अगर आपको लगता है कि आपकी ९ से ५ वाली सरकारी स्टाइल नौकरी और वो घिसी पिटी डिग्री आपको उम्र भर पाल लेगी तो बधाई हो आप गहरी नींद में सो रहे हैं। दुनिया फ्लैट हो चुकी है और पड़ोस का चिंटू अब अमेरिका के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी खा रहा है क्योंकि आप अभी भी पुराने जमाने के भरोसे बैठे हैं।
आज के इस दौर में अगर आपने खुद को बदला नहीं तो आप बहुत पीछे छूट जाएंगे। थॉमस फ्रीडमैन की यह किताब हमें वह ३ कड़वे सच यानी ३ लेसन बताएगी जो आज की भागती दुनिया में टिके रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हैं।
लेसन १ : मैदान अब सबके लिए बराबर है यानी द लेवलिंग ऑफ द प्लेइंग फील्ड
पुराने जमाने में अगर आपको कोई बड़ा बिजनेस शुरू करना होता था तो आपको बहुत सारे पैसों और बड़े शहर के ऑफिस की जरूरत होती थी। लेकिन अब मामला बदल चुका है। थॉमस फ्रीडमैन कहते हैं कि दुनिया अब फ्लैट हो गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि जमीन चपटी हो गई है और आप किनारे से नीचे गिर जाएंगे। इसका मतलब यह है कि अब आपके पास भी वही टूल्स हैं जो एक अमीर देश के नागरिक के पास हैं।
मान लीजिए आप किसी छोटे से गांव में बैठे हैं। वहां इंटरनेट का कनेक्शन है और आपके पास एक पुराना लैपटॉप है। अगर आपके अंदर हुनर है तो आप न्यूयॉर्क के किसी क्लाइंट के लिए काम कर सकते हैं। पहले के दौर में लोग सोचते थे कि सिर्फ बड़े लोग ही बड़ा खेल खेल सकते हैं। लेकिन अब इंटरनेट और टेक्नोलॉजी ने सबको एक लाइन पर खड़ा कर दिया है। अब यह मायने नहीं रखता कि आप कहां पैदा हुए हैं बल्कि यह मायने रखता है कि आप क्या कर सकते हैं।
आजकल का माहौल कुछ ऐसा है कि अगर आप सिर्फ अपनी लोकल मार्केट के भरोसे बैठे हैं तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। आपके पड़ोस की किराना दुकान को अब सिर्फ दूसरी दुकान से खतरा नहीं है। उसे अमेज़न और जेप्टो जैसे दिग्गजों से लड़ना पड़ रहा है। यह सुनने में थोड़ा डरावना लग सकता है पर यही सच है। अगर आप इस बात को नहीं समझेंगे तो आप उस डायनासोर की तरह हो जाएंगे जो बदलती दुनिया को देख ही नहीं पाया।
अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि उनके पास सुविधाएं नहीं हैं। लेकिन हकीकत तो यह है कि आज एक आम लड़का अपने फोन का इस्तेमाल करके उतना ही कमा सकता है जितना एक बड़ी कंपनी का मैनेजर। बस फर्क सिर्फ इतना है कि वह लड़का रील देखने की जगह स्किल सीख रहा है। अगर आप अभी भी किस्मत को कोस रहे हैं तो यकीन मानिए आप खुद को धोखा दे रहे हैं। यह फ्लैट दुनिया आपको मौका भी देती है और आपकी लापरवाही पर आपको सजा भी देती है।
आज के समय में आपका कॉम्पिटिशन सिर्फ आपके शहर के लोगों से नहीं है। आपका मुकाबला चीन के उस वर्कर से है जो कम कीमत में बेहतर काम दे रहा है। आपका मुकाबला अमेरिका के उस फ्रीलांसर से है जो दिन रात मेहनत कर रहा है। अगर आप इस नए मैदान में नहीं उतरेंगे तो आप बहुत जल्दी आउट हो जाएंगे। दुनिया किसी का इंतजार नहीं करती और यह बात हमें जितनी जल्दी समझ आ जाए उतना ही अच्छा है।
लेसन २ : वह १० ताकतें जिन्होंने पुरानी दीवारों को ढहा दिया
अगर आपको लगता है कि दुनिया रातों-रात बदल गई तो आप गलत हैं। थॉमस फ्रीडमैन हमें उन १० फ्लैटनर्स के बारे में बताते हैं जिन्होंने मिलकर इस दुनिया को चपटा बना दिया। इसकी शुरुआत तब हुई जब बर्लिन की दीवार गिरी और विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम ने हर घर में अपनी जगह बना ली। इसके बाद आया इंटरनेट का तूफान जिसने जानकारी की उन दीवारों को तोड़ दिया जिनके पीछे बड़े-बड़े पंडित अपनी दुकान चलाते थे। अब ज्ञान सिर्फ तिजोरियों में बंद नहीं रहा बल्कि वह एक क्लिक की दूरी पर आ गया।
सोचिए पहले के समय में अगर आपको कोई जानकारी चाहिए होती थी तो आपको लाइब्रेरी के चक्कर काटने पड़ते थे। आज आप बिस्तर पर लेटे-लेटे गूगल बाबा से कुछ भी पूछ सकते हैं। इसके बाद आया आउटसोर्सिंग का दौर। अब अमेरिका की कंपनी अपना काम भारत के बैंगलोर में करवा रही है क्योंकि यहाँ काम सस्ता और बढ़िया हो रहा है। अगर आप आज भी यह सोचकर बैठे हैं कि आपकी नौकरी सिर्फ इसलिए सुरक्षित है क्योंकि आप ऑफिस समय पर जाते हैं तो आप एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। आपकी जगह कोई भी ले सकता है चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में बैठा हो।
इसके बाद सप्लाई चेन और सर्च इंजनों ने इस आग में घी का काम किया। आज आप कोई चीज ऑर्डर करते हैं और वह दुनिया के दूसरे कोने से आपके घर तक पहुँच जाती है। यह सब मुमकिन हुआ है क्योंकि बड़ी कंपनियों ने अपनी दीवारों को गिरा दिया और एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया। अब आप सिर्फ एक कस्टमर नहीं हैं बल्कि आप इस ग्लोबल नेटवर्क का एक छोटा सा हिस्सा हैं। अगर आप इस नेटवर्क से नहीं जुड़ेंगे तो आप अकेले रह जाएंगे और अकेले रहने वालों का इस चपटी दुनिया में कोई भविष्य नहीं है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि यह सब बड़ी कंपनियों का खेल है पर असल में यह आपके किचन तक पहुँच चुका है। आपका फोन चीन में बना है उसका सॉफ्टवेयर अमेरिका में बना है और आप उस पर भारतीय मसाले का आर्डर दे रहे हैं। यह सब उन १० ताकतों की वजह से है जिन्होंने दुनिया को इतना छोटा बना दिया है कि अब दूरियां मायने नहीं रखतीं। अगर आप आज भी खुद को अपनी गली या मोहल्ले तक सीमित रख रहे हैं तो आप उस कछुए की तरह हैं जो अपने खोल से बाहर निकलने से डरता है। पर याद रहे अब उस खोल को तोड़ने के लिए इंटरनेट नाम का हथौड़ा तैयार खड़ा है।
इन १० ताकतों ने पुराने बिजनेस मॉडल की धज्जियां उड़ा दी हैं। अब सिर्फ वही टिकेगा जो इस रफ्तार के साथ तालमेल बिठा पाएगा। अगर आप अभी भी यह सोच रहे हैं कि पुराने तरीके ही सबसे बेस्ट थे तो आप उस इंसान की तरह हैं जो रॉकेट के दौर में बैलगाड़ी चलाने की जिद कर रहा है। समय बदल चुका है और यह ताकतें अब रुकने वाली नहीं हैं। या तो इनके साथ चलना सीख लीजिए या फिर इतिहास का हिस्सा बनने के लिए तैयार रहिए।
लेसन ३ : खुद को अपडेट करो वरना कबाड़ बन जाओगे
दुनिया फ्लैट हो गई तो क्या हुआ। इसका मतलब यह नहीं है कि अब सबको बराबर की दौलत और शोहरत मिल जाएगी। सच तो यह है कि अब कॉम्पिटिशन पहले से १० गुना ज्यादा बढ़ गया है। थॉमस फ्रीडमैन कहते हैं कि इस नई दुनिया में सिर्फ तीन तरह के लोग टिक पाएंगे। पहले वह जो बहुत ज्यादा स्पेशल हैं जैसे कोई बड़ा खिलाडी या आर्टिस्ट। दूसरे वह जो बहुत ज्यादा निपुण हैं यानी अपनी फील्ड के पक्के खिलाडी। और तीसरे वह जो खुद को समय के साथ ढालना जानते हैं। अगर आप इन तीनों में से कहीं फिट नहीं बैठते तो समझ लीजिए कि आपकी एक्सपायरी डेट पास आ चुकी है।
आजकल के दौर में लोग सोचते हैं कि एक बार कॉलेज खत्म हुआ तो पढ़ाई खत्म। लेकिन इस चपटी दुनिया में जिस दिन आपने सीखना छोड़ा उसी दिन आपने जीतना छोड़ दिया। पुराने जमाने में आप एक ही हुनर से पूरी जिंदगी काट सकते थे। अब तो हर ६ महीने में सॉफ्टवेयर बदल जाता है और हर साल नया ट्रेंड आ जाता है। अगर आप अभी भी वही घिसी पिटी स्किल लेकर बैठे हैं जो आपने १० साल पहले सीखी थी तो आपकी वैल्यू बाजार में उस पुराने नोकिया फोन जैसी है जिसे लोग अब सिर्फ यादों के लिए रखते हैं काम के लिए नहीं।
हकीकत तो यह है कि अब आपको खुद का मैनेजर खुद बनना पड़ेगा। कोई आपको हाथ पकड़कर नहीं सिखाएगा कि आगे क्या करना है। आपको अपनी लर्निंग की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। अगर आप फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फालतू का टाइम पास कर रहे हैं तो याद रखिए कि दुनिया के किसी कोने में बैठा आपका कोई कॉम्पिटिटर इस वक्त एक नई स्किल सीख रहा है। वह आपसे आगे निकल जाएगा और आप बस यह कहकर अपना दिल बहलाएंगे कि किस्मत खराब थी। किस्मत खराब नहीं थी जनाब बस आप वक्त के साथ अपडेट होना भूल गए थे।
आज के समय में सबसे बड़ा हुनर है 'लर्न टू लर्न' यानी यह सीखना कि नई चीजें जल्दी कैसे सीखी जाती हैं। जो इंसान नया सीखने से डरता है वह इस दुनिया के लिए बोझ बन जाता है। इस फ्लैट दुनिया में मौके बहुत हैं लेकिन वह सिर्फ उन्हीं को दिखते हैं जिनकी आंखें खुली हैं और जो रिस्क लेने से नहीं डरते। अगर आप आज भी सुरक्षा की तलाश में एक ही जगह चिपके हुए हैं तो आप सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। बदलाव ही अब एकमात्र सच्चाई है और जो इस सच को गले लगा लेगा वही इस सदी का असली हीरो बनेगा।
तो दोस्तों, थॉमस फ्रीडमैन की यह बातें हमें आईना दिखाती हैं। दुनिया अब बदल चुकी है और वह आपके पुराने नियमों पर नहीं चलेगी। क्या आप अभी भी किनारे पर खड़े होकर लहरों के शांत होने का इंतजार कर रहे हैं या आप इस समंदर में कूदकर तैरना सीखने के लिए तैयार हैं। याद रखिए इस फ्लैट दुनिया में जगह कम नहीं है बस काबिल लोगों की कमी है।
अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट सेक्शन में हमें बताइए कि वह कौन सी एक स्किल है जिसे आप अगले ३० दिनों में मास्टर करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी पुरानी दुनिया के ख्वाब देख रहे हैं। जागिए सीखिए और इस नई दुनिया पर राज कीजिए।
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