क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो खुद को बहुत बड़ा तोप समझते हैं क्योंकि आप दिन के १८ घंटे बिजी रहते हैं? मुबारक हो, आप असल में अपनी लाइफ का कचरा कर रहे हैं और आपको पता भी नहीं है। जब तक आप चूहे की तरह इस रेस में भागते रहेंगे, आपकी तरक्की सिर्फ सपनों में ही होगी।
आज के इस आर्टिकल में हम टॉम डीमार्को की किताब स्लैप की मदद से समझेंगे कि कैसे आपका यह बिजी रहने का नाटक आपको कामयाबी से दूर ले जा रहा है। चलिए जानते हैं वो ३ लेसन जो आपकी सोच बदल देंगे।
Lesson : १०० परसेंट एफिशिएंसी असल में फेलियर की निशानी है
आजकल के दौर में हम सब एक अजीब से नशे में हैं। यह नशा है बिजी दिखने का। अगर ऑफिस में कोई आपसे पूछे कि भाई क्या हाल है और आप कह दें कि बस थोड़ा फ्री बैठा हूँ तो लोग आपको ऐसे देखते हैं जैसे आपने कोई बहुत बड़ा क्राइम कर दिया हो। टॉम डीमार्को कहते हैं कि यहीं हम सबसे बड़ी गलती करते हैं। असल में यह जो टोटल एफिशिएंसी का भूत हमारे सिर पर सवार है यह हमें प्रोग्रेस की तरफ नहीं बल्कि बर्बादी की तरफ ले जा रहा है।
मान लीजिए आप मुंबई या दिल्ली के भारी ट्रैफिक में फंसे हैं। सड़क पर गाड़ियां एकदम बंपर से बंपर सटकर खड़ी हैं। कोई जगह खाली नहीं है। अब एक एम्बुलेंस आती है जिसे रास्ता चाहिए। क्या कोई उसे रास्ता दे पाएगा? बिल्कुल नहीं। क्यों? क्योंकि रोड की एफिशिएंसी १०० परसेंट है। हर इंच पर कोई न कोई गाड़ी खड़ी है। यही हाल हमारे दिमाग और हमारे काम का है। जब आप अपने दिन का हर मिनट मीटिंग्स, ईमेल्स और फालतू के कामों से भर देते हैं तो आपके पास नया सोचने या अचानक आई किसी बड़ी मुश्किल को सुलझाने के लिए कोई जगह ही नहीं बचती।
हम इंडियंस को लगता है कि जितना ज्यादा पसीना बहेगा उतनी ज्यादा तरक्की होगी। लेकिन सच तो यह है कि बिना दिमाग चलाए बहाया गया पसीना सिर्फ बदबू देता है सक्सेस नहीं। आप खुद को एक मशीन समझने लगते हैं। मशीन को तो आप १०० परसेंट कैपेसिटी पर चला सकते हैं क्योंकि उसे सोचना नहीं पड़ता। लेकिन आप एक इंसान हैं। आपका काम क्रिएटिविटी और प्रॉब्लम सॉल्विंग का है।
अगर आप हर वक्त बिजी हैं तो आप सिर्फ करंट काम को निपटा रहे हैं। आप फ्यूचर के लिए तैयार नहीं हो रहे। जरा सोचिए अगर आपके बॉस ने अचानक आपको एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट का आईडिया दिया लेकिन आपके पास तो सांस लेने की फुर्सत नहीं है। क्या होगा? आप उस मौके को गँवा देंगे। इसी को लेखक कहते हैं स्लैक की कमी। स्लैक यानी वो खाली जगह जो आपको फ्लेक्सिबिलिटी देती है। बिना स्लैक के आप उस कार की तरह हैं जिसका इंजन तो बहुत तेज घूम रहा है लेकिन टायर कीचड़ में फंसे हैं।
कंपनियाँ ऐसे एम्प्लॉई को प्रमोट करती हैं जो रात के २ बजे भी रिप्लाई दे रहा हो। लेकिन असल में वो एम्प्लॉई कंपनी के लिए सबसे बड़ा रिस्क है। क्यों? क्योंकि वो बर्नआउट के कगार पर है। उसका दिमाग थक चुका है और थका हुआ दिमाग कभी भी जीनियस आईडिया नहीं दे सकता। वो बस एक रोबोट बन चुका है जो बिना सोचे समझे बटन दबा रहा है। तो अगली बार जब आप खुद को बहुत बिजी पाएं तो गर्व महसूस करने के बजाय थोड़ा डरिए क्योंकि आप उस रोड की तरह हैं जहाँ ट्रैफिक जाम लगा है और कोई भी एम्बुलेंस यानी कोई भी बड़ा अवसर वहां से गुजर नहीं पाएगा।
Lesson : स्लैक आलस नहीं बल्कि रिस्क मैनेजमेंट का गुप्त हथियार है
अब आप सोच रहे होंगे कि अगर मैं बिजी नहीं रहूँगा तो क्या लोग मुझे निकम्मा नहीं समझेंगे? हमारे समाज में खाली बैठने को पाप समझा जाता है। अगर आप हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं तो घर वाले कहेंगे कि जाओ सब्जी ले आओ और ऑफिस वाले कहेंगे कि ये फालतू फाइल भी चेक कर लो। लेकिन टॉम डीमार्को कहते हैं कि स्लैक यानी वो खाली वक्त असल में आपके दिमाग का सेफ्टी वाल्व है। यह आलस नहीं है बल्कि यह वो समय है जब आप असल में बड़े बदलावों के लिए खुद को तैयार करते हैं।
आपने कभी सर्कस में जुगलर को देखा है? वो हवा में पांच गेंदें उछाल रहा होता है। अगर आप उसे छठी गेंद थमा दें तो क्या होगा? शायद वो उसे भी पकड़ ले। लेकिन अगर आप सातवीं आठवीं और नौवीं गेंद भी फेंक दें तो क्या होगा? सारी की सारी गेंदें जमीन पर गिर जाएंगी। वो जुगलर जो अब तक एक्सपर्ट लग रहा था अब एक जोकर की तरह दिखेगा। यही हमारे साथ होता है। जब हम अपनी लाइफ में थोड़ा सा भी खाली वक्त यानी स्लैक नहीं रखते तो एक छोटा सा बदलाव भी हमें जमीन पर गिरा देता है।
मान लीजिए आपके ऑफिस में सब कुछ परफेक्ट चल रहा है। तभी अचानक मार्केट बदल जाता है या कोई नई टेक्नोलॉजी आ जाती है। अब अगर आप और आपकी टीम पहले से ही १०० परसेंट बिजी हैं तो आप उस बदलाव को कैसे अपनाएंगे? आप तो पुरानी फाइलों में ही दबे हुए हैं। स्लैक वो एक्स्ट्रा टाइम है जो आपको नई चीजें सीखने और एक्सपेरिमेंट करने की आजादी देता है। बिना स्लैक के कोई भी आर्गेनाईजेशन या इंसान कभी इवॉल्व नहीं हो सकता। वो बस वही पुराना घिसा पिटा काम करता रहता है जो वो पिछले दस सालों से कर रहा है।
हम उस इंसान को बहुत काबिल मानते हैं जो एक साथ दस काम कर रहा हो। लेकिन हकीकत में वो इंसान सिर्फ आग बुझा रहा है। उसके पास ये सोचने का वक्त ही नहीं है कि आग लग क्यों रही है। स्लैक आपको वो मौका देता है कि आप रुकें और सोचें। क्या मैं सही दिशा में जा रहा हूँ? क्या यह काम वाकई जरूरी है? जब आप थोड़ा फ्री होते हैं तभी आपके दिमाग में वो युरेका मोमेंट आता है जो आपकी पूरी लाइफ बदल सकता है।
सीधी सी बात है कि अगर आपकी जिंदगी में थोड़ा खालीपन नहीं है तो आप एक ऐसी मशीन हैं जिसे कभी सर्विसिंग के लिए नहीं रोका गया। और हम सबको पता है कि ऐसी मशीनों का अंत क्या होता है। वो बीच रास्ते में धुआं छोड़ देती हैं। इसलिए स्लैक को अपना दुश्मन मत समझिए। इसे अपना सबसे बड़ा दोस्त बनाइये क्योंकि यही वो स्पेस है जहाँ से ग्रोथ पैदा होती है।
Lesson : बिजी वर्क का मायाजाल और असली प्रोडक्टिविटी की पहचान
क्या आपने कभी किसी ऐसे इंसान को देखा है जो सारा दिन कंप्यूटर पर कीबोर्ड तोड़ रहा होता है, पसीने से तर-बतर रहता है, लेकिन हफ्ते के अंत में जब पूछो कि भाई काम क्या हुआ, तो जवाब मिलता है कि बस बहुत काम था। इसे ही टॉम डीमार्को बिजी वर्क कहते हैं। यह वो काम है जो आपको थकाता तो बहुत है, लेकिन उसका रिजल्ट जीरो होता है। हम अक्सर मेहनत को कामयाबी समझ लेते हैं, जबकि असली खेल तो इम्पैक्ट का है।
मान लीजिए आप एक गड्ढा खोद रहे हैं और फिर उसे वापस भर रहे हैं। आप बहुत मेहनत कर रहे हैं, आप बहुत बिजी हैं, लेकिन क्या आप कोई वैल्यू क्रिएट कर रहे हैं? बिल्कुल नहीं। ऑफिस लाइफ में भी यही होता है। वो लंबी मीटिंग्स जिनका कोई अंत नहीं, वो बेमतलब की ईमेल्स जिनका कोई मकसद नहीं, और वो रिपोर्ट्स जिन्हें कोई नहीं पढ़ता—यह सब बिजी वर्क है। यह आपको एक झूठा सुकून देता है कि चलो आज मैंने बहुत काम किया, जबकि हकीकत में आपने अपनी कंपनी या अपनी लाइफ को एक इंच भी आगे नहीं बढ़ाया।
हमारा कॉर्पोरेट कल्चर ऐसे लोगों को रिवॉर्ड देता है जो डेस्क पर सबसे ज्यादा देर तक बैठते हैं। अगर आप अपना काम २ घंटे में खत्म करके सुकून से कॉफी पी रहे हैं, तो लोग समझेंगे कि आप कामचोर हैं। लेकिन वहीँ अगर आप फालतू के कामों में उलझे हुए रात के १० बजा देते हैं, तो आपको 'हार्ड वर्किंग' का टैग मिल जाता है। यह पागलपन नहीं तो और क्या है? असली प्रोडक्टिविटी का मतलब है कम से कम फालतू काम करना ताकि आप उस काम पर फोकस कर सकें जो वाकई मायने रखता है।
जब आप स्लैक यानी खाली वक्त को अपनी लाइफ में जगह देते हैं, तब आपको समझ आता है कि कौन सा काम असली है और कौन सा सिर्फ शोर। आप उस चूहे की तरह नहीं रहते जो पहिये पर दौड़ रहा है और कहीं पहुँच नहीं रहा। आप रुकते हैं, देखते हैं और फिर सही दिशा में कदम बढ़ाते हैं। टॉम डीमार्को हमें याद दिलाते हैं कि अगर आप अपनी लाइफ से इस बिजी वर्क के कचरे को हटा दें, तो आप देखेंगे कि आपके पास असली और बड़े काम करने के लिए कितना सारा वक्त बच गया है।
तो दोस्तों, आज से ही इस बिजी रहने के दिखावे को छोड़िए। अपनी लाइफ में थोड़ा स्लैक लाइए, थोड़ा खाली वक्त बचाइए। याद रखिए कि एक खाली दिमाग शैतान का घर नहीं, बल्कि नए आईडिया का जन्मस्थान होता है। अगर आप खुद को बर्नआउट से बचाना चाहते हैं और अपनी फील्ड में टॉप पर पहुँचना चाहते हैं, तो एफिशिएंसी के इस झूठे मिथक को तोड़ना होगा।
अब आप कमेंट्स में बताइए कि क्या आप भी बिजी रहने का नाटक करते हैं या वाकई कुछ बड़ा कर रहे हैं? इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा कहता है कि भाई बहुत बिजी हूँ। चलिए, इस बिजी वर्क की चेन को साथ मिलकर तोड़ते हैं।
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