क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बस ऑफिस जाकर कुर्सी तोड़ने से कंपनी टॉप पर पहुंच जाएगी। अगर हां तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। बिना सही सिस्टम के सक्सेस ढूंढना वैसा ही है जैसे खाली कुएं में बाल्टी डालना।
आज हम क्विंत स्टुडर की बुक रिजल्ट्स दैट लास्ट के बारे में बात करेंगे। यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे छोटे बदलावों से आप अपनी कंपनी और करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। चलिए इन ३ लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : डॉट्स को कनेक्ट करना यानी हर काम की वैल्यू समझाना
बिजनेस की दुनिया में अक्सर लोग रोबोट की तरह काम करते हैं। सुबह आए अंगूठा लगाया और शाम को घर भाग गए। अगर आप अपने एम्प्लॉई से पूछें कि भाई तुम यह फाइल क्यों बना रहे हो तो ९० परसेंट चांस है कि वह कहेगा कि सर ने बोला है इसलिए बना रहा हूं। यही वह जगह है जहां मामला बिगड़ना शुरू होता है। क्विंत स्टुडर कहते हैं कि अगर आप अपनी कंपनी को टॉप पर ले जाना चाहते हैं तो आपको हर इंसान को यह बताना होगा कि उसके छोटे से काम का मतलब क्या है। इसे वह कनेक्टिंग द डॉट्स कहते हैं।
सोचिए एक हॉस्पिटल में एक सफाई कर्मचारी झाड़ू लगा रहा है। अगर वह सिर्फ यह सोचे कि उसका काम कचरा साफ करना है तो वह शायद कोने में पड़ी धूल को अनदेखा कर दे। लेकिन अगर उसे यह अहसास हो कि उसकी सफाई से इन्फेक्शन कम होगा और मरीजों की जान बचेगी तो उसका नजरिया बदल जाएगा। अब वह सफाई कर्मचारी नहीं बल्कि लाइफ सेवर बन चुका है। यही जादू है जब आप काम को मकसद से जोड़ देते हैं।
हमारे इंडियन घरों में भी तो यही होता है। जब मम्मी संडे को सुबह ७ बजे उठाकर झाड़ू पकड़ा देती हैं तो हम चिढ़ जाते हैं क्योंकि हमें लगता है कि यह सिर्फ एक टास्क है। लेकिन अगर मम्मी यह कहें कि आज मेहमान आने वाले हैं और घर चमकना चाहिए ताकि आपकी इज्जत बनी रहे तो हम थोड़े मन से काम करने लगते हैं। हालांकि इज्जत और हमारा गहरा नाता नहीं है फिर भी हम कोशिश करते हैं।
कंपनियों में भी लीडर्स को यही करना चाहिए। अगर आपका सेल्स वाला बंदा सिर्फ टारगेट के पीछे भाग रहा है तो वह जल्दी थक जाएगा। लेकिन अगर उसे पता है कि उसके एक प्रोडक्ट बेचने से किसी गरीब किसान की लाइफ आसान हो रही है तो वह जी जान लगा देगा। बिना मकसद के काम करना वैसा ही है जैसे बिना सिम कार्ड के आईफोन चलाना। दिखता तो महंगा है पर किसी काम का नहीं होता।
जब तक लोग यह नहीं समझेंगे कि वे जो कर रहे हैं वह क्यों कर रहे हैं तब तक वे सिर्फ अपनी शिफ्ट पूरी करेंगे आपका सपना नहीं। आपको हर मीटिंग में हर बातचीत में यह याद दिलाना होगा कि हम यहाँ क्यों हैं। लोग पैसों के लिए काम शुरू करते हैं लेकिन वे रुकते और लड़ते सिर्फ एक बड़े विजन के लिए हैं। अगर आप उनके काम को कंपनी की जीत से नहीं जोड़ सकते तो आप लीडर नहीं सिर्फ एक मैनेजर हैं जो लोगों की अटेंडेंस मार्क कर रहा है।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे सिर्फ विजन ही काफी नहीं है बल्कि लोगों को उनकी परफॉरमेंस के लिए जवाबदेह बनाना भी उतना ही जरूरी है।
लेसन २ : अकाउंटेबिलिटी और हाई परफॉरमेंस कल्चर का असली सच
अब जब आपने सबको यह समझा दिया है कि उनका काम कितना जरूरी है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दें। बिजनेस में प्यार और इज्जत अपनी जगह है लेकिन जवाबदेही यानी अकाउंटेबिलिटी अपनी जगह। क्विंत स्टुडर कहते हैं कि एक लीडर का सबसे बड़ा पाप यह है कि वह उन लोगों को बर्दाश्त करता है जो काम चोरी करते हैं। जब आप एक खराब काम करने वाले को नहीं टोकते तो आप असल में अपने सबसे अच्छे काम करने वाले एम्प्लॉई को सजा दे रहे होते हैं।
इसे एक क्रिकेट मैच की तरह समझिए। मान लीजिए आपकी टीम का एक प्लेयर बाउंड्री पर खड़ा होकर समोसे खा रहा है और कैच छोड़ देता है। अगर कैप्टन उसे कुछ नहीं कहता और अगले मैच में भी उसे खिला लेता है तो वह बॉलर जो अपनी जान लगाकर बॉलिंग कर रहा है वह क्या सोचेगा। वह सोचेगा कि जब समोसे खाकर भी टीम में जगह पक्की है तो मैं इतनी मेहनत क्यों कर रहा हूं। बस यहीं से आपकी कंपनी की लुटिया डूबना शुरू हो जाती है।
अक्सर बॉस लोग थोड़े डरपोक होते हैं। उन्हें लगता है कि अगर फीडबैक दिया तो बंदा बुरा मान जाएगा या नौकरी छोड़ देगा। अरे भाई जो काम ही नहीं कर रहा उसके रहने से फायदा क्या है। एक अच्छी कंपनी में परफॉरमेंस की तीन केटेगरी होनी चाहिए। एक वे जो आग लगा रहे हैं यानी हाई परफॉरमर्स। दूसरे वे जो ठीक ठाक हैं यानी मिडिल परफॉरमर्स। और तीसरे वे जिनसे काम ही नहीं हो रहा यानी लो परफॉरमर्स।
क्विंत स्टुडर की सलाह बड़ी सिंपल और कड़वी है। जो लोग टॉप पर हैं उन्हें रिवॉर्ड दो और उनकी तारीफों के पुल बांध दो। जो बीच में हैं उन्हें ट्रेनिंग दो ताकि वे ऊपर आ सकें। और जो सबसे नीचे हैं उन्हें साफ कह दो कि भाई आपसे न हो पाएगा या तो सुधर जाओ या फिर कहीं और अपना टैलेंट दिखाओ। यह सुनने में थोड़ा जालिम लग सकता है लेकिन एक सड़ा हुआ सेब पूरी टोकरी को खराब कर देता है।
हमारे यहाँ ऑफिस में अक्सर वह बंदा सबसे ज्यादा खुश रहता है जो सिर्फ चापलूसी करता है। असली काम करने वाला कोने में बैठकर फाइलें निपटाता रहता है और प्रमोशन कोई और ले जाता है। अगर आपकी कंपनी में भी यही हो रहा है तो समझ लीजिए कि आपका जहाज डूबने वाला है। रिजल्ट्स तब आते हैं जब हर इंसान को पता हो कि अगर उसने गलती की तो उसे जवाब देना होगा और अगर उसने कमाल किया तो उसे पूरे मोहल्ले के सामने शाबाशी मिलेगी।
जब आप अकाउंटेबिलिटी की बात करते हैं तो आपको खुद भी उसका हिस्सा बनना पड़ता है। ऐसा नहीं कि आप खुद दोपहर को २ बजे ऑफिस आ रहे हैं और स्टाफ को पंक्चुअलिटी का लेक्चर दे रहे हैं। लोग आपके शब्दों को नहीं आपके एक्शन को फॉलो करते हैं। एक मजबूत कल्चर वह है जहाँ काम न करने वाले को शर्म महसूस हो और काम करने वाले को गर्व।
अगले लेसन में हम बात करेंगे कि कैसे आप इस पूरे सिस्टम को एक ऐसा रूप दे सकते हैं जहाँ लोग मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी मर्जी से कंपनी को टॉप पर ले जाएं।
लेसन ३ : कंसिस्टेंसी और पॉजिटिव कल्चर से लंबी जीत हासिल करना
अक्सर लोग जोश में आकर जिम तो जॉइन कर लेते हैं लेकिन दो दिन बाद ही बिस्तर से उठना उन्हें पहाड़ जैसा लगने लगता है। बिजनेस में भी यही होता है। नई पॉलिसी आती है बड़े बड़े वादे होते हैं और हफ्ते भर बाद सब पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। क्विंत स्टुडर कहते हैं कि रिजल्ट्स वह नहीं जो एक बार धमाका कर दें बल्कि रिजल्ट्स वह हैं जो बार बार आते रहें। और यह तभी मुमकिन है जब आपकी कंपनी का कल्चर सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि लोगों के दिल और दिमाग में हो।
एक अच्छे कल्चर का मतलब यह नहीं है कि ऑफिस में पिज्जा पार्टी हो रही है या बीन बैग्स रखे हैं। असली कल्चर वह है जब बॉस कमरे में न हो तब भी काम उसी रफ्तार और ईमानदारी से चले। इसे कहते हैं हार्डवायरिंग बिहेवियर। यानी अच्छी आदतों को कंपनी के डीएनए में फिट कर देना। जैसे सुबह ब्रश करना हमारी आदत है इसके लिए हमें कोई मोटिवेशनल वीडियो नहीं देखना पड़ता। वैसे ही काम का एक स्टैंडर्ड होना चाहिए जो कभी नीचे न गिरे।
मान लीजिए आप किसी ढाबे पर जाते हैं जहाँ खाना बहुत टेस्टी मिलता है। आप अगली बार अपने पूरे खानदान को वहां ले जाते हैं लेकिन इस बार दाल में नमक ज्यादा है और रोटी कच्ची है। क्या आप दोबारा वहां जाएंगे। कभी नहीं। वह ढाबा इसलिए फेल हुआ क्योंकि उसने अपनी क्वालिटी को हार्डवायर नहीं किया था। बिजनेस में भी अगर आपकी सर्विस संडे को अच्छी है और मंडे को खराब तो आप कभी भी टॉप पर नहीं रह पाएंगे।
सक्सेसफुल लीडर्स जानते हैं कि उन्हें लगातार अपने एम्प्लॉईज की तारीफ करनी चाहिए। स्टुडर कहते हैं कि प्रशंसा यानी रीकोग्निशन एक जादू की तरह काम करता है। लेकिन यहाँ भी लोग कंजूसी कर जाते हैं। कुछ मैनेजर्स को लगता है कि अगर तारीफ कर दी तो बंदा सिर पर चढ़ जाएगा या सैलरी बढ़ाने की मांग करेगा। यह सोच वैसी ही है जैसे यह सोचना कि अगर गाड़ी में पेट्रोल डाल दिया तो वह उड़कर पड़ोसी के घर पहुंच जाएगी। भाई पेट्रोल डालोगे तभी तो गाड़ी चलेगी।
जब आप एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ लोग सुरक्षित महसूस करते हैं और उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत को नोटिस किया जा रहा है तो वे अपनी क्षमता से २०० परसेंट ज्यादा देने को तैयार हो जाते हैं। एक ऐसा कल्चर बनाइए जहाँ गलती होने पर फांसी न दी जाए बल्कि उससे सीखने का मौका मिले। लेकिन हाँ वही गलती दोबारा होने पर अकाउंटेबिलिटी वाला लेसन याद दिलाना भी जरूरी है।
आखिर में बात घूम फिर कर वहीं आती है कि क्या आप एक ऐसी कंपनी बनाना चाहते हैं जो सिर्फ पैसे छापे या एक ऐसी जो लोगों की जिंदगी बदले। रिजल्ट्स दैट लास्ट हमें याद दिलाती है कि शॉर्टकट से आप शायद एक दो बार जीत जाएं लेकिन लंबी रेस का घोड़ा वही बनता है जिसके पास एक मजबूत सिस्टम और शानदार टीम होती है।
दोस्तों, क्या आपकी कंपनी या टीम में भी लोग सिर्फ घड़ी की सुइयों को देखते रहते हैं। याद रखिए असली लीडर वह नहीं जो डराकर काम कराए बल्कि वह है जो लोगों के अंदर काम करने की आग जला दे। आज ही अपने काम करने के तरीके को बदलें और एक ऐसा सिस्टम बनाएं जो आपकी गैरमौजूदगी में भी रिजल्ट्स देता रहे। अगर आपको यह लेसन काम के लगे तो अपने उस दोस्त या कलीग के साथ इसे जरूर शेयर करें जो अपनी टीम को मैनेज करने में परेशान रहता है। चलिए मिलकर एक हाई परफॉरमेंस इंडिया बनाते हैं।
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