Selling Sucks (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अनजान लोगों को फोन करके भीख मांगते हैं कि भाई प्लीज मेरा प्रोडक्ट देख लो। अगर हां तो बधाई हो आप अपनी इज्जत और वक्त दोनों का कबाड़ा कर रहे हैं। बिना सेल्स टेक्निक समझे आप बस एक चलते फिरते रिजेक्शन मशीन बन चुके हैं।

आज के इस आर्टिकल में हम फ्रैंक रुम्बौस्कस की बुक सेलिंग सक्स से वह तरीके सीखेंगे जिनसे लोग आपके पीछे भागेंगे। हम बिना कोल्ड कॉलिंग के सेल्स मास्टर करने के ३ सबसे बड़े लेसन को बहुत ही गहराई से समझेंगे।


लेसन १ : कोल्ड कॉलिंग की तेरहवीं और सेल्फ रिस्पेक्ट का जन्म

इमेजिन कीजिये कि आप अपने घर में सुकून से बैठकर पनीर टिक्का का आनंद ले रहे हैं और तभी फोन बजता है। दूसरी तरफ से एक अनजान आवाज आती है जो आपको क्रेडिट कार्ड बेचने की कोशिश कर रही है। आपका मन करता है कि फोन के अंदर घुसकर उस बंदे को चप्पल से मारें। अब जरा शीशे में देखिये क्योंकि आप भी वही कर रहे हैं। फ्रैंक रुम्बौस्कस कहते हैं कि कोल्ड कॉलिंग करना अपनी इज्जत का सरेआम कत्ल करने जैसा है। आप एक प्रोफेशनल नहीं बल्कि एक डिजिटल भिखारी की तरह बर्ताव कर रहे हैं। सेल्स की दुनिया में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि ज्यादा लोगों को परेशान करने से ज्यादा सेल्स होती है। हकीकत तो यह है कि जब आप किसी को बिना पूछे कॉल करते हैं तो आप उन्हें यह सिग्नल देते हैं कि आपके पास काम की कमी है और आप बहुत ही खाली इंसान हैं।

सोचिये अगर विराट कोहली आपको फोन करके कहें कि भाई प्लीज मेरी बैटिंग की टिप्स खरीद लो तो क्या आप उन्हें सीरियसली लेंगे। बिल्कुल नहीं। आप सोचेंगे कि भाई का करियर डूब गया है तभी तो फोन कर रहे हैं। ठीक यही हालत आपकी होती है जब आप कोल्ड कॉलिंग करते हैं। लोग आपको एक एक्सपर्ट की तरह नहीं बल्कि एक मुसीबत की तरह देखते हैं। सेल्स में सक्सेस का राज पीछा करने में नहीं बल्कि पीछा करवाने में है। जब आप मार्केट में अपनी ऐसी वैल्यू बनाते हैं कि लोग आपके दरवाजे पर लाइन लगाकर खड़े हों तब असली सेल्स होती है। आज का दौर इंटरनेट का है जहाँ आपकी अथॉरिटी आपकी सबसे बड़ी ताकत है। अगर आप आज भी 1990 वाले तरीके अपना रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि बस अपना और दूसरों का खून जला रहे हैं।

इस लेसन का सबसे बड़ा सच यह है कि प्रोस्पेक्ट को पकड़ने के लिए जाल नहीं बिछाना चाहिए बल्कि ऐसा फूल बनना चाहिए जिस पर भंवरे खुद खिंचे चले आएं। जब आप फोन उठाकर किसी अनजान का नंबर डायल करते हैं तो आप अपनी पावर उसी पल उसे दे देते हैं। वह इंसान आपको काट सकता है आप पर चिल्ला सकता है और आपकी पूरी दिन की एनर्जी खराब कर सकता है। लेकिन अगर वही इंसान आपको गूगल पर ढूंढकर या आपका आर्टिकल पढ़कर आपके पास आता है तो गेम बदल जाता है। अब वह आपसे मदद मांग रहा है और आप उसे सोल्यूशन दे रहे हैं। यहाँ आप सेल्समैन नहीं बल्कि एक डॉक्टर की तरह काम करते हैं जिसकी फीस देने के लिए पेशेंट खुद तैयार रहता है।

याद रखिये कि प्रोस्पेक्ट आपसे नहीं बल्कि आपके सेल्स वाले बिहेवियर से नफरत करता है। उसे लगता है कि आप उसकी जेब काटने आए हैं। जब आप कोल्ड कॉलिंग बंद करते हैं तो आप अपनी सेल्स प्रोसेस से उस डर को निकाल देते हैं। आप एक ऐसे इंसान बनते हैं जिसके पास कुछ कीमती है। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी बात सुनें तो पहले आपको अपनी वैल्यू बढ़ानी होगी। बेकार की कॉलिंग करके अपनी जुबान और फोन का बिल घिसने से बेहतर है कि आप अपनी मार्केटिंग पर ध्यान दें। जो सेल्समैन खुद को बेचना बंद कर देता है लोग उसी से खरीदना शुरू करते हैं। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यही कड़वा सच है जो आपकी सेल्स रिपोर्ट को लाल से हरा कर सकता है।


लेसन २ : सेल्समैन नहीं एक्सपर्ट बनो और अपनी दुकान खुद सजाओ

सेल्स की दुनिया का एक काला सच सुनिए। लोग सेल्समैन को देखकर ऐसे भागते हैं जैसे पड़ोस वाली आंटी को देखकर उधार लेने वाला लड़का भागता है। क्यों। क्योंकि सेल्समैन का मतलब है वह इंसान जो अपनी चिपचिपी बातों से आपकी जेब ढीली करेगा। फ्रैंक रुम्बौस्कस कहते हैं कि अगर आपको इस खेल में जीतना है तो आपको अपनी इमेज बदलनी होगी। आपको वह बंदा बनना होगा जिसकी सलाह के लिए लोग पैसे देने को तैयार हों। सोचिये जब आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं तो क्या वह आपको फोन करके बुलाता है कि भाई साहब आज पेट दर्द का डिस्काउंट चल रहा है आ जाइये। नहीं ना। आप खुद अपॉइंटमेंट लेते हैं और दो घंटे लाइन में लगकर उसे मोटी फीस देते हैं। बस यही फर्क है एक आम सेल्समैन और एक एक्सपर्ट में।

अगर आप गली गली जाकर चिल्लाएंगे कि मेरा साबुन सबसे अच्छा है तो लोग आपको पागल समझेंगे। लेकिन अगर आप एक ऐसी रिपोर्ट या वीडियो रिलीज करते हैं जो लोगों को बताए कि उनकी स्किन खराब क्यों हो रही है तो लोग आपको एक गुरु की तरह देखेंगे। जब आप जानकारी देते हैं तो आप विश्वास जीतते हैं। और आज के जमाने में ट्रस्ट ही असली करंसी है। सेल्स तो बस उस ट्रस्ट का एक छोटा सा बायप्रोडक्ट है। जो लोग दिन भर डेटाबेस से नंबर निकाल कर डायल करते रहते हैं वह असल में एक ऐसे कुएं में पत्थर फेंक रहे हैं जहाँ पानी है ही नहीं। इसके बजाय अगर आप अपनी प्रोफाइल को ऐसा बनाएं कि आपकी एक्सपर्टीज झलके तो प्रोस्पेक्ट खुद आपको ढूंढ लेगा।

यहाँ सारा खेल पोजीशनिंग का है। आप खुद को कैसे पेश करते हैं। क्या आप एक परेशान सेल्स वाले इंसान दिखते हैं जिसे इस महीने का टारगेट पूरा करने की टेंशन है। या आप एक ऐसे सुलझे हुए इंसान दिखते हैं जो सामने वाले की प्रॉब्लम का पक्का इलाज जानता है। भारतीय मार्केट में तो वैसे भी लोग जुगाड़ और भरोसे पर चलते हैं। जब तक आप उन्हें यह अहसास नहीं दिलाएंगे कि आप उनकी मदद कर रहे हैं वह आपसे सुई भी नहीं खरीदेंगे। आपको अपनी मार्केटिंग को इतना तगड़ा बनाना होगा कि वह आपके लिए सेल्स का रास्ता साफ कर दे। विज्ञापन और कंटेंट का इस्तेमाल ऐसे करें कि जब आप प्रोस्पेक्ट से बात करें तो वह आपको पहले से जानता हो।

अपनी फील्ड के हीरो बनिए विलेन नहीं। विलेन वह होता है जो जबरदस्ती अपनी बात थोपता है और हीरो वह जो जरूरत के वक्त काम आता है। जब आप मार्केट में अपनी एक पहचान बना लेते हैं तो रिजेक्शन का डर खत्म हो जाता है। तब आप यह तय करते हैं कि आपको किसके साथ काम करना है और किसके साथ नहीं। यह पावर तब आती है जब आप अपनी स्किल्स पर काम करते हैं ना कि अपनी कॉलिंग लिस्ट पर। सेल्स में सबसे बड़ी जीत तब होती है जब कस्टमर आपको पैसे देते वक्त थैंक यू बोले। और यह तभी मुमकिन है जब आप उसे कुछ बेच नहीं रहे होते बल्कि उसकी लाइफ की कोई बड़ी मुश्किल आसान कर रहे होते हैं।


लेसन ३ : रिजेक्शन का डर छोड़ो और मैग्नेटिक मार्केटिंग का जादू चलाओ

सेल्स की फील्ड में आधे से ज्यादा लोग तो इसलिए डिप्रेशन में चले जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि दुनिया उनके खिलाफ साजिश कर रही है। हर दूसरा इंसान फोन पर मना कर देता है या दरवाजे से ही भगा देता है। फ्रैंक रुम्बौस्कस कहते हैं कि भाई जब तुम मछली पकड़ने के लिए पहाड़ पर जाओगे तो रिजेक्शन ही मिलेगा ना। असली गलती तुम्हारी है कि तुम गलत जगह पर गलत लोगों को अपना टाइम दे रहे हो। लेसन 3 हमें सिखाता है कि सेल्स कोई किस्मत का खेल नहीं है बल्कि एक प्योर साइंस है जिसे मैग्नेटिक मार्केटिंग कहते हैं। इसका मतलब है ऐसी स्ट्रेटेजी बनाना जिससे सही कस्टमर चुंबक की तरह आपकी तरफ खिंचा आए। आपको हर किसी को खुश करने की जरूरत नहीं है आपको बस उन लोगों को ढूंढना है जिन्हें आपकी सख्त जरूरत है।

इमेजिन कीजिये कि आप तपती धूप में रेगिस्तान के बीच खड़े होकर बर्फीला पानी बेच रहे हैं। क्या आपको वहां सेल्स करने के लिए किसी चिकनी चुपड़ी बातों की जरूरत पड़ेगी। बिल्कुल नहीं। प्यासा इंसान आपसे पानी छीन लेगा। बस यही है मैग्नेटिक मार्केटिंग का असली सीक्रेट। आपको उन प्यासे लोगों को ढूंढना है जिन्हें आपका प्रोडक्ट या सर्विस चाहिए। जब आप सही ऑडियंस को टारगेट करते हैं तो सेल्स एक बोझ नहीं बल्कि एक बहुत ही नेचुरल प्रोसेस बन जाती है। हम अक्सर अपना 80 परसेंट वक्त उन 20 परसेंट लोगों पर बर्बाद करते हैं जो कभी हमसे कुछ नहीं खरीदेंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी पत्थर को दीवार में गाड़ने की कोशिश करना। इसके बजाय अपनी एनर्जी वहां लगाइये जहाँ जमीन पहले से ही उपजाऊ हो।

भारतीय मार्केट में लोग भावनाओं और पर्सनल कनेक्शन से बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगर आप अपने प्रोस्पेक्ट को यह दिखा सकें कि आप उनके दर्द को समझते हैं और आपके पास उसका रामबाण इलाज है तो वह कीमत की चिंता नहीं करेंगे। यहाँ आपको एक साइकोलॉजिस्ट की तरह सोचना होगा। लोग वह नहीं खरीदते जो आप बेच रहे हैं बल्कि वह वह खरीदते हैं जो उन्हें महसूस कराता है। अगर आप उन्हें सिक्योरिटी या खुशी या पैसा कमा कर दे रहे हैं तो आप एक विनर हैं। जब आपकी मार्केटिंग इतनी पावरफुल होती है कि वह आपके प्रोस्पेक्ट की रातों की नींद और दिन का सुकून छीन ले तो वह खुद चलकर आपके पास आएगा। तब आपको सेलिंग करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी क्योंकि प्रोस्पेक्ट पहले से ही खरीदने का मन बना चुका होगा।

दुनिया के सबसे सफल लोग कभी सेल्समैन की तरह व्यवहार नहीं करते। वे खुद को एक ऐसे सोर्स की तरह पेश करते हैं जो लोगों की लाइफ में वैल्यू ऐड करता है। अगर आप आज भी पुराने घिसे पिटे तरीकों से सेल्स करने की कोशिश कर रहे हैं तो आप बस अपनी उम्र काट रहे हैं। असली खिलाड़ी वह है जो मार्केट के शोर में अपनी एक ऐसी खामोश पहचान बनाता है कि उसकी कामयाबी शोर मचाने लगे। सेलिंग करना बंद कीजिये और लोगों की मदद करना शुरू कीजिये। जब आप किसी की प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं तो रिवॉर्ड के रूप में पैसा अपने आप आपके पास आता है। यही सेलिंग सक्स बुक का असली निचोड़ है जिसे अपनाकर आप अपने करियर की रॉकेट की तरह उड़ान भर सकते हैं।

अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप वही पुराने रिजेक्टेड सेल्समैन बने रहना चाहते हैं या फिर एक ऐसा एक्सपर्ट जिसकी एक झलक पाने के लिए लोग तरसें। अपनी एप्रोच बदलिए अपनी किस्मत अपने आप बदल जाएगी। आज ही अपनी पुरानी कॉलिंग लिस्ट को कूड़ेदान में डालिए और अपनी अथॉरिटी बिल्ड करने पर काम शुरू कीजिये। क्योंकि असली सक्सेस वही है जहाँ आपको ग्राहक नहीं ढूंढना पड़े बल्कि ग्राहक आपको ढूंढते हुए आए।

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