क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिन भर गधे की तरह मेहनत करते हैं पर शाम को पता चलता है कि असली काम तो अभी बाकी है। मुबारक हो, आप अपनी जिंदगी का कीमती टाइम और सुकून दोनों कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं। बिना सिस्टम के भागना सिर्फ थकावट देता है, सक्सेस नहीं।
डेविड एलेन की बुक रेडी फॉर एनीथिंग हमें सिखाती है कि कैसे पागलों की तरह काम करना बंद करके स्मार्टली चीजों को कंट्रोल में लेना है। आइये समझते हैं इस बुक के वो ३ धांसू लेसन्स जो आपकी प्रोडक्टिविटी को रॉकेट बना देंगे।
लेसन १ : दिमाग को स्टोर हाउस नहीं बल्कि आइडियाज की फैक्ट्री बनाइये
क्या आपको याद है कि पिछली बार जब आप रात को सोने की कोशिश कर रहे थे और अचानक आपको याद आया कि कल सुबह दूध वाले को पैसे देने हैं या ऑफिस की वो फाइल मेल करनी है। फिर क्या हुआ। आपकी नींद गायब हो गयी और आप छत को ताकते रहे जैसे कि वहीं से कोई फरिश्ता उतर कर आपका काम कर देगा। डेविड एलेन कहते हैं कि आपका दिमाग दुनिया का सबसे घटिया ऑफिस मैनेजर है। इसके पास याद रखने की कैपेसिटी तो है पर यह सही समय पर कुछ याद नहीं दिलाता। यह आपको रात को दो बजे याद दिलाएगा कि बिजली का बिल भरना है जबकि आप उस वक्त कुछ नहीं कर सकते।
हम में से ज्यादातर लोग अपने दिमाग को एक कूड़ादान बना कर रखते हैं। इसमें किराना की लिस्ट भी है। इसमें बॉस की डांट भी है। इसमें पड़ोसी की नयी कार का दुख भी है। और इसमें वो दस अधूरे काम भी हैं जो पिछले साल पूरे हो जाने चाहिए थे। एलेन कहते हैं कि आपका दिमाग सिर्फ आइडियाज पैदा करने के लिए बना है। इसे चीजों को स्टोर करने के लिए मजबूर करना वैसा ही है जैसे आप अपने सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल सिर्फ सब्जी काटने के लिए कर रहे हों। यह टैलेंट की बर्बादी है।
जब आप अपने दिमाग में सब कुछ रखने की कोशिश करते हैं तो आपका सिस्टम हैंग होने लगता है। आप चिड़चिड़े हो जाते हैं। आप उस इंसान की तरह काम करते हैं जिसके हाथ में दस जलती हुई मोमबत्तियां हैं और वो उन्हें गिरने से बचाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में आप क्रिएटिव कैसे होंगे। आप तो बस सर्वाइवल मोड में जी रहे हैं। सच तो यह है कि जब तक आपका दिमाग खाली नहीं होगा तब तक इसमें कुछ नया और काम का नहीं आएगा।
डेविड एलेन का सीधा सा फंडा है। जो भी काम आपके दिमाग में आए उसे तुरंत कहीं लिख लें। चाहे वो कागज हो या मोबाइल की कोई एप। जैसे ही आप किसी चीज को लिख लेते हैं आपका दिमाग उसे अपनी जिम्मेदारी से मुक्त कर देता है। उसे लगता है कि चलो अब यह सुरक्षित है। अब मैं आराम कर सकता हूँ। यह वैसा ही है जैसे आप किसी भारी बैग को कंधे से उतार कर जमीन पर रख दें। जो सुकून मिलता है ना वही असली प्रोडक्टिविटी की शुरुआत है।
भारतीय घरों में अक्सर मम्मी को देखा है। उन्हें सब याद रहता है क्योंकि उनके पास एक अदृश्य लिस्ट होती है। लेकिन क्या आपने ध्यान दिया है कि उसी चक्कर में वो कितनी स्ट्रेस में रहती हैं। आप वो गलती मत कीजिये। अगर आप चाहते हैं कि आपका फोकस अर्जुन जैसा हो तो पहले अपने दिमाग का कचरा बाहर निकालिये। जब दिमाग साफ होगा तभी तो आप वो सोच पाएंगे जो आपको अमीर और कामयाब बनाएगा। वरना आप बस यही याद करते रह जाएंगे कि कल सब्जी में नमक डालना है या नहीं।
लेसन २ : जितना साफ शीशा होगा उतनी ही साफ़ आपकी परछाई दिखेगी
कभी आपने अपने ऑफिस की डेस्क या अपने कमरे के उस कोने को देखा है जहाँ फाइलों और पुराने सामान का पहाड़ लगा है। हम भारतीयों को चीजों से बड़ा लगाव होता है। वो २०१५ का शादी का कार्ड हो या वो पेन जो अब चलता नहीं है। हम सब कुछ संभाल कर रखते हैं जैसे कि कल को सरकार इन्हें म्यूजियम में रखने वाली है। डेविड एलेन कहते हैं कि अगर आपका बाहरी माहौल बिखरा हुआ है तो आपका दिमाग कभी शांत नहीं रह सकता। यह वैसा ही है जैसे आप कीचड़ से भरे चश्मे को पहन कर एचडी मूवी देखने की कोशिश कर रहे हों।
जब आपके वर्किंग टेबल पर ढेर सारा पेपर वर्क और फालतू सामान पड़ा होता है तो आपका दिमाग उसे देख कर थक जाता है। हर एक चीज जो अधूरी है वो आपके दिमाग से चीख-चीख कर कह रही है कि मुझे पूरा करो। और आप। आप बस उसे इग्नोर करने की कोशिश करते हैं। लेकिन सबकॉन्शियसली आपकी एनर्जी ड्रेन हो रही होती है। एलेन का मानना है कि क्लैरिटी पाने के लिए सफाई जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं कि आप झाड़ू लेकर दिन भर सफाई करें। इसका मतलब है कि अपनी फिजिकल और डिजिटल स्पेस को फालतू की चीजों से आजाद करें।
सोचिये आप एक ऐसी कार चला रहे हैं जिसका विंडशील्ड पूरी तरह गंदा है। आप कितनी भी तेज गाड़ी भगा लें आपको एक्सीडेंट का डर हमेशा रहेगा। हमारी लाइफ भी ऐसी ही है। जब हमारे पेंडिंग काम और फालतू का कबाड़ हमारे सामने होता है तो हम बड़े फैसले लेने से डरते हैं। हम बस आज का दिन काटने की कोशिश करते हैं। एलेन यहाँ रिफ्लेक्शन की बात करते हैं। जब आपका माहौल साफ होता है तब आप अपनी लाइफ की सही तस्वीर देख पाते हैं। तब आपको समझ आता है कि आप कहाँ खड़े हैं और आपको कहाँ जाना है।
बहुत से लोग सोचते हैं कि बड़े लोग इसलिए कामयाब हैं क्योंकि उनके पास बहुत काम है। सच तो यह है कि वो इसलिए कामयाब हैं क्योंकि उन्हें पता है कि क्या नहीं करना है। उन्होंने अपने आसपास से वो शोर खत्म कर दिया है जो उन्हें डिस्ट्रैक्ट करता है। आप भी अपने ईमेल इनबॉक्स से लेकर अपनी डेस्क तक का कचरा साफ कीजिये। जब स्पेस खाली होगी तभी तो वहां कुछ नया और बड़ा करने की जगह बनेगी। वरना आप बस उस भीड़ में खोए रहेंगे जो खुद को बिजी तो दिखाती है पर करती कुछ नहीं है।
सफलता का रास्ता सादगी से होकर गुजरता है। अगर आप चाहते हैं कि आप बिजली की रफ़्तार से काम करें तो पहले वो बोझ उतारिए जो आपने सालों से पाल रखा है। जब शीशा साफ होगा तो आपको अपनी काबिलियत पर शक नहीं होगा। आप बिना डरे आगे बढ़ेंगे क्योंकि आपको सब कुछ साफ दिखाई दे रहा होगा। तो आज ही उस पुराने कबाड़ को विदा कीजिये और अपनी प्रोग्रेस के लिए रास्ता बनाइये।
लेसन ३ : बड़े पहाड़ को मत देखिये बस अगला कदम उठाइये
हम में से ज्यादातर लोग प्रोक्रास्टिनेशन यानी काम टालने के एक्सपर्ट होते हैं। हम किसी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले ही उसे इतना बड़ा बना देते हैं जैसे कि हमें मंगल ग्रह पर बस्ती बसानी हो। डेविड एलेन कहते हैं कि लोग काम से नहीं थकते बल्कि वो इस बात से थक जाते हैं कि काम शुरू कैसे करें। जब आप पूरे पहाड़ को एक साथ देखते हैं तो आपका दिमाग घबरा जाता है और सीधे नेटफ्लिक्स खोल कर बैठ जाता है। इसे कहते हैं पैरालिसिस बाय एनालिसिस।
एलेन का सबसे जादुई मंत्र है नेक्स्ट एक्शन। इसका मतलब है कि बड़े गोल के बारे में सोचना बंद कीजिये और सिर्फ यह पूछिये कि अभी इसी वक्त मैं ऐसा क्या छोटा काम कर सकता हूँ जिससे गाड़ी आगे बढ़े। अगर आपको वजन कम करना है तो जिम की सालाना फीस के बारे में मत सोचिये। बस अपने जूते पहनिए और घर से बाहर कदम रखिये। जूते पहनना दुनिया का सबसे आसान काम है पर यही वो छोटा कदम है जो आपको रनिंग ट्रैक तक ले जाएगा।
अक्सर हम इंडियंस को आदत होती है कि हम शुभ मुहूर्त का इन्तजार करते हैं। हम सोचते हैं कि जब सारी चीजें परफेक्ट होंगी तब हम अपना बिजनेस शुरू करेंगे या वो किताब लिखेंगे। सच तो यह है कि परफेक्शन एक बहुत बड़ा धोखा है। एलेन कहते हैं कि आपको तैयार रहने की जरूरत है ना कि परफेक्ट होने की। जब आप छोटे कदम उठाते हैं तो आप मोमेंटम बनाते हैं। और एक बार जब आप चलने लगते हैं तो रास्ता अपने आप दिखने लगता है।
सोचिये आप रात के अंधेरे में कार चला रहे हैं। आपकी हेडलाइट सिर्फ १०० मीटर तक का रास्ता दिखाती है। लेकिन उसी १०० मीटर के सहारे आप सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर लेते हैं। लाइफ और प्रोडक्टिविटी भी ऐसी ही है। आपको पूरा रास्ता देखने की जरूरत नहीं है। बस अगले १०० मीटर चलिए। एलेन समझाते हैं कि जब आप छोटे टास्क पूरे करते हैं तो आपके दिमाग को जीत की आदत हो जाती है। फिर बड़े से बड़ा काम भी आपको एक खेल लगने लगता है।
तो अगली बार जब आपको लगे कि काम का बोझ बहुत ज्यादा है तो गहरी सांस लीजिये और खुद से पूछिये कि अगला सबसे छोटा कदम क्या है। क्या वो एक फोन कॉल है। क्या वो एक ईमेल लिखना है। बस उसे कर डालिए। यकीन मानिए कि आधी जंग तो आप वहीं जीत लेंगे। सफलता कोई एक दिन का चमत्कार नहीं है बल्कि यह छोटे-छोटे सही फैसलों का नतीजा है जो आपने बिना डरे लिए थे।
डेविड एलेन की यह बुक सिर्फ काम करने के तरीके नहीं बल्कि जीने का एक नया नजरिया सिखाती है। अगर आप अपने दिमाग को खाली रखेंगे। अपने माहौल को साफ रखेंगे और छोटे कदम उठाते रहेंगे तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। क्या आप आज ही अपने दिमाग से कोई एक बोझ उतार कर उसे कागज पर लिखने के लिए तैयार हैं। कमेंट में हमें बताइये कि वो कौन सा एक काम है जिसे आप आज ही खत्म करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा बिजी होने का नाटक करता है पर करता कुछ नहीं है।
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