क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस में हैप्पी बर्थडे मनाकर और एम्प्लॉईज के साथ चाय पीकर खुद को मसीहा समझ रहे हैं? बधाई हो, आप बिजनेस नहीं बल्कि एक महंगा चैरिटी शो चला रहे हैं। जब आपका बैंक बैलेंस जीरो होगा, तब ये तालियां काम नहीं आएंगी।
जॉर्ज क्लाउटियर की बुक प्रॉफिट्स आर नॉट एवरीथिंग, दे आर द ओनली थिंग आपके बिजनेस करने के पुराने और सॉफ्ट तरीके को पूरी तरह बदल देगी। चलिए जानते हैं वो 3 लेसन जो आपके डूबते हुए बिजनेस को प्रॉफिट मशीन बना सकते हैं।
लेसन १ : बिजनेस कोई सोशल क्लब नहीं है, यहाँ सिर्फ पैसा बोलता है
अगर आप अपने ऑफिस को एक बड़ा सा पिकनिक स्पॉट समझते हैं जहाँ सबको खुश रखना आपकी जिम्मेदारी है, तो यकीन मानिए आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। जॉर्ज क्लाउटियर सीधा आपके मुंह पर कहते हैं कि आप यहाँ दोस्त बनाने या 'बेस्ट बॉस ऑफ द ईयर' का अवॉर्ड जीतने नहीं आए हैं। बिजनेस का असली मतलब होता है पैसा कमाना। अगर आप महीने के अंत में अपने बिल नहीं भर पा रहे हैं और बैंक अकाउंट में मक्खियां उड़ रही हैं, तो आपके उस 'फ्रेंडली वर्क कल्चर' का कोई मतलब नहीं है। इंडिया में हम अक्सर इमोशन्स में बह जाते हैं। हमें लगता है कि अगर हम स्टाफ के साथ ज्यादा सख्ती करेंगे तो वो बुरा मान जाएंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आपकी कंपनी डूबेगी, तो क्या वो स्टाफ आपके घर का किराया भरेगा? बिल्कुल नहीं।
मान लीजिए आप एक छोटी सी कैफे चला रहे हैं। आपका एक वेटर है जो बहुत ही हंसमुख है, सबको जोक्स सुनाता है, लेकिन ऑर्डर हमेशा गलत लाता है। अब आप उसे सिर्फ इसलिए नहीं निकाल रहे क्योंकि वो 'बेचारा' बहुत अच्छा इंसान है। यहाँ आप बिजनेस नहीं चला रहे, आप पुण्य कमा रहे हैं। और पुण्य से घर की ईएमआई नहीं भरती। जॉर्ज क्लाउटियर कहते हैं कि अगर कोई एम्प्लॉई प्रॉफिट में वैल्यू एड नहीं कर रहा, तो उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखाइए। यह सुनने में कड़वा लग सकता है, लेकिन यह सच है। लोग अक्सर कहते हैं कि वर्क लाइफ बैलेंस होना चाहिए, ऑफिस में फैमिली जैसा माहौल होना चाहिए। लेकिन भाई, फैमिली घर पर होती है। ऑफिस में सिर्फ टीम होती है जिसका एक ही मकसद होना चाहिए, और वो है जीतना।
जरा सोचिए, क्या आपने कभी किसी शेर को देखा है जो घास खाने वाले जानवरों के साथ किटी पार्टी कर रहा हो? नहीं ना? क्योंकि उसे पता है कि उसका सर्वाइवल शिकार पर निर्भर है। आपका बिजनेस भी वैसा ही है। अगर आप प्रॉफिट का शिकार नहीं करेंगे, तो मार्केट के दूसरे शिकारी आपको खा जाएंगे। लोग आपको सार्केस्टिक कहेंगे, आपको पत्थर दिल कहेंगे, लेकिन जब आपका प्रॉफिट बढ़ेगा और आपकी कंपनी बड़ी बनेगी, तो वही लोग आपके पास जॉब मांगने आएंगे। अपनी प्रायोरिटी सेट कीजिए। क्या आपको सबकी नजरों में अच्छा बनना है या आपको एक सक्सेसफुल बिजनेस खड़ा करना है? दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।
सच्चाई तो यह है कि लोग उन्हीं की इज्जत करते हैं जिनके पास पैसा होता है। जब आप प्रॉफिट कमाते हैं, तो आप अपने एम्प्लॉईज को अच्छी सैलरी दे पाते हैं, अच्छी सुविधाएं दे पाते हैं। और यही असली भलाई है। झूठी मुस्कुराहटें बांटने से अच्छा है कि आप अपने बिजनेस के नंबर्स पर ध्यान दें। अगर नंबर्स रेड में हैं, तो आपका व्यवहार चाहे जितना भी गोल्ड जैसा हो, आप फेल हैं। इसलिए आज ही अपने अंदर के उस 'बेचारे' इंसान को मार दीजिए जो सबको खुश करना चाहता है। खुद को एक सख्त लीडर बनाइए जिसे सिर्फ और सिर्फ रिजल्ट्स से प्यार हो। क्योंकि अंत में, सिर्फ आपका प्रॉफिट ही आपकी असली पहचान बनेगा।
लेसन २ : डर को अपना दोस्त बनाइए, क्योंकि शांति सिर्फ कब्र में मिलती है
अगर आपको लगता है कि एक बार बिजनेस सेट हो गया तो आप चैन की नींद सो पाएंगे, तो आप शायद किसी दूसरी दुनिया की बात कर रहे हैं। जॉर्ज क्लाउटियर का मानना है कि एक बिजनेस ओनर के लिए 'सुकून' सबसे बड़ा दुश्मन है। जिस दिन आपको लगा कि अब तो सब ठीक है, समझ लीजिए आपके पतन की शुरुआत हो चुकी है। डर एक ऐसी चीज है जिसे हम अक्सर बुरा मानते हैं, लेकिन बिजनेस में यह आपका सबसे बड़ा मोटिवेटर है। डर इस बात का कि कल कोई नया स्टार्टअप आपकी छुट्टी कर देगा। डर इस बात का कि मार्केट बदल जाएगा और आप पीछे छूट जाएंगे। यह डर ही है जो आपको सुबह जल्दी उठाता है और रात को देर तक काम करने पर मजबूर करता है।
मान लीजिए आप एक मोहल्ले में किराने की दुकान चलाते हैं। आपकी दुकान बढ़िया चल रही है, आप शाम को आराम से क्रिकेट देखते हैं और रविवार को छुट्टी मनाते हैं। अचानक पता चलता है कि सामने वाली गली में एक बड़ा सुपरमार्केट खुल गया है जो भारी डिस्काउंट दे रहा है। अब आपकी रातों की नींद उड़ गई। आप बेचैन हैं। यह जो बेचैनी है ना, यही आपको अपनी सर्विस सुधारने, नए प्रोडक्ट्स लाने और कस्टमर्स को बेहतर डील देने के लिए मजबूर करेगी। अगर आपको डर नहीं होता, तो आप वही पुराने ढर्रे पर चलते रहते और एक दिन आपकी दुकान पर ताला लग जाता। इसलिए, डर से डरिए मत, उसे अपनी ताकत बनाइए।
आजकल के मोटिवेशनल गुरु कहते हैं कि 'चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा'। क्लाउटियर कहते हैं कि यह बकवास है। चिंता करिए, क्योंकि अगर आप चिंता नहीं करेंगे तो आपके कॉम्पिटिटर आपकी चिंता बढ़ा देंगे। क्या आपको लगता है कि बड़े बड़े ब्रांड्स के मालिक आज चैन से सो रहे हैं? नहीं, वो हर पल डरते हैं कि कहीं कोई नया टेक्नोलॉजी बदलाव उन्हें मार्केट से बाहर न कर दे। यह डर ही उन्हें इनोवेट करने पर मजबूर करता है। जो इंसान यह सोचकर बैठ गया कि 'मैं तो अब राजा हूँ', वो बहुत जल्द सड़क पर आने वाला है। बिजनेस कोई डेस्टिनेशन नहीं है जहाँ पहुँच कर आप रुक जाएं, यह एक ऐसी रेस है जो कभी खत्म नहीं होती।
लोग सोचते हैं बिजनेस मालिक बनने के बाद वो अपनी मर्जी के मालिक बन जाएंगे। सच तो यह है कि अब आपके हजारों मालिक हैं, जिन्हें हम कस्टमर्स कहते हैं। और उन कस्टमर्स के खो जाने का डर ही आपको एक सजग लीडर बनाता है। अपनी टीम को भी यह अहसास दिलाते रहिए कि मार्केट में सर्वाइव करना कितना मुश्किल है। अगर वो रिलैक्स हो गए, तो आपकी पूरी शिप डूब जाएगी। शांति और सुकून उन लोगों के लिए है जो रिटायर्ड हो चुके हैं। अगर आप अभी गेम में हैं, तो अपनी धड़कनों को बढ़ने दीजिए। यही धड़कन आपके बिजनेस की लाइफलाइन है। डर को अपना फ्यूल बनाइए और हर दिन ऐसे काम करिए जैसे कल आपकी छुट्टी होने वाली हो।
लेसन ३ : संडे को भूल जाइए, क्योंकि सक्सेस कोई पार्ट टाइम जॉब नहीं है
अगर आपको लगता है कि आप मंडे से फ्राइडे सुबह नौ से शाम पांच बजे तक काम करके दुनिया जीत लेंगे, तो आप शायद किसी सरकारी दफ्तर के सपने देख रहे हैं। जॉर्ज क्लाउटियर बहुत ही सार्केस्टिक अंदाज में कहते हैं कि बिजनेस कोई 40 घंटे का हफ्ता नहीं है, यह तो 168 घंटे का एक कमिटमेंट है। अगर आप अपने बिजनेस को सच में बड़ा बनाना चाहते हैं, तो 'वीकेंड' और 'हॉलिडे' जैसे शब्द अपनी डिक्शनरी से निकाल दीजिए। इंडिया में हमें बचपन से सिखाया जाता है कि 'संडे मतलब फन डे'। लेकिन अगर आप एक स्मॉल बिजनेस ओनर हैं और संडे को नेटफ्लिक्स देख रहे हैं, तो याद रखिए आपका कॉम्पिटिटर उस वक्त शायद नई सेल्स स्ट्रेटेजी बना रहा होगा।
मान लीजिए आपका एक गारमेंट स्टोर है। आप संडे को यह सोचकर दुकान बंद रखते हैं कि 'एक दिन तो रेस्ट बनता है भाई'। उसी संडे को आपका एक रेगुलर कस्टमर आपकी दुकान पर आता है, उसे ताला लटका मिलता है, और वो बगल वाली दुकान से शॉपिंग कर लेता है जो सातों दिन खुली रहती है। आपने सिर्फ एक दिन की सेल नहीं खोई, आपने उस कस्टमर का भरोसा और उसकी लाइफटाइम वैल्यू खो दी। यहाँ पर आपका आराम आपको बहुत महंगा पड़ा। बिजनेस में जो रुक गया, समझो वो बिक गया। लोग आपको कहेंगे कि आप पागल हो गए हैं, आप काम के पीछे दीवाने हैं, लेकिन जब आपका बैंक बैलेंस बढ़ेगा, तो वही लोग आपके काम करने के जुनून की तारीफ करते नहीं थकेंगे।
जॉर्ज क्लाउटियर कहते हैं कि हर संडे को काम करना सिर्फ इसलिए जरूरी नहीं है कि आप ज्यादा पैसा कमाएं, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि संडे को दुनिया शांत होती है। उस दिन कोई अनचाहे फोन कॉल्स नहीं आते, कोई वेंडर परेशान नहीं करता। यह वो वक्त है जब आप अपने बिजनेस के नंबर्स को गहराई से देख सकते हैं और आने वाले हफ्ते की प्लानिंग कर सकते हैं। जो लोग कहते हैं कि वो 'स्मार्ट वर्क' करते हैं इसलिए उन्हें ज्यादा काम करने की जरूरत नहीं, वो अक्सर काम से बचने का बहाना ढूंढ रहे होते हैं। सच तो यह है कि बिना 'हार्ड वर्क' के 'स्मार्ट वर्क' की कोई औकात नहीं है। आप जितने ज्यादा घंटे अपने काम को देंगे, आपकी किस्मत उतनी ही ज्यादा चमकेगी।
लोग अपनी शादी की सालगिरह और दोस्तों की पार्टियों के लिए बिजनेस को इग्नोर कर देते हैं। भाई, अगर बिजनेस फेल हो गया तो वो दोस्त भी आपको उधार देने से पहले दस बार सोचेंगे। अपनी प्रायोरिटी को शीशे की तरह साफ रखिए। अगर आप नंबर वन बनना चाहते हैं, तो आपको उन चीजों को छोड़ना होगा जो बाकी के 99 परसेंट लोग कर रहे हैं। संडे को सोना बंद करिए और अपने सपनों के लिए जागना शुरू करिए। याद रखिए, सक्सेस कोई लॉटरी नहीं है जो अचानक लग जाएगी, यह आपके द्वारा दिए गए उन एक्स्ट्रा घंटों का नतीजा है जो आपने तब दिए जब बाकी सब सो रहे थे।
तो क्या आप तैयार हैं उस कड़वे सच को गले लगाने के लिए जो आपको एक असली अमीर बिजनेसमैन बना सकता है? जॉर्ज क्लाउटियर की यह बातें शायद आपके दिल को चुभें, लेकिन आपके बैंक अकाउंट को बहुत पसंद आएंगी। आज ही तय कीजिए कि क्या आपको सिर्फ एक 'अच्छा इंसान' बनकर रह जाना है या एक 'सक्सेसफुल प्रॉफिट मेकर' बनना है। अगर आप में वो दम है कि आप अपने डर को अपनी ताकत बना सकें और संडे की छुट्टी को कुर्बान कर सकें, तो कमेंट में प्रॉफिट लिखकर अपनी कमिटमेंट दिखाएं। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बिजनेस के नाम पर सिर्फ टाइमपास कर रहा है।
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