The Answer (Hindi)


क्या आप अभी भी उसी पुराने घिसे-पिटे तरीके से अमीर बनने का सपना देख रहे हैं? सच तो यह है कि आपका बैंक बैलेंस आपके आलस और पुरानी सोच की वजह से रो रहा है। अगर आप द आंसर के सीक्रेट्स नहीं जानते तो बधाई हो, आप अपनी लाइफ बर्बाद करने की रेस में सबसे आगे हैं।

इस ब्लॉग में हम जॉन असराफ की जादुई तकनीक सीखेंगे जो आपके बिजनेस और दिमाग को सुपरफास्ट बना देगी। चलिए जानते हैं वे ३ पावरफुल लेसन जो आपको एक साधारण इंसान से एक कामयाब बिजनेसमैन बना सकते हैं।


लेसन १ : विजन का असली खेल और सबकॉन्शियस माइंड की प्रोग्रामिंग

दोस्तो, क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग मिट्टी भी छूते हैं तो वह सोना बन जाती है और कुछ लोग सोने को भी मिट्टी कर देते हैं? इसका जवाब आपकी मेहनत में नहीं बल्कि आपके उस पुराने डब्बे यानी आपके दिमाग के अंदर छिपा है। जॉन असराफ अपनी बुक द आंसर में साफ कहते हैं कि अगर आपके पास कोई क्लियर विजन नहीं है तो आप बिना पते के चिट्ठी की तरह हैं जो कहीं नहीं पहुँचती। लोग कहते हैं कि वह बहुत बिजी हैं पर सच तो यह है कि वे सिर्फ पागलों की तरह एक ही जगह पर गोल-गोल घूम रहे हैं। विजन का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि मुझे बहुत पैसा चाहिए। भाई पैसा तो बैंक मैनेजर के पास भी बहुत होता है पर वह उसका नहीं होता। विजन का मतलब है यह जानना कि आपको असल में अपनी लाइफ कैसी चाहिए।

क्या आप उस आलीशान घर में रहना चाहते हैं जहाँ सुबह की चाय पीते वक्त आपको ऑफिस की टेंशन न हो? या आप बस उस पुरानी टूटी साइकिल पर बैठकर चांद तक जाने के सपने देख रहे हैं? असल समस्या यह है कि हमारा दिमाग एक पुराने सॉफ्टवेयर पर चल रहा है जिसे हमारे पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने इंस्टॉल किया था। वे लोग जिन्होंने खुद अपनी लाइफ में कुछ बड़ा नहीं किया वह हमें सिखाते हैं कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते। अब वक्त आ गया है उस पुराने कचरे को डिलीट करने का। जॉन असराफ हमें बताते हैं कि हमारा सबकॉन्शियस माइंड एक छोटे बच्चे की तरह है जिसे जो सिखाओगे वह वही मान लेगा। अगर आप इसे रोज यह कहेंगे कि मैं एक लूजर हूँ तो वह पूरी ताकत लगा देगा आपको लूजर बनाए रखने में।

मान लीजिए एक लड़का है जिसका नाम है राहुल। राहुल एक छोटा सा स्टार्टअप शुरू करना चाहता है पर उसके दिमाग में एक ही बात चलती रहती है कि अगर बिजनेस डूब गया तो लोग क्या कहेंगे। अब राहुल का विजन सक्सेस का नहीं बल्कि बेइज्जती से बचने का है। नतीजा यह होता है कि वह कभी रिस्क ही नहीं ले पाता। वह हर दिन ऑफिस जाता है अपने बॉस की गालियां सुनता है और घर आकर सोशल मीडिया पर मोटिवेशनल कोट्स पढ़ता है। यह तो वही बात हुई कि आप जिम जाकर सिर्फ समोसे खा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सिक्स पैक एब्स बन जाएंगे। विजन बोर्ड बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है बल्कि यह आपके दिमाग को एक टारगेट देने जैसा है। जब आप अपने विजन को पेपर पर लिखते हैं और उसे रोज देखते हैं तो आपका दिमाग उसे सच मानने लगता है।

सफलता की पहली सीढ़ी यही है कि आप अपने डर को पहचानें और उसे एक तरफ रख दें। अगर आप सोचते हैं कि बिजनेस शुरू करना बहुत रिस्की है तो यकीन मानिए घर में खाली बैठकर गरीबी में जीना उससे कहीं ज्यादा रिस्की है। जॉन असराफ की यह तकनीक आपके न्यूरॉन्स को फिर से वायरल करती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपने पुराने स्लो कंप्यूटर में नया प्रोसेसर लगा रहे हों। जब आपका विजन क्लियर होता है तो आपको रास्ते अपने आप दिखने लगते हैं। आपको वह लोग मिलने लगते हैं जो आपकी मदद कर सकें और वह मौके दिखने लगते हैं जिन्हें आप पहले देख ही नहीं पा रहे थे। लेकिन याद रखिए विजन के साथ-साथ माइंडसेट का बदलना भी उतना ही जरूरी है जितना कि फोन में बैलेंस होने के साथ नेटवर्क का होना।

बिना सही माइंडसेट के विजन सिर्फ एक हसीन सपना है जो सुबह उठते ही गायब हो जाएगा। आपको अपने दिमाग को ट्रेन करना होगा कि वह बड़े से बड़े झटके को भी झेल सके। अगर आप एक छोटा सा नुकसान होने पर रोने लगते हैं तो आप बिजनेस के लिए नहीं बल्कि किसी कॉमेडी शो के लिए बने हैं। असली बिजनेसमैन वह है जो गिरकर यह नहीं देखता कि चोट कहाँ लगी है बल्कि यह देखता है कि वह गिरा क्यों और अगली बार वहां से कैसे उछलना है। यही वह मानसिक मजबूती है जो द आंसर हमें सिखाती है। अब जब आप समझ गए हैं कि विजन और सबकॉन्शियस माइंड का क्या कनेक्शन है तो चलिए देखते हैं कि इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए ब्रह्मांड की शक्तियों का इस्तेमाल कैसे करना है।


लेसन २ : लॉ ऑफ अट्रैक्शन और सही एक्शन का जबरदस्त तालमेल

दोस्तो, आपने लॉ ऑफ अट्रैक्शन के बारे में तो बहुत सुना होगा। लोग सोचते हैं कि बस सोफे पर लेटकर आँखें बंद करेंगे और नोटों की बारिश होने लगेगी। अगर ऐसा होता तो आज दुनिया का हर आलसी इंसान करोड़पति होता। जॉन असराफ अपनी बुक द आंसर में बड़े प्यार से समझाते हैं कि ब्रह्मांड आपकी बातों को नहीं बल्कि आपकी फ्रीक्वेंसी को सुनता है। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। सिर्फ पॉजिटिव सोचने से कुछ नहीं होता। यह वैसा ही है जैसे आप एक लग्जरी कार में बैठे हैं और इंजन तो स्टार्ट कर दिया पर गियर डालना भूल गए। गियर डालना ही असल में एक्शन लेना है। बिना एक्शन के आपकी सारी विजुअलाइजेशन वैसी ही है जैसे बिना दूल्हे की बारात।

जरा सोचिए, आप एक बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। आप रोज सपने देखते हैं कि आप एक बड़ी ऑफिस में बैठे हैं और लोग आपको सर-सर कह रहे हैं। लेकिन हकीकत में आप सुबह ११ बजे सोकर उठते हैं और दिन भर रील्स देखते हैं। क्या आपको लगता है कि किस्मत आपके दरवाजे पर आकर घंटी बजाएगी? बिल्कुल नहीं। किस्मत तो आपके घर का रास्ता भी भूल जाएगी। जॉन और मरे स्मिथ कहते हैं कि जब आप अपने विजन के साथ सही एक्शन को जोड़ते हैं तभी चमत्कार होते हैं। इसे इंस्पायर्ड एक्शन कहते हैं। इसका मतलब है कि जब आपका दिमाग और दिल एक ही दिशा में काम करते हैं तो आप थकावट महसूस नहीं करते। आप काम इसलिए नहीं करते क्योंकि आपको करना पड़ रहा है बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि आपको मजा आ रहा है।

मान लीजिए सतीश नाम का एक आदमी है जो अपना वजन कम करना चाहता है। वह रोज सुबह उठकर शीशे के सामने खड़ा होता है और बोलता है कि मैं बहुत फिट हूँ। लेकिन अगले ही पल वह दो प्लेट छोले-भटूरे और एक्स्ट्रा मक्खन वाली लस्सी पी लेता है। अब सतीश भाई को लगता है कि ब्रह्मांड उनके साथ नाइंसाफी कर रहा है। भाई ब्रह्मांड तो ठीक है पर आपके पेट का क्या? यही हाल हमारे बिजनेस और करियर का भी होता है। हम चाहते हैं कि हमारे पास करोड़ों रुपये हों पर हम एक नया स्किल सीखने के लिए दो घंटे भी नहीं दे सकते। यह लॉ ऑफ अट्रैक्शन नहीं बल्कि लॉ ऑफ कन्फ्यूजन है।

असली सफलता तब मिलती है जब आपकी इच्छा और आपकी मेहनत के बीच कोई फासला न रहे। जॉन असराफ बताते हैं कि जब आप अपने दिमाग को विजन की ट्रेनिंग देते हैं तो आपका दिमाग उन मौकों को पकड़ना शुरू कर देता है जिन्हें दूसरे लोग देख ही नहीं पाते। आपको वह सही इंसान मिल जाएगा जो आपके बिजनेस में पैसा लगा दे या वह सही आइडिया मिल जाएगा जो आपकी सेल्स को १० गुना बढ़ा दे। पर वह मौका आपके पास चलकर नहीं आएगा आपको उसके पास दौड़कर जाना होगा। बहुत से लोग डरते हैं कि अगर मैंने कदम उठाया और फेल हो गया तो? अरे भाई अगर कदम नहीं उठाया तो फेल तो आप पहले से ही हैं। कम से कम कोशिश करके आपके पास जीतने का चांस तो होगा।

अक्सर लोग दूसरों की कामयाबी देखकर कहते हैं कि इसकी तो किस्मत अच्छी थी। पर वे यह नहीं देखते कि उस किस्मत को बनाने के लिए उस इंसान ने कितनी रातों की नींद उड़ाई है। द आंसर हमें सिखाती है कि आपको अपनी फ्रीक्वेंसी को उस लेवल पर ले जाना होगा जहाँ पैसा और कामयाबी आपकी तरफ खुद खिंचे चले आएं। इसके लिए आपको अपने डर, शक और पुराने अनुभवों को पीछे छोड़ना होगा। अगर आप पुराने अनुभवों की पोटली लेकर चलेंगे तो नई कामयाबी के लिए आपके हाथ खाली ही नहीं होंगे। तो अब जब हमने समझ लिया है कि सोचना और करना दोनों ही सिक्के के दो पहलू हैं तो चलिए अब चलते हैं तीसरे और सबसे जरूरी पड़ाव की ओर जहाँ हम सीखेंगे कि अपने बिजनेस और लाइफ को एक्स्ट्राऑर्डिनरी कैसे बनाना है।


लेसन ३ : बिजनेस की ग्रोथ और एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ का ब्लूप्रिंट

दोस्तो, अब तक हमने विजन बना लिया और एक्शन लेना भी सीख लिया। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ बिजनेस रॉकेट की तरह ऊपर जाते हैं और कुछ शुरू होते ही फुस्स पटाखा बन जाते हैं? जॉन असराफ और मरे स्मिथ कहते हैं कि इसका राज आपके बिजनेस के सिस्टम और आपकी पर्सनल ग्रोथ में छिपा है। अगर आप अपने बिजनेस में खुद ही चपरासी और खुद ही बॉस बने रहेंगे, तो आप कभी एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ नहीं जी पाएंगे। असल अमीर वह नहीं है जो दिन के १८ घंटे पागलों की तरह काम करता है, बल्कि वह है जिसने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो उसके सोते वक्त भी उसके लिए पैसा कमाता है। अगर आपको लगता है कि आपके बिना आपका काम रुक जाएगा, तो बधाई हो, आपने बिजनेस नहीं बल्कि अपने लिए एक नई नौकरी ढूंढ ली है।

अक्सर लोग अपनी दुकान या ऑफिस को लेकर इतने इमोशनल हो जाते हैं कि वे छोटे-छोटे काम भी दूसरों को नहीं सौंपते। उन्हें लगता है कि उनके जैसा परफेक्ट काम कोई नहीं कर सकता। भाई साहब, अगर दुनिया आपके भरोसे चल रही होती तो सूरज भी आपसे पूछकर उगता। मरे स्मिथ समझाते हैं कि बिजनेस को बढ़ाने के लिए आपको "वर्किंग ऑन द बिजनेस" और "वर्किंग इन द बिजनेस" का फर्क समझना होगा। ज्यादातर लोग काम के अंदर फंसे रहते हैं और कभी काम के ऊपर उठकर नहीं देख पाते। एक शानदार लाइफ जीने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास बहुत बड़ा बंगला हो, बल्कि यह है कि उस बंगले में शांति से बैठने के लिए आपके पास वक्त हो। अगर आपके पास पैसा है पर ब्लड प्रेशर भी हाई है, तो यह सक्सेस नहीं बल्कि एक महंगी बीमारी है।

मान लीजिए रमेश की एक मिठाई की दुकान है। रमेश खुद ही दूध उबालता है, खुद ही हिसाब लिखता है और खुद ही ग्राहकों को समोसे परोसता है। रमेश को लगता है कि वह बहुत मेहनती है, पर असल में वह एक ऐसी जेल में है जिसकी चाबी उसके ही पास है। वहीं दूसरी तरफ सुरेश है जिसने अच्छे कारीगर रखे हैं और खुद सिर्फ यह देखता है कि काम सही से हो रहा है या नहीं। सुरेश महीने में १० दिन छुट्टी मनाता है फिर भी उसका बिजनेस रमेश से बड़ा है। रमेश सिर्फ पसीना बहा रहा है, जबकि सुरेश दिमाग का इस्तेमाल कर रहा है। द आंसर बुक हमें यही सिखाती है कि आपको खुद को एक लीडर की तरह डेवलप करना होगा, न कि एक मजदूर की तरह।

एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ का मतलब है कि आपके पास अपनी फैमिली, अपनी हॉबीज और खुद के लिए पूरा टाइम हो। इसके लिए आपको अपने डर को छोड़कर लोगों पर भरोसा करना सीखना होगा। जॉन असराफ कहते हैं कि सफलता एक टीम गेम है। अगर आप अकेले पहाड़ चढ़ने की कोशिश करेंगे तो बीच में ही सांस फूल जाएगी। लेकिन अगर आपके पास सही टीम और सही सिस्टम है, तो आप एवरेस्ट भी फतह कर सकते हैं। अपनी वैल्यू को पहचानिए। अगर आपकी एक घंटे की कीमत १००० रुपये है, तो १०० रुपये वाला काम किसी और को सौंप दीजिए। जब आप अपना कीमती वक्त बड़े आइडियाज पर खर्च करेंगे, तभी आपकी लाइफ में बड़ा बदलाव आएगा। वरना पूरी जिंदगी बिजली का बिल और राशन कार्ड के चक्कर में ही निकल जाएगी।

याद रखिए, आप इस दुनिया में सिर्फ बिल भरने और मरने के लिए नहीं आए हैं। आपके अंदर वह ताकत है कि आप अपनी किस्मत खुद लिख सकें। जॉन और मरे की यह गाइडेंस आपको उस अंधेरे से बाहर निकालती है जहाँ आप सालों से फंसे थे। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप वही पुरानी घिसी-पिटा जिंदगी जीना चाहते हैं या फिर उन चुनिंदा लोगों में शामिल होना चाहते हैं जो दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाते हैं? यह बुक सिर्फ बिजनेस बढ़ाने के बारे में नहीं है, यह आपको एक नया इंसान बनाने के बारे में है। एक ऐसा इंसान जो चुनौतियों को देखकर डरता नहीं बल्कि मुस्कुराता है। अब जब आपके पास सारे जवाब हैं, तो देर किस बात की? उठिए और अपनी एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ की शुरुआत आज और अभी से कीजिए।


दोस्तो, क्या आप तैयार हैं अपने दिमाग के उस पुराने ताले को खोलने के लिए? याद रखिए, द आंसर आपके पास है, बस आपको कदम बढ़ाना है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका वह एक बड़ा सपना क्या है जिसे आप इसी साल पूरा करना चाहते हैं। इस ब्लॉग को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो कड़ी मेहनत तो कर रहे हैं पर उन्हें सही रास्ता नहीं मिल रहा। चलिए साथ मिलकर एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी कम्युनिटी बनाते हैं।

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