Talent Is Overrated (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आप इसलिए सक्सेसफुल नहीं हैं क्योंकि आपके पास टैलेंट नहीं है तो बधाई हो आप अपनी लाइफ का सबसे बड़ा बहाना बना रहे हैं। जबकि दुनिया के टॉप परफॉर्मर्स आपकी इसी बेवकूफी पर हंस रहे हैं क्योंकि असली राज टैलेंट नहीं बल्कि कुछ और ही है।

आज हम जेफ कोल्विन की किताब टैलेंट इस ओवररेटेड से वो 3 लेसन सीखेंगे जो आपको एवरेज से वर्ल्ड क्लास बना देंगे। तैयार हो जाइए क्योंकि अब आपके पास फेल होने का कोई बहाना नहीं बचेगा।


लेसन १ : डेलिब्रेट प्रैक्टिस का जादू

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो पिछले पांच साल से ऑफिस में वही एक काम घिस रहे हैं और सोचते हैं कि आप उसमें एक्सपर्ट बन गए हैं? अगर हां, तो जेफ कोल्विन आपकी पीठ थपथपाने नहीं बल्कि आपको हकीकत का आईना दिखाने आए हैं। ज्यादातर लोग अनुभव को ही अपनी काबिलियत मान लेते हैं। लेकिन सच तो यह है कि बीस साल का अनुभव और एक ही काम को बीस साल तक बिना दिमाग लगाए दोहराना, दोनों में जमीन आसमान का फर्क है। इसे किताब में डेलिब्रेट प्रैक्टिस कहा गया है। यह वो जादुई चाबी है जिसे दुनिया के महान संगीतकार और खिलाड़ी अपनी जेब में रखते हैं।

आम इंसान जिम जाता है, गाना गाता है या कोडिंग करता है ताकि उसे मजा आए। लेकिन एक वर्ल्ड क्लास परफॉर्मर इसलिए प्रैक्टिस करता है ताकि उसे अपनी कमियों पर दर्द हो। डेलिब्रेट प्रैक्टिस का मतलब सिर्फ पसीना बहाना नहीं है बल्कि उन चीजों को चुन चुनकर ठीक करना है जिनमें आप फिसड्डी हैं। मान लीजिए आप क्रिकेट खेल रहे हैं। एक एवरेज प्लेयर घंटों नेट पर छक्के मारेगा क्योंकि उसमें उसे मजा आता है और लोग तालियां बजाते हैं। लेकिन एक डेलिब्रेट प्रैक्टिस करने वाला खिलाड़ी अपनी उस कमजोरी को पकड़ेगा जहां उसकी गेंद बार बार मिस हो रही है। वह शायद घंटों सिर्फ एक ही तरह के शॉट को सुधारने में लगा देगा भले ही वह कितना भी बोरिंग क्यों न हो।

इसमें सबसे बड़ा रोल फीडबैक का होता है। हम इंडियंस की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही है कि हमें अपनी बुराई सुनना पसंद नहीं है। हमें लगता है कि जो हम कर रहे हैं वही बेस्ट है। लेकिन डेलिब्रेट प्रैक्टिस कहती है कि आपको एक ऐसे मेंटर या कोच की जरूरत है जो आपकी छोटी से छोटी गलती पर उंगली उठाए और आपको बताए कि आप कहां गलत जा रहे हैं। बिना फीडबैक के आप बस अंधेरे में हाथ पैर मार रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे आप बिना गूगल मैप्स के किसी अनजान शहर में शॉर्टकट ढूंढ रहे हों। आप शायद कहीं पहुंच तो जाएंगे लेकिन वो मंजिल नहीं होगी जहां आपको जाना था।

हकीकत तो यह है कि डेलिब्रेट प्रैक्टिस बहुत ही बोरिंग और थका देने वाली होती है। इसमें कोई मजा नहीं आता और न ही कोई आपकी वाहवाही करता है। इसीलिए दुनिया के 99 परसेंट लोग इसे बीच में ही छोड़ देते हैं। लोग इसे टैलेंट का नाम देकर खुद को तसल्ली दे देते हैं। वह कहते हैं कि अरे भाई वो तो पैदाइशी होशियार है। लेकिन वो यह नहीं देखते कि उस इंसान ने बंद कमरे में अपनी स्किल्स को रगड़ने के लिए कितनी बोरियत झेली है।

अगर आप वाकई कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो अपनी कंफर्ट जोन से बाहर निकलना पड़ेगा। वो काम करिए जो आपसे नहीं हो रहा है। अपनी गलतियों का एक डेटा तैयार करिए। जब तक आप खुद को मुश्किल में नहीं डालेंगे तब तक आपका दिमाग नई न्यूरल पाथवेज नहीं बनाएगा। याद रखिए डेलिब्रेट प्रैक्टिस का मकसद आपको खुश करना नहीं बल्कि आपको बेहतर बनाना है। यह एक ऐसी सीढ़ी है जिस पर चढ़ते वक्त आपके पैरों में दर्द तो होगा लेकिन ऊपर पहुंचने के बाद नजारा सबसे शानदार होगा। अब सवाल यह है कि क्या आप अपनी ईगो को साइड में रखकर अपनी कमियों पर काम करने के लिए तैयार हैं या फिर टैलेंट का रोना रोते रहेंगे?


लेसन २ : टैलेंट एक मिथ है

क्या आपको भी बचपन में यह बताया गया था कि कुछ बच्चे भगवान की स्पेशल देन होते हैं? जैसे कि कोई पैदा होते ही मैथ्स के सवाल हल करने लगा या किसी ने पालने में ही गिटार बजाना सीख लिया? जेफ कोल्विन बड़े प्यार से हमें समझाते हैं कि यह सब एक सफेद झूठ है जिसे हम अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। हकीकत तो यह है कि 'नेचुरल टैलेंट' जैसी कोई चीज एक्जिस्ट ही नहीं करती। जो हमें रातों रात मिली कामयाबी दिखती है, उसके पीछे अक्सर दस साल की वो मेहनत होती है जिसे देखने की हमारी फुर्सत नहीं होती।

जब हम टाइगर वुड्स को गोल्फ के मैदान में जादू करते देखते हैं, तो हम कहते हैं कि यार इसके खून में ही गोल्फ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब टाइगर सिर्फ सात महीने के थे, तब उनके पिता ने उन्हें गोल्फ क्लब थमा दिया था? जब बाकी बच्चे मिट्टी में खेल रहे थे, टाइगर अपनी डेलिब्रेट प्रैक्टिस में डूबे हुए थे। हम अक्सर 'कॉज और इफेक्ट' को ही गलत समझ लेते हैं। हमें लगता है कि किसी के पास टैलेंट है इसलिए वो प्रैक्टिस कर रहा है, जबकि सच यह है कि वो पागलों की तरह प्रैक्टिस कर रहा है इसलिए हमें उसमें टैलेंट नजर आता है।

हम इंडियंस के साथ दिक्कत यह है कि हम 'जेनेटिक लॉटरी' पर बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं। अगर शर्मा जी का बेटा इंजीनियर बन गया, तो हम कहेंगे उसके जींस अच्छे हैं। लेकिन हम यह नहीं देखेंगे कि उसने अपनी जवानी किताबों के साथ गुजार दी। यह टैलेंट वाला बहाना दरअसल एक सेफ्टी नेट की तरह है। अगर हम मान लें कि टैलेंट ही सब कुछ है, तो हमें मेहनत न करने का एक लीगल परमिट मिल जाता है। हम खुद से कह पाते हैं कि भाई मेरे पास तो वो गॉड गिफ्टेड दिमाग है ही नहीं, तो मैं मेहनत करके भी क्या उखाड़ लूँगा? यह सोच ही हमें एक एवरेज लाइफ जीने पर मजबूर कर देती है।

जेफ कोल्विन ने इस किताब में मोजार्ट जैसे महान संगीतकारों का भी पर्दाफाश किया है। मोजार्ट के बारे में मशहूर था कि वो बचपन से ही धुनें बना लेते थे। लेकिन रिसर्च बताती है कि मोजार्ट के पिता एक बहुत ही सख्त टीचर थे जिन्होंने मोजार्ट के बचपन के कई साल सिर्फ म्यूजिक की ट्रेनिंग में झोंक दिए थे। उनकी शुरुआती धुनें उतनी भी महान नहीं थीं, लेकिन सालों की रगड़ के बाद जो निकला उसे दुनिया ने चमत्कार मान लिया।

तो क्या इसका मतलब यह है कि कोई भी इंसान कुछ भी बन सकता है? हां, बिल्कुल। लेकिन शर्त सिर्फ एक है कि आपको उस टैलेंट वाले कंफर्टेबल झूठ को छोड़ना होगा। जब आप यह मान लेते हैं कि आपकी काबिलियत आपके हाथ में है न कि आपकी किस्मत में, तब आप सच में आजाद होते हैं। यह जानकर थोड़ा डर भी लगता है क्योंकि अब आप अपनी हार का ठीकरा ऊपर वाले पर नहीं फोड़ सकते। अगर आप आज वहां नहीं हैं जहां होना चाहिए, तो इसका मतलब है कि आपने अपनी स्किल्स को उतना वक्त नहीं दिया जितना जरूरी था। तो अगली बार जब किसी को 'टैलेंटेड' बोलें, तो याद रखिएगा कि आप उनकी मेहनत का अपमान कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या आप अपनी किस्मत खुद लिखने का रिस्क लेंगे या फिर किसी चमत्कार का इंतजार करेंगे?


लेसन ३ : मेंटल मॉडल की ताकत

क्या आपने कभी सोचा है कि एक प्रो चेस प्लेयर और एक आम खिलाड़ी में क्या फर्क होता है? या फिर क्यों एक टॉप क्लास सीईओ डूबती हुई कंपनी को चुटकियों में बचा लेता है जबकि बाकी लोग बस हाथ मलते रह जाते हैं? जेफ कोल्विन कहते हैं कि यह कोई जादू नहीं बल्कि मेंटल मॉडल का कमाल है। मेंटल मॉडल यानी आपके दिमाग में बना वो नक्शा जो आपको डेटा और इन्फॉर्मेशन को तेजी से समझने में मदद करता है। जब एक बिगिनर किसी प्रॉब्लम को देखता है तो उसे सिर्फ उलझन दिखती है लेकिन एक एक्सपर्ट को उसमें पैटर्न नजर आते हैं।

मान लीजिए आप किचन में पहली बार पनीर बटर मसाला बनाने जा रहे हैं। आप रेसिपी बुक देखेंगे, बार बार नमक चखेंगे और शायद डिश को जला भी देंगे। लेकिन आपकी मम्मी? वो फोन पर बात करते हुए भी परफेक्ट खाना बना लेती हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि उनके दिमाग में मसालों और आंच का एक ऐसा मेंटल मॉडल फिट हो चुका है कि उन्हें अब सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती। एक्सपर्ट्स के साथ भी यही होता है। वो अपनी फील्ड में इतना समय बिता चुके होते हैं कि उनका दिमाग आने वाली चुनौतियों का पहले से ही अंदाजा लगा लेता है।

हम में से ज्यादातर लोग अपनी लाइफ में सिर्फ ऊपर ऊपर की जानकारी रखते हैं। हम 'जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स' तो बन जाते हैं लेकिन 'मास्टर ऑफ नन' रह जाते हैं। मेंटल मॉडल बनाने के लिए आपको अपनी फील्ड की गहराई में उतरना पड़ता है। आपको चीजों के बीच के कनेक्शन को समझना होता है। एक महान इन्वेस्टर सिर्फ स्टॉक के भाव नहीं देखता बल्कि वो दुनिया की राजनीति, लोगों की साइकोलॉजी और इकॉनमी के रिश्तों को समझता है। यही वो विजन है जो उसे भीड़ से अलग खड़ा करता है।

मेंटल मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आपको मुश्किल वक्त में शांत रखता है। जब एक नया पायलट प्लेन में गड़बड़ी देखता है तो वह घबरा जाता है। लेकिन एक अनुभवी पायलट के दिमाग में पहले से ही हजारों सिमुलेशन चल रहे होते हैं। उसे पता होता है कि इस सिचुएशन में कौन सा बटन दबाना है। यह काबिलियत रातों रात नहीं आती। यह आती है सालों तक अपने काम को बारीकी से ऑब्जर्व करने से। अगर आप भी चाहते हैं कि लोग आपकी सूझबूझ की मिसाल दें तो आपको अपनी इन्फॉर्मेशन को नॉलेज में और नॉलेज को विजडम में बदलना होगा।

तो दोस्तों, आज हमने जाना कि टैलेंट सिर्फ एक शब्द है जिसे दुनिया मेहनत से बचने के लिए इस्तेमाल करती है। असली खेल तो डेलिब्रेट प्रैक्टिस, अपनी सीमाओं को तोड़ने और दिमाग में मजबूत मेंटल मॉडल बनाने का है। दुनिया आपको कहेगी कि आप यह नहीं कर सकते क्योंकि आप में वो 'बात' नहीं है। लेकिन अब आप जानते हैं कि वो 'बात' पैदा नहीं की जाती बल्कि कमाई जाती है।

अब वक्त आ गया है कि आप खुद से एक कड़वा सवाल पूछें। क्या आप अपनी पूरी जिंदगी एक एवरेज इंसान बनकर गुजारना चाहते हैं जो हमेशा दूसरों की कामयाबी को किस्मत का नाम देता रहे? या फिर आप आज से ही अपनी स्किल्स पर वो बोरिंग और दर्दनाक काम शुरू करेंगे जो आपको कल एक लेजेंड बना देगा? चुनाव आपका है। नीचे कमेंट में मुझे जरूर बताएं कि वो कौन सी एक स्किल है जिसे आप आज से मास्टर करना शुरू करेंगे। याद रखिए, आज की गई मेहनत ही कल का टैलेंट कहलाती है। उठिए और दुनिया को दिखा दीजिए कि आप क्या चीज हैं।

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