क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एक छोटा सा ढाबा खोलते ही फाइव स्टार होटल के सपने देखने लगते हैं और फिर अगले महीने ताला लटका देते हैं? बधाई हो, आप अपनी बर्बादी के रास्ते पर बहुत तेज दौड़ रहे हैं। जब तक आप हर चमकती चीज के पीछे भागेंगे, आपका बैंक बैलेंस और सुकून दोनों ही गायब रहेंगे।
आज हम क्रिस जूक की किताब प्रॉफिट फ्रॉम द कोर से वो ३ लेसन सीखेंगे जो आपको बताएंगे कि आखिर क्यों आपका बिजनेस फैलने के बजाय सिर्फ रायते की तरह फैल रहा है। चलिए, इस सफर को शुरू करते हैं और आपके काम को एक असली पहचान देते हैं।
Lesson : अपने कोर को पहचानो और उसी पर दांव लगाओ
देखिये बॉस, हमारे यहाँ एक बहुत बड़ी बीमारी है। जैसे ही किसी लड़के की चाय की दुकान थोड़ी सी चल निकलती है, वह अगले दिन सोंचता है कि क्यों न अब साथ में मोबाइल रिचार्ज और जिम की मेंबरशिप भी बेचना शुरू कर दूँ। सुनने में यह बहुत कूल लगता है कि आप मल्टी टास्किंग कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में आप अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं, बल्कि सीधा जे सी बी मशीन चला रहे हैं। क्रिस जूक अपनी किताब प्रॉफिट फ्रॉम द कोर में सबसे पहले यही समझाते हैं कि आपके बिजनेस का एक कोर होता है। यह वह एक चीज है जिसे आप दुनिया में सबसे बेहतर करते हैं।
अब आप पूछेंगे कि भाई यह कोर क्या बला है? सिंपल है, वह एक प्रोडक्ट या सर्विस जिसकी वजह से ग्राहक आपके पास दौड़ा आता है। लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब हम लालच के चक्कर में अपनी उस असली ताकत को भूल जाते हैं। मान लीजिये आप बहुत बढ़िया समोसे बनाते हैं। लोग शहर के कोने कोने से आपके पास आते हैं। अब आपको लगा कि यार समोसा तो बिक ही रहा है, क्यों न कल से यहाँ लैपटॉप भी ठीक करना शुरू कर दूँ? अब अगले दिन क्या होगा? न समोसा फ्रेश मिलेगा और न लैपटॉप ठीक होगा। ऊपर से ग्राहक आपको जो गालियाँ देगा, वह बोनस में।
ज्यादातर बिजनेस इसी वजह से दम तोड़ देते हैं क्योंकि वो अपनी जड़ों को छोड़कर आसमान छूने की कोशिश करते हैं। किताब कहती है कि अगर आपको ग्रो करना है, तो पहले अपने उस एक एरिया में मार्केट लीडर बनिए। जब तक आप अपने इलाके के समोसा किंग नहीं बन जाते, तब तक बर्गर बेचने का सपना देखना बंद कर दीजिये। लोग अक्सर सोचते हैं कि पोर्टफोलियो जितना बड़ा होगा, प्रॉफिट उतना ही ज्यादा होगा। पर भाई साहब, यह शेयर मार्केट नहीं है। यहाँ जितना ज्यादा आप फैलेंगे, उतना ही आपका फोकस और क्वालिटी कम होगी।
सोचिये, अगर आई फोन बनाने वाली कंपनी कल से झाड़ू और पोछा बेचना शुरू कर दे, तो क्या आप उनका फोन खरीदेंगे? बिलकुल नहीं। आप कहेंगे कि भाई अपना काम कर, यह क्या तमाशा लगा रखा है। ठीक यही बात आपके बिजनेस पर भी लागू होती है। आपको यह समझना होगा कि हर चमकती हुई अपॉर्चुनिटी आपके लिए नहीं बनी है। फोकस का मतलब उन चीजों को 'ना' कहना है जो आपको आपके रास्ते से भटकाती हैं।
अगर आप अपने बिजनेस में वह एक चीज नहीं ढूंढ पाए जो आपको दूसरों से अलग बनाती है, तो आप बस भीड़ का हिस्सा हैं। और भीड़ में रहने वालों को प्रॉफिट नहीं, सिर्फ धक्का मिलता है। इसलिए सबसे पहले डायरी उठाइये और लिखिये कि आपकी असली पावर क्या है। क्या वह आपकी सर्विस है? क्या वह आपका रेट है? या वह आपकी बात करने का तरीका है? जो भी है, उस पर पकड़ इतनी मजबूत कर लीजिये कि कोई चाहकर भी आपको टक्कर न दे सके। जब आपका कोर मजबूत होगा, तभी आपकी बिल्डिंग खड़ी हो पाएगी। वरना हवा का एक छोटा सा झोंका आएगा और आपका यह सो कॉल्ड साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा।
Lesson : एडजेसेंसी एक्सपेंशन की कला
जब आपका कोर बिजनेस सेट हो जाता है, तो दिमाग में एक कीड़ा कुलबुलाने लगता है कि अब और क्या नया किया जाए। बस यहीं पर ज्यादातर लोग खुद को जेम्स बॉन्ड समझने की गलती कर बैठते हैं। वो सीधा मंगल ग्रह पर झंडा गाड़ने की सोचते हैं, जबकि उन्हें अभी पड़ोस की गली का रास्ता भी ठीक से नहीं पता होता। क्रिस जूक कहते हैं कि अगर आपको अपना दायरा बढ़ाना है, तो एडजेसेंसी का सहारा लीजिये। इसका मतलब है कि अपने पुराने काम से बिलकुल अलग कुछ करने के बजाय, उससे मिलता जुलता कुछ शुरू कीजिये।
मान लीजिये आप एक जिम चलाते हैं और आपका जिम बहुत हिट है। अब अगर आप जिम के बाहर कल से मछली बेचना शुरू कर देंगे, तो लोग आपको फिटनेस कोच नहीं, बल्कि मानसिक रूप से परेशान इंसान समझेंगे। लेकिन, अगर आप जिम के अंदर ही प्रोटीन शेक या जिम के कपड़े बेचना शुरू करते हैं, तो इसे कहते हैं समझदारी वाला विस्तार। यह आपके कोर बिजनेस से जुड़ा हुआ है। आपके पास ग्राहक पहले से मौजूद है, बस आपने उसे एक और सर्विस दे दी।
लोग अक्सर अपनी लिमिट भूल जाते हैं। उन्हें लगता है कि एक बार पैसा आ गया तो वो दुनिया का हर काम कर सकते हैं। भाई साहब, अगर आप बैटिंग अच्छी करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कीपिंग भी उतनी ही धांसू करेंगे। एडजेसेंसी एक्सपेंशन का मतलब है अपनी ताकत को धीरे-धीरे आगे बढ़ाना। जैसे कि अगर आप स्कूल चलाते हैं, तो हॉस्टल खोलना एक अच्छा कदम हो सकता है। लेकिन स्कूल चलाते-चलाते टायर पंचर की दुकान खोलना सिर्फ और सिर्फ सुसाइड है।
अक्सर हमें लगता है कि पड़ोसी का बिजनेस बहुत अच्छा चल रहा है, चलो वही शुरू कर देते हैं। इसे कहते हैं भेड़ चाल। किताब हमें सिखाती है कि आप तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक आप अपने मौजूदा कस्टमर की जरूरतों को गहराई से नहीं समझते। क्या आपके कस्टमर को आपसे कुछ और चाहिए जो आप आसानी से दे सकते हैं? अगर जवाब हाँ है, तो वही आपका अगला कदम होना चाहिए।
रिस्क लेना अच्छी बात है, लेकिन रिस्क और बेवकूफी के बीच एक बहुत पतली लाइन होती है। उस लाइन को मत पार कीजिये। जब आप अपने कोर से हटकर कहीं बहुत दूर हाथ मारते हैं, तो आपकी एनर्जी और रिसोर्स दोनों ही बंट जाते हैं। नतीजा यह होता है कि न पुराना काम ढंग से हो पाता है और न नया। इसलिए अगली बार जब भी कोई नया आईडिया आये, तो खुद से पूछिये कि क्या यह मेरे आज के काम से किसी भी तरह जुड़ा है? अगर नहीं, तो उस आईडिया को डस्टबिन में डालिये और वापस अपने काम पर लग जाइये।
Lesson : अनफेयर एडवांटेज का इस्तेमाल
अब बात करते हैं उस सीक्रेट मसाले की, जिसके बिना आपकी बिरयानी एकदम फीकी है। मार्केट में हजारों लोग वही काम कर रहे हैं जो आप कर रहे हैं। तो फिर कोई ग्राहक अपनी गाढ़ी कमाई आपको क्यों दे? क्रिस जूक और जेम्स एलन कहते हैं कि आपके पास एक अनफेयर एडवांटेज होना चाहिए। यह वह ताकत है जिसे आपका कॉम्पिटिटर चाहकर भी चुरा नहीं सकता। अगर आपके पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है, तो समझ लीजिये कि आप बस अपनी दुकान की शटर गिराने का इंतजार कर रहे हैं।
मान लीजिये आपके मोहल्ले में दो किराने की दुकानें हैं। एक दुकान वाला बस सामान तोलकर देता है, लेकिन दूसरा दुकान वाला हर कस्टमर का नाम जानता है, उनके घर की खैरियत पूछता है और कभी-कभी धनिया मुफ्त में भी डाल देता है। अब यह जो 'रिलेशनशिप' है, यह उसका अनफेयर एडवांटेज है। बड़ा से बड़ा मॉल खुल जाए, लेकिन लोग उस चाचा की दुकान पर ही जाएंगे क्योंकि वह कनेक्शन कोई और नहीं दे सकता।
कई लोग सोचते हैं कि सस्ता बेचना ही सबसे बड़ा एडवांटेज है। भाई साहब, यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। आपसे सस्ता बेचने वाला कल कोई और पैदा हो जाएगा, फिर आप क्या करेंगे? अपना घर बेचेंगे? असली अनफेयर एडवांटेज वह होता है जो आपकी जड़ों से निकलता है। क्या आपकी टेक्नोलॉजी सबसे अलग है? क्या आपकी सर्विस इतनी तेज है कि पलक झपकते ही काम हो जाता है? या फिर आपकी ब्रांडिंग इतनी धांसू है कि लोग आपका लोगो देखकर ही पैसा फेंकने को तैयार हैं?
जब आप अपने कोर बिजनेस को पहचान लेते हैं और सही दिशा में विस्तार करते हैं, तब आपको अपनी इस छुपी हुई ताकत को धार देनी होती है। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे आप एक युद्ध में जा रहे हैं और आपके पास एक ऐसा हथियार है जिसकी काट किसी के पास नहीं। अगर आप भी वही घिसी-पिटी स्ट्रेटेजी अपनाएंगे जो बाकी दुनिया अपना रही है, तो प्रॉफिट के नाम पर सिर्फ चवन्नी-अठन्नी ही हाथ आएगी।
किताब का असली सार यही है कि अपने आप को इतना काबिल और यूनिक बना लो कि मार्केट आपको इग्नोर न कर सके। अपनी उस एक चीज को पकड़ो और उसे तब तक घिसो जब तक वह हीरा न बन जाए। याद रखिये, दुनिया सिर्फ जीतने वालों को याद रखती है, कोशिश करने वालों को तो लोग उनका नाम तक नहीं पूछते।
तो दोस्तों, प्रॉफिट कमाना कोई तुक्का नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी प्लानिंग है। अपने कोर पर टिके रहिये, धीरे-धीरे कदम बढ़ाइये और अपनी यूनिक पावर को पहचानिये। क्या आप आज भी हर तरफ हाथ पैर मार रहे हैं या आपने अपना कोर ढूंढ लिया है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताइये और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हर हफ्ते एक नया बिजनेस प्लान लेकर आपके पास आता है। जागिये, इससे पहले कि आपका बिजनेस सो जाए!
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