Preventing Strategic Gridlock (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आपकी कंपनी सिर्फ किस्मत की वजह से डूब रही है तो आप शायद नींद में हैं। असल में आपकी घटिया लीडरशिप और वो अनदेखे ग्रिडलोक आपकी मेहनत को कचरा बना रहे हैं। मुबारक हो आप बिना कुछ किए ही फेल होने की रेस में सबसे आगे निकल चुके हैं।

पामेला हार्पर की यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे उन छिपे हुए रोड़ों को हटाकर बिजनेस को रॉकेट बनाना है। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन्स जो आपकी ग्रोथ की गाड़ी को धक्का देंगे।


लेसन १ : इनविजिबल रोडब्लॉक्स को पहचानना

इमेजिन करिए कि आप अपनी चमचमाती नई कार लेकर हाईवे पर निकले हैं। रास्ता एकदम खाली है और आप फुल स्पीड में एक्सीलरेटर दबाते हैं। लेकिन कार अपनी जगह से हिल ही नहीं रही। इंजन शोर मचा रहा है पर टायर जाम हैं। अब आप बाहर निकलकर देखते हैं तो पता चलता है कि किसी ने चुपके से आपकी कार के नीचे बड़े बड़े पत्थर लगा दिए हैं। बिजनेस की दुनिया में इसे ही पामेला हार्पर स्ट्रैटेजिक ग्रिडलोक कहती हैं। यह वो अदृश्य पत्थर हैं जो आपकी तरक्की को तब रोक देते हैं जब आप सबसे ज्यादा जोश में होते हैं।

ज्यादातर लीडर्स को लगता है कि अगर सेल्स कम हो रही है तो मार्केटिंग बजट बढ़ा दो। अगर एम्प्लॉई काम नहीं कर रहे तो उन्हें डाँट दो। लेकिन भाई साहब असल दिक्कत अक्सर कहीं और होती है। जैसे मान लीजिए आपने अपनी टीम को बोला कि हमें इस साल १० गुना ग्रोथ चाहिए। आपने बढ़िया प्रेजेंटेशन दी और सबको मोटिवेट किया। लेकिन अंदर ही अंदर आपकी टीम यह सोच रही है कि अगर हमने ज्यादा काम किया तो हमारी छुट्टियाँ कैंसिल हो जाएगी। यह डर एक इनविजिबल रोडब्लॉक है। आप एक्सीलरेटर दबा रहे हैं और आपकी टीम हैंडब्रेक खींचकर बैठी है। क्या खाक ग्रोथ होगी।

इंडिया में अक्सर देखा जाता है कि लाला जी अपनी दुकान को बड़ा शोरूम तो बनाना चाहते हैं लेकिन वो गल्ले की चाबी किसी और को नहीं देना चाहते। अब आप अकेले ही बिल काटेंगे और अकेले ही माल मंगाएंगे तो ग्रोथ तो उतनी ही होगी जितनी आपकी कैपेसिटी है। यह कंट्रोल करने की चाहत ही वो ग्रिडलोक है जो आपके बिजनेस के टायर जाम कर रहा है। पामेला कहती हैं कि जब तक आप इन इनविजिबल रुकावटों को ढूंढकर बाहर नहीं फेकेंगे तब तक आपकी कोई भी महान स्ट्रेटेजी ऑफिस की दीवारों पर टंगी फोटो बनकर रह जाएगी।

ग्रिडलोक का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि आप मेहनत तो पागलों की तरह कर रहे हैं लेकिन रिजल्ट के नाम पर सिर्फ पसीना निकल रहा है। यह वैसा ही है जैसे आप जिम जाकर रोज भारी वजन उठा रहे हैं पर बाहर आकर रोज १० समोसे पेल रहे हैं। आप सोच रहे हैं कि बॉडी क्यों नहीं बन रही जबकि असली रुकावट आपकी वो समोसे वाली डाइट है। बिजनेस में भी ऐसी ही गलत आदतें और पुरानी सोच रोडब्लॉक बन जाती हैं।

अगर आप वाकई हाई परफॉरमेंस चाहते हैं तो आपको जासूस बनना पड़ेगा। अपनी टीम के साथ बैठकर यह मत पूछिए कि काम क्यों नहीं हुआ। बल्कि यह पूछिए कि काम करने में सबसे बड़ी चिढ़ किस बात से होती है। जब आप लोगों की अनकही बातों को सुनने लगेंगे तब आपको वो पत्थर दिखेंगे जिन्होंने आपकी ग्रोथ को रोक रखा है। याद रखिए रुकावटें अक्सर बाहर नहीं आपके सिस्टम के अंदर ही छिपी होती हैं। जब आप इन इंटरनल जैम्स को क्लियर करते हैं तभी आपकी स्ट्रेटेजी को असली रफ़्तार मिलती है। और यही रफ़्तार आपको अगले लेवल पर ले जाती है जहाँ आपको अपनी टीम के कल्चर और अपनी स्ट्रेटेजी के बीच के उस गैप को भरना होता है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।


लेसन २ : कल्चर और स्ट्रेटेजी का तालमेल

पिछले लेसन में हमने उन पत्थरों को पहचाना जिन्होंने आपकी गाड़ी रोक रखी थी। लेकिन मान लीजिए आपने पत्थर हटा दिए और अब आप रेस जीतने के लिए तैयार हैं। तभी आपको पता चलता है कि आपकी टीम के आधे लोग कार को आगे धक्का दे रहे हैं और बाकी के आधे पीछे की तरफ। अब आप चिल्ला रहे हैं कि हमें तो उत्तर दिशा में जाना है पर टीम कह रही है कि हमें तो दक्षिण की हवा खानी है। यह जो खिचड़ी पक रही है इसे ही कहते हैं कल्चर और स्ट्रेटेजी का मिसमैच। पामेला हार्पर का कहना है कि दुनिया की सबसे बेस्ट स्ट्रेटेजी भी तब तक कामयाब नहीं हो सकती जब तक आपकी टीम का कल्चर उसे खाने के लिए तैयार न हो।

सोचिए आपने एक बहुत ही मॉडर्न स्ट्रेटेजी बनाई कि अब से हम सब पेपरलेस काम करेंगे और सारा डेटा क्लाउड पर रखेंगे। सुनने में कितना कूल लगता है ना। लेकिन आपकी टीम में वो शर्मा जी हैं जो पिछले ३० साल से हर रसीद को फाइल में लगाने के आदी हैं। शर्मा जी के लिए क्लाउड का मतलब सिर्फ वो बादल हैं जो बारिश लाते हैं। अब आपकी स्ट्रेटेजी तो मॉडर्न है पर कल्चर पुराना घिसा पिटा। नतीजा यह होगा कि शर्मा जी चुपके से प्रिंट आउट निकालेंगे और आपकी पेपरलेस स्ट्रेटेजी का कचरा हो जाएगा।

इंडिया में अक्सर स्टार्टअप्स में यह देखा जाता है कि फाउंडर को लगता है कि बस कुछ कूल स्लोगन्स दीवार पर चिपका देने से कल्चर बन जाता है। ऑफिस में टेबल टेनिस टेबल रख देने से लोग इनोवेटिव नहीं हो जाते। अगर आपकी स्ट्रेटेजी कहती है कि हमें रिस्क लेना है लेकिन आपका कल्चर यह है कि एक गलती होने पर आप एम्प्लॉई की सरेआम बेइज्जती कर देते हैं तो भाई साहब कोई रिस्क नहीं लेगा। सब अपनी गर्दन बचाने में लगे रहेंगे। आपका कल्चर आपकी स्ट्रेटेजी को नाश्ते में खा जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा।

यह वैसा ही है जैसे आप एक बहुत ही फिट एथलीट को बोले कि आज से तुम्हें सिर्फ चाट पकोड़े खाकर ओलंपिक जीतना है। उसकी ट्रेनिंग यानी आपकी स्ट्रेटेजी तो वर्ल्ड क्लास है लेकिन उसकी डाइट यानी आपका कल्चर एकदम बेकार है। अब वो एथलीट मैदान में दौड़ेगा या पेट पकड़कर बैठेगा। यही हाल आपके बिजनेस का होता है। लीडर्स अक्सर यह भूल जाते हैं कि लोग वही करते हैं जो वो देखते हैं ना कि वो जो उन्हें करने को कहा जाता है।

अगर आपकी स्ट्रेटेजी और कल्चर में जंग छिड़ी है तो जीत हमेशा कल्चर की ही होगी। इसलिए एक स्मार्ट लीडर पहले अपनी टीम के बिहेवियर को समझता है। वो देखता है कि क्या लोग सच में उस विजन पर यकीन करते हैं जो बोर्ड मीटिंग में दिखाया गया था। अगर नहीं तो सबसे पहले उस भरोसे को बनाना पड़ता है। आपको अपनी टीम को यह समझाना होगा कि यह नई स्ट्रेटेजी उनकी लाइफ कैसे आसान बनाएगी ना कि सिर्फ आपका बैंक बैलेंस कैसे बढ़ाएगी।

जब कल्चर और स्ट्रेटेजी एक ही सुर में गाने लगते हैं तभी वो मैजिक पैदा होता है जिसे हम हाई परफॉरमेंस कहते हैं। लेकिन रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता। कभी कभी पहाड़ सामने आ जाता है और कभी खाई। ऐसे में एक लीडर को अपनी चाल बदलनी पड़ती है। और यहीं पर काम आती है वो कला जिसे पामेला ओवर अंडर और अराउंड लीडरशिप कहती हैं जिसके बारे में हम अगले लेसन में गहराई से बात करेंगे।


लेसन ३ : ओवर अंडर और अराउंड लीडरशिप

पिछले दो लेसन्स में हमने पत्थर हटाए और अपनी टीम के सुर से सुर मिलाए। लेकिन लाइफ कोई सीधी सड़क नहीं है कि आपने एक्सीलरेटर दबाया और आप सीधे मंज़िल पर पहुँच गए। असली दुनिया में तो हर दो किलोमीटर पर एक बड़ा सा गड्ढा या एक ऐसी दीवार खड़ी होती है जिसे देखकर अच्छे-अच्छे लीडर्स के पसीने छूट जाते हैं। यहाँ पर काम आती है पामेला हार्पर की वो जादुई टेक्निक जिसे वो 'लीडिंग ओवर अंडर एंड अराउंड' कहती हैं। सीधे शब्दों में कहें तो अगर सामने दीवार है तो उसे सिर मारकर तोड़ने की बेवकूफी मत करो बल्कि देखो कि क्या ऊपर से कूद सकते हैं नीचे से सुरंग बना सकते हैं या साइड से निकल सकते हैं।

इमेजिन करिए कि आपने एक नया प्रोडक्ट लॉन्च किया और अचानक सरकार ने कोई नया नियम निकाल दिया जिसने आपके काम पर ब्रेक लगा दिया। अब एक आम लीडर क्या करेगा। वो बैठकर रोएगा किस्मत को कोसेगा या फिर सिस्टम से लड़ने में अपना सारा टाइम और पैसा बर्बाद कर देगा। लेकिन एक स्मार्ट लीडर 'अराउंड' रास्ता ढूंढेगा। वो सोचेगा कि क्या इस नियम के दायरे में रहकर हम कुछ और नया कर सकते हैं। यह वैसा ही है जैसे इंडिया में जब बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर जाता है तो ट्रैफिक जाम में फँसने के बजाय कुछ लोग अपनी बाइक फुटपाथ पर चढ़ाकर निकल लेते हैं। हालांकि वो कानूनन गलत है पर बिजनेस में इसे 'क्रिएटिव प्रॉब्लम सॉल्विंग' कहते हैं।

कभी-कभी आपके सामने ऐसी मुसीबत आती है जिसे आप टाल नहीं सकते। जैसे कि आपकी टीम का कोई बहुत ही टैलेंटेड लेकिन जिद्दी बंदा जो काम तो बढ़िया करता है पर किसी की सुनता नहीं। अब आप उससे सीधे टकराएंगे तो वो नौकरी छोड़ देगा और आपका नुकसान होगा। यहाँ आपको 'अंडर' लीडरशिप दिखानी होगी। आपको थोड़ा झुकना पड़ेगा उसकी बात को समझना पड़ेगा और उसे ऐसा फील कराना पड़ेगा कि आईडिया उसी का था। जैसे घर में मम्मी को पता होता है कि पापा को कैसे मनाना है वो सीधे हुकुम नहीं चलातीं बल्कि प्यार से अपनी बात मनवा लेती हैं। इसे ही कहते हैं ईगो को साइड में रखकर गोल पर फोकस करना।

पामेला कहती हैं कि लीडरशिप का मतलब हमेशा सबसे आगे खड़े होकर तलवार चलाना नहीं होता। कभी-कभी आपको 'ओवर' यानी ऊपर से देखना पड़ता है ताकि आप बड़ा पिक्चर समझ सकें। जब पूरी टीम छोटे-छोटे मसलों में उलझी हो तब लीडर को ऊपर उठकर यह देखना चाहिए कि अगले एक साल में क्या होने वाला है। अगर आप सिर्फ आज के गड्ढे भरते रहेंगे तो कल के पहाड़ से कैसे टकराएंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे क्रिकेट में कैप्टन बाउंड्री पर खड़ा होकर यह देखता है कि कौन सा प्लेयर आलस कर रहा है और कहाँ फील्डिंग सेट करनी है।

बिजनेस में जिद्दी होना अच्छी बात है पर अपनी अप्रोच में लचीला होना उससे भी ज्यादा जरूरी है। अगर आप एक ही ढर्रे पर चलते रहे तो आप उस पुराने जमाने के टाइपराइटर की तरह बन जाएंगे जिसे आज कोई पूछने वाला नहीं है। आपको हालात के हिसाब से अपना रूप बदलना पड़ेगा। कभी सख्त बॉस बनना पड़ेगा तो कभी एक दोस्त की तरह कंधा देना पड़ेगा। यही वो कला है जो एक एवरेज मैनेजर को एक लेजेंडरी लीडर बनाती है।

जब आप इन तीनों तरीकों को मास्टर कर लेते हैं तब कोई भी ग्रिडलोक आपको रोक नहीं सकता। आप रुकावटों को प्रॉब्लम नहीं बल्कि एक गेम की तरह देखने लगते हैं जिसे बस पार करना है। तो अब सवाल यह है कि क्या आप अब भी उस पुरानी दीवार के सामने खड़े होकर उसके टूटने का इंतज़ार करेंगे या फिर आज ही अपना रास्ता खुद बनाएंगे। याद रखिए लीडर वो नहीं जो रास्ता जानता है बल्कि वो है जो रास्ता बनाता है।


आज हमने सीखा कि बिजनेस में ग्रिडलोक सिर्फ बाहर नहीं हमारे दिमाग और सिस्टम के अंदर होते हैं। क्या आप अपनी टीम में ऐसे किसी 'इनविजिबल पत्थर' को देख पा रहे हैं। नीचे कमेंट्स में अपना एक्सपीरियंस शेयर करें और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसका बिजनेस आजकल थोड़ा 'जाम' चल रहा है। चलिए साथ मिलकर इन रुकावटों को पार करते हैं।

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