क्या आप भी उन्हीं लोगों में से हैं जो ऑफिस में गधों की तरह मेहनत करके सोचते हैं कि एक दिन बॉस खुश होकर आपको कंपनी का मालिक बना देगा। सच तो यह है कि आपकी यह मासूमियत और घिसी पिटी मेहनत आपको सिर्फ एवरेज लाइफ ही देगी। अगर आपको लग रहा है कि आप सही रास्ते पर हैं तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम जेम्स सिट्रिन और रिचर्ड स्मिथ की किताब से वो राज खोलेंगे जो आपको एक आम एम्प्लॉई से एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीडर बना देंगे। चलिए जानते हैं वो ३ कमाल के लेसन जो आपके करियर की दिशा बदल देंगे।
लेसन १ : अपनी वैल्यू का सही सौदा करना सीखें
अगर आपको लगता है कि ऑफिस में सिर्फ अपनी डेस्क पर चिपके रहने और कीबोर्ड तोड़ते रहने से आपकी सैलरी डबल हो जाएगी तो शायद आप किसी दूसरी दुनिया में जी रहे हैं। इस किताब का पहला और सबसे बड़ा लेसन यही है कि दुनिया आपके पसीने की कीमत नहीं बल्कि आपके काम के इम्पैक्ट की कीमत देती है। इसे ऑथर्स ने द वैल्यू प्रोपोजिशन कहा है। मान लीजिए आप एक ऐसे रेस्टोरेंट में जाते हैं जहाँ वेटर बहुत मेहनत से पसीना बहाते हुए आपको ठंडा खाना खिलाता है। क्या आप उसे टिप देंगे। बिल्कुल नहीं। आप कहेंगे भाई मेहनत घर पर रख मुझे काम परफेक्ट चाहिए। ठीक यही आपके करियर के साथ होता है।
अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि शर्मा जी का लड़का तो दिन भर चाय पीता रहता है फिर भी उसका प्रमोशन हो गया और मैं यहाँ रात भर फाइलें काली कर रहा हूं। बात यह है कि शर्मा जी के लड़के को पता है कि कंपनी को असल में चाहिए क्या। वह उन चीजों पर काम कर रहा है जो सीधे कंपनी के प्रॉफिट से जुड़ी हैं। और आप। आप बस वह काम कर रहे हैं जो आपको दिया गया है। एक्स्ट्राऑर्डिनरी करियर बनाने वाले लोग कभी भी सिर्फ टास्क पूरा नहीं करते बल्कि वह यह देखते हैं कि उनके किस काम से कंपनी को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
राहुल और समीर एक ही टीम में थे। राहुल बहुत मेहनती था। वह हर ईमेल का जवाब ३ सेकंड में देता था। दूसरी तरफ समीर था जो थोडा आलसी दिखता था लेकिन वह उस क्लाइंट के साथ मीटिंग फिक्स करने में लगा रहता था जिससे कंपनी को करोड़ों का बिजनेस मिल सके। साल के अंत में राहुल को मिला एक नया कीबोर्ड और समीर को मिला बड़ा बोनस और प्रमोशन। राहुल रोता रहा कि दुनिया जालिम है लेकिन सच तो यह है कि समीर ने अपनी वैल्यू का सही सौदा किया था।
आपको समझना होगा कि आप एक प्रोडक्ट हैं और मार्केट आपका खरीदार। अगर आपके पास वो स्किल नहीं है जिसकी मार्केट में डिमांड है तो आपकी मेहनत कूड़े के भाव बिकेगी। कई लोग सालों तक एक ही पुराने सॉफ्टवेयर पर काम करते रहते हैं और फिर रोते हैं कि नई जनरेशन उनसे आगे निकल गई। भाई अगर आप आज के जमाने में नोकिया ११00 बनकर घूमेंगे तो लोग आपको म्यूजियम में ही रखेंगे जेब में नहीं। आपको अपनी स्किल्स को लगातार अपडेट करना होगा ताकि आपकी मार्केट वैल्यू हमेशा टॉप पर रहे।
करियर में सक्सेसफुल होने का मतलब यह नहीं है कि आप सबसे ज्यादा काम करें। इसका मतलब यह है कि आप वह काम करें जो सबसे ज्यादा जरूरी है। जब आप अपनी वैल्यू को सही जगह इन्वेस्ट करते हैं तो रिजल्ट अपने आप दिखने लगते हैं। तो अगली बार जब आप काम शुरू करें तो खुद से पूछें कि क्या यह काम मुझे एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनाएगा या बस एक और थका हुआ कर्मचारी। अपनी वैल्यू पहचानिए वरना दुनिया आपको मुफ्त का मजदूर समझने में देर नहीं लगाएगी।
लेसन २ : भले बनो लेकिन थोड़े से स्वार्थी भी
सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है क्योंकि बचपन से हमें सिखाया गया है कि बेटा हमेशा दूसरों की मदद करो और चुपचाप अपना काम करो। लेकिन जेम्स सिट्रिन कहते हैं कि अगर करियर में टॉप पर पहुंचना है तो आपको बेनेवोलेंट नार्सिसिज्म का रास्ता अपनाना होगा। इसका मतलब है एक ऐसा इंसान जो खुद को आगे बढ़ाना चाहता है लेकिन दूसरों को नीचे गिराकर नहीं बल्कि सबको साथ लेकर। अगर आप सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे तो लोग आपको ऑफिस का विलेन मान लेंगे और अगर सिर्फ दूसरों के लिए जिएंगे तो आप ऑफिस के डोरमैट बन जाएंगे जिस पर हर कोई पैर पोंछकर निकल जाएगा।
ऑफिस की राजनीति में कई लोग ऐसे होते हैं जो सारा क्रेडिट खुद खा जाते हैं। ऐसे लोग शॉर्ट टर्म में तो चमकते हैं लेकिन लॉन्ग टर्म में अकेले पड़ जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ वो बेचारे लोग होते हैं जो पूरी प्रेजेंटेशन रात भर जागकर बनाते हैं और मीटिंग में बॉस के सामने उनका नाम तक नहीं लिया जाता। एक्स्ट्राऑर्डिनरी लोग इन दोनों के बीच का रास्ता निकालते हैं। वे अपनी टीम को भी स्टार बनाते हैं और यह भी पक्का करते हैं कि उस स्टार की चमक में उनका चेहरा सबसे ज्यादा ग्लो करे।
अमित एक टीम लीडर था जिसे पता था कि अगर उसकी टीम जीतेगी तो ही वह जीतेगा। जब भी कोई बड़ा प्रोजेक्ट पूरा होता वह सबसे पहले अपने जूनियर्स की तारीफ करता। इससे उसकी टीम उसके लिए जान देने को तैयार रहती थी। लेकिन अमित शातिर भी था। वह यह सुनिश्चित करता था कि जब बड़े बॉस के साथ डिनर हो तो वह यह बताना न भूले कि कैसे उसने अपनी लीडरशिप से इस बिखरी हुई टीम को एक किया। वह सबका भला भी कर रहा था और अपनी ब्रांडिंग भी। इसे कहते हैं सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।
अगर आप सोचते हैं कि आपका काम खुद बोलेगा तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। आपके काम के पास अपनी जुबान नहीं होती। आपको उसका लाउडस्पीकर बनना पड़ता है। लेकिन यह लाउडस्पीकर ऐसा होना चाहिए जो दूसरों के कान न फाड़े बल्कि उन्हें संगीत जैसा लगे। अगर आप अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा अकेले पीटेंगे तो लोग आपको अहंकारी कहेंगे। लेकिन अगर आप अपनी टीम की जीत का जश्न मनाते हुए अपनी भूमिका को चतुराई से पेश करेंगे तो लोग आपको एक महान लीडर मानेंगे।
याद रखिए कि कॉर्पोरेट की सीढ़ी चढ़ने के लिए आपको लोगों के कंधों की जरूरत होती है। अगर आप उन कंधों पर चढ़कर उनके सिर पर पैर मारेंगे तो आप बहुत जल्द नीचे गिरेंगे। लेकिन अगर आप उन्हें सहारा देकर ऊपर उठाएंगे तो वे खुद आपको अपने सिर पर बिठा लेंगे। एक्स्ट्राऑर्डिनरी करियर का यही सीक्रेट है कि आप अपनी तरक्की को सबकी तरक्की बना दें। खुद को प्रमोट करना कोई गुनाह नहीं है बशर्ते आप अपनी टीम को पीछे न छोड़ें। तो आज से ही अपनी भलाई में थोड़ा सा अपना फायदा मिक्स करना शुरू कर दीजिए वरना इतिहास के पन्नों में आप सिर्फ एक अच्छे इंसान बनकर रह जाएंगे सफल प्रोफेशनल नहीं।
लेसन ३ : ८0 परसेंट फालतू के कामों को कचरे में डालिए
क्या आपको भी ऐसा लगता है कि आप पूरा दिन पागलों की तरह काम करते हैं लेकिन जब शाम को घर लौटते हैं तो समझ ही नहीं आता कि आज उखाड़ा क्या है। अगर हां तो आप द २0/८0 प्रिंसिपल के शिकार हैं। जेम्स सिट्रिन और रिचर्ड स्मिथ कहते हैं कि आपके करियर की ८0 परसेंट ग्रोथ आपके सिर्फ २0 परसेंट कामों से आती है। बाकी का ८0 परसेंट काम तो बस आपकी जिंदगी का टाइम पास है जो आपको थकाने के अलावा और कुछ नहीं करता। जो लोग एक्स्ट्राऑर्डिनरी करियर बनाते हैं उन्हें पता होता है कि कब ना बोलना है और किन चीजों पर अपनी पूरी जान लगानी है।
ज्यादातर लोग ऑफिस में इसलिए बिजी रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बिजी दिखना ही सफल होने की निशानी है। वे हर फालतू मीटिंग का हिस्सा बनते हैं और हर उस ईमेल का रिप्लाई करते हैं जिसका उनके करियर से कोई लेना देना नहीं होता। इसे एक मजेदार एग्जांपल से समझिए। मान लीजिए आप एक ऐसे शेफ हैं जिसे दुनिया का सबसे बेस्ट पिज्जा बनाना है। लेकिन आप अपना सारा वक्त बर्तन धोने और सब्जियां काटने में बर्बाद कर रहे हैं। क्या आप कभी मास्टरशेफ बन पाएंगे। कभी नहीं। बर्तन धोना जरूरी हो सकता है लेकिन वह आपको मशहूर नहीं बनाएगा। आपको फोकस उस सॉस और डो पर करना होगा जो आपके पिज्जा को खास बनाता है।
यही हाल हमारे करियर का है। आप शायद उन रिपोर्ट्स को सजाने में घंटों लगा रहे हैं जिन्हें बॉस कभी खोलकर भी नहीं देखता। जबकि आपको वह वक्त उन नए आइडियाज पर लगाना चाहिए था जो कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा सकें। जो लोग करियर की रेस में सबसे आगे निकलते हैं वे लेजर की तरह फोकस्ड होते हैं। वे जानते हैं कि कौन से वो ३ काम हैं जो उन्हें प्रमोशन दिलाएंगे और वे बाकी के ५0 कामों को या तो किसी और को सौंप देते हैं या फिर उन्हें इग्नोर कर देते हैं।
इसे सुमित की कहानी से समझते हैं। सुमित के पास हर रोज ५0 काम होते थे और वह सबको खुश करने के चक्कर में रात के १० बजे तक ऑफिस में बैठा रहता था। वहीं उसका दोस्त विकास सिर्फ ३ बड़े क्लाइंट्स पर फोकस करता था और शाम ५ बजे ही जिम निकल जाता था। सबको लगता था विकास कामचोर है। लेकिन जब साल के अंत में नंबर्स देखे गए तो विकास ने कंपनी को सुमित से १० गुना ज्यादा मुनाफा कमाकर दिया था। प्रमोशन किसे मिला। जाहिर है विकास को। सुमित आज भी ऑफिस में बैठकर दूसरों की एक्सेल शीट ठीक कर रहा है और किस्मत को कोस रहा है।
सफलता का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी प्लेट में सब कुछ भर लें। इसका मतलब है कि आप सिर्फ वही खाएं जो आपकी सेहत के लिए सही है। अगर आप हर किसी को खुश करने की कोशिश करेंगे तो आप सिर्फ एक वेटर बनकर रह जाएंगे। एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनने के लिए आपको निर्दयी होना पड़ेगा अपने समय को लेकर। फालतू की गॉसिप और बिना मतलब की मीटिंग्स को अपनी जिंदगी से ऐसे निकाल फेंकिए जैसे चाय से मक्खी। जब आप अपने उस कीमती २0 परसेंट पर फोकस करेंगे तो आपके करियर की गाड़ी बुलेट ट्रेन की रफ्तार से दौड़ने लगेगी।
तो दोस्तों, क्या आप भी सुमित की तरह सिर्फ बिजी रहना चाहते हैं या विकास की तरह एक्स्ट्राऑर्डिनरी बनना चाहते हैं। याद रखिए करियर की यह रेस लंबी है और यहाँ वही जीतता है जो सही दिशा में भागता है न कि वह जो सबसे तेज भागता है। आज ही अपनी डायरी उठाइए और उन २0 परसेंट कामों को लिखिए जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं। कमेंट में मुझे बताइए कि वो कौन सी एक चीज है जिसे आप आज से ही बदलना शुरू करेंगे। अगर यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो ऑफिस में गधों की तरह मेहनत कर रहा है। उसे भी जागने की जरूरत है।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#CareerGrowth #SuccessMindset #BookSummary #ProfessionalDevelopment #CorporateLife
_