Radical Collaboration (Hindi)


अगर आपको लगता है कि ऑफिस में हर कोई आपका दुश्मन है और आपके आइडियाज कचरा हैं तो बधाई हो आप अकेले नहीं हैं। आप अपनी डिफेंसिवनेस की वजह से खुद की ही लंका लगा रहे हैं और आपको पता भी नहीं है। ऐसे ही अकेले सड़ते रहिए या फिर यह पढ़ लीजिये वरना लोग आपको इग्नोर करना शुरू कर देंगे और आप बस कोने में बैठकर रोते रहेंगे।

जेम्स टाम और रोनाल्ड लुयेट की किताब रैडिकल कोलेबोरेशन हमें उन पांच जादुई स्किल्स के बारे में बताती है जो आपके रिश्तों और करियर को पूरी तरह बदल सकते हैं। आइये जानते हैं वह ३ बड़े लेसन जो आपकी लाइफ आसान बना देंगे।


लेसन १ : अपनी डिफेंसिवनेस की दीवार को गिराएं

इमेजिन कीजिये कि आप ऑफिस की एक मीटिंग में बैठे हैं और आपका बॉस आपके किसी पुराने प्रोजेक्ट में गलती निकाल देता है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह कि आप शांति से सुनें और समझें। दूसरा रास्ता वह है जो ९९ परसेंट लोग चुनते हैं जिसे हम कहते हैं रेड जोन मोड। आप तुरंत अपनी ढाल निकाल लेते हैं और चिल्लाने लगते हैं कि अरे सर वह तो प्रिंटर खराब था या फिर वह शर्मा जी की वजह से लेट हो गया। मुबारक हो आपने अभी-अभी डिफेंसिवनेस का मास्टरक्लास दिया है।

जेम्स टाम कहते हैं कि जब हम डिफेंसिव होते हैं तो हमारा दिमाग सोचना बंद कर देता है और हम सिर्फ लड़ने या भागने के मूड में आ जाते हैं। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे किसी ने आपकी पूंछ पर पैर रख दिया हो और आप बिना सोचे समझे काटने को दौड़ें। असल में जब हम डिफेंसिव होते हैं तो हम अपनी कमजोरी छुपाने की कोशिश कर रहे होते हैं पर सच तो यह है कि सबको आपकी वह घबराहट साफ़ दिख रही होती है।

मान लीजिये आपकी गर्लफ्रेंड या वाइफ ने आपसे कह दिया कि आप कभी टाइम पर नहीं आते। अब एक तरीका तो यह है कि आप अपनी घड़ी के सेल की कहानी सुनाने लगें या फिर उल्टा उन पर इल्जाम लगा दें कि तुम कौन सी बहुत जल्दी तैयार हो जाती हो। यह डिफेंसिवनेस आपके रिश्ते में कोलेबोरेशन नहीं बल्कि वर्ल्ड वार ३ शुरू कर देती है। आप जीत तो जाते हैं पर रिश्ता हार जाते हैं।

किताब कहती है कि इस रेड जोन से बाहर निकलकर ग्रीन जोन में आना होगा। ग्रीन जोन का मतलब है कि जब कोई आपकी गलती बताए तो उसे हमले की तरह न लें। उसे एक फीडबैक की तरह देखें। अगर आप खुद को सही साबित करने की अपनी इस बीमारी का इलाज नहीं करेंगे तो यकीन मानिये आप कभी किसी के साथ मिलकर काम नहीं कर पाएंगे। लोग आपके साथ काम करने से कतराएंगे क्योंकि उन्हें लगेगा कि आपसे बात करना मतलब अपने सिर पर पत्थर मारना है।

डिफेंसिव होना एक नेचुरल रिएक्शन है पर प्रोफेशनल लाइफ में यह एक सुसाइड मिशन है। जब आप अपनी गलती मानते हैं या कम से कम उस पर शांति से बात करते हैं तो आप सामने वाले को निहत्था कर देते हैं। वह लड़ने आया था पर आपने उसे समझदारी का आईना दिखा दिया। यह पहला कदम है एक ऐसे रिश्ते की तरफ जहाँ लोग एक दूसरे को नीचा दिखाने की बजाय एक दूसरे की मदद करते हैं। अगर आप अभी भी सोच रहे हैं कि आप तो कभी डिफेंसिव नहीं होते तो दोस्त सबसे पहले आपको ही इस लेसन की सख्त जरूरत है।


लेसन २ : पर्सनल अकाउंटेबिलिटी की पावर को अपनाएं

अक्सर हमारी लाइफ में जब कुछ गलत होता है तो हम सबसे पहले एक बलि का बकरा ढूंढते हैं। चाय ठंडी हो गई तो गैस खत्म थी। ऑफिस लेट पहुंचे तो ट्रैफिक ज्यादा था। प्रमोशन नहीं मिला तो बॉस को चमचागिरी पसंद थी। हम इतने क्रिएटिव हैं कि अपनी हर नाकामी के लिए एक बढ़िया सी कहानी तैयार रखते हैं। लेकिन जेम्स टाम कहते हैं कि अगर आप खुद को विक्टिम यानी बेचारा समझना बंद नहीं करेंगे तो आप कभी लीडर नहीं बन पाएंगे। इसे ही वह पर्सनल अकाउंटेबिलिटी कहते हैं।

पर्सनल अकाउंटेबिलिटी का मतलब यह नहीं है कि आप खुद को कोड़े मारना शुरू कर दें। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आप यह मानें कि आपकी लाइफ में जो भी हो रहा है उसके जिम्मेदार आप खुद हैं। मान लीजिये आप एक टीम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं और टीम फेल हो गई। एक औसत इंसान कहेगा कि बाकी लोग कामचोर थे इसलिए हार गए। लेकिन एक रेडिकल कोलेबोरेटर कहेगा कि मैंने अपनी बात ठीक से नहीं समझाई या मैंने फॉलोअप नहीं लिया। जब आप जिम्मेदारी लेते हैं तो आपके पास उसे सुधारने की पावर आ जाती है।

सोचिये अगर आप क्रिकेट खेल रहे हैं और आप जीरो पर आउट हो गए। अब आप पिच को गाली दें या अंपायर को अंधा कहें इससे आपका स्कोर कार्ड नहीं बदलेगा। लेकिन अगर आप यह मान लें कि आपका शॉट सिलेक्शन खराब था तो अगली बार आप शतक लगा सकते हैं। लाइफ में भी हम अक्सर अंपायर और पिच को ही दोष देते रहते हैं जबकि हमारी बैटिंग में ही छेद होता है। जो इंसान अपनी गलतियों का क्रेडिट नहीं ले सकता वह अपनी सफलता का हकदार भी नहीं है।

अकाउंटेबिलिटी का मतलब यह भी है कि आप दूसरों पर उंगली उठाना बंद करें। जब आप किसी की शिकायत करते हैं तो आप अपनी पावर उस इंसान को दे देते हैं। आप कह रहे हैं कि मेरा मूड खराब है क्योंकि उसने ऐसा किया। मतलब आपकी खुशियों का रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथ में है। क्या आप सच में इतने सस्ते हैं कि कोई भी आकर आपका दिन खराब कर दे। पर्सनल अकाउंटेबिलिटी आपको उस रिमोट कंट्रोल का मालिक बनाती है।

जब आप जिम्मेदारी लेना शुरू करते हैं तो लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं। लोगों को पता होता है कि यह इंसान बहाने नहीं बनाएगा बल्कि सोल्यूशन ढूंढेगा। ऑफिस में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो सीना ठोक कर कह सकें कि हाँ यह मेरी गलती है और मैं इसे ठीक करूँगा। ऐसे लोग ही आगे चलकर बड़े मैनेजर या सीईओ बनते हैं। बाकी लोग तो बस कैंटीन में बैठकर इस बात पर चर्चा करते रह जाते हैं कि किस्मत ने उनके साथ कितना बड़ा धोखा किया है।


लेसन ३ : सिर्फ अपनी जीत नहीं सबकी जीत का सोचें

ज्यादातर लोगों को लगता है कि नेगोशिएशन या बातचीत का मतलब है एक जंग। जिसमें या तो आप जीतेंगे या सामने वाला। हम इंडियंस के लिए तो यह और भी खतरनाक है। हमें लगता है कि अगर हमने सब्जी वाले से ५ रुपये कम नहीं करवाए तो हमारी ईगो हर्ट हो जाएगी। लेकिन "रैडिकल कोलेबोरेशन" कहता है कि अगर आप सिर्फ अपनी जीत का सोच रहे हैं तो आप असल में हार रहे हैं। इसे कहते हैं इंटरेस्ट बेस्ड नेगोशिएशन।

इमेजिन कीजिये कि आप और आपका दोस्त एक ही संतरा चाहते हैं। अब आप दोनों लड़ने लगते हैं और अंत में संतरे को आधा-आधा काट लेते हैं। आपको लगा कि यह फेयर है। लेकिन बाद में पता चलता है कि आपको सिर्फ संतरे का जूस चाहिए था और आपके दोस्त को केक बनाने के लिए उसका छिलका। अगर आप लड़ने की बजाय एक दूसरे का इंटरेस्ट यानी जरूरत पूछते तो आप दोनों को १०० परसेंट फायदा होता। लेकिन नहीं हमें तो बस अपनी बात ऊपर रखनी है भले ही सबका नुकसान हो जाए।

असली कोलेबोरेशन तब होता है जब आप सामने वाले के जूतों में पैर डालकर देखते हैं। जब आप ऑफिस में किसी कलीग के साथ काम कर रहे हैं तो यह मत सोचिये कि मैं अपना काम खत्म करके क्रेडिट कैसे लूट लूं। यह सोचिये कि हम दोनों का काम कैसे आसान हो सकता है। जब आप दूसरों के फायदे की बात करते हैं तो लोग आपके लिए जान देने को तैयार हो जाते हैं। और अगर आप सिर्फ अपना उल्लू सीधा करेंगे तो लोग आपको देखकर रास्ता बदल लेंगे जैसे आप कोई उधारी मांगने वाले रिश्तेदार हों।

याद रखिये कि रिश्ते कोई जीरो-सम गेम नहीं हैं जहाँ एक को जीतने के लिए दूसरे का हारना जरूरी हो। एक अच्छा लीडर वह है जो टेबल पर बैठे हर इंसान को विनर महसूस कराए। अगर आप किसी डील में सामने वाले को पूरी तरह निचोड़ देते हैं तो वह दोबारा आपके साथ काम नहीं करेगा। आपने आज तो पैसा बचा लिया पर भविष्य का एक बड़ा दरवाजा हमेशा के लिए बंद कर दिया। यह वैसी ही बेवकूफी है जैसी सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को काटना।

अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके साथ जुड़ें और आपका साथ दें तो अपनी नीयत साफ़ रखिये। अपनी जरूरतों को साफ़-साफ़ बताएं और दूसरों की जरूरतों को ध्यान से सुनें। जब आप 'मैं' से ऊपर उठकर 'हम' पर आते हैं तो मैजिक शुरू होता है। और यकीन मानिये यह मैजिक आपकी लाइफ और करियर को उस ऊंचाई पर ले जाएगा जहाँ अकेले आप कभी नहीं पहुँच सकते थे।


तो दोस्तों, यह थे जेम्स टाम और रोनाल्ड लुयेट की किताब से वो ३ बड़े लेसन जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं। लाइफ में सफल होना सिर्फ टैलेंट का खेल नहीं है बल्कि इस बात का है कि आप लोगों के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं। अगर आप अपनी डिफेंसिवनेस छोड़कर जिम्मेदारी लेना और दूसरों का भला सोचना सीख गए तो आपको कोई नहीं रोक सकता।

अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट्स में लिखकर बताइए कि क्या आप भी कभी रेड जोन में जाकर डिफेंसिव हुए हैं। उस मोमेंट के बारे में बताएं जब आपने अपनी गलती मानकर किसी रिश्ते को बचाया हो। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे लगता है कि वह हमेशा सही है। चलिए मिलकर एक बेहतर और कोलेबोरेटिव दुनिया बनाते हैं।

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