अगर आपको लगता है कि आप बहुत स्मार्ट हैं और दुनिया को समझते हैं तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की ओर बढ़ रहे हैं। टेक्नोलॉजी बदल रही है और आप पुराने खयालों को पकड़कर बैठे हैं। क्या आप उस कबाड़ की तरह पीछे छूटना चाहते हैं जिसे कोई याद नहीं रखता। यह आलस आपको बहुत महंगा पड़ने वाला है।
केविन केली की किताब द इनएविटेबल हमें उन ताकतों के बारे में बताती है जो हमारे भविष्य को तय करेंगी। अगर आप इन बदलावों को नहीं समझेंगे तो आप पीछे रह जाएंगे। चलिए जानते हैं वह 3 बड़े लेसन जो आपकी लाइफ बदल देंगे।
लेसन १ : बिकमिंग - हमेशा एक नौसिखिया बने रहना ही असली पावर है
दोस्तो, आज के समय में अगर आप यह सोचकर बैठे हैं कि आपने पढ़ाई पूरी कर ली है और अब आपको कुछ नया सीखने की जरूरत नहीं है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। केविन केली अपनी किताब में सबसे पहला और जरूरी लेसन देते हैं बिकमिंग का। इसका मतलब यह है कि भविष्य में कोई भी चीज कभी भी पूरी तरह से कंप्लीट नहीं होगी। सब कुछ हमेशा बनता रहेगा यानी वह प्रोसेस में रहेगा। आज आपने जो नया फोन खरीदा है वह कल पुराना हो जाएगा और उसका सॉफ्टवेयर अपडेट मांगना शुरू कर देगा। ठीक वैसे ही हमारी स्किल्स और हमारा ज्ञान भी हर पल अपडेट मांग रहा है।
जरा सोचिए आपके घर में वह चाचा या ताऊ जी जरूर होंगे जिन्हें आज भी व्हाट्सएप पर फोटो भेजना नहीं आता। वह आज भी फोन लेकर आपके पास आते हैं और कहते हैं कि बेटा जरा देखना इसमें यह क्या हो गया। वह पीछे क्यों छूट गए क्योंकि उन्होंने सीखना बंद कर दिया। उन्होंने मान लिया कि जो वह जानते हैं वही काफी है। लेकिन इस बदलती दुनिया में आप कभी भी एक्सपर्ट बनकर नहीं बैठ सकते। यहाँ हर कोई हमेशा एक न्यूबी यानी नौसिखिया ही रहेगा। चाहे आप कितने भी बड़े इंजीनियर हों या डॉक्टर अगर आपने नई टेक्नोलॉजी के साथ हाथ नहीं मिलाया तो आप आउटडेटेड हो जाएंगे।
मान लीजिए आप एक बहुत बड़े हलवाई हैं और आपकी दुकान की मिठाई पूरे शहर में मशहूर है। लेकिन अचानक जमाना बदलता है और लोग अब डाइट वाली मिठाइयां मांगने लगते हैं। आप गुस्से में कहते हैं कि मैं तो असली घी की ही मिठाई बनाऊंगा क्योंकि मेरे दादाजी भी यही बनाते थे। नतीजा क्या होगा। आपकी दुकान खाली रहेगी और बगल वाला लड़का जो कल तक कुछ नहीं जानता था वह यूट्यूब से नई रेसिपी सीखकर आपसे आगे निकल जाएगा। यहाँ आपकी साख नहीं बल्कि आपकी बदलने की हिम्मत काम आती है।
भविष्य में हर चीज वर्जन 1.0 से 2.0 पर जाती रहेगी। अगर आप यह सोच रहे हैं कि एक बार मेहनत करके आप पूरी जिंदगी आराम करेंगे तो आप शायद किसी दूसरी दुनिया की बात कर रहे हैं। यहाँ तो आपको हर सुबह उठकर खुद को अपडेट करना होगा। केविन केली कहते हैं कि आने वाले समय में सबसे बड़ी स्किल यह नहीं होगी कि आप क्या जानते हैं बल्कि यह होगी कि आप कितनी जल्दी पुरानी चीजों को भूलकर नई चीजें सीख सकते हैं। जो इंसान यह मान लेता है कि उसे सब आता है असल में उसकी ग्रोथ वहीं रुक जाती है।
हम एक ऐसी दुनिया में जा रहे हैं जहाँ स्टेबिलिटी यानी स्थिरता एक धोखा है। यहाँ सिर्फ वही टिकेगा जो बहते पानी की तरह अपनी दिशा बदलता रहेगा। अगर आप जड़ बन गए तो आप टूट जाएंगे। इसलिए खुद को हमेशा एक स्टूडेंट की तरह रखें। यह मत सोचिए कि लोग क्या कहेंगे अगर आप 30 की उम्र में कुछ नया सीख रहे हैं। यकीन मानिए अगर आप नहीं सीखेंगे तो लोग आप पर हसेंगे जब आप बदलते वक्त के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएंगे। बिकमिंग का यह प्रोसेस थकाने वाला लग सकता है लेकिन यही वह रास्ता है जो आपको कल के लिए तैयार करेगा।
लेसन २ : कॉग्नीफाइंग - अब हर चीज के पास अपना दिमाग होगा
दोस्तो, अब जरा अपनी चारों तरफ नजर घुमाइए। आपको क्या दिखता है। एक साधारण सा पंखा। एक पानी की बोतल। या शायद आपकी पुरानी साइकिल। केविन केली कहते हैं कि आने वाले सालों में इन बेजान चीजों में भी जान आ जाएगी। और वह जान होगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की। इसे लेखक ने कॉग्नीफाइंग कहा है। इसका सीधा मतलब है किसी भी चीज को स्मार्ट बनाना। जैसे हमने बिजली का आविष्कार किया और हर चीज को बिजली से चला दिया वैसे ही अब हम हर चीज को एआई से जोड़ देंगे।
जरा सोचिए अभी आप अपने फ्रिज के पास जाते हैं और देखते हैं कि दूध खत्म हो गया है। फिर आप खुद बाजार जाते हैं या ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं। लेकिन कॉग्नीफाइंग के बाद आपका फ्रिज खुद ही जान जाएगा कि दूध खत्म होने वाला है। वह आपके टेस्ट और बजट के हिसाब से खुद ही ऑर्डर कर देगा और आपके उठने से पहले दूध दरवाजे पर होगा। आपको लगेगा कि फ्रिज के पास अपना दिमाग आ गया है। लेकिन असल में वह एआई की ताकत होगी।
मान लीजिए आपकी एक पुरानी कार है जो बीच सड़क पर बंद हो जाती है। आप उसे गालियां देते हैं और अपना सिर पकड़ लेते हैं। लेकिन एआई वाले जमाने में आपकी कार खुद आपसे कहेगी कि भाई साहब मुझे गालियां देने से कुछ नहीं होगा। मेरी बैटरी में दिक्कत है और मैंने पास वाले मैकेनिक को मैसेज भेज दिया है वह अगले पांच मिनट में यहाँ होगा। तब आपको अहसास होगा कि आपकी कार आपसे ज्यादा समझदार हो चुकी है।
लोग अक्सर डरते हैं कि एआई उनकी नौकरियां छीन लेगा। लेकिन केविन केली का नजरिया अलग है। वह कहते हैं कि एआई नौकरियां नहीं छीनेगा बल्कि वह हमारे काम करने के तरीके को बदल देगा। पुराने समय में जब ट्रैक्टर आया था तो किसानों को लगा था कि अब उनका क्या होगा। लेकिन ट्रैक्टर ने खेती को और आसान बना दिया। वैसे ही एआई हमारे लिए एक पार्टनर की तरह काम करेगा। जो काम बोरिंग और थकाने वाले हैं वह एआई करेगा और हम अपनी क्रिएटिविटी पर ध्यान दे पाएंगे।
लेकिन यहाँ एक बड़ा कटाक्ष भी है। हम मशीनों को तो स्मार्ट बना रहे हैं लेकिन क्या हम खुद स्मार्ट हो रहे हैं। आज हालत यह है कि अगर मैप्स काम न करें तो हम अपने घर का रास्ता भूल जाएं। हम इतने निर्भर हो चुके हैं कि बिना एआई के हमारा दिमाग चलना बंद कर देता है। कॉग्नीफाइंग का असली फायदा तभी है जब हम एआई को अपना गुलाम बनाकर रखें न कि उसके गुलाम बन जाएं। भविष्य में वही इंसान सबसे ज्यादा कमाएगा जो एआई को सही कमांड देना जानता होगा।
आने वाले समय में एआई कोई लग्जरी नहीं बल्कि बिजली की तरह एक जरूरत बन जाएगा। जैसे आज आप बिना बिजली के घर की कल्पना नहीं कर सकते वैसे ही भविष्य में आप बिना एआई वाली किसी भी चीज की कल्पना नहीं कर पाएंगे। चाहे वह आपका जूता हो जो आपको बताएगा कि आप आज कम चले हैं या आपका चश्मा जो आपको सामने वाले का नाम याद दिला देगा जिसे आप भूल चुके हैं। यह सब सुनने में जादू जैसा लगता है लेकिन यह बहुत जल्द हकीकत बनने वाला है। और जो इस जादू को नहीं समझेगा वह बस हाथ मलता रह जाएगा।
लेसन ३ : एक्सेसिंग - मालिक बनना अब पुराना फैशन हो चुका है
दोस्तो, याद करिए वह दिन जब हमें गाने सुनने के लिए सीडी खरीदनी पड़ती थी या फिल्में देखने के लिए डीवीडी का कलेक्शन रखना पड़ता था। केविन केली कहते हैं कि अब वह जमाना गया। अब हम ओनरशिप यानी मालिकाना हक से निकलकर एक्सेसिंग यानी इस्तेमाल करने के युग में आ चुके हैं। आज आपको गाने सुनने के लिए कोई कैसेट खरीदने की जरूरत नहीं है। आपके पास स्पॉटिफाई या यूट्यूब का एक्सेस है। आपको फिल्म संभाल कर रखने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपके पास नेटफ्लिक्स का एक्सेस है। भविष्य में यह ट्रेंड और भी खतरनाक लेवल पर जाने वाला है।
जरा सोचिए आप लाखों रुपये खर्च करके एक कार खरीदते हैं। फिर उसका इंश्योरेंस भरते हैं। उसकी सर्विसिंग करवाते हैं। और वह कार दिन के 22 घंटे आपके गैराज में खड़ी धूल फांकती है। क्या यह समझदारी है। केविन केली के हिसाब से यह बेवकूफी है। आने वाले समय में लोग कार खरीदना बंद कर देंगे। जब भी आपको कहीं जाना होगा आप बस एक बटन दबाएंगे और एक बिना ड्राइवर वाली कार आपके दरवाजे पर खड़ी होगी। आप उसका इस्तेमाल करेंगे और वह चली जाएगी। आपको न पार्किंग की चिंता होगी और न ही टायर फटने की।
मान लीजिए आप अपनी शादी के लिए एक बहुत महंगी शेरवानी खरीदते हैं जिसकी कीमत 50 हजार रुपये है। आप उसे सिर्फ एक दिन पहनते हैं और उसके बाद वह अगले 20 साल तक आपकी अलमारी के किसी कोने में चूहे खा रहे होते हैं। लेकिन एक्सेसिंग वाली दुनिया में आप वही शेरवानी सिर्फ उस एक दिन के लिए रेंट पर लेंगे। आपके पैसे भी बचेंगे और अलमारी में जगह भी। लेकिन हमारे समाज में आज भी लोग चीजों को जमा करने के शौकीन हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा चीजें उनके पास होंगी वह उतने ही बड़े आदमी कहलाएंगे। सच तो यह है कि जितनी ज्यादा चीजें आप पालेंगे आप उतने ही ज्यादा उनके गुलाम बनते जाएंगे।
भविष्य में सॉफ्टवेयर से लेकर हार्डवेयर तक और घर से लेकर ऑफिस तक सब कुछ सर्विस के रूप में मिलेगा। हमें चीजों को अपने पास रखने का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। जब हमें किसी चीज की जरूरत होगी वह हमारे पास तुरंत मौजूद होगी। इंटरनेट की स्पीड और क्लाउड टेक्नोलॉजी ने इसे मुमकिन बना दिया है। आज आपकी सारी कीमती तस्वीरें और फाइल्स आपके फोन में नहीं बल्कि क्लाउड पर हैं। फोन खो जाए तो गम नहीं क्योंकि डेटा तो आपके पास हमेशा एक्सेसिबल है।
लेकिन यहाँ एक पेंच है। जब आप किसी चीज के मालिक नहीं होते तो आपके पास उसे कंट्रोल करने की ताकत भी कम हो जाती है। अगर कल को कंपनी ने अपनी सर्विस बंद कर दी तो आप क्या करेंगे। इसलिए एक्सेसिंग के इस दौर में आपको स्मार्ट बनना होगा। आपको यह समझना होगा कि किन चीजों का मालिक बनना जरूरी है और किन चीजों का सिर्फ इस्तेमाल करना काफी है। यह बदलाव सिर्फ पैसों की बचत नहीं है बल्कि यह एक मानसिक आजादी है। जब आप चीजों के बोझ से आजाद होते हैं तभी आप असली ग्रोथ के बारे में सोच पाते हैं।
तो दोस्तो, केविन केली की यह किताब हमें डराती नहीं है बल्कि एक नई दुनिया के लिए तैयार करती है। बदलाव आ रहा है और वह इनएविटेबल है यानी उसे रोका नहीं जा सकता। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप उस पुराने सॉफ्टवेयर की तरह बनना चाहते हैं जो नए जमाने के कंप्यूटर पर नहीं चलता। या आप खुद को हर रोज अपडेट करके इस भविष्य का हिस्सा बनना चाहते हैं। नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं कि इन 3 लेसन में से कौन सा आपको सबसे ज्यादा झटका देने वाला लगा। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो आज भी पुरानी सोच में फंसे हैं। जाग जाइए क्योंकि कल बहुत तेजी से आ रहा है।
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