क्या आप भी उन टैलेंटेड लोगों में से हैं जो किसी से हाथ मिलाते ही उसका नाम भूल जाते हैं और फिर पूरी पार्टी में उसे ओ भाई या एक्सक्यूज मी कह कर अपना उल्लू सीधा करते हैं। सच तो यह है कि आपकी यह गजनी वाली बीमारी लोगों की नजर में आपको कूल नहीं बल्कि एक लापरवाह इंसान बनाती है जो दूसरों को इज्जत देना भी नहीं जानता।
लेकिन फिक्र मत कीजिये क्योंकि बेंजामिन लेवी की यह बुक आपके दिमाग के जंग लगे ताले को खोलकर आपको एक मेमोरी मास्टर बना देगी। आइये जानते हैं वो ३ कमाल के लेसन जो आपकी प्रोफेशनल लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : द फेस नेप टेक्निक - चेहरे में छुपा है नाम का पता
मान लीजिये आप एक बहुत बड़ी ऑफिस पार्टी में हैं। वहां आपका बॉस आपको एक बहुत बड़े क्लाइंट से मिलवाता है जिसका नाम मिस्टर कपूर है। आप हाथ मिलाते हैं और स्माइल करते हैं। लेकिन जैसे ही बॉस वहां से हटता है आपके दिमाग का डेटा डिलीट हो जाता है। अब आप खड़े हैं उस बेचारे क्लाइंट के सामने और सोच रहे हैं कि यह कपूर था या खन्ना। यह सिचुएशन जितनी शर्मनाक है उतनी ही कॉमन भी है। बेंजामिन लेवी कहते हैं कि हम नाम इसलिए भूलते हैं क्योंकि हम सिर्फ कान से सुनते हैं पर आँखों से देखना भूल जाते हैं। यहीं काम आती है फेस नेप टेक्निक।
यह तकनीक कहती है कि जब आप किसी से मिलें तो उसके चेहरे पर कोई एक ऐसी चीज ढूंढिए जो सबसे अलग हो। मान लीजिये किसी की नाक बहुत लंबी है या किसी की आँखें बहुत बड़ी हैं। अब उस खास फीचर को उसके नाम के साथ चिपका दीजिये। जैसे अगर सामने वाले का नाम आकाश है और उसका माथा बहुत चौड़ा है तो सोचिये कि उसका माथा बिल्कुल खुले आकाश जैसा है। यह सुनने में थोड़ा अजीब और फनी लग सकता है पर यकीन मानिए हमारा दिमाग फनी और अजीब चीजों को बहुत जल्दी पकड़ता है।
अक्सर हम लोगों से मिलते वक्त इतने नर्वस होते हैं कि हम अपना नाम बताने की तैयारी में लगे रहते हैं। हम सोचते हैं कि मैं हाथ कैसे मिलाऊंगा या मैं कैसा दिख रहा हूँ। इस चक्कर में सामने वाले का नाम हवा में उड़ जाता है। लेवी समझाते हैं कि नाम याद रखना असल में एक चॉइस है। अगर आप किसी को सच में इम्प्र्रेस करना चाहते हैं तो आपको उसे यह अहसास दिलाना होगा कि वह आपके लिए खास है। और किसी के लिए उसका नाम दुनिया का सबसे प्यारा शब्द होता है।
जब आप फेस नेप का इस्तेमाल करते हैं तो आप सामने वाले को गौर से देखते हैं। यह नजर का कनेक्शन ही आधे नाम को याद करवा देता है। अगर कोई राहुल है और उसकी हंसी बहुत तेज है तो सोचिये कि यह राहुल तो बहुत शोर मचाता है। जब अगली बार आप उससे मिलेंगे तो आपको वो हंसी याद आएगी और तुरंत राहुल का नाम आपके जुबान पर होगा। आप उसे ओ भाई कहने की जगह राहुल भाई कहेंगे और यकीन मानिए उसका दिल खुश हो जाएगा।
कॉर्पोरेट वर्ल्ड में लोग आपकी डिग्री से ज्यादा आपकी याददाश्त से इम्प्रेस होते हैं। अगर आप किसी बड़ी मीटिंग में पिछली बार मिले हुए इंसान का नाम सही से ले लेते हैं तो आप आधे नंबर तो वहीँ जीत जाते हैं। यह कोई जादू नहीं है बस एक छोटी सी दिमागी ट्रिक है। चेहरे को एक मैप की तरह देखिये और नाम को उस मैप का रास्ता बना दीजिये। कभी रास्ता नहीं भटकेंगे।
लेसन २ : कॉन्फिडेंट रिपीटीशन - नाम को जुबान पर चढ़ाना सीखिए
जब आप किसी से मिलते हैं और वो अपना नाम बताता है तो क्या आप उसे सिर्फ एक बार सुनकर छोड़ देते हैं। अगर हाँ तो आप वही गलती कर रहे हैं जो ९० परसेंट लोग करते हैं। बेंजामिन लेवी कहते हैं कि नाम कोई पासवर्ड नहीं है जिसे एक बार डाला और काम हो गया। यह एक मंत्र की तरह है जिसे आपको बार बार जपना होगा। लेकिन रुकिए इसका मतलब यह नहीं है कि आप सामने वाले के सामने खड़े होकर उसका नाम माला की तरह जपने लगें। आपको इसे बहुत ही स्मार्ट तरीके से अपनी बातचीत में फिट करना होगा।
इसे ऐसे समझिये कि आप एक डेट पर गए हैं। सामने वाली ने कहा कि मेरा नाम सिमरन है। अब आप पूरा टाइम उसे सिर्फ देखते रहेंगे और नाम दिमाग के पीछे चला जाएगा। इसके बजाय जैसे ही वो नाम बताए आप कहिये अच्छा तो सिमरन जी आप यहाँ पहली बार आई हैं। फिर बीच में पूछिए कि सिमरन आपको क्या पीना पसंद है। जब आप बातचीत के पहले ३० सेकंड में तीन बार नाम ले लेते हैं तो आपका दिमाग उसे इम्पोर्टेन्ट फाइल मानकर सेव कर लेता है। यह सुनने में शायद आपको लगे कि आप बहुत चिपकू साउंड कर रहे हैं पर हकीकत में सामने वाले को अपना नाम सुनना बहुत अच्छा लगता है।
इंसानी फितरत बड़ी अजीब है। हमें अपना नाम सुनना किसी म्यूजिक से कम नहीं लगता। जब आप किसी का नाम लेकर बात करते हैं तो आप उसे एक अनकही इज्जत दे रहे होते हैं। मान लीजिये आप ऑफिस की लिफ्ट में हैं और किसी कलीग ने अपना नाम बताया। अगर आप चुपचाप खड़े रहेंगे तो लिफ्ट से बाहर निकलते ही आप नाम साफ कर देंगे। लेकिन अगर आप कहेंगे कि बहुत अच्छा लगा आपसे मिलकर सुमित तो वो नाम आपके सबकॉन्शियस माइंड में लॉक हो जाएगा। यह एक साइकोलॉजिकल हैक है जो आपको भीड़ में सबसे अलग खड़ा कर देता है।
ज्यादातर लोग नाम इसलिए नहीं भूलते कि उनकी याददाश्त कमजोर है बल्कि इसलिए भूलते हैं क्योंकि वो ध्यान ही नहीं देते। हम उस वक्त सिर्फ अपनी इमेज चमकाने में लगे होते हैं। लेवी कहते हैं कि अपनी ईगो को साइड में रखिये और सामने वाले के नाम को अपनी प्रायोरिटी बनाइये। अगर आप नाम ठीक से नहीं सुन पाए हैं तो दोबारा पूछने में कोई बुराई नहीं है। यह कहना कि माफ कीजिये क्या आप अपना नाम एक बार फिर बता सकते हैं किसी गलत नाम लेने से हजार गुना बेहतर है।
जब आप कॉन्फिडेंस के साथ नाम रिपीट करते हैं तो आप एक मैसेज भेज रहे होते हैं कि मैं आपकी वैल्यू करता हूँ। यह छोटी सी प्रैक्टिस आपके नेटवर्क को इतना मजबूत बना देगी कि लोग आपके कायल हो जाएंगे। अगली बार जब किसी से मिलें तो नाम को हवा में मत छोड़िये उसे पकड़कर अपनी बातों के धागे में पिरो लीजिये। जितना ज्यादा आप नाम दोहराएंगे उतना ही गहरा वो आपके दिमाग के फोल्डर में सेट होगा।
लेसन ३ : विजुअल एसोसिएशन - दिमाग में बनाइये मूवी पोस्टर
हमारा दिमाग नंबर्स और टेक्स्ट को याद रखने में बड़ा आलसी है पर इसे कलर्ड फोटोज और अजीबोगरीब फिल्में बहुत पसंद आती हैं। बेंजामिन लेवी कहते हैं कि अगर आप किसी का नाम जिंदगी भर नहीं भूलना चाहते तो उसके नाम की अपने दिमाग में एक कार्टून जैसी इमेज बना लीजिये। मान लीजिये आप किसी से मिलते हैं जिसका नाम है मयूर। अब अगर आप सिर्फ मयूर याद रखेंगे तो शायद भूल जाएँ पर अगर आप इमेजिन करें कि उस इंसान के पीछे मोर के पंख लगे हुए हैं और वो ऑफिस की डेस्क पर नाच रहा है तो क्या आप उसे कभी भूल पाएंगे। बिल्कुल नहीं।
यह टेक्निक सुनने में थोड़ी बचकानी लग सकती है पर बड़े बड़े मेमोरी एक्सपर्ट्स इसी का इस्तेमाल करते हैं। हमारा दिमाग बोरिंग चीजों को कचरे के डिब्बे में डाल देता है। इसलिए अगर किसी का नाम विजय है तो सोचिये कि वो हाथ में एक बड़ी सी ट्रॉफी लेकर विक्ट्री का साइन बना रहा है और उसके पीछे पटाखे फूट रहे हैं। जितना ज्यादा आप सिचुएशन को फनी और इलॉजिकल बनाएंगे उतना ही वह आपके दिमाग में पक्की हो जाएगी। असल में हम नाम इसलिए भूलते हैं क्योंकि वो किसी चीज से जुड़े नहीं होते। विजुअल एसोसिएशन उन्हें एक खूंटी की तरह टांग देता है।
मान लीजिये किसी का नाम है सागर। अब सागर सुनते ही आपके दिमाग में गहरा नीला समंदर और लहरें आनी चाहिए। आप इमेजिन कीजिये कि सागर साहब अपनी मीटिंग की फाइलें समंदर की लहरों पर तैरा रहे हैं। अब अगली बार आप जब भी उन्हें देखेंगे आपके दिमाग में वो लहरें और समंदर अपने आप आ जाएगा और जुबान पर होगा नाम सागर। यह दिमागी खेल आपको थकाने की जगह और भी ज्यादा शार्प बना देता है।
अक्सर लोग कहते हैं कि भाई मेरा इमेजिनेशन इतना अच्छा नहीं है। लेकिन सच तो यह है कि आप सपने तो देखते ही होंगे। सपने भी तो विजुअल ही होते हैं। बस आपको वही क्रिएटिविटी यहाँ इस्तेमाल करनी है। लेवी का मानना है कि नाम को किसी ऑब्जेक्ट या एक्शन के साथ जोड़ देने से आपका रिकॉल रेट १० गुना बढ़ जाता है। अगर कोई पूजा है तो सोचिये कि उसके हाथ में एक घंटी है और वो पूरे ऑफिस में आरती कर रही है। यह सुनकर आपको हंसी आ रही होगी और यही इस टेक्निक की पावर है। जो चीज हमें हंसाती है वो हमें याद रहती है।
यह याद रखिये कि यह सारी ट्रिक्स तभी काम करेंगी जब आप लोगों में असली इंटरेस्ट लेंगे। नाम याद रखना सिर्फ एक स्किल नहीं है बल्कि यह एक सुपरपावर है जो आपको सोशल और प्रोफेशनल लाइफ का किंग बना सकती है। बेंजामिन लेवी की यह बुक हमें सिखाती है कि कोई भी दिमाग कमजोर नहीं होता बस उसे सही तरीके से ट्रेन करने की जरूरत होती है। तो आज से ही लोगों को ओ भाई या सुनो जी कहना बंद कीजिये और उनके नाम का जादू चलाना शुरू कीजिये।
तो दोस्तों, क्या आप भी आज से अपनी इस मेमोरी पावर को टेस्ट करने के लिए तैयार हैं। अगली बार जब आप किसी नए इंसान से मिलें तो इनमें से कोई भी एक टेक्निक जरूर आजमायें और देखिये कि कैसे लोग आपके फैन बन जाते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर कीजिये जो हर १० मिनट में आपका नाम भूल जाता है। कमेंट्स में बताइये कि आपको सबसे मजेदार लेसन कौन सा लगा।
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