The Well-Timed Strategy (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो मार्केट गिरते ही रोना शुरू कर देते हैं और तेजी आने पर पछताते हैं। मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का जश्न बहुत शानदार तरीके से मना रहे हैं। अगर आपको इकोनॉमिक साइकल की समझ नहीं है तो यकीन मानिए आप सिर्फ अंधेरे में तीर चला रहे हैं।

पीटर नवारो की यह बुक आपको सिखाएगी कि कैसे मंदी के समय भी आप नोट छाप सकते हैं। आइए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपके बिजनेस और करियर की दिशा बदल देंगे और आपको एक प्रो प्लेयर बनाएंगे।


लेसन १ : इकोनॉमिक साइकल का मास्टर बनना - मंदी को अपना दोस्त बनाओ

अगर आपको लगता है कि मार्केट हमेशा ऊपर ही जाएगा तो शायद आप किसी दूसरी दुनिया में रह रहे हैं। सच तो यह है कि इकोनॉमी एक समंदर की लहरों जैसी है जो कभी ऊपर जाती है और कभी इतनी नीचे गिरती है कि अच्छे अच्छे धुरंधरों की पेंट ढीली हो जाती है। पीटर नवारो अपनी बुक द वेल टाइमड स्ट्रेटेजी में सबसे पहले यही समझाते हैं कि असली पैसा वो नहीं कमाता जो सिर्फ तेजी में उछलता है बल्कि वो कमाता है जिसे पता है कि तूफान कब आने वाला है। इसे हम बिजनेस साइकल कहते हैं। अब आप कहेंगे कि भाई हमें क्या पता कब मंदी आएगी। क्या हम कोई ज्योतिषी हैं। जी नहीं आपको ज्योतिषी बनने की जरूरत नहीं है बस थोड़ा सा दिमाग और अपनी आंखें खुली रखनी हैं।

ज्यादातर लोग क्या करते हैं। जब मार्केट में हर तरफ हरियाली होती है और चाय की टपरी पर बैठा हर दूसरा इंसान आपको स्टॉक मार्केट की सलाह देने लगता है तब वो अपना सारा पैसा लगा देते हैं। और जैसे ही मंदी की आहट होती है या न्यूज चैनल पर चिल्लाना शुरू होता है कि मार्केट गिर गया तो वो डर के मारे अपना सब कुछ बेचकर भाग जाते हैं। यह तो वही बात हुई कि जब सेल लगी थी तब आपने सामान नहीं खरीदा और जब कीमतें आसमान छू रही थीं तब आप शॉपिंग करने निकल पड़े। पीटर कहते हैं कि एक स्मार्ट मैनेजर या इन्वेस्टर हमेशा इकोनॉमी के पहिये को देखता है।

जब ब्याज दरें बढ़ रही हों या लोग अंधाधुंध खर्चा कर रहे हों तो समझ जाइये कि ब्रेक लगने वाला है। एक रियल लाइफ एग्जांपल देखिए। मान लीजिए आपके पास एक आइसक्रीम की दुकान है। अब आप सर्दियों में यह सोचकर बैठ जाएं कि धंधा चौपट हो गया है और दुकान बंद कर दें तो आपसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं है। एक वेल टाइमड स्ट्रेटेजिक माइंड वाला इंसान सर्दियों में अपनी मशीनें ठीक कराएगा नई फ्लेवर की टेस्टिंग करेगा और पूरी तैयारी रखेगा ताकि जैसे ही पहली गर्मी की लहर आए वो मार्केट का राजा बन जाए।

ज्यादातर कंपनियां मंदी आते ही सबसे पहले अपना मार्केटिंग बजट काट देती हैं। उन्हें लगता है कि पैसा बचाकर वो महान काम कर रहे हैं। जबकि सच तो यह है कि उस समय आपका कॉम्पिटिटर सो रहा होता है। अगर आप उस वक्त थोड़ा सा शोर मचा दें तो पूरी दुनिया आपको देखेगी। पीटर नवारो का यह पहला लेसन हमें यही सिखाता है कि मंदी कोई डरने वाली चीज नहीं है बल्कि यह एक फिल्टर है जो कमजोर खिलाड़ियों को बाहर निकाल देता है और सिर्फ उन्हें टिकने देता है जिनके पास सही टाइमिंग और गजब का धैर्य है। 

अगर आप इस लहर पर सवार होना सीख गए तो यकीन मानिए आप उस भीड़ से बहुत आगे निकल जाएंगे जो आज भी सिर्फ कल की फिक्र में दुबली हो रही है। बिना इस साइकल को समझे अगर आप बिजनेस कर रहे हैं तो आप उस ड्राइवर की तरह हैं जो आंखें बंद करके हाईवे पर गाड़ी चला रहा है। अब फैसला आपका है कि आपको पैसेंजर सीट पर बैठकर डरना है या ड्राइवर बनकर अपनी मंजिल खुद तय करनी है।


लेसन २ : इन्वेंटरी और सप्लाई चेन का खेल - जब दुनिया सोए तब तुम जागो

अब बात करते हैं उस चीज की जिसे सुनकर आधे से ज्यादा लोगों को नींद आने लगती है और वो है इन्वेंटरी मैनेजमेंट। लेकिन रुकिए अगर आपने इस गेम को समझ लिया तो आप अपने कॉम्पिटिटर की दुकान पर ताला लगवा सकते हैं। पीटर नवारो कहते हैं कि ज्यादातर बिजनेसमैन अपनी इन्वेंटरी को लेकर इतने लापरवाह होते हैं जैसे वो कोई कबाड़ हो। जब मार्केट में डिमांड पीक पर होती है तब उनके पास स्टॉक खत्म हो जाता है और जब मंदी आती है तो उनका गोदाम फालतू माल से भरा होता है जिस पर धूल जम रही होती है। यह तो वही बात हुई कि जब मेहमान घर आ गए तब आप दूध लेने भागे और जब घर में कोई नहीं है तब आपने दस किलो पनीर मंगा कर रख लिया।

एक वेल टाइमड स्ट्रेटेजी वाला बंदा हमेशा सप्लाई चेन को अपनी उंगलियों पर नचाता है। पीटर समझाते हैं कि जब इकोनॉमी धीमी हो रही हो तब आपको अपना स्टॉक कम कर देना चाहिए और कैश बचाना चाहिए। क्योंकि उस वक्त कैश ही किंग है। लेकिन जैसे ही रिकवरी के संकेत मिलें आपको अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए। सोचिए एक ऐसी कंपनी के बारे में जो स्मार्टफोन बनाती है। अगर वो मंदी के दौरान पुराने मॉडल का ढेर लगा ले तो मंदी खत्म होते ही वो टेक्नोलॉजी पुरानी हो जाएगी। लोग उसे मुफ्त में भी नहीं लेंगे। लेकिन अगर वो कंपनी उस शांत समय का इस्तेमाल रिसर्च और नए सप्लायर्स ढूंढने में करे तो जब मार्केट खुलेगा तब उनके पास सबसे लेटेस्ट माल होगा।

लोग अक्सर भेड़ चाल चलते हैं, अगर पड़ोसी ने बहुत सारा माल भर लिया है तो हम भी भर लेते हैं। अरे भाई उसके पास शायद फालतू पैसा होगा या शायद वो डूबना चाहता है। आप क्यों अपनी नाव में छेद कर रहे हैं। असल में सप्लाई चेन मैनेजमेंट एक आर्ट है। आपको अपने सप्लायर्स के साथ ऐसे रिश्ते बनाने चाहिए कि जब मंदी आए तो वो आपको क्रेडिट दें और जब तेजी आए तो वो सबसे पहले आपका ऑर्डर पूरा करें।

मान लीजिए आप एक बिल्डर हैं। जब सीमेंट और सरिये के दाम आसमान छू रहे हों तब आप अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन शुरू कर देते हैं क्योंकि आपको लगता है कि सब बिक जाएगा। फिर अचानक मंदी आती है ब्याज दरें बढ़ती हैं और आपकी बिल्डिंग अधूरी खड़ी रह जाती है। वहीं एक समझदार बिल्डर मंदी के समय सस्ते में जमीन और मटेरियल का इंतजाम करता है और जैसे ही मार्केट उठता है वो रेडी टू मूव फ्लैट्स के साथ तैयार खड़ा होता है। इसे कहते हैं टाइमिंग का असली जादू।

पीटर नवारो बार बार जोर देते हैं कि अपनी इन्वेंटरी को सिर्फ डब्बे मत समझिए वो आपका पैसा है जो जाम पड़ा है। अगर आप मंदी के संकेतों को पढ़कर अपनी सप्लाई चेन को एडजस्ट नहीं कर सकते तो आप बिजनेस नहीं बल्कि जुआ खेल रहे हैं। और जुए में आखिर में जीत हमेशा कसीनो की होती है आपकी नहीं। इसलिए अगर आपको इस कॉम्पिटिटिव मार्केट में टिकना है तो अपनी आंखों को सिर्फ अपने गल्ले पर नहीं बल्कि दुनिया के हालातों पर भी टिका कर रखें। यह लेसन हमें सिखाता है कि सही समय पर सही माल का होना ही आपको मार्केट का बेताज बादशाह बना सकता है बाकी तो सब मोह माया है।


लेसन ३ : रिस्क मैनेजमेंट और डाइवर्सिफिकेशन - अंडे एक ही टोकरी में मत रखो

अब आते हैं उस पॉइंट पर जहाँ बड़े बड़े सुरमा भी ढेर हो जाते हैं। लोग अक्सर पूछते हैं कि भाई सब कुछ तो सही चल रहा है फिर भी कंपनी क्यों डूब गई। इसका जवाब बहुत सिंपल है और पीटर नवारो ने इसे बहुत खूबसूरती से समझाया है। वो कहते हैं कि अगर आप अपनी किस्मत के भरोसे बैठे हैं और रिस्क मैनेजमेंट को नजरअंदाज कर रहे हैं तो आप एक ऐसे जहाज पर सवार हैं जिसमें छेद तो है लेकिन अभी पानी अंदर नहीं आया है। ज्यादातर इंडियन बिजनेसमैन की प्रॉब्लम यह है कि वो जोश में आकर अपना सारा पैसा एक ही जगह झोंक देते हैं। उन्हें लगता है कि जैकपॉट लगने वाला है लेकिन असल में वो अपनी तबाही का सामान तैयार कर रहे होते हैं।

रिस्क मैनेजमेंट का मतलब यह नहीं है कि आप डर कर बैठ जाएं। इसका मतलब है कि जब आप युद्ध के मैदान में उतरें तो आपके पास एक ढाल भी होनी चाहिए। पीटर समझाते हैं कि एक वेल टाइमड मैनेजर हमेशा अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हर गली में जाकर अलग अलग काम शुरू कर दें। इसका मतलब है कि आपका बिजनेस मॉडल ऐसा होना चाहिए कि अगर इकोनॉमी का एक हिस्सा गिरे तो दूसरा आपको संभाल ले। यह तो वही बात हुई कि आपने अपनी शादी में सिर्फ एक ही हलवाई के भरोसे सारा खाना छोड़ दिया और ऐन वक्त पर उसका पेट खराब हो गया। अब आप और आपके मेहमान भूखे भजन करेंगे।

सच्चाई तो यह है कि मंदी हर सेक्टर को एक जैसा हिट नहीं करती। जब रियल एस्टेट गिरता है तो शायद हेल्थकेयर या एफएमसीजी सेक्टर मजबूत खड़ा रहता है। अगर आप एक स्मार्ट प्लेयर हैं तो आप अपनी कमाई के रास्तों को ऐसे फैलाएंगे कि मौसम कोई भी हो आपके घर का चूल्हा जलता रहे। एक मजेदार उदाहरण देखिए। मान लीजिए आप एक बहुत बड़े इवेंट प्लानर हैं और आप सिर्फ डेस्टिनेशन वेडिंग्स पर ध्यान देते हैं। अब जैसे ही मंदी आएगी लोग विदेशों में शादी करना बंद कर देंगे। लेकिन अगर आपने साथ ही साथ छोटे बजट की शादियों या कॉरपोरेट इवेंट्स में भी हाथ आजमाया होता तो आप भूखे नहीं मरते।

पीटर नवारो यहाँ एक और कड़वा सच बताते हैं। लोग अक्सर कर्ज लेकर बिजनेस बढ़ाते हैं जब मार्केट में बहुत ज्यादा लिक्विडिटी होती है। उन्हें लगता है कि ब्याज तो कम है और पैसा ही पैसा होगा। लेकिन जैसे ही सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है उनकी किश्तें उनकी कमाई से ज्यादा हो जाती हैं। यह वैसा ही है जैसे आपने उधार की गाड़ी लेकर शोर मचाया और पेट्रोल के दाम बढ़ते ही आप उसे गैराज में खड़ा करके पैदल चलने लगे।

एक सफल मैनेजर वही है जो मंदी आने से पहले ही अपने फालतू के खर्चों को काट देता है और कैश का एक ऐसा ढेर बनाकर रखता है जो उसे मुश्किल वक्त में ऑक्सीजन देता रहे। याद रखिए मंदी में कैश ही भगवान है। जिसके पास कैश है वो दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके एसेट्स सस्ते में खरीद सकता है। तो अगर आप चाहते हैं कि कॉम्पिटिशन आपको कुचल न दे तो अपनी रिस्क लेने की क्षमता को अपनी औकात के हिसाब से सेट करें।

यह पूरा खेल सिर्फ जानकारी का नहीं बल्कि सही वक्त पर सही फैसले लेने का है। पीटर नवारो की यह बुक हमें चीख चीख कर यही कहती है कि बिजनेस कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि यह एक सोची समझी चाल है। अगर आप आज नहीं संभले तो कल कोई और आपकी जगह आकर राज करेगा और आप सिर्फ बहाने बनाते रह जाएंगे। उठिए मार्केट के संकेतों को पढ़िए और अपनी किस्मत खुद लिखिए।


तो दोस्तों, क्या आप भी अपनी किस्मत के भरोसे बैठे हैं या अब मार्केट के इस पहिये को अपने इशारों पर नचाने के लिए तैयार हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको मंदी से ज्यादा डर लगता है या गलत टाइमिंग से। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बिना सोचे समझे बिजनेस में पैसा लुटा रहा है। चलिए मिलकर एक वेल टाइमड कम्युनिटी बनाते हैं।

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