अगर आपको लगता है कि आपका बिजनेस मंदी की वजह से रुका है तो आप खुद को धोखा दे रहे हैं। असल में आपकी पुरानी घिसी पिटी स्ट्रेटेजी ही आपके प्रॉफिट को दीमक की तरह चाट रही है। जब आपके कॉम्पिटिटर पैसा छाप रहे हैं तब आप बस हाथ पर हाथ धरे अपनी बर्बादी का तमाशा देख रहे हैं।
जे अब्राहम की द स्टिकिंग पॉइंट सलूशन आपको उस बिजनेस की दलदल से बाहर निकालेगी जहाँ आप फंसे हुए हैं। चलिए जानते हैं वो ३ पावरफुल लेसन जो आपके बिजनेस की किस्मत बदल देंगे।
लेसन १ : बिजनेस को रेंगने से बचाओ और उड़ना सीखो (द स्टे स्ट्रेटेजी)
ज्यादातर इंडियन बिजनेस ओनर्स की सबसे बड़ी समस्या पता है क्या है। वे बस किसी तरह सर्वाइव करने की कोशिश करते हैं। उनका पूरा दिन इसी में निकल जाता है कि बस आज का खर्चा निकल जाए और बिजली का बिल भर दिया जाए। अगर आप भी इसी कैटेगरी में आते हैं तो मुबारक हो आप एक बिजनेसमैन नहीं बल्कि एक ऐसे मजदूर हैं जिसने खुद को ही नौकरी पर रखा हुआ है। जे अब्राहम कहते हैं कि बिजनेस में स्टैग्नेशन यानी ठहराव तब आता है जब आप अपनी प्रोग्रेस से संतुष्ट हो जाते हैं। आप सोचते हैं कि पिछले साल भी इतना ही कमाया था तो इस साल भी इतना काफी है। लेकिन भाई साहब महंगाई और कॉम्पिटिशन के दौर में अगर आप आगे नहीं बढ़ रहे हैं तो असल में आप पीछे जा रहे हैं।
मान लीजिए आपके पड़ोस में एक शर्मा जी की किराने की दुकान है। शर्मा जी पिछले २० साल से वही पुरानी टूटी हुई दराज और धूल भरी अलमारियों के साथ बैठे हैं। वे आज भी वही पुराना हिसाब किताब रखते हैं और कस्टमर के आने का इंतज़ार करते हैं। वहीं दूसरी तरफ एक लड़का आता है जो अपनी दुकान को थोड़ा मॉडर्न बनाता है और होम डिलीवरी शुरू कर देता है। अब शर्मा जी उसे देखकर जलते तो बहुत हैं लेकिन खुद को बदलने को तैयार नहीं हैं। वे कहते हैं कि हमारे जमाने में तो लोग खुद दुकान पर आते थे। अरे भाई वो जमाना गया। अब लोग आलसी हो चुके हैं और अगर आप उनकी सुविधा के हिसाब से नहीं बदलेंगे तो आप इतिहास बन जाएंगे।
जे अब्राहम यहाँ द स्टे स्ट्रेटेजी की बात करते हैं। इसका मतलब है कि आपको अपने बिजनेस के हर छोटे हिस्से को कम से कम १० परसेंट बेहतर बनाना होगा। अगर आपकी मार्केटिंग बेकार है तो उसे सुधारिए। अगर आपकी सेल्स टीम बस फोन पर गप्पे मारती है तो उन्हें काम पर लगाइए। अक्सर लोग सोचते हैं कि कोई बहुत बड़ा चमत्कार होगा और रातों रात करोड़ों रुपये आ जाएंगे। लेकिन हकीकत में छोटी छोटी सुधार ही आपको बड़ी जीत दिलाती हैं। अगर आप अपने बिजनेस के हर प्रोसेस को थोड़ा थोड़ा भी ऑप्टिमाइज करते हैं तो साल के अंत में आपका प्रॉफिट कई गुना बढ़ सकता है।
क्या आप अभी भी उसी पुरानी घिसी पिटी सोच के साथ बैठे हैं जो आपको अमीर बनाने का सिर्फ सपना दिखाती है। अगर आप अपने बिजनेस को एक स्टक सिचुएशन से बाहर निकालना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी मानसिक जंजीरों को तोड़िए। सिर्फ सर्वाइव करना बंद कीजिए और थ्राइव करना शुरू कीजिए। जब तक आप खुद को और अपने काम करने के तरीके को अपग्रेड नहीं करेंगे तब तक दुनिया आपको कचरे के डिब्बे में डालने के लिए तैयार खड़ी है। याद रखिए मार्केट को आपकी भावनाओं से कोई मतलब नहीं है उसे सिर्फ रिजल्ट चाहिए।
लेसन २ : मुफ्त की मार्केटिंग सेना खड़ी करो (रेफरल सिस्टम)
अब बात करते हैं उस सबसे बड़ी गलती की जो हर दूसरा देसी बिजनेसमैन करता है। वो है नए ग्राहकों के पीछे पागलों की तरह भागना और पुराने ग्राहकों को भूल जाना। आप फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों रुपये के ऐड चलाते हैं ताकि कोई अनजान व्यक्ति आपकी दुकान पर आए। लेकिन क्या आपने कभी उस कस्टमर की तरफ देखा है जो पहले से आपसे जुड़ा हुआ है। जे अब्राहम कहते हैं कि आपका सबसे कीमती असेट आपके मौजूदा ग्राहक हैं। अगर आप उनसे रेफरल नहीं मांग रहे हैं तो आप अपनी टेबल पर पड़ा हुआ पैसा छोड़ रहे हैं। और यकीन मानिए आपके कॉम्पिटिटर उस पैसे को उठाने के लिए गिद्ध की तरह नजरें गड़ाए बैठे हैं।
मान लीजिए एक मशहूर जिम है जहाँ लोग बॉडी बनाने जाते हैं। जिम का ओनर हर महीने नए लोगों को जोड़ने के लिए सड़कों पर पर्चे बंटवाता है। लेकिन जो लोग पहले से वहां पसीना बहा रहे हैं वो उनसे कभी बात तक नहीं करता। अब सोचिए अगर वो ओनर अपने पुराने मेंबर्स से कहे कि भाई अगर तुम अपने किसी मोटे दोस्त को यहाँ लाते हो तो तुम्हें एक महीने की फीस माफ कर दी जाएगी। क्या होगा। वो मेंबर अपने पूरे खानदान और मोहल्ले को जिम खींच लाएगा क्योंकि उसे फ्री में वर्कआउट करना है। इसे कहते हैं बिना एक रुपया खर्च किए अपनी मार्केटिंग टीम खड़ी करना। लेकिन अफसोस की बात ये है कि ज्यादातर लोग रेफरल मांगने में ऐसे शर्माते हैं जैसे कोई दामाद पहली बार ससुराल में खाना मांग रहा हो।
रेफरल मांगना कोई भीख मांगना नहीं है बल्कि यह आपके प्रोडक्ट की क्वालिटी का सबूत है। अगर आपका काम अच्छा है तो लोग खुशी खुशी दूसरों को बताएंगे। लेकिन आपको उन्हें एक छोटा सा पुश या लालच देना होगा। इसे एक सिस्टम की तरह अपने बिजनेस में फिट कर दीजिए। जब भी कोई कस्टमर आपसे कुछ खरीदे तो उसे शुक्रिया कहने के साथ साथ एक ऐसा ऑफर दीजिए कि वो अपने दोस्तों को भी आपके पास ले आए। लोग अपनी मर्जी से किसी की तारीफ बहुत कम करते हैं क्योंकि आजकल किसी के पास टाइम नहीं है। लेकिन जब बात उनके फायदे की आती है तो वो दुनिया के सबसे बड़े मार्केटिंग गुरु बन जाते हैं।
क्या आप अभी भी उसी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं जहाँ आप अकेले ही सारा बोझ उठा रहे हैं। अपने बिजनेस को एक ऑटो पायलट मोड पर डालने के लिए आपको लोगों के नेटवर्क का इस्तेमाल करना होगा। अगर आप अपने ग्राहकों को अपना पार्टनर बना लेते हैं तो आपकी ग्रोथ को कोई मंदी नहीं रोक सकती। याद रखिए एक संतुष्ट ग्राहक जो आपको १० और लोग लाकर देता है वो आपके द्वारा चलाए गए लाखों के ऐड से कहीं ज्यादा ताकतवर है। तो अपनी शर्म को अलमारी में बंद कीजिए और आज ही से अपने कस्टमर्स को अपनी सेल्स टीम में बदलना शुरू कीजिए।
लेसन ३ : कस्टमर का डर खत्म करो और नोट छापो (रिस्क रिवर्सल)
मार्केट में सेल न होने का सबसे बड़ा कारण पता है क्या है। वो है कस्टमर के मन में छिपा हुआ डर। हर इंसान जब अपनी जेब से पैसा निकालता है तो उसके दिमाग में एक ही सवाल चलता है कि अगर ये सामान बेकार निकला तो क्या होगा। अगर ये सर्विस मेरे काम नहीं आई तो मेरे पैसे तो डूब जाएंगे। और आप एक स्मार्ट बिजनेसमैन बनने के बजाय एक जिद्दी दुकानदार की तरह व्यवहार करते हैं जो दुकान के बाहर बोर्ड लगाता है कि बिका हुआ माल वापस नहीं होगा। अरे भाई जब आपको खुद के प्रोडक्ट पर भरोसा नहीं है तो कोई अनजान आप पर दांव क्यों लगाएगा। जे अब्राहम कहते हैं कि अगर आप बिजनेस में तहलका मचाना चाहते हैं तो सारा रिस्क अपने कंधों पर ले लीजिए।
मान लीजिए आप एक सेकंड हैंड कार खरीदने जाते हैं। दो डीलर्स हैं। पहला डीलर कहता है कि भाई कार ले जाओ लेकिन बाहर निकलने के बाद मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है। दूसरा डीलर कहता है कि ये रही कार की चाबी इसे १५ दिन तक चलाओ और अगर आपको जरा सा भी लगा कि इसमें कोई कमी है तो वापस कर देना मैं बिना कोई सवाल पूछे आपके पूरे पैसे लौटा दूंगा। अब आप ही बताइए कि आप किसके पास जाएंगे। जाहिर है दूसरे वाले के पास। भले ही उसकी कार थोड़ी महंगी हो। इसे ही कहते हैं रिस्क रिवर्सल। आपने कस्टमर के दिमाग से उस सबसे बड़े कांटे को निकाल दिया जो उसे खरीदारी करने से रोक रहा था।
ज्यादातर इंडियन बिजनेस ओनर्स को लगता है कि अगर उन्होंने ऐसी गारंटी दे दी तो लोग उनका फायदा उठाएंगे और लूट लेंगे। लेकिन सच तो ये है कि दुनिया में ९९ परसेंट लोग ईमानदार होते हैं और वो सिर्फ एक अच्छी सर्विस चाहते हैं। जो १ परसेंट लोग चालाक होते हैं उन्हें झेलना आपके उस मुनाफे के सामने कुछ भी नहीं है जो आपको इस स्ट्रेटेजी से मिलने वाला है। जब आप रिस्क को पूरी तरह खत्म कर देते हैं तो आप अपने कॉम्पिटिशन को पूरी तरह खत्म कर देते हैं। फिर आपकी जंग कीमत पर नहीं बल्कि भरोसे पर होती है। और इस दुनिया में भरोसे से कीमती कोई चीज नहीं है।
तो क्या आप अभी भी अपने ग्राहकों को डरा कर बिजनेस करना चाहते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस उस स्टिकिंग पॉइंट से बाहर निकले तो जिम्मेदारी लेना सीखिए। अपने ऑफर को इतना सॉलिड बनाइए कि सामने वाला उसे मना ही न कर पाए। जब आप कहते हैं कि अगर आपको फायदा नहीं हुआ तो हम पैसे नहीं लेंगे तो आप मार्केट के बेताज बादशाह बन जाते हैं। अब फैसला आपका है कि आप एक साधारण डरपोक दुकानदार बने रहना चाहते हैं या फिर जे अब्राहम की तरह एक लीजेंडरी मार्केटर। उठिए और अपने बिजनेस की जंजीरें तोड़िए।
दोस्तों, बिजनेस करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस अपनी सोच को थोड़ा सा शिफ्ट करने की जरूरत है। आज ही अपने बिजनेस में इन ३ लेसन्स में से कोई भी एक लागू करें और देखें कि कैसे आपकी ग्रोथ रॉकेट की तरह ऊपर जाती है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपने बिजनेस में अटका हुआ महसूस कर रहा है। कमेंट में जरूर बताएं कि आपका सबसे बड़ा स्टिकिंग पॉइंट क्या है।
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