क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस की लिफ्ट में बॉस को देखकर ऐसे जम जाते हैं जैसे फ्रीजर में रखी मटर। आप सोचते रह जाते हैं और वो करोड़ों की डील किसी और को थमा कर निकल जाते हैं। मुबारक हो आप अपनी खामोशी से अपना करियर खुद दफन कर रहे हैं।
आज हम टेरी स्योडिन की बुक स्मॉल मैसेज बिग इम्पैक्ट से वो राज सीखेंगे जो आपकी एलीवेटर स्पीच को एक पावरफुल वेपन बना देंगे। चलिए इन ३ बेहतरीन लेसन के जरिए आपकी बात करने के तरीके को पूरी तरह बदलते हैं।
लेसन १ : एलीवेटर स्पीच सिर्फ सेल्स के लिए नहीं है
अक्सर लोग सोचते हैं कि एलीवेटर स्पीच का मतलब है किसी अनचाहे इंसान को जबरदस्ती अपना सामान बेचना। लेकिन सच तो यह है कि लाइफ एक बहुत बड़ा सेल्स पिच है और आप खुद ही सबसे बड़े प्रोडक्ट हैं। मान लीजिए आप एक पार्टी में खड़े हैं और कोई आपसे पूछता है कि भाई आप करते क्या हैं। अब अगर आपका जवाब यह है कि मैं बस एक ऑफिस में काम करता हूँ तो समझ लीजिए आपने अपनी वैल्यू वहीं जीरो कर दी। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप किसी को अपनी शादी का कार्ड दें और वो उसे समोसे रखने के लिए इस्तेमाल कर ले। आपकी एलीवेटर स्पीच आपकी पहचान है और अगर यह ढीली है तो लोग आपको भूलने में उतनी ही देर लगाएंगे जितनी देर में वो यूट्यूब एड स्किप करते हैं।
टेरी स्योडिन हमें समझाती हैं कि एक छोटा सा मैसेज आपकी जिंदगी बदल सकता है बशर्ते आपको पता हो कि बोलना क्या है। लोग अक्सर अपनी पूरी राम कथा सुनाने बैठ जाते हैं और सामने वाला मन ही मन यह सोच रहा होता है कि कब यह चुप होगा और कब मैं भागूँगा। असल में आपको अपनी बात में वो मसाला डालना है जो सामने वाले की जिज्ञासा को जगा दे। अगर आप एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और आप कहते हैं कि मैं कोड लिखता हूँ तो कोई इम्प्रेस नहीं होगा। लेकिन अगर आप कहें कि मैं लोगों का कीमती समय बचाने के लिए डिजिटल टूल बनाता हूँ तो शायद वो अपनी ड्रिंक छोड़कर आपकी बात सुनने लगे।
यहाँ सबसे बड़ा डर यह होता है कि कहीं हम बहुत ज्यादा दिखावा तो नहीं कर रहे। लेकिन भाई अगर आप अपनी ढोल खुद नहीं बजाएंगे तो पड़ोसी तो वैसे भी आपकी बैंड बजाने के लिए तैयार बैठा है। याद रखिए जब आप कम शब्दों में अपनी बात की वैल्यू समझा देते हैं तो आप सामने वाले का वक्त बर्बाद नहीं करते बल्कि उसे एक अवसर देते हैं। यह वैसा ही है जैसे किसी मूवी का ट्रेलर देखना। अगर ट्रेलर में ही पूरी कहानी बता दी या फिर वो एकदम बोरिंग हुआ तो कौन टिकट खरीदेगा। आपकी एलीवेटर स्पीच वो ट्रेलर है जो लोगों को आपकी पूरी फिल्म यानी आपके काम को देखने के लिए मजबूर कर दे।
जब आप इस हुनर को सीख जाते हैं तो आप सिर्फ एक प्रोफेशनल नहीं रह जाते बल्कि एक ब्रांड बन जाते हैं। आपको बस यह ध्यान रखना है कि आपकी बात में वजन हो और वो सामने वाले की किसी समस्या का समाधान पेश करे। अब अगली बार जब कोई आपसे पूछे कि आप क्या करते हैं तो पुरानी घिसी पिटी लाइनों को कचरे के डिब्बे में डालिए और कुछ ऐसा कहिए जो उनके दिमाग में चिपक जाए। वरना तो दुनिया में भीड़ बहुत है और बिना अपनी पहचान बनाए आप बस उस भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे जो सिर्फ दूसरों की सफलता पर तालियां बजाते हैं।
लेसन २ : एंटरटेन, एजुकेट और इंस्पायर का बैलेंस
ज्यादातर लोग जब अपनी बात कहना शुरू करते हैं तो वो सामने वाले को इतना ज्ञान देने लगते हैं कि सुनने वाले को लगने लगता है कि वो किसी बोरिंग हिस्ट्री क्लास में बैठा है। टेरी स्योडिन कहती हैं कि आपकी एलीवेटर स्पीच में एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और इंस्पिरेशन का सही मिश्रण होना चाहिए। अगर आप सिर्फ ज्ञान देंगे तो लोग सो जाएंगे और अगर सिर्फ मजाक करेंगे तो कोई आपको सीरियसली नहीं लेगा। यह बिल्कुल घर की दाल की तरह है जिसमें नमक, मिर्च और हल्दी का बैलेंस जरूरी है। अगर नमक ज्यादा हुआ तो बात बिगड़ जाएगी और अगर तड़का नहीं लगा तो कोई उसे चखेगा भी नहीं।
मान लीजिए आप एक नए ऐप के बारे में बता रहे हैं। अगर आप सिर्फ उसकी कोडिंग और फीचर्स की बातें करेंगे तो सामने वाला अपनी घड़ी देखने लगेगा। लेकिन अगर आप उसे एक छोटी सी कहानी सुनाएं कि कैसे इस ऐप ने एक आम आदमी की मुश्किल आसान कर दी तो उसकी आंखों में चमक आ जाएगी। लोग डेटा या फैक्ट्स को याद नहीं रखते लेकिन वो कहानियों को कभी नहीं भूलते। आपकी स्पीच में थोड़ा सा मनोरंजन का तड़का होना चाहिए ताकि सामने वाला मुस्कुराए और उसे लगे कि उसका समय बर्बाद नहीं हो रहा है।
एजुकेशन का मतलब यह नहीं है कि आप उसे पूरी डिक्शनरी पढ़ा दें। इसका मतलब है कि आप उसे कुछ ऐसा नया बताएं जो उसके काम का हो। जब आप सामने वाले को कुछ सिखाते हैं तो आपकी इमेज एक एक्सपर्ट की बन जाती है। लेकिन यहाँ सावधान रहना जरूरी है क्योंकि ओवर स्मार्ट बनने की कोशिश में आप सामने वाले को नीचा महसूस करवा सकते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी को रास्ता बता रहे हों और वो आपसे कहे कि मुझे जीपीएस चलाना आता है। अपनी बात को सरल रखिए और ऐसे पेश कीजिए जैसे आप कोई कीमती राज साझा कर रहे हों।
अंत में आता है इंस्पिरेशन यानी प्रेरणा। आपकी बात सुनने के बाद सामने वाले के मन में यह सवाल नहीं आना चाहिए कि अब मैं क्या करूँ। उसे पता होना चाहिए कि अगला कदम क्या है। अगर आपकी स्पीच में दम है तो वो खुद आपसे पूछेगा कि भाई इसके बारे में और जानकारी कहाँ मिलेगी। प्रेरणा का मतलब यह नहीं है कि आप उसे पहाड़ चढ़ने के लिए कहें बल्कि यह है कि उसे आपके काम में भरोसा हो जाए। जब आप इन तीनों चीजों को मिला देते हैं तो आपकी बात किसी जादू की तरह काम करती है।
याद रखिए कि आज के समय में लोगों का ध्यान खींचना सबसे मुश्किल काम है। अगर आप पहले दस सेकंड में उन्हें अपनी तरफ नहीं खींच पाए तो फिर आप चाहे सोने के शब्द बोलें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लोग अपने मोबाइल की स्क्रीन से नजर तभी हटाएंगे जब आपकी बात में उन्हें अपना कोई फायदा या कोई मजेदार कहानी दिखेगी। तो अपनी स्पीच को सिर्फ एक सूचना मत बनाइये बल्कि उसे एक अनुभव बनाइये। जब आप दिल और दिमाग दोनों को छू लेते हैं तो लोग न सिर्फ आपकी बात सुनते हैं बल्कि वो आपके फैन बन जाते हैं।
लेसन ३ : क्लोजिंग का जादू
मान लीजिए आपने एक बहुत ही लजीज खाना बनाया है जिसकी खुशबू से पूरा मोहल्ला परेशान है लेकिन अंत में आप उसमें नमक डालना ही भूल गए। कैसा लगेगा। आपकी एलीवेटर स्पीच की क्लोजिंग भी बिल्कुल वैसी ही होती है। लोग पूरी कहानी सुना देते हैं अपनी तारीफों के पुल बांध देते हैं और आखिर में बस मुस्कुराकर खड़े हो जाते हैं जैसे किसी ने उनका रिमोट छीन लिया हो। टेरी स्योडिन कहती हैं कि बिना एक सॉलिड क्लोजिंग के आपकी स्पीच सिर्फ एक बेकार की गपशप है। अगर आपने सामने वाले को यह नहीं बताया कि उसे अब क्या करना है तो आपने उसका और अपना दोनों का कीमती वक्त बर्बाद किया है।
क्लोजिंग का मतलब यह नहीं है कि आप भीख मांगने लगें कि प्लीज मुझे काम दे दो। इसका मतलब है एक ऐसा कॉल टू एक्शन देना जो सामने वाले को सोचने पर मजबूर कर दे। अगर आपकी बात दमदार थी तो अब गेंद उनके पाले में है। यह वैसा ही है जैसे आप किसी को डेट पर ले जाएं और अंत में उसे घर छोड़ते समय बस टाटा बोलकर भाग आएं। अगर आप अगला कदम यानी नेक्स्ट मीटिंग या बिजनेस कार्ड के लिए नहीं पूछेंगे तो समझ लीजिए कि वो रिश्ता शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। एक प्रोफेशनल इंसान हमेशा जानता है कि उसे अपनी बात को किस मोड़ पर खत्म करना है ताकि सस्पेंस भी बना रहे और काम भी हो जाए।
अक्सर लोग अपनी क्लोजिंग में घबरा जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वो बहुत ज्यादा चिपकू लग रहे हैं। लेकिन भाई अगर आप खुद अपने काम के लिए कॉन्फिडेंट नहीं हैं तो दूसरा आप पर दांव क्यों लगाएगा। क्लोजिंग में एक हल्का सा मजाक और बहुत सारा आत्मविश्वास होना चाहिए। जैसे आप कह सकते हैं कि मुझे पता है आपका समय बहुत कीमती है इसलिए क्या हम कल चाय पर इसके बारे में विस्तार से बात कर सकते हैं। यह सुनने में बहुत ही प्रोफेशनल और सुलझा हुआ लगता है। जब आप अपनी बात को एक सवाल पर खत्म करते हैं तो सामने वाले का दिमाग अपने आप जवाब ढूंढने लगता है और यहीं आपकी जीत होती है।
याद रखिए कि आपकी पूरी स्पीच का मकसद सिर्फ उस एक मोमेंट को हासिल करना था जहाँ सामने वाला आपसे जुड़ने के लिए तैयार हो जाए। अगर आप वहाँ हिचकिचा गए तो आपकी सारी मेहनत पानी में मिल जाएगी। दुनिया में काबिल लोगों की कमी नहीं है लेकिन दुनिया उन्हें ही याद रखती है जो अपनी बात को सही अंजाम तक पहुँचाना जानते हैं। तो अपनी झिझक को घर पर छोड़िए और जब भी अपनी एलीवेटर स्पीच दें तो उसे एक धमाके के साथ खत्म करें। आपकी आवाज में वो खनक होनी चाहिए कि सुनने वाले को लगे कि अगर इसने मौका छोड़ दिया तो मेरा ही नुकसान होगा।
दोस्तो, छोटी बातें ही बड़े बदलाव लाती हैं। टेरी स्योडिन की यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे हम अपने शब्दों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप वही पुराने घिसे पिटे तरीके से अपनी बात कहते रहेंगे या फिर एक स्मार्ट एलीवेटर स्पीच मास्टर बनेंगे। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपनी बात कहने में आज भी शरमाते हैं। नीचे कमेंट में लिखिये कि आपका सबसे बड़ा कम्युनिकेशन चैलेंज क्या है। चलिए मिलकर अपनी आवाज को बुलंद करते हैं।
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