क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एक छोटी सी प्रॉब्लम आते ही हाथ पैर फूलने लगते हैं और फिर गूगल पर 'बिजनेस कैसे बढ़ाएं' सर्च करने लगते हैं। बधाई हो आप अपनी असफलता की टिकट खुद काट रहे हैं। जबकि राइट ब्रदर्स ने बिना किसी डिग्री के दुनिया को उड़ा दिया और आप अभी तक एक सही आईडिया के लिए रो रहे हैं।
आज हम मार्क एप्लर की किताब द राइट वे से वो ३ सीक्रेट्स जानेंगे जिन्होंने दो साइकिल बनाने वालों को इतिहास का सबसे बड़ा इन्वेंटर बना दिया। ये लेसन्स आपकी प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को जमीन से उठाकर आसमान की ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
लेसन १ : कंस्ट्रक्टिव कॉन्फ्लिक्ट - बहस करो पर काम के लिए
हम में से ज्यादातर लोग ऑफिस या बिजनेस में झगड़ा होने पर ऐसे मुंह फुला लेते हैं जैसे किसी शादी में रूठे हुए फूफाजी। हमें लगता है कि अगर टीम में शांति है तो सब कुछ बढ़िया चल रहा है। लेकिन राइट ब्रदर्स यानी ओरविल और विल्बर राइट की कहानी कुछ और ही कहती है। उनके बीच ऐसी भयंकर बहस होती थी कि पड़ोसियों को लगता था कि आज तो ये एक दूसरे का सिर फोड़ देंगे। पर असलियत में वो एक दूसरे के दुश्मन नहीं बल्कि एक दूसरे के आइडियाज के फिल्टर थे।
मार्क एप्लर बताते हैं कि राइट ब्रदर्स ने 'कंस्ट्रक्टिव कॉन्फ्लिक्ट' को एक आर्ट बना दिया था। जब वो साइकिल की दुकान चलाते थे तब भी और जब वो प्लेन बना रहे थे तब भी। वो घंटों तक चिल्लाते थे पर उनका मकसद एक दूसरे को नीचा दिखाना नहीं बल्कि उस आईडिया में मौजूद कमियों को जड़ से उखाड़ना होता था। आज के दौर में हमारा ईगो इतना नाजुक है कि अगर बॉस या पार्टनर कह दे कि भाई ये लोगो थोड़ा अजीब लग रहा है तो हम उसे अपनी खानदान की बेइज्जती मान लेते हैं। हम 'यस मैन' बनकर घूमते हैं जिससे बिजनेस कभी उड़ान नहीं भर पाता।
सोचिए अगर आप एक नया स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और आपका पार्टनर कहता है कि आपकी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बेकार है। आपका पहला रिएक्शन होगा उसे ब्लॉक करना या फिर पुरानी उधारियां याद दिलाना। लेकिन राइट ब्रदर्स वाला तरीका कहता है कि भाई तू बता क्यों बेकार है। जब आप अपने आइडियाज को आग में तपते हुए देखते हैं तभी वो सोने की तरह चमकते हैं। राइट ब्रदर्स अक्सर बहस करते करते अपनी पोजीशन बदल लेते थे। विल्बर ओरविल के साइड से लड़ने लगता और ओरविल विल्बर के साइड से। क्या आपने कभी ऐसा किया है। हम तो अपनी बात पर ऐसे अड़ जाते हैं जैसे सरकारी दफ्तर का बाबू अपनी कुर्सी पर।
बिना बहस के जो शांति होती है वो असल में सड़न होती है। अगर आपके पास ऐसा कोई इंसान नहीं है जो आपके आईडिया को चैलेंज करे तो समझ लीजिए आप एक बहुत बड़े गड्ढे की तरफ बढ़ रहे हैं। राइट ब्रदर्स ने हवा में उड़ने का सपना इसलिए पूरा किया क्योंकि उन्होंने जमीन पर रहकर एक दूसरे के थॉट्स की धज्जियां उड़ाई थीं। वो जानते थे कि अगर लैब में बहस नहीं हुई तो आसमान में प्लेन क्रैश हो जाएगा। और यकीन मानिए जमीन पर बहस हारना आसमान में जान गंवाने से कहीं बेहतर है।
आज के कॉर्पोरेट कल्चर में हम मीटिंग्स में बिस्किट खाते हैं और मन ही मन एक दूसरे को गालियां देते हैं पर मुंह पर सब बढ़िया है कहते हैं। ये शांति आपके बिजनेस को दीमक की तरह खा रही है। अगर आपको बड़ा करना है तो आपको अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर सच का सामना करना होगा। जब आप किसी आईडिया पर लड़ते हैं तो आप उस आईडिया को बेहतर बना रहे होते हैं। तो अगली बार जब कोई आपके काम में कमी निकाले तो उसे थैंक यू बोलिए क्योंकि वो अनजाने में आपको राइट ब्रदर्स की लीग में शामिल कर रहा है।
लेसन २ : वेटिंग फॉर द राइट विंड - हड़बड़ी में काम खराब मत करो
आजकल के दौर में सबको 'क्विक सक्सेस' चाहिए। अगर आज यूट्यूब चैनल शुरू किया है तो कल सुबह तक सिल्वर प्ले बटन चाहिए। अगर आज बिजनेस डाला है तो अगले महीने तक फंडिंग और ऑडी कार का सपना देखने लगते हैं। राइट ब्रदर्स ने जब प्लेन बनाने का सोचा तो उनके पास कोई रॉकेट इंजन नहीं था। उनके पास थी तो बस पतंगें और हवा का रुख। उन्होंने सालों तक नॉर्थ कैरोलिना के किटी हॉक की पहाड़ियों पर सिर्फ हवा चलने का इंतजार किया। वो घंटों रेट के टीलों पर बैठे रहते थे सिर्फ ये देखने के लिए कि हवा कब और किस दिशा से बहेगी।
मार्क एप्लर कहते हैं कि राइट ब्रदर्स ने कभी भी हड़बड़ी में अपना ग्लैंडर नहीं उड़ाया। उन्हें पता था कि अगर हवा उनके साथ नहीं है तो उनकी मेहनत और इंजन दोनों मिट्टी में मिल जाएंगे। हमारे साथ दिक्कत ये है कि हम अपनी एनर्जी को गलत वक्त पर वेस्ट कर देते हैं। जैसे कोई नया दुकानदार बिना ये देखे कि मार्केट में मंदी चल रही है अपना सारा पैसा स्टॉक में लगा देता है और फिर रोता है कि किस्मत खराब है। किस्मत खराब नहीं है दोस्त बस तुमने हवा के चलने का इंतजार नहीं किया।
सोचिए आप एक शानदार ऐप लॉन्च करना चाहते हैं पर जिस दिन बड़े ब्रांड्स का सेल चल रहा है आप उसी दिन अपना प्रमोशन शुरू कर देते हैं। आपकी आवाज उस शोर में दब जाएगी। राइट ब्रदर्स की तरह बनिए जो अपनी वर्कशॉप में सब कुछ तैयार रखते थे पर पहाड़ी पर तब तक खड़े रहते थे जब तक कुदरत उन्हें इशारा न कर दे। कई बार तो वो हफ्तों तक वापस लौट आते थे बिना उड़े। आज के टाइम में तो हम इसे 'टाइम वेस्ट' कहेंगे पर असल में वो 'स्ट्रेटेजिक वेटिंग' थी।
हम लोग अक्सर प्रेशर में आकर गलत फैसले लेते हैं। शादी का प्रेशर हो तो गलत पार्टनर चुन लेते हैं और पैसे का प्रेशर हो तो गलत बिजनेस। विल्बर और ओरविल ने ये साबित किया कि सही रिजल्ट के लिए आपको पेशेंस यानी सब्र का दामन थामना ही पड़ेगा। वो चाहते तो आधा अधूरा प्लेन उड़ाकर थोड़े बहुत तालियां बटोर सकते थे पर उन्हें तो दुनिया बदलनी थी। अगर आप भी अपने फील्ड में झंडे गाड़ना चाहते हैं तो पहले मार्केट और हालात को पढ़ना सीखिए।
सर्कस के शेर की तरह मत बनिए जो चाबुक देखते ही कूद जाता है। उस बाज की तरह बनिए जो आसमान में शांति से घूमता रहता है और सही मौका मिलते ही शिकार पर झपट्टा मारता है। सही हवा का इंतजार करना कायरता नहीं बल्कि एक प्रोफेशनल स्ट्रेटेजी है। जब दुनिया शोर मचा रही हो और भाग रही हो तब आप अपनी तैयारी पूरी रखिए। जब सही विंड आएगी तब आपकी उड़ान इतनी ऊंची होगी कि जो लोग आपको रुका हुआ देखकर हंस रहे थे उनकी गर्दनें ऊपर देखते देखते थक जाएंगी।
लेसन ३ : रिप्रेसिंग द इगो - क्रेडिट नहीं रिजल्ट पर ध्यान दो
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वो जो काम करते हैं और दूसरे वो जो उस काम का ढिंढोरा पीटते हैं। राइट ब्रदर्स ने जब पहली बार उड़ान भरी तो उन्होंने किसी अखबार वाले को फोन नहीं किया कि भाई आओ और मेरी फोटो खींचो। उनका सारा ध्यान इस बात पर था कि मशीन सही से काम कर रही है या नहीं। मार्क एप्लर बताते हैं कि राइट ब्रदर्स ने अपने ईगो को हमेशा अपने मिशन के नीचे दबाकर रखा। आज के जमाने में अगर हम अपनी गाड़ी का टायर भी बदल लें तो इंस्टाग्राम पर स्टोरी डाल देते हैं कि 'मैकेनिक लाइफ'।
बिजनेस और लाइफ में सबसे बड़ी रुकावट हमारा अपना ईगो होता है। जब विल्बर और ओरविल काम करते थे तो वो ये भूल जाते थे कि बड़ा भाई कौन है और छोटा कौन। उनके बीच कभी इस बात को लेकर झगड़ा नहीं हुआ कि इन्वेंशन का क्रेडिट किसे मिलेगा। हमारे यहाँ तो अगर घर की नेमप्लेट पर छोटे भाई का नाम बड़े भाई से पहले लिख दिया जाए तो महाभारत शुरू हो जाती है। जब आप अपने ईगो को बीच में लाते हैं तो आपकी विजन धुंधली हो जाती है। फिर आपको ये नहीं दिखता कि कंपनी के लिए क्या अच्छा है बल्कि ये दिखता है कि आपकी तारीफ कहाँ होगी।
मान लीजिए आपकी टीम में किसी इंटर्न ने एक बहुत शानदार आईडिया दिया। अब आपका ईगो आपसे कहेगा कि अगर मैंने इसकी बात मान ली तो लोग सोचेंगे कि मुझे कुछ नहीं आता। बस यहीं पर आप एक महान लीडर बनने का मौका खो देते हैं। राइट ब्रदर्स ने कभी ये नहीं सोचा कि उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा इंजीनियर माना जाए। वो बस उड़ना चाहते थे। अगर आप भी अपने बिजनेस को ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं तो 'मैं' को छोड़कर 'हम' और 'लक्ष्य' पर फोकस करना होगा।
ईगो एक ऐसी बीमारी है जो अंदर ही अंदर आपके विजन को खत्म कर देती है। राइट ब्रदर्स के पास उस वक्त के हिसाब से बहुत कम रिसोर्स थे पर उनका इरादा फौलादी था। उन्होंने कभी अपनी हार को दिल से नहीं लगाया और न ही अपनी छोटी जीतों को दिमाग पर चढ़ने दिया। जब लोग उनका मजाक उड़ाते थे तब भी वो चुपचाप काम करते रहे। वो जानते थे कि जब प्लेन हवा में होगा तब उनकी चुप्पी ही सबसे बड़ा शोर मचाएगी।
तो दोस्त अपनी लाइफ में अगर कुछ बड़ा अचीव करना है तो क्रेडिट लेने की रेस से बाहर निकल जाइए। जब आप काम के पीछे दीवाने होते हैं तो कामयाबी खुद आपका पता ढूंढते हुए आती है। राइट ब्रदर्स की तरह अपने मिशन को इतना बड़ा बना दीजिए कि आपका ईगो उसके सामने बौना लगने लगे। जब आप खुद को मिटाकर अपने लक्ष्य में खो जाते हैं तभी आप इतिहास रचते हैं।
राइट ब्रदर्स की ये कहानी हमें सिर्फ प्लेन बनाना नहीं बल्कि लाइफ की मुश्किलों को सलीके से सुलझाना सिखाती है। चाहे वो रचनात्मक बहस हो सही समय का इंतजार हो या फिर अपने ईगो को काबू में रखना। ये प्रिंसिपल्स आज भी उतने ही काम के हैं जितने सौ साल पहले थे। अब ये आपके ऊपर है कि आप अपनी साइकिल की दुकान में ही फंसे रहना चाहते हैं या फिर अपने सपनों को उड़ान देना चाहते हैं।
अगर आपको इन लेसन्स ने थोड़ा सा भी मोटिवेट किया है तो नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं कि आपका 'सही हवा' का इंतजार कब खत्म हो रहा है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे लगता है कि वो सब कुछ अकेला ही कर सकता है। याद रखिए उड़ान भरने के लिए जमीन छोड़नी पड़ती है और बड़े सपनों के लिए ईगो को।
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