Re-Imagine! (Hindi)


अगर आप आज भी वही घिसे पिटे पुराने बिजनेस रूल्स फॉलो कर रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं। टॉम पीटर्स की री इमेजिन बुक समरी नहीं पढ़ी तो आप बस अपनी बर्बादी का इंतजार कर रहे हैं। बिना इनोवेशन के आपका बिजनेस और करियर उस पुरानी साइकिल जैसा है जिसे अब कोई कबाड़ी भी नहीं पूछता।

इस आर्टिकल में हम टॉम पीटर्स की उन क्रांतिकारी बातों को समझेंगे जो आपको आज के इस भागदौड़ वाले डिजिटल युग में सबसे आगे खड़ा कर देंगी। चलिए देखते हैं वे ३ लेसन जो आपकी सोच को पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : डिसरप्शन को गले लगाओ

आज की दुनिया में अगर आप यह सोचकर बैठे हैं कि जो कल चल रहा था वही आज भी चलेगा तो भाई आप अपनी ही कब्र खोद रहे हैं। टॉम पीटर्स अपनी किताब री इमेजिन में बहुत साफ़ कहते हैं कि पुरानी दुनिया मर चुकी है। आज हम एक ऐसे दौर में हैं जहाँ हर दिन कुछ नया आ जाता है और पुराने तरीके कचरे के डिब्बे में चले जाते हैं। इसे ही टॉम डिसरप्शन कहते हैं।

जरा सोचिए उस पड़ोस वाले अंकल के बारे में जिनकी किराने की दुकान पिछले तीस साल से वैसी की वैसी है। उनके पास वही पुराने डिब्बे हैं वही पुराना हिसाब का रजिस्टर है और वही थकी हुई मुस्कान है। अब उनके बगल में एक नया स्मार्ट स्टोर खुल गया है जो फोन पर आर्डर लेता है और दस मिनट में सामान घर पहुँचाता है। अंकल अभी भी सोच रहे हैं कि कस्टमर कहाँ गायब हो गए। अंकल जी कस्टमर गायब नहीं हुए बस वे उस दौर में चले गए हैं जहाँ टाइम की कीमत है। अंकल ने खुद को री इमेजिन नहीं किया और आज वे बस खाली मक्खियाँ मार रहे हैं।

टॉम पीटर्स कहते हैं कि आज के दौर में एक्सीलेंस का मतलब यह नहीं है कि आप अपना काम बिना किसी गलती के कर रहे हैं। आज एक्सीलेंस का मतलब है कि आप कितनी जल्दी खुद को बदल सकते हैं। अगर आपकी कंपनी या आपका करियर पिछले दो साल से एक ही जगह खड़ा है तो समझ लीजिये कि आप पीछे जा रहे हैं। क्योंकि पूरी दुनिया रॉकेट की रफ़्तार से आगे बढ़ रही है। आपको हर रोज खुद से पूछना होगा कि आज मैंने क्या नया किया। क्या मैंने कुछ ऐसा किया जो कल तक नामुमकिन लगता था।

हकीकत तो यह है कि हम सबको सेफ्टी बहुत पसंद है। हमें लगता है कि अगर हम चुपचाप अपना काम करते रहेंगे तो सब ठीक रहेगा। लेकिन आज के समय में सबसे बड़ा रिस्क है कोई रिस्क न लेना। टॉम पीटर्स हमें याद दिलाते हैं कि विनाशकारी बदलाव यानी डिस्ट्रक्टिव चेंज ही अब नया नॉर्मल है। आपको उस बदलाव से डरना नहीं है बल्कि उसके साथ डांस करना सीखना होगा। जो लोग कहते हैं कि हमारे यहाँ तो काम ऐसे ही होता है वे दरअसल अपनी कंपनी की विदाई की तैयारी कर रहे होते हैं।

मान लीजिये आप एक ऑफिस में काम करते हैं जहाँ आज भी फाइलों का ढेर लगा रहता है। आपका बॉस गर्व से कहता है कि हमें कंप्यूटर की जरूरत नहीं है हमारा हाथ का काम ही असली है। ऐसे बॉस को म्यूजियम में रख देना चाहिए क्योंकि वे आने वाले तूफान को देख ही नहीं पा रहे हैं। जब एआई और नई टेक्नोलॉजी सब कुछ बदल रही है तब आप पुरानी लाठी लेकर लड़ने नहीं जा सकते। आपको अपनी स्किल्स को पूरी तरह से री इमेजिन करना ही होगा।

सक्सेस का अब कोई फिक्स फार्मूला नहीं बचा है। जो फार्मूला कल हिट था वह आज फ्लॉप हो सकता है। इसलिए टॉम कहते हैं कि पागल बनो। थोड़े अजीब बनो। कुछ ऐसा करो जो किसी ने न किया हो। अगर आप भी भीड़ का हिस्सा बनकर चल रहे हैं तो आप भी उसी भीड़ की तरह गुमनाम होकर मर जाएंगे। अपनी पहचान बनानी है तो उस पुराने ढर्रे को लात मारनी होगी जिसे दुनिया डिसिप्लिन कहती है लेकिन वह असल में आलस है।

यही वह पहला कदम है जो आपको एक साधारण इंसान से एक लीडर बनाता है। खुद को और अपने काम को बार बार नए नजरिए से देखना ही असली टॉम पीटर्स स्टाइल है। और जब आप इस बदलाव को अपना लेते हैं तब आप सिर्फ सर्वाइव नहीं करते बल्कि आप रूल करते हैं।


लेसन २ : डिजाईन और इनोवेशन का जादू

जब आप खुद को बदलने के लिए तैयार हो जाते हैं जैसा कि हमने पहले लेसन में देखा तो अगला सवाल आता है कि आखिर अलग दिखें कैसे। टॉम पीटर्स कहते हैं कि आज के दौर में सिर्फ क्वालिटी देना काफी नहीं है। भाई साहब क्वालिटी तो अब बेसिक चीज है। अगर आप आज कार खरीदने जाएं और सेल्समैन कहे कि सर इसके चारों टायर गोल हैं तो क्या आप उसे इनाम देंगे। बिल्कुल नहीं। गोल टायर तो होने ही चाहिए। टॉम कहते हैं कि आज के कॉम्पिटिशन में जीतने के लिए आपको डिजाईन और इनोवेशन को अपना भगवान मानना होगा।

जरा उस चाय वाले के बारे में सोचिये जिसने अपनी टपरी को एक कूल कैफ़े में बदल दिया। चाय तो वही है पानी और दूध का मेल लेकिन उसने कप की जगह कुल्हड़ रखा और दीवारों पर गजब की पेंटिंग बनवा दी। अब जो लोग सड़क किनारे पांच रुपये की चाय पीने में शर्माते थे वही लोग वहां आकर सत्तर रुपये की चाय पीते हैं और इंस्टाग्राम पर फोटो भी डालते हैं। यह है डिजाईन की ताकत। उस चाय वाले ने सिर्फ चाय नहीं बेची उसने एक एक्सपीरियंस बेचा। और आप अभी भी सोच रहे हैं कि आपका प्रोडक्ट बिक क्यों नहीं रहा। शायद इसलिए क्योंकि आपका प्रोडक्ट देखने में उतना ही बोरिंग है जितना रविवार की शाम को होमवर्क करना।

टॉम पीटर्स का मानना है कि हर चीज में डिजाईन होना चाहिए चाहे वह आपकी इनवॉइस हो या आपकी ऑफिस की डेस्क। अगर आपका काम देखने में सुंदर नहीं है और यूजर को मजा नहीं दे रहा है तो आप रेस से बाहर हैं। लोग अब सिर्फ सामान नहीं खरीदते वे उस सामान से जुड़ी फीलिंग को खरीदते हैं। अगर आप एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और आपका कोड तो सही चलता है लेकिन उसका इंटरफेस किसी ९० के दशक की सरकारी वेबसाइट जैसा दिखता है तो यकीन मानिए कोई उसे इस्तेमाल नहीं करेगा।

इनोवेशन का मतलब यह नहीं है कि आप लैब में बैठकर कोई रॉकेट साइंस बनाएं। इनोवेशन का मतलब है छोटी छोटी चीजों को बेहतर बनाना। जैसे उस रेस्टोरेंट वाले ने किया जिसने बिल के साथ सौंफ की जगह एक छोटा सा जोक लिखकर देना शुरू कर दिया। ग्राहक मुस्कुराता हुआ बाहर निकलता है और अगली बार फिर आता है। क्या इसमें करोड़ों रुपये लगे। नहीं। इसमें लगा तो सिर्फ थोड़ा सा दिमाग और बहुत सारा इमेजिनेशन।

हम में से ज्यादातर लोग बस अपना काम निपटाने की कोशिश करते हैं। हम सोचते हैं कि बस बॉस खुश हो जाए और सैलरी आ जाए। लेकिन टॉम कहते हैं कि अगर आप अपने काम में अपना दिल और अपनी कला नहीं डाल रहे हैं तो आप बस एक मशीन हैं। और मशीनों को आजकल बहुत सस्ते में रिप्लेस किया जा रहा है। आपको एक आर्टिस्ट की तरह सोचना होगा। आपको यह सोचना होगा कि आप अपने कस्टमर के चेहरे पर मुस्कान कैसे ला सकते हैं।

जब आप हर चीज में एक्सीलेंस और ब्यूटी ढूंढने लगते हैं तो आपका काम बोझ नहीं रहता। वह एक जुनून बन जाता है। टॉम पीटर्स हमें बार बार याद दिलाते हैं कि मार्केट में भीड़ बहुत है और उस भीड़ से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है कुछ ऐसा बनाना जो लोगों की आँखों को सुकून दे और उनके दिमाग को चकरा दे। याद रखिये अगर आपका काम यादगार नहीं है तो वह बेकार है।


लेसन ३ : वूमन पावर और इमोशनल कनेक्शन

जब आपने खुद को बदल लिया और अपने काम को सुंदर बना लिया जैसा कि हमने पिछले दो लेसन में देखा तो अब बारी आती है उस सीक्रेट हथियार की जिसे अक्सर लोग इग्नोर कर देते हैं। टॉम पीटर्स चिल्ला चिल्लाकर कहते हैं कि आने वाला जमाना महिलाओं का है और उन लोगों का है जो दिल से बात करना जानते हैं। अगर आप आज भी उस पुराने खडूस बॉस की तरह व्यवहार कर रहे हैं जो सिर्फ ऑर्डर देना जानता है तो भाई साहब आपके रिटायरमेंट का समय आ गया है।

जरा अपने घर की महिलाओं को देखिये। चाहे वह आपकी माँ हो या आपकी वाइफ। वे एक साथ दस काम निपटा लेती हैं और उन्हें यह भी पता होता है कि घर के किस कोने में उदासी छाई है। इसे कहते हैं मल्टी टास्किंग और इमोशनल इंटेलिजेंस। टॉम पीटर्स का कहना है कि बिजनेस में अब इसी की जरूरत है। मार्केट अब सिर्फ ट्रांजैक्शन नहीं रहा बल्कि यह एक रिलेशनशिप बन चुका है। अगर आप अपने कस्टमर को सिर्फ एक चलते फिरते एटीएम की तरह देखते हैं तो वह भी आपको सिर्फ एक लुटेरे की तरह देखेगा।

एक किस्सा देखिये। आप एक ऐसी दुकान पर जाते हैं जहाँ सेल्समैन बस खड़ा होकर आपको घूर रहा है जैसे आप चोरी करने आए हों। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी दुकान है जहाँ सेल्समैन आपसे पूछता है कि भाई साहब आज परेशान लग रहे हो क्या बात है। और फिर वह आपको एक ठंडा पानी पिलाता है। अब आप सामान वहां से लेंगे जहाँ आपको इंसान समझा गया न कि सिर्फ एक बिलिंग नंबर। टॉम कहते हैं कि सॉफ्ट स्किल्स ही अब हार्ड स्किल्स हैं। जो लोग प्यार से बात करना और दूसरों की भावनाओं को समझना जानते हैं वही इस डिजिटल दुनिया के असली बादशाह हैं।

महिलाएं अक्सर बेहतर कम्युनिकेटर और बेहतर लिसनर होती हैं। टॉम कहते हैं कि अगर आपको अपना बिजनेस बढ़ाना है तो महिलाओं को लीडरशिप पोजीशन में लाइए। वे सिर्फ नंबर्स नहीं देखतीं वे उस काम के पीछे छिपे लोगों को देखती हैं। आज की दुनिया में जहाँ सब कुछ ऑटोमेटिक हो रहा है वहां एक असली इंसानी स्पर्श यानी ह्यूमन टच की कीमत सोने से भी ज्यादा है। अगर आप अपने एम्प्लोयी का जन्मदिन भूल जाते हैं लेकिन उसकी गलती पर उसे झाड़ना नहीं भूलते तो आप एक बहुत बुरे लीडर हैं।

एक्सीलेंस का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि आपकी बैलेंस शीट हरी भरी है। एक्सीलेंस का मतलब यह है कि आपके साथ काम करने वाले लोग सुबह ऑफिस आने के लिए एक्साइटेड रहते हैं या नहीं। टॉम पीटर्स हमें याद दिलाते हैं कि हम मशीनों के साथ नहीं बल्कि इंसानों के साथ काम कर रहे हैं। और इंसानों को इज्जत चाहिए होती है। जब आप लोगों की केयर करते हैं तो लोग आपके बिजनेस की केयर करते हैं। यह इतना सिंपल है कि कई बड़े बड़े एमबीए वाले इसे समझ ही नहीं पाते।

तो दोस्तों री इमेजिन का पूरा सार यही है। पुराने और सड़े हुए नियमों को आग लगा दीजिये। हर काम में खूबसूरती और डिजाईन डालिए और सबसे जरूरी बात कि लोगों के साथ दिल का रिश्ता बनाइये। अगर आप ये तीन काम कर लेते हैं तो यकीन मानिए आपको सक्सेसफुल होने से कोई नहीं रोक सकता।


अब समय आ गया है कि आप अपनी जिंदगी और अपने काम को एक नए नजरिए से देखें। क्या आप आज भी वही पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं या कुछ बदलने की हिम्मत रखते हैं। नीचे कमेंट में लिखिये कि आप आज से अपनी लाइफ में क्या एक चीज री इमेजिन करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर कीजिये जो आज भी पुरानी सोच में फंसा हुआ है। उठो और दुनिया को अपनी एक्सीलेंस दिखाओ।

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