आप अपनी कंपनी को गूगल और एप्पल जैसा बनाने के सपने देख रहे हैं, पर असलियत में आप बिना जीपीएस के घने कोहरे में गाड़ी चला रहे हैं। बिना बैलेंस स्कोरकार्ड के आपकी स्ट्रेटजी सिर्फ कागजों पर अच्छी लगती है, जबकि आपकी टीम और प्रॉफिट दोनों ही गलत दिशा में भाग रहे हैं।
आज के इस कम्पटीशन में अगर आप सिर्फ पुराने तरीकों से बिजनेस मैनेज कर रहे हैं, तो यकीन मानिए आप अपनी तरक्की को खुद ही लात मार रहे हैं। चलिए आज रॉबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन की इस किताब से समझते हैं कि कैसे अपनी कंपनी को एक विनर की तरह तैयार करना है।
Lesson : स्ट्रेटजी को ऑपरेशनल टर्म्स में बदलना
ज्यादातर बिजनेस मालिकों के साथ एक बहुत बड़ी समस्या है। उनके दिमाग में एक बहुत बड़ा विजन होता है जैसे मुझे इंडिया का अगला यूनिकॉर्न बनना है या मुझे अपनी सेल्स दस गुना बढ़ानी है। सुनने में यह बहुत कूल लगता है, लेकिन जब ऑफिस में बैठा हुआ एक जूनियर एम्प्लोयी सुबह अपनी डेस्क पर आता है, तो उसे रत्ती भर भी अंदाजा नहीं होता कि इस बड़े विजन में उसका क्या रोल है। वह बस अपनी ईमेल्स चेक करता है और शाम का इन्तजार करता है। यहीं पर रॉबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन कहते हैं कि आपकी स्ट्रेटजी फेल होने वाली है।
सोचिए आप एक क्रिकेट टीम के कप्तान हैं और आप अपनी टीम से कहते हैं कि हमें बस वर्ल्ड कप जीतना है। बस इतना ही। न कोई फील्डिंग प्लान है, न कोई बैटिंग आर्डर और न ही बॉलर्स को पता है कि किस लाइन पर बॉल डालनी है। क्या आप जीतेंगे? बिल्कुल नहीं। आप केवल ग्राउंड पर जोक बन कर रह जाएंगे। स्ट्रेटजी को ऑपरेशनल टर्म्स में बदलने का मतलब है कि उस बड़े भारी भरकम विजन को छोटे और साफ एक्शन में तब्दील करना। बैलेंस स्कोरकार्ड हमें सिखाता है कि बिजनेस को सिर्फ बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि चार अलग नज़रों से देखना चाहिए।
पहला है फाइनेंस, दूसरा है कस्टमर, तीसरा है इंटरनल प्रोसेस और चौथा है लर्निंग और ग्रोथ। अगर आप सिर्फ पैसे के पीछे भागेंगे तो आप उस ड्राइवर की तरह हैं जो सिर्फ कार के पेट्रोल मीटर को देख रहा है और सामने से आ रहे ट्रक को भूल गया है। आपको अपने हर एम्प्लोयी को बताना होगा कि भाई, अगर तुम आज एक कस्टमर की प्रॉब्लम पांच मिनट जल्दी सॉल्व करते हो, तो वह हमारे उस बड़े विजन का हिस्सा है।
मान लीजिए शर्मा जी की एक मिठाई की दुकान है। शर्मा जी का विजन है कि उनकी दुकान शहर की सबसे बड़ी चेन बने। पर दुकान पर काम करने वाला छोटू समोसे में आलू कम भर रहा है और चटनी में पानी ज्यादा डाल रहा है क्योंकि उसे विजन से कोई लेना देना नहीं है। शर्मा जी को लगता है कि वह बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं, पर असल में वह बस एक गिरती हुई दुकान के मालिक हैं। जब तक छोटू को यह समझ नहीं आएगा कि अच्छी चटनी का मतलब है खुश कस्टमर और खुश कस्टमर का मतलब है ज्यादा सेल्स, तब तक शर्मा जी का सपना सिर्फ सपना ही रहेगा।
स्ट्रेटजी को जमीन पर उतारने के लिए आपको मैप्स बनाने पड़ते हैं। इसे किताब में स्ट्रेटजी मैप कहा गया है। यह मैप बताता है कि कैसे एक चीज दूसरी चीज से जुड़ी है। अगर आपके लोग स्किल्ड हैं, तो प्रोसेस अच्छा होगा। अगर प्रोसेस अच्छा है, तो कस्टमर खुश होगा। और अगर कस्टमर खुश है, तो पैसा तो झक मार कर पीछे आएगा ही। इसलिए अपनी हवा हवाई बातों को छोड़िए और अपनी टीम को वह भाषा समझाइए जो उन्हें समझ आती है।
Lesson : पूरी कंपनी को स्ट्रेटजी के साथ जोड़ना
आपने वह पुरानी कहावत तो सुनी होगी कि घर के जोगी जोगड़ा, आन गाँव के सिद्ध। बिजनेस की दुनिया में भी यही होता है। मार्केटिंग वाले अपनी अलग दुनिया में जी रहे होते हैं, उन्हें लगता है कि बस क्रिएटिव एड्स बना लो तो काम हो गया। उधर सेल्स वाले अपनी ही धुन में मगन होते हैं, और फाइनेंस वालों को लगता है कि अगर उन्होंने खर्चा कम कर दिया तो वह कंपनी के असली मसीहा हैं। नतीजा? कंपनी एक ऐसी नाव बन जाती है जिसे चार लोग चार अलग दिशाओं में खे रहे हैं। ऐसी नाव कहीं पहुँचती नहीं है, बस बीच मंझधार में गोल गोल घूमती रहती है और फिर एक दिन डूब जाती है।
रॉबर्ट कपलान कहते हैं कि एक स्ट्रेटजी फोकस्ड ऑर्गनाइजेशन में हर डिपार्टमेंट का एक ही सुर और एक ही ताल होनी चाहिए। इसे कहते हैं अलाइनमेंट। मतलब यह कि अगर कंपनी का लक्ष्य पहाड़ चढ़ना है, तो हर कोई पहाड़ की तरफ ही देखे, न कि कोई बगल वाली नदी में मछली पकड़ने चला जाए। अक्सर बड़ी कंपनियों में साइलो बन जाते हैं। साइलो मतलब ऐसी दीवारें जहाँ एक टीम को दूसरी टीम के काम से कोई मतलब नहीं होता। यह वैसा ही है जैसे आपके शरीर का हाथ कहे कि मुझे तो आज जिम जाना है, पर पैर कहें कि मुझे तो बिस्तर पर लेटे रहना है। ऐसे में जिम तो क्या, आप वाशरूम तक नहीं पहुँच पाएंगे।
मान लीजिए एक टेक कंपनी है जो एक नया ऐप लॉन्च कर रही है। मार्केटिंग टीम ने पूरे शहर में होर्डिंग्स लगवा दिए कि यह ऐप आपकी जिंदगी बदल देगा। लेकिन आईटी टीम को इस बारे में पता ही नहीं था, वे अभी भी पुराने सर्वर पर काम कर रहे हैं। जैसे ही लाखों लोगों ने ऐप डाउनलोड किया, सर्वर बैठ गया। अब कस्टमर केयर वाले परेशान हैं क्योंकि उनके पास कोई जवाब नहीं है। यहाँ गलती किसी एक की नहीं है, बल्कि पूरी कंपनी की है क्योंकि वे आपस में अलाइन नहीं थे।
हकीकत तो यह है कि ज्यादातर बॉस अपनी टीम को बस काम सौंप देते हैं, मकसद नहीं। जब तक आपकी टीम को यह नहीं पता होगा कि उनके छोटे से काम का बड़े लक्ष्य पर क्या असर पड़ता है, तब तक वे बस अपनी शिफ्ट पूरी करेंगे, आपकी कंपनी को बड़ा नहीं बनाएंगे। अलाइनमेंट का मतलब है कि हर एम्प्लोयी के अपने पर्सनल गोल्स कंपनी के गोल्स से मेल खाने चाहिए। अगर कंपनी जीतती है, तो एम्प्लोयी को भी अपनी जीत महसूस होनी चाहिए।
सर्कस तो देखा ही होगा आपने? उसमें जब पांच लोग मिलकर एक ट्रैपीज एक्ट करते हैं, तो उनकी टाइमिंग और तालमेल एकदम परफेक्ट होता है। अगर एक ने भी हाथ छोड़ने में एक सेकंड की भी देरी की, तो खेल खत्म। बिजनेस भी वही सर्कस है। यहाँ हर डिपार्टमेंट को दूसरे का हाथ थाम कर चलना होता है। इसलिए अपनी टीम के बीच की दीवारों को तोड़िए और उन्हें एक ही मिशन का हिस्सा बनाइए। जब पूरी कंपनी एक साथ धड़कती है, तब जाकर कोई ब्रांड इतिहास रचता है।
Lesson : स्ट्रेटजी को एक निरंतर चलने वाला प्रोसेस बनाना
अक्सर लोग सोचते हैं कि एक बार बढ़िया स्ट्रेटजी बना ली, उसे सुंदर सी फाइल में सजा दिया और ऑफिस की दीवार पर उसका चार्ट टांग दिया, तो बस काम हो गया। अब तो बस नोटों की बारिश होगी। पर भाई साहब, बिजनेस कोई मैगी नहीं है जो दो मिनट में बन जाए और न ही यह कोई एक बार का इवेंट है। रॉबर्ट कपलान और डेविड नॉर्टन हमें याद दिलाते हैं कि स्ट्रेटजी कोई पत्थर की लकीर नहीं है, बल्कि यह एक जीवित चीज है जिसे हर दिन देखभाल की जरूरत होती है।
अगर आप आज की तारीख में अपनी कंपनी को वैसे ही चला रहे हैं जैसे आपने पिछले साल के प्लान में लिखा था, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। मार्केट बदलता है, कस्टमर की पसंद बदलती है और नए कॉम्पिटिटर हर रोज पैदा होते हैं। अगर आप अपनी स्ट्रेटजी को अपडेट नहीं करेंगे, तो आप नोकिया या कोडक की तरह इतिहास की किताबों में दफ़न हो जाएंगे। स्ट्रेटजी को एक निरंतर चलने वाला प्रोसेस बनाने का मतलब है कि आपको लगातार फीडबैक लेना होगा और सुधार करना होगा।
मान लीजिए आप वजन घटाने के लिए जिम ज्वाइन करते हैं। आपने एक बेहतरीन डाइट प्लान बनाया और वर्कआउट रूटीन सेट किया। पर क्या सिर्फ प्लान बनाने से पेट अंदर हो जाएगा? बिल्कुल नहीं। आपको हर हफ्ते अपना वजन चेक करना होगा, यह देखना होगा कि क्या आपकी बॉडी रिस्पॉन्ड कर रही है या नहीं। अगर वजन नहीं घट रहा, तो आपको अपनी डाइट बदलनी होगी। बिजनेस में भी यही होता है। बैलेंस स्कोरकार्ड आपको वह डेटा देता है जिससे आपको पता चलता है कि आपकी स्ट्रेटजी काम कर रही है या नहीं।
याद करिए उस दोस्त को जो हर १ जनवरी को कसम खाता है कि इस साल तो वह बॉडी बनाएगा। वह पहले हफ्ते खूब मेहनत करता है, प्रोटीन पाउडर भी खरीद लेता है, पर १५ जनवरी तक वह फिर से समोसे और कोल्ड ड्रिंक पर लौट आता है। क्यों? क्योंकि उसने अपने प्लान को डेली रूटीन नहीं बनाया। उसने बस एक सपना देखा और उसे भूल गया। आपकी कंपनी भी उसी दोस्त की तरह बन जाएगी अगर आप मैनेजमेंट मीटिंग्स को सिर्फ चाय समोसे का अड्डा बनाकर छोड़ देंगे।
एक सफल कंपनी में स्ट्रेटजी पर चर्चा हर महीने, हर हफ्ते और हर दिन होनी चाहिए। इसे किताब में डबल लूप लर्निंग कहा गया है। मतलब सिर्फ यह मत देखिए कि क्या हम काम सही कर रहे हैं, बल्कि यह भी देखिए कि क्या हम सही काम कर रहे हैं। अगर आपकी टीम हर मीटिंग में सिर्फ पिछले महीने की सेल्स रिपोर्ट देख रही है, तो आप पीछे की खिड़की से देखकर गाड़ी चला रहे हैं। आपको सामने की खिड़की से देखना होगा कि आगे क्या आ रहा है।
जब स्ट्रेटजी आपके कल्चर का हिस्सा बन जाती है, तब आपको उसे बार बार याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती। वह खुद ब खुद चलने लगती है। अपनी कंपनी को एक सीखने वाली मशीन बनाइए। गलतियों से डरिए मत, बल्कि उन गलतियों को डेटा की तरह इस्तेमाल कीजिए ताकि अगली बार आप और बेहतर कर सकें। याद रखिए, जीत उनकी नहीं होती जो सबसे तेज दौड़ते हैं, बल्कि उनकी होती है जो सही दिशा में लगातार चलते रहते हैं।
तो दोस्तों, द स्ट्रेटजी फोकस्ड ऑर्गनाइजेशन हमें सिखाती है कि कामयाबी कोई तुक्का नहीं है। यह एक सोची समझी प्लानिंग और उस पर लगातार अमल करने का नतीजा है। अगर आप भी अपनी कंपनी या अपने स्टार्टअप को अगले लेवल पर ले जाना चाहते हैं, तो आज ही अपने विजन को कागज से निकालकर अपनी टीम के दिल और दिमाग में उतारिए।
क्या आपकी कंपनी में भी हर कोई अलग दिशा में भाग रहा है? या आपने अपनी स्ट्रेटजी को एक डेली रूटीन बना लिया है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बिजनेस तो बड़ा करना चाहता है पर जिसके पास कोई प्लान नहीं है। चलिए मिलकर एक स्ट्रेटजी फोकस्ड इंडिया बनाते हैं।
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