The Gone Fishin' Portfolio (Hindi)


क्या आप अभी भी उन स्टॉक मार्केट गुरुओं की बातें सुनकर अपना सर फोड़ रहे हैं जो खुद अपनी चाय का पैसा ट्रेडिंग से नहीं निकाल पाते। बधाई हो। आप अपनी मेहनत की कमाई और सुकून दोनों को कचरे के डिब्बे में फेंक रहे हैं। जब तक आप स्क्रीन से चिपके रहेंगे तब तक असली लाइफ तो बस दूसरों के स्टेटस में ही दिखेगी।

लेकिन रुकिए। अलेक्जेंडर ग्रीन की यह बुक आपको उस दलदल से बाहर निकाल सकती है। आज हम द गॉन फिशिन पोर्टफोलियो के वो सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी इन्वेस्टमेंट की टेंशन खत्म करके आपको लाइफ एन्जॉय करने का टाइम देंगे।


लेसन १ : सिम्पलिसिटी का पावर और मार्केट प्रेडिक्शन का जाल

क्या आपको भी लगता है कि स्टॉक मार्केट में पैसा बनाने के लिए आपको कोई रॉकेट साइंटिस्ट या अंतर्यामी होना पड़ेगा। अगर हां, तो आप उन लाखों लोगों में शामिल हैं जो हर रोज न्यूज चैनल पर सूट पहनकर चिल्लाने वाले एक्सपर्ट्स की बातें सुनकर अपना पैसा डुबोते हैं। अलेक्जेंडर ग्रीन इस बुक में सबसे पहले इसी भ्रम को तोड़ते हैं। वो कहते हैं कि मार्केट कल ऊपर जाएगा या नीचे, यह बात दुनिया में किसी को नहीं पता। जो कहता है कि उसे पता है, वो या तो झूठ बोल रहा है या फिर वो खुद को धोखा दे रहा है।

सोचिए आप एक ऐसी रेस में दौड़ रहे हैं जहां फिनिश लाइन हर पांच मिनट में बदल जाती है। आप कभी इधर भागते हैं तो कभी उधर। अंत में आप थक कर गिर जाते हैं और हाथ में कुछ नहीं आता। इन्वेस्टिंग के साथ भी लोग यही करते हैं। कभी इस टिप के पीछे भागते हैं तो कभी उस वायरल स्टॉक के पीछे। अलेक्जेंडर ग्रीन कहते हैं कि मार्केट को हराने की कोशिश करना एक बेवकूफी भरा खेल है। असली समझदारी मार्केट के साथ चलने में है। उन्होंने हमें सिखाया कि इन्वेस्टमेंट को जितना सिंपल रखोगे, उतना ही अमीर बनोगे।

हमारे शर्मा जी को ले लीजिए। शर्मा जी को लगता है कि वो अगले झुनझुनवाला हैं। वो हर आधे घंटे में अपना पोर्टफोलियो चेक करते हैं। जैसे ही कोई न्यूज आती है कि अमेरिका में किसी बैंक को जुकाम हुआ है, शर्मा जी यहां इंडिया में अपने सारे शेयर्स छींकते हुए बेच देते हैं। नतीजा। ब्रोकर अमीर हो गया और शर्मा जी के बाल सफेद हो गए। वहीं दूसरी तरफ है गॉन फिशिन पोर्टफोलियो का तरीका। यह तरीका कहता है कि एक बार एक सॉलिड और सिंपल सिस्टम बनाओ और फिर जाकर मछली पकड़ो या सो जाओ।

सिम्पलिसिटी का मतलब यह नहीं कि आप आलसी हैं। इसका मतलब है कि आप इतने समझदार हैं कि आपको पता है कि आपकी एनर्जी कहां लगनी चाहिए। स्क्रीन पर लाल और हरी मोमबत्तियां देखने से पैसा नहीं बनता, बल्कि डिसिप्लिन से बनता है। जब आप मार्केट को प्रेडिक्ट करना छोड़ देते हैं, तब आप असल में इन्वेस्ट करना शुरू करते हैं। यह लेसन हमें सिखाता है कि कॉम्प्लिकेटेड चीजें अक्सर फेल हो जाती हैं, लेकिन एक साधारण सा इंडेक्स फंड और फिक्स्ड सिस्टम कभी धोखा नहीं देता। तो अगली बार जब कोई आपको 'हॉट टिप' देने आए, तो उसे चाय पिलाकर विदा कर दीजिए और अपनी सिम्पलिसिटी पर भरोसा रखिए।


लेसन २ : एसेट एलोकेशन की ताकत और रिस्क का मैनेजमेंट

अगर आप अपना सारा पैसा सिर्फ एक ही बास्केट में रखते हैं तो समझ लीजिए कि आप अपनी किस्मत के साथ जुआ खेल रहे हैं। अलेक्जेंडर ग्रीन कहते हैं कि एक स्मार्ट इन्वेस्टर वो नहीं है जो सबसे ज्यादा रिटर्न वाला स्टॉक खोज ले बल्कि वो है जो अपने पैसे को इस तरह फैला दे कि मार्केट गिरे या उठे उसे फर्क न पड़े। इसी को हम 'एसेट एलोकेशन' कहते हैं। लोग अक्सर गलती क्या करते हैं। जब मार्केट ऊपर होता है तो वो जोश में आकर अपना सारा पैसा स्टॉक्स में डाल देते हैं और जब मार्केट गिरता है तो उनके पास रोने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचता।

कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसी थाली सजा रहे हैं जिसमें सिर्फ और सिर्फ मिर्च है। क्या आप उसे खा पाएंगे। बिल्कुल नहीं। एक अच्छी थाली वो होती है जिसमें दाल, रोटी, सब्जी और थोड़ा सा मीठा भी हो। इसी तरह आपका पोर्टफोलियो भी बैलेंस्ड होना चाहिए। अलेक्जेंडर ग्रीन ने इस बुक में एक बहुत ही खास फॉर्मूला दिया है। वो कहते हैं कि अपने पैसे को अलग अलग जगह जैसे डोमेस्टिक स्टॉक्स, इंटरनेशनल स्टॉक्स, बांड्स और रियल एस्टेट में बांट दीजिए। इससे फायदा यह होता है कि अगर एक सेक्टर डूब रहा है तो दूसरा आपको बचा लेगा।

हमारे एक दोस्त हैं वर्मा जी। वर्मा जी को किसी ने कह दिया कि 'गोल्ड' ही असली राजा है। उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी सोने के बिस्किट खरीदने में लगा दी। अब हुआ यह कि अगले पांच साल तक गोल्ड का भाव वहीं का वहीं रहा और उधर स्टॉक मार्केट रॉकेट बन गया। वर्मा जी अब सोने के बिस्किट देख कर ठंडी आहें भरते हैं। वहीं अगर उन्होंने एसेट एलोकेशन का इस्तेमाल किया होता तो उनके पास स्टॉक्स का प्रॉफिट भी होता और गोल्ड की सेफ्टी भी।

ज्यादातर लोग इन्वेस्टमेंट को एक स्प्रिंट रेस समझते हैं लेकिन यह असल में एक मैराथन है। एसेट एलोकेशन आपको उस मैराथन में टिके रहने की ताकत देता है। ग्रीन हमें सिखाते हैं कि साल में सिर्फ एक बार अपने पोर्टफोलियो को चेक करें और उसे रीबैलेंस करें। यानी जो एसेट बहुत ज्यादा बढ़ गया है उसे थोड़ा बेचें और जो कम हो गया है उसे थोड़ा और खरीदें। यह सुनने में बहुत बोरिंग लग सकता है लेकिन यकीन मानिए दुनिया के सबसे अमीर लोग इसी 'बोरिंग' तरीके से पैसा बनाते हैं। आपको जीनियस बनने की जरूरत नहीं है बस आपको एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो आपकी भावनाओं पर लगाम लगा सके। जब आपका पैसा अलग अलग जगह बंटा होता है तब आप रात को सुकून की नींद सो सकते हैं क्योंकि आपको पता है कि कोई भी एक घटना आपको सड़क पर नहीं ला सकती।


लेसन ३ : टाइम की वैल्यू और असली वेल्थ का मतलब

क्या आपने कभी सोचा है कि आप अपनी लाइफ के सबसे कीमती घंटे एक ऐसी स्क्रीन को देखने में बिता रहे हैं जिसमें बस नंबर्स ऊपर नीचे हो रहे हैं। अलेक्जेंडर ग्रीन इस बुक में एक बहुत गहरी बात कहते हैं कि पैसा सिर्फ एक साधन है लेकिन असली मंजिल तो वह 'समय' है जिसे आप अपनी मर्जी से जी सकें। 'द गॉन फिशिन पोर्टफोलियो' का नाम ही इसलिए रखा गया है ताकि आप अपना पोर्टफोलियो सेट करें और फिर आराम से मछली पकड़ने चले जाएं। यानी अपनी हॉबी को जिएं। अपने परिवार के साथ वक्त बिताएं। लाइफ को सिर्फ फाइल्स और चार्ट्स में मत खोजिए।

दुनिया में सबसे बड़ी गरीबी पैसे की कमी नहीं बल्कि समय की कमी है। लोग अमीर तो होना चाहते हैं लेकिन वो अमीर बनने के चक्कर में इतने बिजी हो जाते हैं कि जब पैसा आता है तब उसे एन्जॉय करने की हेल्थ और उम्र ही नहीं बचती। अलेक्जेंडर ग्रीन हमें सिखाते हैं कि एक बार जब आपका एसेट एलोकेशन सेट हो जाए और आपका सिस्टम ऑटो मोड पर आ जाए तब आपको मार्केट की खबरों से खुद को पूरी तरह काट लेना चाहिए। अगर आप हर दिन न्यूज देख रहे हैं तो आप इन्वेस्टमेंट नहीं कर रहे बल्कि आप एक बिना पगार वाली नौकरी कर रहे हैं जो आपको सिर्फ स्ट्रेस दे रही है।

मान लीजिए हमारे गुप्ता जी हैं। गुप्ता जी ने बहुत मेहनत करके करोड़ों रुपये जोड़ लिए। लेकिन उनका हाल यह है कि वो अपनी बेटी की शादी में भी लैपटॉप खोलकर बैठे हैं क्योंकि मार्केट में क्रैश आ गया है। अब आप ही बताइए क्या वो करोड़ों रुपये किसी काम के हैं अगर वो अपनी लाइफ के सबसे खूबसूरत पलों को भी सुकून से नहीं जी पा रहे। वहीं दूसरी तरफ एक समझदार इन्वेस्टर है जिसने अपना सिस्टम बनाया और अब वो साल में सिर्फ एक बार अपना पोर्टफोलियो देखता है। बाकी समय वो अपनी मनपसंद किताबें पढ़ता है या पहाड़ों की सैर करता है। असली अमीरी वही है जहां आपको बैंक बैलेंस देखने के लिए ब्लड प्रेशर की गोली न खानी पड़े।

अलेक्जेंडर ग्रीन की यह फिलॉसफी हमें एक बहुत बड़ा लेसन देती है कि वेल्थ का मतलब सिर्फ गाड़ियां या बंगला नहीं है बल्कि वेल्थ का असली मतलब है 'आजादी'। आजादी अपनी सुबह को अपनी पसंद से शुरू करने की। आजादी उन लोगों के साथ रहने की जिनसे आप प्यार करते हैं। जब आप इस बुक के बताए रास्तों पर चलते हैं तो आप सिर्फ अमीर नहीं बनते बल्कि आप 'वाइज' यानी समझदार बनते हैं। याद रखिए कि कब्र में कोई भी अपना पोर्टफोलियो साथ लेकर नहीं जाता लेकिन वो यादें जरूर साथ रहती हैं जो आपने अपनी लाइफ को खुलकर जीते हुए बनाई थीं। तो उठिए अपना पोर्टफोलियो सेट कीजिए और अपनी लाइफ को वापस अपने हाथों में लीजिए।


तो दोस्तों, क्या आप तैयार हैं उस चूहा दौड़ से बाहर निकलने के लिए जो आपको सिर्फ थकान दे रही है। आज ही फैसला कीजिए कि आप अपने पैसे के गुलाम नहीं बल्कि उसके मालिक बनेंगे। अलेक्जेंडर ग्रीन की यह बुक हमें सिखाती है कि पैसा कमाना आसान है अगर हम अपनी ईगो को बीच में न आने दें। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो दिन भर मार्केट की टेंशन में रहते हैं और कमेंट्स में बताइए कि आप अपनी लाइफ का फ्री टाइम किस काम में बिताना चाहेंगे। चलिए मिलकर एक ऐसी लाइफ बनाते हैं जहां पैसा हमारे लिए काम करे और हम अपनी लाइफ के लिए जिएं।

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