क्या आप भी उसी पुराने घिसे पिटे बिजनेस आइडिया को चिपकाकर अंबानी बनने का सपना देख रहे हैं। मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। जबकि दुनिया वाइट स्पेस में नए नोट छाप रही है और आप अभी भी आउटडेटेड मॉडल्स के भरोसे बैठे अपनी ग्रोथ का गला घोंट रहे हैं।
मार्क डब्ल्यू जॉनसन की यह किताब आपको सिखाएगी कि कैसे मार्केट के उस खाली हिस्से पर कब्जा करना है जिसे आपके कॉम्पिटिटर्स देख भी नहीं पा रहे हैं। चलिए इस आर्टिकल में उन तीन लेसन्स को समझते हैं जो आपके डूबते हुए बिजनेस को एक नई उड़ान दे सकते हैं।
लेसन १ : द फोर बॉक्स बिजनेस मॉडल - आपके बिजनेस का असली DNA
अगर आप उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बस एक कूल सा ऑफिस खोल लेने और फेसबुक पर एड्स चला देने से आप बिजनेस के किंग बन जाएंगे तो भाई साहब आपको अपनी सोच का इलाज कराने की सख्त जरूरत है। मार्क जॉनसन कहते हैं कि एक सफल बिजनेस कोई तुक्का नहीं होता बल्कि यह चार डब्बों का एक सेट है जिसे हम फोर बॉक्स बिजनेस मॉडल कहते हैं। अगर इनमें से एक भी डब्बा ढीला रहा तो आपका बिजनेस उसी तरह क्रैश होगा जैसे किसी संडे मार्केट का सस्ता खिलौना।
इसका सबसे पहला और जरूरी हिस्सा है कस्टमर वैल्यू प्रोपजिशन। आसान भाषा में कहें तो आप दुनिया के किस दुख की दवा बेच रहे हैं। क्या आप कस्टमर का कोई ऐसा काम कर रहे हैं जो वह खुद नहीं कर पा रहा था। मान लीजिए आप एक ऐसी चाय की दुकान खोलते हैं जहाँ चाय के साथ सुट्टा मारना मना है। अब आप सोच रहे हैं कि यह तो बहुत बड़ा रिवोल्यूशन है। लेकिन क्या सच में लोग ऐसी जगह आना चाहेंगे जहाँ उनकी सबसे बड़ी तलब पर ताला लगा हो। अगर आप कस्टमर की असल जरूरत को नहीं समझ रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं बल्कि अपनी ईगो की दुकान चला रहे हैं।
दूसरा डब्बा है प्रॉफिट फार्मूला। यहाँ बहुत से शूरवीर ढेर हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि रेवेन्यू और प्रॉफिट एक ही चीज है। भाई साहब जेब में पैसे आने और जेब में पैसे बचने के बीच में जो खाई है ना उसे ही प्रॉफिट फार्मूला कहते हैं। इसमें आपकी फिक्स्ड कॉस्ट और वेरिएबल कॉस्ट का वह हिसाब होता है जो आपको यह बताता है कि एक समोसा बेचने पर आपको सच में चार आने बच रहे हैं या आप अपनी जेब से पैसे भरकर कस्टमर को पार्टी दे रहे हैं। कई स्टार्टअप्स तो इसी चक्कर में बंद हो जाते हैं क्योंकि उनके पास गजब का आइडिया तो होता है लेकिन उस आइडिया को नोटों में बदलने का कोई ठोस रास्ता नहीं होता।
तीसरा और चौथा डब्बा है की रिसोर्सेज और की प्रोसेस। रिसोर्सेज का मतलब सिर्फ पैसा नहीं है बल्कि आपके पास वो जादूगर लोग और वो टेक्नोलॉजी होनी चाहिए जो आपके वादे को हकीकत में बदल सके। और प्रोसेस का मतलब है कि क्या आप वही क्वालिटी हर बार दे सकते हैं। अगर आपके रेस्टोरेंट का खाना कभी बहुत बढ़िया और कभी बिलकुल कचरा होता है तो आपका प्रोसेस बीमार है।
एक बिजनेस को चलाने के लिए इन चारों डब्बों का तालमेल वैसा ही होना चाहिए जैसा एक शादी में दूल्हे के दोस्तों और फ्री की कोल्ड ड्रिंक का होता है। अगर एक भी चीज मिसिंग हुई तो तमाशा होना तय है। अगर आपके पास गजब का रिसोर्स है लेकिन कस्टमर को उसकी जरूरत ही नहीं तो आप बस सफेद हाथी पाल रहे हैं। इसलिए मार्क जॉनसन कहते हैं कि जब भी आप कुछ नया शुरू करें तो इन चार बॉक्सेस को अच्छी तरह चेक कर लें।
मार्क जॉनसन एक बहुत प्यारा उदाहरण देते हैं। जब टाटा नैनो आई थी तो उन्होंने एक बहुत बड़ी समस्या को हल करने की कोशिश की थी। वे मिडिल क्लास फैमिली को बाइक की जगह कार देना चाहते थे। आइडिया जबरदस्त था। लेकिन उनके प्रॉफिट फार्मूला और की रिसोर्सेज में कुछ ऐसी गड़बड़ हुई कि वह कार एक स्टेटस सिंबल बनने की बजाय गरीबों की मजबूरी बन गई। यही होता है जब आप अपने फोर बॉक्स मॉडल के एक भी हिस्से को हल्के में लेते हैं।
लेसन २ : वाइट स्पेस की पहचान - जहाँ कोई नहीं वहां आप
अगर आप भी वही कर रहे हैं जो आपके पड़ोस वाला शर्मा जी का लड़का कर रहा है तो आप बिजनेस नहीं बल्कि भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं। मार्क जॉनसन हमें वाइट स्पेस के बारे में बताते हैं। यह वो इलाका है जहाँ आपके कॉम्पिटिटर्स जाने से डरते हैं या फिर उन्हें पता ही नहीं है कि वहां भी पैसा छिपा है। ज्यादातर कंपनियां अपने पुराने ढर्रे पर ही चलती रहती हैं और फिर एक दिन अचानक गायब हो जाती हैं। जैसे नोकिया को लगा कि टच स्क्रीन बस एक खिलौना है। नतीजा आज उनके फोन म्यूजियम में भी मुश्किल से मिलते हैं।
वाइट स्पेस को खोजने का मतलब है उन कस्टमर्स को ढूंढना जिन्हें दुनिया ने इग्नोर कर दिया है। इसे जॉनसन नॉन कन्जम्पशन कहते हैं। मतलब वो लोग जो आपका प्रोडक्ट खरीदना तो चाहते हैं लेकिन या तो वो बहुत महंगा है या उसे इस्तेमाल करना रॉकेट साइंस जैसा मुश्किल है। अब जरा सोचिए इंडिया में नेटफ्लिक्स आने से पहले क्या लोग फिल्में नहीं देखते थे। देखते थे लेकिन पायरेटेड सीडी और वेबसाइट्स के धक्के खाते थे। नेटफ्लिक्स ने उस वाइट स्पेस को पकड़ा और आपको सुविधा दी कि आप रजाई में घुसकर एक बटन दबाकर दुनिया भर का कंटेंट देख सकें।
हममें से ज्यादातर लोग वाइट स्पेस ढूंढने के नाम पर बस दूसरों की नकल करते हैं। अगर मार्केट में मोमोज की दुकान चल रही है तो हम उसके बगल में उससे बड़ी मोमोज की दुकान खोल लेते हैं। भाई साहब यह वाइट स्पेस नहीं यह तो सुसाइड स्पेस है। असली वाइट स्पेस तब मिलता है जब आप यह देखते हैं कि मोमोज खाने वाले लोग प्यासे भी तो होते हैं लेकिन कोई उन्हें साफ पानी या कोई हेल्दी ड्रिंक ऑफर नहीं कर रहा।
मार्क जॉनसन कहते हैं कि इनोवेशन का मतलब हमेशा कुछ नया आविष्कार करना नहीं होता। कभी-कभी बस पुराने तरीके को नए तरीके से पेश करना ही काफी है। जैसे ओयो रूम्स ने किया। होटल तो हमेशा से थे लेकिन भरोसा गायब था। उन्होंने उस भरोसे की कमी वाले वाइट स्पेस को भरा। उन्होंने गंदे चादरों और बदबूदार कमरों वाले होटलों को एक स्टैंडर्ड लुक दिया। उन्होंने कोई नया होटल नहीं बनाया बस पुराने होटल्स के काम करने का तरीका बदल दिया।
सच्चाई तो यह है कि वाइट स्पेस आपके ठीक सामने होता है लेकिन आप अपनी पुरानी सफलता के चश्मे से उसे देख नहीं पाते। आपको लगता है कि आपकी कंपनी जो आज कर रही है वही कल भी करेगी। लेकिन याद रखिए जिस दिन आपने अपनी आंखें बंद की उसी दिन कोई नया खिलाड़ी आकर आपके पैर के नीचे से जमीन खिसका ले जाएगा। वाइट स्पेस में घुसने के लिए जिगरा चाहिए क्योंकि वहां रिस्क होता है। वहां कोई मैप नहीं होता। वहां आपको खुद रास्ता बनाना पड़ता है।
अगर आप एक मिडिल क्लास फैमिली के बजट को देखें तो वहां वाइट स्पेस भरा पड़ा है। ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो अमीर लोग आराम से इस्तेमाल करते हैं लेकिन आम आदमी के लिए वो आज भी एक सपना हैं। जो कंपनी उस गैप को कम करेगी वही असली वाइट स्पेस की रानी कहलाएगी। लेकिन अफसोस की बात यह है कि हम आज भी उसी कुएं के मेंढक बने बैठे हैं जहाँ कंपटीशन ज्यादा और प्रॉफिट कम है।
लेसन ३ : रिस्क और रिन्यूअल - पुराने को छोड़ो वरना डूब जाओगे
ज्यादातर बिजनेसमैन अपनी पुरानी सफलता से ऐसे चिपक कर बैठते हैं जैसे कोई छोटा बच्चा अपने टूटे हुए खिलौने से। उन्हें लगता है कि जो तरीका कल काम कर रहा था वो आज भी करेगा और कल भी करेगा। लेकिन मार्क जॉनसन बहुत कड़वा सच बोलते हैं कि अगर आप समय रहते खुद को रिन्यू यानी नया नहीं करेंगे तो मार्केट आपको कचरे के डिब्बे में फेंकने में एक सेकंड भी नहीं लगाएगा। इसे कहते हैं रिस्क और रिन्यूअल का खेल।
जब किसी कंपनी का बिजनेस मॉडल मरने वाला होता है तो उसके मालिक नए इनोवेशन करने के बजाय एडवरटाइजिंग पर और पैसा फूंकने लगते हैं। ये बिलकुल वैसा ही है जैसे किसी आईसीयू में पड़े मरीज को नया चश्मा पहनाकर ये उम्मीद करना कि वो अब मैराथन दौड़ेगा। भाई साहब अगर आपका बेसिक मॉडल ही एक्सपायर हो चुका है तो मार्केटिंग का मेकअप उसे नहीं बचा पाएगा। रिन्यूअल का मतलब है अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर खुद के ही बिजनेस को चैलेंज करना।
अक्सर कंपनियां तब तक बदलाव नहीं करतीं जब तक पानी सिर के ऊपर न चला जाए। लेकिन मार्क जॉनसन कहते हैं कि जब आप टॉप पर हों तभी आपको अपने अगले वाइट स्पेस की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। अमेज़न को देखिए। वो सिर्फ किताबें बेचकर खुश रह सकते थे। लेकिन उन्होंने खुद को रिन्यू किया और एडब्ल्यूएस यानी क्लाउड कंप्यूटिंग में घुस गए जो उनकी पुरानी लाइन से बिलकुल अलग था। उन्होंने रिस्क लिया और आज वो वहां से सबसे ज्यादा प्रॉफिट कमाते हैं। अगर वो सिर्फ किताबों के भरोसे रहते तो शायद आज कोई उन्हें याद भी नहीं करता।
असली रिस्क नए रास्ते पर चलने में नहीं है बल्कि उसी पुराने घिसे पिटे रास्ते पर खड़े रहने में है। दुनिया बदल रही है और कस्टमर की चॉइस तो गिरगिट से भी तेज बदलती है। अगर आप आज भी ये सोच रहे हैं कि आपका पुराना कस्टमर वफादार है तो आप सबसे बड़े भ्रम में जी रहे हैं। कस्टमर सिर्फ वैल्यू का वफादार होता है। जिस दिन उसे आपसे बेहतर और सस्ता विकल्प मिला वो आपको टाटा बाय-बाय कह देगा।
रिन्यूअल की प्रोसेस में दर्द होता है क्योंकि आपको अपनी उन चीजों को छोड़ना पड़ता है जिनसे आपको प्यार है। लेकिन एक समझदार लीडर वही है जो अपनी ईगो को साइड में रखकर मार्केट की नब्ज को पहचाने। याद रखिए डायनासोर भी बहुत ताकतवर थे लेकिन वो खुद को बदल नहीं पाए इसलिए आज वो सिर्फ किताबों और फिल्मों में मिलते हैं। अगर आप अपने बिजनेस को डायनासोर नहीं बनाना चाहते तो वाइट स्पेस में कूदने का रिस्क उठाइए और खुद को हर दिन नया बनाइए।
तो दोस्तों, क्या आप अब भी उसी पुरानी लकीर के फकीर बने रहना चाहते हैं या फिर अपने बिजनेस के लिए वो वाइट स्पेस खोजने को तैयार हैं। याद रखिए मौके सबको मिलते हैं लेकिन जीतता वही है जो सही समय पर सही दांव लगाता है। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपने स्टार्टअप को लेकर सीरियस हैं लेकिन कहीं फंसे हुए हैं। नीचे कमेंट्स में बताएं कि आपके बिजनेस का वो कौन सा वाइट स्पेस है जिसे आप आज तक इग्नोर कर रहे थे। चलिए मिलकर इंडिया को एक बिजनेस हब बनाते हैं।
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