क्या आप भी अपनी टीम के साथ वही घिसे पिटे बॉस बनकर खुश हैं जिसे लोग पीठ पीछे कोसते हैं। बधाई हो आप अपनी कंपनी और करियर दोनों को डुबाने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं क्योंकि असली लीडरशिप का मतलब सिर्फ ऑर्डर देना नहीं होता। अगर आप अब भी पुराने तरीकों से चिपके हैं तो समझिए कि आप मार्केट में अपनी इज्जत और पैसा दोनों खो रहे हैं।
आज हम नोएल टिची की किताब द साइकिल ऑफ लीडरशिप से वो सीक्रेट्स समझेंगे जो एक साधारण मैनेजर को लेजेंडरी लीडर बना देते हैं। तैयार हो जाइए क्योंकि ये ३ लेसन आपके सोचने का तरीका पूरी तरह बदल देंगे।
Lesson : लीडरशिप इंजन - हर लेवल पर लीडर तैयार करना
ज्यादातर कंपनियों में पता है क्या प्रॉब्लम है। वहां बॉस को लगता है कि बस वही सबसे समझदार इंसान है और बाकी सब तो बस कीबोर्ड पर उंगलियां घिसने के लिए पैदा हुए हैं। नोएल टिची कहते हैं कि अगर आप अपनी कंपनी में अकेले जीनियस बने घूम रहे हैं तो असल में आप एक बहुत बड़े फेलियर की तरफ बढ़ रहे हैं। असली लीडरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप कितने लोगों को कंट्रोल करते हैं बल्कि इसका मतलब यह है कि आपने कितने नए लीडर्स तैयार किए हैं। इसे लेखक लीडरशिप इंजन कहते हैं।
सोचिए एक ऐसी पुरानी कार के बारे में जिसका सिर्फ एक ही टायर घूम रहा हो। क्या वह कार कभी रेस जीत पाएगी। बिल्कुल नहीं। आपकी कंपनी भी उसी कार जैसी है। अगर सिर्फ टॉप फ्लोर पर बैठा हुआ इंसान ही फैसले ले रहा है और नीचे वाले लोग सिर्फ सिर हिला रहे हैं तो आपकी कंपनी का इंजन बीच रास्ते में ही धुआं छोड़ देगा। एक सक्सेसफुल कंपनी वह होती है जहां सफाई करने वाले से लेकर मैनेजर तक हर कोई एक लीडर की तरह सोचता है। लेकिन हमारे यहाँ तो लोग अपनी कुर्सी से इतना चिपक कर बैठते हैं जैसे वह कोई पुश्तैनी जायदाद हो। उनको डर लगता है कि अगर जूनियर को सब सिखा दिया तो कल को वह उनकी जगह न ले ले। यह सोच वैसी ही है जैसे कोई डॉक्टर यह सोचे कि अगर उसने कंपाउंडर को पट्टी बांधना सिखा दिया तो उसका क्लिनिक बंद हो जाएगा।
असली लीडर वह है जो अपनी पावर को बांटता है न कि उसे तिजोरी में बंद करके रखता है। जब आप अपनी टीम को जिम्मेदारी देते हैं और उन्हें गलती करने की आजादी देते हैं तब जाकर एक असली लीडरशिप इंजन तैयार होता है। अगर आपकी गैर हाजिरी में आपकी टीम पागलों की तरह इधर उधर भागने लगे और काम ठप हो जाए तो यकीन मानिए आपने लीडरशिप नहीं बल्कि सिर्फ एक भीड़ जमा की है। एक महान लीडर वह है जो खुद को रिप्लेस करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। वह जानता है कि जब तक नीचे वाले लोग ऊपर नहीं आएंगे तब तक वह खुद और ऊपर नहीं जा पाएगा।
लेकिन हम इंडियंस को तो माइक्रो मैनेजमेंट की बीमारी है। हम चाहते हैं कि ईमेल का फॉन्ट साइज भी हम ही तय करें और चाय में चीनी कितनी होगी यह भी हमसे ही पूछा जाए। यह लीडरशिप नहीं बल्कि खुद को थका देने का एक शानदार तरीका है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी कंपनी एक रॉकेट की तरह उड़े तो आपको हर लेवल पर छोटे छोटे इंजन यानी लीडर्स फिट करने होंगे। जब हर कोई अपनी जिम्मेदारी खुद उठाने लगेगा तो आपको रोज रोज डंडा लेकर पीछे पड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। याद रखिए एक अकेला इंसान पहाड़ नहीं तोड़ सकता लेकिन अगर पूरी टीम लीडर बन जाए तो वह पहाड़ का रास्ता ही बदल सकती है।
Lesson : टीचेबल पॉइंट ऑफ व्यू - अपनी नॉलेज को हथियार बनाइये
क्या आपने कभी उस रिश्तेदार को देखा है जो शादी के फंक्शन में आकर सबको ज्ञान तो बहुत देता है लेकिन खुद को यह नहीं पता होता कि पनीर की सब्जी कहाँ रखी है। कॉर्पोरेट दुनिया में भी ऐसे बहुत से लीडर्स हैं जिनके पास बड़ी बड़ी डिग्रियां तो हैं पर उनके पास कोई टीचेबल पॉइंट ऑफ व्यू नहीं है। लेखक कहते हैं कि एक महान लीडर बनने के लिए आपके पास अपनी वैल्यूज और आइडियाज का एक क्लियर मैप होना चाहिए जिसे आप दूसरों के दिमाग में फिट कर सकें। अगर आप अपनी टीम को यह नहीं बता पा रहे कि हम यह काम क्यों कर रहे हैं और हमारी जीत का फॉर्मूला क्या है तो आप सिर्फ अंधेरे में तीर चला रहे हैं।
टीचेबल पॉइंट ऑफ व्यू का मतलब है कि आपके पास बिजनेस को लेकर एक ऐसी साफ सोच होनी चाहिए जो कोई भी आसानी से समझ सके। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आपकी मम्मी आपको रसोई में काम सिखाती हैं। उनके पास एक क्लियर विजन होता है कि नमक कब डालना है और मसाला कितना भूनना है। वह सिर्फ यह नहीं कहतीं कि खाना बना लो बल्कि वह आपको पूरा प्रोसेस सिखाती हैं। लेकिन हमारे ऑफिसों में तो गजब का खेल चलता है। बॉस आएगा और कहेगा कि इस महीने सेल्स बढ़ानी है। अब कैसे बढ़ानी है और उसका क्या प्लान है यह किसी को नहीं पता। यह तो वही बात हुई कि आप किसी को स्विमिंग पूल में धक्का दे दें और कहें कि चलो अब नेशनल चैंपियन बनकर बाहर निकलना।
एक लीडर के पास चार चीजों का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए यानी आइडियाज वैल्यूज इमोशनल एनर्जी और साहस। अगर आप अपनी टीम को यह नहीं समझा सकते कि मार्केट में क्या चल रहा है और हमें किस दिशा में जाना है तो आपकी टीम बस गोल गोल घूमती रहेगी। बहुत से लोग अपनी नॉलेज को छुपा कर रखते हैं जैसे वह कोई खजाना हो जिसे शेयर किया तो उसकी कीमत कम हो जाएगी। यह सोच आपको कभी बड़ा नहीं बनने देगी। असल में जब आप अपनी सोच को शब्दों में ढालकर दूसरों को सिखाते हैं तब आपकी खुद की समझ और भी ज्यादा मजबूत होती है।
लेकिन यहाँ तो हालत यह है कि मीटिंग्स में लोग ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जैसे वह नासा के वैज्ञानिक हों और सामने वाले बेचारे फ्रेशर्स हों। अगर आपका विजन इतना पेचीदा है कि उसे समझने के लिए डिक्शनरी लेकर बैठना पड़े तो समझ लीजिए कि आपके पास कोई टीचेबल पॉइंट ऑफ व्यू नहीं है। एक लेजेंडरी लीडर वह है जो सबसे मुश्किल बात को भी सबसे आसान तरीके से समझा दे। जब आपकी टीम के हर मेंबर को यह पता होता है कि कंपनी का मकसद क्या है तो वह खुद ब खुद मोटिवेटेड महसूस करते हैं। बिना क्लियर विजन के टीम को लीड करना वैसा ही है जैसे बिना जीपीएस के किसी अनजान शहर में गाड़ी चलाना। आप पहुँच तो कहीं न कहीं जाएंगे पर वहां नहीं जहाँ आप जाना चाहते थे।
Lesson : वर्चुअल साइकिल ऑफ टीचिंग - सिखाने से ही आप सीखेंगे
क्या आपने कभी गौर किया है कि जब घर का बड़ा बच्चा छोटे भाई को होमवर्क कराता है तो असल में बड़े वाले का कांसेप्ट ज्यादा क्लियर हो जाता है। नोएल टिची कहते हैं कि लीडरशिप कोई वन वे रोड नहीं है जहाँ आप बस ऊपर बैठकर प्रवचन देते रहें। यह एक वर्चुअल साइकिल यानी एक ऐसा चक्र है जहाँ आप अपनी टीम को सिखाते हैं और बदले में उनसे भी बहुत कुछ सीखते हैं। लेकिन हमारे यहाँ तो ईगो का इतना बड़ा पहाड़ है कि अगर जूनियर ने कोई अच्छा आइडिया दे दिया तो बॉस को लगता है कि उसकी बेइज्जती हो गई। वह सोचने लगता है कि कल का आया लड़का मुझे सिखाएगा कि धंधा कैसे चलता है।
यही वह सोच है जो बड़ी बड़ी कंपनियों को मिट्टी में मिला देती है। एक असली लीडर वह नहीं है जो हर सवाल का जवाब जानता हो बल्कि वह है जो सही सवाल पूछना जानता हो। जब आप सिखाने के इरादे से अपनी टीम के साथ बैठते हैं तो आप उनकी मुश्किलों को और मार्केट की असली सच्चाई को करीब से देख पाते हैं। यह वैसा ही है जैसे कोई कुक सिर्फ रेसिपी बुक पढ़कर मास्टर शेफ नहीं बन सकता जब तक कि वह किचन की गर्मी और मसालों की खुशबू को महसूस न करे। जब आप अपनी टीम को कोच करते हैं तो आप खुद को भी अपडेट कर रहे होते हैं।
आजकल की दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि अगर आप सिर्फ अपने पुराने अनुभवों के भरोसे बैठे रहे तो आप बहुत जल्दी आउटडेटेड हो जाएंगे। आपकी टीम में जो नए लड़के लड़कियां आ रहे हैं उनके पास टेक्नोलॉजी और नए ट्रेंड्स की जबरदस्त नॉलेज होती है। एक स्मार्ट लीडर वह है जो उन्हें अपना विजन सिखाता है और उनसे नई दुनिया के टूल्स सीखता है। लेकिन हमें तो बस मीटिंग्स में अपनी आवाज सुनना पसंद है। हमें लगता है कि जितना ज्यादा हम बोलेंगे उतने ही बड़े लीडर कहलाएंगे। असलियत में जो लीडर सिर्फ बोलता है वह सिर्फ शोर मचाता है और जो लीडर दूसरों की सुनकर उन्हें सिखाता है वह एक लेगेसी बनाता है।
इस वर्चुअल साइकिल को शुरू करने के लिए आपको अपना चश्मा उतारकर अपनी टीम के जूतों में पैर डालकर देखना होगा। जब आप सिखाने की प्रोसेस को एक रूटीन बना लेते हैं तो पूरी कंपनी का माहौल बदल जाता है। लोग सवाल पूछने से नहीं डरते और नए एक्सपेरिमेंट करने से नहीं कतराते। याद रखिए जिस दिन आपने यह सोच लिया कि आपको अब कुछ और सीखने की जरूरत नहीं है उसी दिन से आपका पतन शुरू हो जाता है। लीडरशिप एक कभी न खत्म होने वाली क्लास है जहाँ टीचर और स्टूडेंट की भूमिका हर पल बदलती रहती है। अगर आप खुद को एक स्टूडेंट बनाए रखेंगे तभी आप एक महान टीचर यानी लीडर बन पाएंगे।
तो दोस्तों, क्या आप भी अपनी कंपनी में वही पुराने घिसे पिटते मैनेजर बने रहना चाहते हैं या फिर एक ऐसा लीडरशिप इंजन बनाना चाहते हैं जो कभी न रुके। लीडरशिप कोई पद नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है अपनी टीम को खुद से बेहतर बनाने की। आज ही अपनी टीम के साथ बैठिये उनसे अपनी नॉलेज शेयर कीजिये और उनके नए नजरिए को समझने की कोशिश कीजिये। याद रखिये आपकी असली कामयाबी इसमें नहीं है कि आपने कितने पैसे कमाए बल्कि इसमें है कि आपने अपने पीछे कितने काबिल लीडर्स छोड़े। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर कीजिये जो अपनी टीम को लीड करने के लिए संघर्ष कर रहा है। नीचे कमेंट में बताइये कि एक लीडर की सबसे बड़ी खूबी क्या होनी चाहिए।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#Leadership #BusinessGrowth #TeamBuilding #ManagementTips #SuccessMindset
_