अगर आपको लगता है कि सिर्फ दिन रात गधों की तरह मेहनत करने से आप रेस जीत जाएंगे तो मुबारक हो आप अपनी जिंदगी के सबसे बड़े भ्रम में जी रहे हैं। बिना गेम प्लान के भागना सिर्फ पसीना बहाना है सक्सेस पाना नहीं। क्या आप अपनी कीमती मेहनत को ऐसे ही कचरे में फेंकना चाहते हैं?
आज हम जो गिब्स की किताब रेसिंग टू विन से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी लाइफ की धीमी पड़ती गाड़ी को रॉकेट बना देंगे। चलिए इन 3 पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : बिना गेम प्लान के रेस जीतना नामुमकिन है
अगर आप आज भी बिना किसी प्लानिंग के सुबह उठकर बस ऑफिस या काम पर भाग रहे हैं तो यकीन मानिए आप उस रेसर की तरह हैं जो बहुत तेज तो भाग रहा है पर उसे पता ही नहीं कि फिनिश लाइन किस तरफ है। जो गिब्स अपनी किताब रेसिंग टू विन में सबसे पहले इसी बात पर जोर देते हैं कि सक्सेस कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश होती है। जिसे हम गेम प्लान कहते हैं।
जरा सोचिए आप एक ट्रिप पर जाने वाले हैं और आपने गाड़ी में पेट्रोल तो फुल करवा लिया पर आपके पास मैप या जीपीएस नहीं है। आप पूरे जोश में एक्सीलेटर दबाते हैं और दो घंटे बाद पता चलता है कि आप अपनी मंजिल से सौ किलोमीटर दूर किसी अनजान गांव में खड़े हैं। वहां के लोग आपको ऐसे देख रहे हैं जैसे आप एलियन हों। यही हाल हमारी लाइफ का है। हम मेहनत के नाम पर पसीना तो बहा रहे हैं पर हमारे पास अपनी मंजिल तक पहुंचने का कोई ब्लूप्रिंट नहीं है।
जो गिब्स कहते हैं कि एक विनर बनने के लिए आपको अपनी जीत का नक्शा पहले से ही कागज पर उतारना पड़ता है। आपको पता होना चाहिए कि कब गियर बदलना है और कब ब्रेक मारना है। अगर आपके पास गेम प्लान नहीं है तो आप बस दूसरों की सफलता के लिए एक मोहरा बनकर रह जाएंगे। लोग अक्सर कहते हैं कि किस्मत साथ नहीं दे रही। भाई साहब किस्मत भी उसी का साथ देती है जिसके पास उस किस्मत को संभालने का प्लान होता है।
असली दिक्कत यह है कि हम अपनी शादी की प्लानिंग में छह महीने लगा देते हैं लेकिन अपने करियर या लाइफ की प्लानिंग के लिए छह मिनट भी नहीं निकालते। हम बस यह उम्मीद करते हैं कि एक दिन अचानक आसमान फटेगा और छप्पर फाड़ कर पैसा और शोहरत हमारे कदमों में गिर जाएगी। पर असलियत में ऐसा सिर्फ फिल्मों में होता है। हकीकत में तो आपको हर छोटे गोल के लिए एक सॉलिड स्ट्रेटेजी चाहिए।
अपना गेम प्लान बनाना बोरिंग काम लग सकता है। इसमें दिमाग खर्च होता है और आपको अपनी कमियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन याद रखिए बिना प्लान के मैदान में उतरना हार की पहली सीढ़ी है। जब आपके पास एक लिखित प्लान होता है तो आप मुश्किल समय में घबराते नहीं हैं। आपको पता होता है कि यह रुकावट सिर्फ एक छोटा सा गड्डा है जिसे पार करने का तरीका आपके प्लान में पहले से लिखा है।
आज ही अपनी डायरी उठाइए और तय करिए कि अगले एक साल में आप खुद को कहाँ देखना चाहते हैं। उसे छोटे टुकड़ों में बांटिए। हर दिन के लिए एक टास्क सेट करिए। जब आप एक छोटे टास्क को पूरा करते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है। यह छोटा सा बदलाव ही आपको भीड़ से अलग खड़ा कर देगा। वरना भीड़ तो वैसे भी बिना किसी मकसद के धक्का खाते हुए आगे बढ़ ही रही है।
लेसन २ : सही खिलाड़ियों को चुनना ही असली लीडरशिप है
अक्सर हमें लगता है कि हम सुपरमैन हैं और अकेले ही पूरी दुनिया जीत लेंगे। जो गिब्स कहते हैं कि यह सोच आपको थका देगी और अंत में आपके हाथ कुछ नहीं लगेगा। रेसिंग की दुनिया में ड्राइवर को जीत का क्रेडिट मिलता है पर असली काम वह टीम करती है जो कुछ सेकंड के अंदर गाड़ी के चारों टायर बदल देती है। अगर आपका मैकेनिक ढीला है तो आपका इंजन चाहे जितना भी पावरफुल हो आप बीच रास्ते में ही लटक जाएंगे।
जरा अपने आसपास के दोस्तों और साथ काम करने वालों को देखिए। क्या वे लोग ऐसे हैं जो मुश्किल समय में आपका साथ देंगे या फिर वे सिर्फ पार्टी करने के लिए आपके साथ हैं। अगर आप बाज की तरह उड़ना चाहते हैं तो मुर्गियों के साथ दाना चुगना छोड़ना होगा। जो गिब्स अपनी टीम में सिर्फ स्किल्स नहीं बल्कि सही एटीट्यूड भी देखते थे। एक ऐसा इंसान जो काम के प्रति पागल हो वह उस इंसान से लाख गुना बेहतर है जिसके पास डिग्री तो बहुत है पर काम करने की नीयत जीरो है।
एक लीडर होने का मतलब यह नहीं है कि आप सबको सिर्फ ऑर्डर्स दें। असली लीडर वह है जो अपनी टीम के हर मेंबर की ताकत को जानता हो। आपको पता होना चाहिए कि किसको फील्ड में भेजना है और किसको बैकएंड संभालना है। अगर आप मछली को पेड़ पर चढ़ने की ट्रेनिंग देंगे तो वह पूरी जिंदगी खुद को बेवकूफ ही समझेगी। यही गलती हम अपनी टीम बनाने में करते हैं। हम सही इंसान को गलत काम दे देते हैं और फिर गुस्सा करते हैं कि काम ठीक से क्यों नहीं हुआ।
टीम बनाने में ईगो को साइड में रखना पड़ता है। जो गिब्स बताते हैं कि कई बार आपको खुद से ज्यादा स्मार्ट लोगों को अपनी टीम में रखना पड़ता है। अगर आप कमरे के सबसे होशियार इंसान हैं तो यकीन मानिए आप गलत कमरे में बैठे हैं। अपने आसपास ऐसे लोग रखें जो आपको चैलेंज कर सकें और आपकी गलतियों को बता सकें। चापलूसों की भीड़ जुटाना बहुत आसान है पर वे आपको कभी टॉप पर नहीं ले जा सकते।
असली लीडरशिप का टेस्ट तब होता है जब चीजें प्लान के हिसाब से नहीं चलतीं। जब आपकी टीम प्रेशर में हो तब एक लीडर का शांत रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर आप खुद ही घबरा जाएंगे तो आपकी टीम तो पहले ही हथियार डाल देगी। जो गिब्स ने सिखाया है कि अपनी टीम पर भरोसा करना सीखिए। उन्हें जिम्मेदारी दीजिए और उन्हें अपनी गलतियों से सीखने का मौका दीजिए।
एक मजबूत टीम वह नहीं होती जो कभी हारती नहीं बल्कि वह होती है जो हारने के बाद एक दूसरे पर उंगली उठाने के बजाय साथ बैठकर अगली जीत की प्लानिंग करती है। अगर आपने सही टीम चुन ली तो आपका आधा काम वैसे ही आसान हो जाएगा। बाकी का आधा काम आपकी स्ट्रेटेजी संभाल लेगी। याद रखिए अकेले आप तेज दौड़ सकते हैं लेकिन दूर तक जाने के लिए आपको साथियों की जरूरत पड़ेगी ही।
लेसन ३ : हार का सामना करना और बाउंस बैक की कला
लाइफ कोई सीधी सड़क नहीं है जहाँ आप बस एक्सीलेटर दबाएंगे और पहुंच जाएंगे। इसमें खतरनाक मोड़ आएंगे और कई बार आपकी गाड़ी ट्रैक से उतरकर दीवार से भी टकराएगी। जो गिब्स अपनी किताब में बहुत साफ़ कहते हैं कि हारना बुरा नहीं है लेकिन हार मान लेना सबसे बड़ा गुनाह है। रेसिंग की दुनिया में एक्सीडेंट होना आम बात है पर असली चैंपियन वही है जो मलबे से बाहर निकलता है और अगली रेस के लिए खुद को तैयार करता है।
जरा अपनी पिछली असफलता को याद करिए। जब आपका वह बड़ा प्रोजेक्ट फेल हुआ था या जब आपको वह प्रमोशन नहीं मिला था जिसकी आप उम्मीद कर रहे थे। उस वक्त आपने क्या किया था? क्या आप एक कोने में बैठकर अपनी किस्मत को कोस रहे थे या फिर आप यह देख रहे थे कि इंजन में गड़बड़ी कहाँ हुई थी? ज्यादातर लोग हारने के बाद डिप्रेशन का कंबल ओढ़ लेते हैं। उन्हें लगता है कि बस अब सब खत्म हो गया। पर असल में हार सिर्फ यह बताती है कि आपकी तैयारी में कहीं कोई छोटा सा छेद था जिसे भरना जरूरी है।
असफलता असल में एक बहुत ही कड़वा लेकिन जरूरी फीडबैक है। यह आपको बताती है कि आपका कौन सा पैंतरा काम नहीं आया। जो गिब्स ने अपनी टीम को हमेशा यही सिखाया कि हार के बाद शोक मनाने के बजाय डेटा चेक करो। टायर का प्रेशर कम था या ड्राइवर ने मोड़ पर गलती की? जब आप अपनी हार को इमोशनली नहीं बल्कि लॉजिकली देखते हैं तो आप जीतने के एक कदम और करीब पहुंच जाते हैं। वरना आंसू बहाने से तो आज तक किसी का बैंक बैलेंस नहीं बढ़ा है।
वापसी करने के लिए कलेजा चाहिए होता है। जब पूरी दुनिया आपको देख रही हो और आप बुरी तरह फेल हो जाएं तो दोबारा खड़े होना डरावना लग सकता है। लेकिन याद रखिए इतिहास उन्हीं को याद रखता है जिन्होंने गिरकर संभलना सीखा। जो कभी गिरा ही नहीं उसने कभी अपनी लिमिट्स को टेस्ट ही नहीं किया। अगर आप सेफ खेल रहे हैं तो आप जीत नहीं रहे बल्कि आप बस हारने से बच रहे हैं। और हारने से बचने वाले लोग कभी पोडियम पर खड़े होकर शैम्पेन नहीं उड़ाते।
जो गिब्स कहते हैं कि हर हार आपको एक नया लेसन देकर जाती है बशर्ते आप उसे सीखने के लिए तैयार हों। अपनी गलतियों के लिए दूसरों को ब्लेम करना बंद करिए। जब तक आप स्टयरिंग व्हील अपने हाथ में नहीं लेंगे तब तक आप गाड़ी को सही दिशा में नहीं मोड़ पाएंगे। अपनी जिम्मेदारी खुद लीजिए। अपनी टीम के साथ बैठिए और पूछिए कि हम इससे बेहतर कैसे कर सकते हैं? यही वह एटीट्यूड है जो एक साधारण इंसान को लीजेंड बना देता है।
अंत में जीत उसी की होती है जो आखिरी सांस तक हार मानने से इनकार कर देता है। अगर आज आप मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपनी लाइफ की सबसे बड़ी रेस के बीच में हैं। बस रुकिए मत। गियर बदलिए और फिर से रेस में लौट आइये। आपकी मंजिल आपका इंतजार कर रही है।
लाइफ की रेस में भागना बड़ी बात नहीं है बल्कि एक गेम प्लान के साथ जीतना असली खेल है। आज ही अपनी लाइफ का गेम प्लान बनाइये और कमेंट्स में बताइए कि इस किताब का कौन सा लेसन आपकी लाइफ की गाड़ी का गियर बदलने वाला है। उठिए और अपनी जीत की कहानी खुद लिखिए।
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