Put Your Dream to the Test (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिन में सपने देखते हैं और रात को चादर तानकर सो जाते हैं। बधाई हो, आप अपनी लाइफ को बर्बाद करने के एकदम सही रास्ते पर हैं। अगर आप बिना किसी प्लान के बस हवा में महल बना रहे हैं, तो यकीन मानिए, आपका सपना सिर्फ एक जोक बनकर रह जाएगा और लोग आप पर हँसेंगे।

लेकिन फिक्र मत करिए। आज हम जॉन सी मैक्सवेल की किताब पुट योर ड्रीम टू द टेस्ट के जरिए आपके उन सोए हुए सपनों का एक कड़ा इम्तिहान लेंगे। हम देखेंगे कि आपके विजन में कितनी जान है और आप उसे सच करने के लिए कितने तैयार हैं। चलिए शुरू करते हैं इन ३ लेसन्स के साथ।


लेसन १ : ओनरशिप क्वेश्चन : क्या यह सपना आपका अपना है या उधार का है।

जरा सोचिए आप एक बहुत बड़ी लाइन में लगे हैं और घंटों तक धूप में पसीना बहाने के बाद जब आपकी बारी आती है तो आपको पता चलता है कि आप गलत काउंटर पर खड़े थे। कितना गुस्सा आएगा न। लाइफ में भी बहुत से लोग यही कर रहे हैं। वे किसी और की दौड़ में भाग रहे हैं क्योंकि पड़ोस के शर्मा जी के बेटे ने वह किया था या फिर उनके पेरेंट्स चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने। जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि अगर सपना आपका अपना नहीं है तो उसकी कामयाबी भी आपको कभी खुशी नहीं देगी।

अक्सर इंडिया में क्या होता है। लड़का पैदा हुआ नहीं कि बुआ जी कह देती हैं कि यह तो इंजीनियर बनेगा। अब उस बेचारे को गिटार बजाना पसंद है लेकिन वह पूरी जिंदगी नट और बोल्ट कसने में निकाल देता है। यह ओनरशिप की कमी है। जब आप किसी और का सपना जी रहे होते हैं तो आप एक रोबोट की तरह काम करते हैं। उसमें न तो कोई जान होती है और न ही कोई असली मोटिवेशन। आप बस संडे का इन्तजार करते हैं ताकि उस उधार के सपने से थोड़ी देर की छुट्टी मिल सके। अगर आप हर मंडे को ऑफिस जाते वक्त ऐसा चेहरा बनाते हैं जैसे आपको फांसी की सजा सुनाई गई हो तो समझ जाइए कि आपका सपना आपका अपना नहीं है।

असली ओनरशिप तब आती है जब आप अपने दिल की आवाज सुनते हैं। जब आप अपनी स्ट्रेंथ को पहचानते हैं। लोग कहेंगे कि इसमें पैसा नहीं है या इसमें इज्जत नहीं है। लेकिन भाई साहब इज्जत और पैसा तो कबाड़ बेचने वाले के पास भी बहुत होता है अगर वह उसे अपने ढंग से और ओनरशिप के साथ करे। अगर आपका सपना आपका अपना है तो आप उसके लिए दुनिया से लड़ने के लिए तैयार रहेंगे। आप यह नहीं कहेंगे कि पापा नहीं मान रहे या किस्मत साथ नहीं दे रही। आप रास्ता खुद बनाएंगे क्योंकि वह सपना आपकी आत्मा का हिस्सा है।

सोचिए अगर सचिन तेंदुलकर ने अपने घर वालों के कहने पर बैंक की नौकरी पकड़ ली होती तो आज क्या होता। शायद वह फाइलें दबा रहे होते और लंच ब्रेक का इन्तजार कर रहे होते। उन्होंने अपने सपने की ओनरशिप ली। उन्होंने वह बल्ला पकड़ा जिसे देखकर लोग कहते थे कि इससे घर नहीं चलता। लेकिन जब सपना आपका अपना होता है तो पूरी कायनात को झुकना पड़ता है। आपको यह समझना होगा कि दूसरों की उम्मीदों का बोझ ढोना बंद करिए। अपनी लाइफ के ड्राइवर खुद बनिए वरना लोग आपको अपनी मर्जी के स्टेशन पर उतार देंगे और आप बस अपना सामान देखते रह जाएंगे।

बिना ओनरशिप के किसी भी गोल को पाना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल की कार को धक्का मारना। कितनी दूर ले जाएंगे आप। थक जाएंगे और एक दिन उसे वहीं छोड़ देंगे। इसलिए खुद से यह कड़वा सवाल पूछिए कि क्या मैं यह सपना इसलिए देख रहा हूँ क्योंकि मुझे यह सच में चाहिए या फिर इसलिए क्योंकि मुझे दूसरों की नजरों में कूल दिखना है। अगर जवाब दूसरा है तो अभी रुक जाइए। थोड़ा सोचिए और अपने असली जुनून को खोजिए। क्योंकि जब सपना आपका अपना होता है तो हार भी आपको सिखाती है और जीत आपको अमर बना देती है।


लेसन २ : पैशन क्वेश्चन : क्या आपके सपने में आपको जगाए रखने का दम है।

सपना वह नहीं होता जो आप सोते समय देखते हैं, सपना वह होता है जो आपको सोने नहीं देता। यह लाइन आपने हजार बार सुनी होगी, लेकिन क्या कभी इसे महसूस किया है। जॉन मैक्सवेल कहते हैं कि पैशन आपके सपने का फ्यूल है। अगर आपके पास दुनिया का सबसे बड़ा विजन है लेकिन उसमें पैशन की कमी है, तो आप उस रॉकेट की तरह हैं जिसमें पेट्रोल ही नहीं है। वह जमीन पर खड़ा तो बहुत शानदार दिखता है, लेकिन आसमान कभी नहीं छू सकता। इंडिया में हम अक्सर 'जुगाड़' और 'एडजस्टमेंट' के भरोसे जीते हैं, लेकिन पैशन के मामले में कोई जुगाड़ काम नहीं आता।

जरा अपने उस दोस्त के बारे में सोचिए जिसे नई गाड़ियों का बहुत शौक है। वह रात के ३ बजे भी आपको उठाकर बता सकता है कि किस कार का इंजन कितने हॉर्स पावर का है। उसे कोई पैसे नहीं देता यह सब याद रखने के लिए, वह उसका पैशन है। अब जरा अपने सपने को देखिए। क्या आप उसके बारे में बात करते समय अपनी नींद भूल जाते हैं। या फिर आप बस इसलिए काम कर रहे हैं क्योंकि महीने की आखिरी तारीख को सैलरी वाला मैसेज आने वाला है। अगर आपका काम आपको बोर कर रहा है, तो समझ लीजिए कि पैशन का मीटर जीरो पर है। और जीरो पैशन के साथ आप सिर्फ सर्वाइव कर सकते हैं, सक्सेज नहीं पा सकते।

पैशन का मतलब यह नहीं है कि आप हर वक्त पागलों की तरह चिल्लाते रहें। पैशन का असली मतलब है 'परसिस्टेंस'। जब सब कुछ आपके खिलाफ जा रहा हो, जब आपके रिश्तेदार आपकी नाकामयाबी पर चटखारे लेकर बातें कर रहे हों, तब भी जो चीज आपको सुबह जल्दी बिस्तर से उठाकर काम पर लगा देती है, वही पैशन है। बिना पैशन के इंसान उस गीली माचिस की तीली की तरह है, जिसे रगड़ते तो बहुत हैं लेकिन आग कभी नहीं लगती। आप बस धुँआ निकालते रह जाते हैं और लोग आपसे दूर भागने लगते हैं।

सोचिए उस स्ट्रगलिंग एक्टर के बारे में जो वडा पाव खाकर पूरा दिन ऑडिशन की लाइन में खड़ा रहता है। उसे पता है कि रिजेक्शन मिलने वाला है, फिर भी वह अगले दिन फिर तैयार होकर पहुँच जाता है। क्यों। क्योंकि उसके अंदर वह आग है। और एक तरफ वह लोग हैं जिन्हें मखमल का बिस्तर मिला है, लेकिन उनके पास कोई सपना नहीं है, इसलिए वे डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। पैशन आपको मुश्किलों से लड़ने की ताकत देता है। यह आपको वह एक्स्ट्रा माइल चलने के लिए मजबूर करता है जहाँ भीड़ कम होती है।

अगर आपको लगता है कि आपका सपना बहुत बड़ा है, तो चेक करिए कि क्या आपके पास उसे पाने की भूख भी उतनी ही बड़ी है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आप बस एक 'विश' को 'सपना' समझ रहे हैं। विश वह होती है जो अच्छी लगती है, लेकिन सपना वह होता है जो आपको बेचैन कर देता है। बिना पैशन के आप सिर्फ एक औसत जिंदगी जिएंगे और अंत में कहेंगे कि काश मैंने उस वक्त थोड़ी और मेहनत कर ली होती। तो क्या आप तैयार हैं अपने अंदर की उस चिंगारी को शोला बनाने के लिए। क्योंकि बिना पैशन के कामयाबी सिर्फ एक इत्तेफाक होती है, और इत्तेफाक हर किसी के साथ नहीं होते।


लेसन ३ : कॉस्ट क्वेश्चन : क्या आप अपने सपने की असली कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं

फ्री में तो आजकल एडवाइस भी नहीं मिलती, तो आपको क्या लगा कि आपका इतना बड़ा सपना आपको खैरात में मिल जाएगा। जॉन मैक्सवेल यहाँ सबसे बड़ा सच बोलते हैं कि हर सपने की एक कीमत होती है। और समस्या यह नहीं है कि सपना बड़ा है, समस्या यह है कि लोग कीमत चुकाने से पहले ही डिस्काउंट मांगने लगते हैं। आप चाहते हैं कि आप एक फिट बॉडी बनाएं लेकिन पिज्जा छोड़ने का मन नहीं है। आप चाहते हैं कि आप करोड़पति बनें लेकिन वीकेंड पर नेटफ्लिक्स की सीरीज भी पूरी देखनी है। भाई साहब, यह सपना है या कोई सेल चल रही है जहाँ आप मोलभाव कर रहे हैं।

इंडिया में हमें 'बचत' करना सिखाया जाता है, लेकिन सपनों के मामले में आपको अपना टाइम, अपनी एनर्जी और कभी-कभी अपनी सुख-सुविधाओं का निवेश करना पड़ता है। कीमत सिर्फ पैसों की नहीं होती। असली कीमत होती है उस अकेलेपन की जो आपको तब महसूस होता है जब आपके दोस्त पार्टी कर रहे होते हैं और आप अपने विजन पर काम कर रहे होते हैं। असली कीमत होती है उन रातों की जब आपकी आँखों में नींद भरी होती है लेकिन आपका गोल आपको सोने नहीं देता। अगर आप सोच रहे हैं कि बिना कुछ खोए आप सब कुछ पा लेंगे, तो आप शायद मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं। हकीकत की दुनिया में हर चीज का एक 'प्राइस टैग' होता है।

जरा उस एथलीट को देखिए जो सुबह ४ बजे उठता है जब पूरा शहर चैन की नींद सो रहा होता है। वह उस सुबह की नींद की कीमत चुका रहा है ताकि वह बाद में गोल्ड मेडल जीत सके। और हम। हम ५ मिनट का अलार्म स्नूज करने में ही अपनी आधी जंग हार जाते हैं। हम चाहते हैं कि कामयाबी हमारे कदम चूमे लेकिन हमें धूप में निकलना पसंद नहीं है। अगर आप अपने आराम के दायरे यानी 'कंफर्ट जोन' को नहीं छोड़ सकते, तो अपने सपने को टाटा-बाय-बाय कह दीजिए। क्योंकि आपका सपना आपके कंफर्ट जोन के बाहर ही आपका इन्तजार कर रहा है।

बहुत से लोग शुरू तो बहुत जोश में करते हैं, लेकिन जैसे ही पहली मुश्किल आती है या कोई कुर्बानी देनी पड़ती है, वे पीछे हट जाते हैं। वे कहते हैं कि यार यह तो बहुत मुश्किल है। अरे भाई, अगर आसान होता तो हर कोई आज बिल गेट्स बना होता। मुश्किलें ही तो वह फिल्टर हैं जो उन लोगों को अलग करती हैं जो सिर्फ बातें करते हैं उनसे जो वाकई में कुछ करना चाहते हैं। आपको तय करना होगा कि क्या आप वह कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं या आप बस एक दर्शक बनकर दूसरों की कामयाबी पर तालियाँ बजाना चाहते हैं।

याद रखिए, जो आज आप त्याग करेंगे, वही कल आपकी सफलता की नींव बनेगा। चाहे वह अपनी ईगो छोड़ना हो, फालतू के शौक कम करना हो या अपनी रातों की नींद कम करना। जब आप कीमत चुका देते हैं, तो कामयाबी का स्वाद भी बहुत मीठा होता है। बिना मेहनत की मिली हुई चीज की कोई कद्र नहीं होती। इसलिए खुद से पूछिए कि क्या आपका सपना इतना कीमती है कि आप उसके लिए अपनी आज की खुशियों को दांव पर लगा सकें। अगर दिल से आवाज आती है 'हाँ', तो समझ जाइए कि आप जीत की राह पर निकल चुके हैं।


सपने देखना आसान है लेकिन उन्हें जीना एक तपस्या है। आज हमने देखा कि ओनरशिप, पैशन और कॉस्ट ही वह तीन पिलर हैं जिस पर आपकी कामयाबी की बिल्डिंग खड़ी होगी। अब गेंद आपके पाले में है। क्या आप अभी भी बस सोचते रहेंगे या आज ही अपने सपने का पहला टेस्ट लेंगे। नीचे कमेंट्स में मुझे जरूर बताएं कि आपके सपने की सबसे बड़ी कीमत क्या है जो आप चुकाने के लिए तैयार हैं। उठिए, जागिए और अपने विजन को हकीकत में बदलिए।

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