क्या आप भी अपनी घिसी पिटी बिजनेस स्ट्रेटेजी के साथ मार्केट में राज करने का सपना देख रहे हैं। बहुत बढ़िया। आपकी इसी सुस्ती का फायदा उठाकर आपके कॉम्पिटिटर आपको कचरे के डिब्बे में फेंकने की तैयारी कर चुके हैं। बिना माइकल हैमर का यह एजेंडा समझे आप बस अपनी बर्बादी का इंतजार कर रहे हैं।
चिंता मत कीजिये, हम यहाँ आपको डराने नहीं बल्कि जगाने आए हैं। आज हम दि एजेंडा बुक से वो ३ लेसन समझेंगे जो आपके डूबते हुए बिजनेस को रॉकेट बना देंगे।
Lesson : कस्टमर के लिए आसान बनो (Becoming Easy to Do Business With)
अगर आपको लगता है कि आपका प्रोडक्ट दुनिया में सबसे बेस्ट है और लोग लाइनों में लगकर उसे खरीदेंगे, तो शायद आप अभी भी नब्बे के दशक में जी रहे हैं। आज का कस्टमर राजा नहीं, बल्कि एक बहुत ही चिड़चिड़ा और आलसी इंसान है। माइकल हैमर कहते हैं कि अगर आपने अपने कस्टमर का काम आसान नहीं किया, तो वह आपके पास दोबारा कभी नहीं आएगा। सोचिये, आप एक ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर जाते हैं और पेमेंट करने के लिए आपको दस अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ें। क्या आप रुकेंगे। बिल्कुल नहीं। आप तुरंत उस टैब को बंद करेंगे और किसी ऐसी जगह जाएंगे जहाँ एक क्लिक में काम हो जाए।
इंडिया में हमारा सबसे बड़ा मसला यही है। हम बिजनेस तो खोल लेते हैं, लेकिन कस्टमर को भगवान मानने के बजाय उसे एक मुसीबत समझते हैं। मान लीजिये आपका एक बड़ा शोरूम है और कस्टमर आपसे कुछ पूछने आता है। आपका सेल्समैन उसे ऐसे देखता है जैसे उसने उसकी जायदाद मांग ली हो। "सर, उधर काउंटर नंबर चार पर जाइये।" काउंटर नंबर चार वाला बोलता है, "साहब अभी लंच पर हैं, पांच बजे आना।" भाई साहब, आप बिजनेस कर रहे हैं या सरकारी दफ्तर चला रहे हैं। यह एटीट्यूड आपको ले डूबेगा। माइकल हैमर का सीधा फंडा है, अपने इंटरनल झमेलों को कस्टमर की सरदर्दी मत बनाइये। उसे फर्क नहीं पड़ता कि आपका सर्वर डाउन है या आपका मैनेजर छुट्टी पर है। उसे बस अपना काम फटाफट खत्म करना है।
इसको एक मजेदार उदाहरण से समझते हैं। शर्मा जी ने एक नई इंटरनेट सर्विस शुरू की। उन्होंने बड़े-बड़े बैनर लगाए, डिस्काउंट दिया। लेकिन जब कस्टमर का नेट बंद हुआ और उसने फोन किया, तो उसे म्यूजिक सुनाया गया। "आपकी कॉल हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।" भाई, अगर महत्वपूर्ण होती तो उठा लेते। बीस मिनट बाद जब किसी ने फोन उठाया, तो बोला गया कि आपको अपनी कंप्लेंट ईमेल करनी होगी। ईमेल करने के बाद जवाब आया कि फिजिकल लेटर लिखकर भेजिए। शर्मा जी को लगा कि वह बहुत प्रोफेशनल काम कर रहे हैं। असलियत में वह अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे थे। अगले महीने उनके पास एक भी कस्टमर नहीं बचा। क्यों। क्योंकि उनके साथ बिजनेस करना एक सजा बन गया था।
आज के दौर में जीत उसी की होती है जो फ्रिक्शन खत्म करता है। अगर कस्टमर को आपसे बात करने के लिए अपनी कुंडली निकालनी पड़ रही है, तो समझिये आपका बिजनेस आईसीयू में है। आपको अपनी प्रोसेस ऐसी बनानी होगी कि एक छोटा बच्चा भी उसे बिना किसी की मदद के समझ सके। इसे ईजी टू डू बिजनेस विद कहते हैं। अपनी अकड़ को साइड में रखिये और यह देखिये कि कस्टमर को आपके पास आने में कितनी मेहनत लग रही है। जितनी कम मेहनत, उतना ज्यादा पैसा। अगर आप अभी भी वही पुराने घिसे-पिटे तरीके अपना रहे हैं, तो तैयार रहिये क्योंकि आपका कॉम्पिटिटर आपसे कहीं ज्यादा स्मार्ट और यूजर फ्रेंडली हो रहा है।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे आपकी कंपनी के अंदर की लड़ाइयां आपके कस्टमर का एक्सपीरियंस खराब कर रही हैं।
Lesson : इंटरनल बाउंड्रीज को खत्म करना (Breaking Internal Silos)
क्या आपने कभी किसी ऐसे ऑफिस में काम किया है जहाँ सेल्स टीम मार्केटिंग वालों को अपना दुश्मन समझती है और आईटी वाले खुद को किसी दूसरी दुनिया का प्राणी मानते हैं। माइकल हैमर कहते हैं कि ज्यादातर कंपनियां अंदर से एक जंग का मैदान बनी हुई हैं। यहाँ हर डिपार्टमेंट अपनी एक अलग रियासत बनाकर बैठा है। सेल्स वाले कहते हैं कि हमने तो आर्डर ला दिया, अब डिलीवरी वाले जानें। डिलीवरी वाले कहते हैं कि स्टॉक नहीं है, तो हम क्या करें। और इस पूरे ड्रामे में पिस्ता कौन है। वही बेचारा कस्टमर, जिसने गलती से आपको पैसे दे दिए।
इंडिया में तो यह समस्या और भी मजेदार है। यहाँ 'मेरा काम' और 'तेरा काम' का जो खेल चलता है, वह किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है। मान लीजिये आपने एक कार खरीदी। कार में कोई दिक्कत आई और आप सर्विस सेंटर गए। वहां मेकेनिक कहता है कि इंजन का काम मैं देखूँगा, लेकिन वायरिंग के लिए आपको बिजली विभाग वाले लड़के का इंतजार करना होगा। बिजली वाला लड़का गायब है। अब आप वहां खड़े होकर अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। कंपनी के अंदर इन दीवारों को 'सायलोस' कहते हैं। जब तक ये दीवारें नहीं टूटेंगी, आपकी सर्विस में वो रफ्तार नहीं आएगी जो आज के जमाने की मांग है।
एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी थी। वहां जब भी कोई नया क्लाइंट आता, सेल्स टीम उसे चांद-तारे तोड़कर लाने के वादे कर देती। "सर, हमारा सॉफ्टवेयर आपकी चाय भी बना देगा।" क्लाइंट खुश होकर पैसे दे देता। लेकिन जब काम शुरू होता, तो डेवलपर कहते कि भाई हमें तो चाय बनाना आता ही नहीं, हमें तो सिर्फ कोडिंग आती है। फिर सेल्स और डेवलपर के बीच जो तू-तू मैं-मैं शुरू होती, उसमें क्लाइंट का प्रोजेक्ट लटक जाता। आखिर में क्लाइंट भाग जाता और दोनों टीमें एक-दूसरे को दोष देती रहतीं। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि दोनों को लगता था कि उनका काम सिर्फ अपना टारगेट पूरा करना है, न कि क्लाइंट को वैल्यू देना।
माइकल हैमर का लेसन बहुत सिंपल है। कस्टमर को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि आपकी कंपनी में कितने डिपार्टमेंट हैं। उसे सिर्फ अपना फाइनल रिजल्ट चाहिए। अगर आप एक टीम की तरह कोलैबोरेट नहीं कर सकते, तो आप बिजनेस करने के लायक नहीं हैं। आपको अपने एम्प्लॉइज को यह समझाना होगा कि वे किसी एक डिपार्टमेंट के नौकर नहीं हैं, बल्कि वे एक पूरी प्रोसेस का हिस्सा हैं जिसका मकसद कस्टमर की लाइफ बेहतर बनाना है। बाउंड्रीज तोड़िये, कम्युनिकेशन के रास्ते खोलिये और ईगो को ऑफिस के बाहर छोड़िये। जब पूरी कंपनी एक सुर में गाएगी, तभी मार्केट में आपकी धाक जमेगी।
अगले लेसन में हम बात करेंगे उस इंजन की जो इस पूरी गाड़ी को चलाता है, यानी आपकी बिजनेस प्रोसेस।
Lesson : प्रोसेस पर फोकस (Focusing on Processes)
अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ अच्छे लोग हायर करने से या मोटिवेशनल स्पीच देने से आपका बिजनेस चमक जाएगा, तो भाई आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। माइकल हैमर का मानना है कि असली जादू 'प्रोसेस' में छिपा होता है। प्रोसेस मतलब वो रास्ता जिस पर चलकर आपका काम शुरू से अंत तक पहुँचता है। अक्सर लोग रिजल्ट्स के पीछे भागते हैं, लेकिन उस रास्ते को ठीक करना भूल जाते हैं जो उन रिजल्ट्स तक ले जाता है। अगर आपकी गाड़ी का इंजन ही खराब है, तो आप चाहे कितना भी बेहतरीन ड्राइवर बिठा दें, गाड़ी रेस नहीं जीतेगी।
हमारे यहाँ अक्सर क्या होता है। जब भी बिजनेस में कोई गलती होती है, तो हम तुरंत किसी इंसान को पकड़ने दौड़ते हैं। "अरे, यह गलती किसने की।" हम उस बेचारे को डांटते हैं, शायद उसे नौकरी से निकाल भी देते हैं। लेकिन हम यह नहीं देखते कि शायद गलती उस इंसान की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की थी जिसने उसे वह गलती करने का मौका दिया। इसे ऐसे समझिये कि आपने अपनी दुकान के बाहर एक बड़ा गड्ढा खोद रखा है। अब चाहे आप वहां कितना भी होशियार गार्ड खड़ा कर दें, कोई न कोई ग्राहक तो उसमें गिरेगा ही। समझदारी गड्ढा भरने में है, गार्ड को बदलने में नहीं।
एक मजेदार उदाहरण लेते हैं। वर्मा जी की एक मिठाई की दुकान थी। उनकी दुकान के समोसे बहुत मशहूर थे, लेकिन अक्सर कस्टमर को आधे घंटे तक इन्तजार करना पड़ता था। वर्मा जी ने सोचा कि शायद हलवाई सुस्त है। उन्होंने नया हलवाई रखा, उसे ज्यादा पैसे दिए, लेकिन इन्तजार का समय फिर भी कम नहीं हुआ। असल समस्या यह थी कि समोसे तलने की कढ़ाई बहुत छोटी थी और चटनी दूसरे कमरे में बनती थी। हलवाई आधा समय तो यहाँ से वहां भागने में बिता देता था। इसे कहते हैं खराब प्रोसेस। जब वर्मा जी ने किचन का सेटअप बदला और चटनी को समोसे के पास रखा, तो वही पुराना हलवाई भी फटाफट काम करने लगा।
माइकल हैमर कहते हैं कि आपको अपने बिजनेस की हर छोटी-बड़ी प्रोसेस को फिर से डिजाइन करना होगा। पुरानी घिसी-पिटी लकीरों पर चलना छोड़िये। क्या आपकी कोई प्रोसेस ऐसी है जो बिना वजह समय बर्बाद कर रही है। क्या कोई ऐसा कदम है जो कस्टमर को कोई वैल्यू नहीं दे रहा। अगर हाँ, तो उसे तुरंत हटा दीजिये। याद रखिये, आज का कंपटीशन बहुत बेरहम है। अगर आप प्रोसेस को रिफाइन नहीं करेंगे, तो आपका पूरा समय आग बुझाने में ही निकल जाएगा और आप कभी बड़े विजन पर काम नहीं कर पाएंगे। अपनी प्रोसेस को स्मार्ट बनाइये, ऑटोमेट कीजिये और उसे इतना स्मूथ रखिये कि काम मक्खन की तरह हो।
तो दोस्तों, माइकल हैमर का यह 'एजेंडा' साफ है। मार्केट में राज करना है तो कस्टमर के लिए आसान बनिए, अपने अंदर की दीवारों को गिराइए और अपनी प्रोसेस को लोहे जैसा मजबूत बनाइए। बिजनेस कोई तुक्का नहीं है, यह एक सोची-समझी स्ट्रेटजी का खेल है। अब आपकी बारी है। क्या आप अभी भी वही पुराने ढर्रे पर चलेंगे या आज ही अपने बिजनेस में ये बड़े बदलाव लाएंगे। नीचे कमेंट्स में हमें बताइये कि इन ३ लेसन में से आपको सबसे ज्यादा जरूरी कौन सा लगा और आप इसे अपने काम में कैसे लागू करेंगे। उठिये, बदलिए और डोमिनेट कीजिये।
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