Think Better (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आप बहुत स्मार्ट है और आपके डिसीजन हमेशा सही होते है तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की ओर बढ़ रहे है। लोग गधों की तरह मेहनत कर रहे है और आप भी उसी भीड़ का हिस्सा है क्योंकि आपको लगता है कि सोचना तो सबको आता है। असल में आपका दिमाग बस पुराने जंग लगे आइडियाज को रीसायकल कर रहा है और आप इसे अपनी बुद्धिमानी समझ रहे है।

आज हम टिम हरसन की किताब थिनक बेटर की मदद से आपके सोचने के पुराने तरीके को कचरे के डिब्बे में डालेंगे। यह आर्टिकल आपको प्रोडक्टिव थिनकिंग के वो ३ लेसन सिखाएगा जो आपके करियर और लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : प्रोडक्टिव थिनकिंग बनाम रिप्रोडक्टिव थिनकिंग

ज्यादातर लोग अपनी पूरी जिंदगी यह सोचकर गुजार देते है कि वे बहुत ज्यादा दिमागी काम कर रहे है। सच तो यह है कि आपका दिमाग बस पुराने एक्सपीरियन्स और सीखी हुई बातों को बार बार दोहरा रहा है। टिम हरसन इसे रिप्रोडक्टिव थिनकिंग कहते है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपने स्कूल की पुरानी नोटबुक से आंसर कॉपी कर रहे हो। यह आसान है क्योंकि इसमें मेहनत नहीं लगती। हमारा दिमाग आलसी है और वह हमेशा शॉर्टकट ढूंढता है। जब भी आपके सामने कोई नई प्रॉब्लम आती है तो आपका दिमाग अपनी अलमारी खोलता है और पुराना घिसा पिटा सॉल्यूशन निकाल कर दे देता है। और आप खुश हो जाते है कि चलो काम हो गया। लेकिन भाई साहब असल में आपने कुछ नया सोचा ही नहीं। आप बस एक रोबोट की तरह पुरानी यादों को प्ले कर रहे है।

मान लीजिए आपकी कॉलोनी में एक नई चाय की दुकान खुलती है। अब आप भी सोचते है कि मुझे भी बिजनेस करना है। आपका दिमाग तुरंत सिग्नल देता है कि अरे बगल वाले ने चाय की दुकान खोली है तो मैं भी मोमोज की दुकान खोल लेता हूँ। यह रिप्रोडक्टिव थिनकिंग है। आपने बस वही किया जो दुनिया कर रही है। इसमें न कोई रिस्क है और न ही कोई बड़ा रिवॉर्ड। अगर आप प्रोडक्टिव थिनर होते तो आप सोचते कि इस एरिया में लोगों को असल में क्या चाहिए। शायद वहां एक ऐसी जगह की जरूरत हो जहां लोग शांति से बैठकर काम कर सके और साथ में हेल्दी स्नैक्स खा सके। प्रोडक्टिव थिनकिंग का मतलब है अपने दिमाग के उस जंग लगे दरवाजे को लात मार कर खोलना और कुछ ऐसा सोचना जो पहले कभी नहीं सोचा गया।

प्रोडक्टिव थिनकिंग कोई जादू नहीं है बल्कि एक प्रोसेस है। जब आप रिप्रोडक्टिव मोड में होते है तो आप बस सर्वाइव कर रहे होते है। आप वही गलतियां बार बार दोहराते है और फिर भगवान को दोष देते है कि मेरी किस्मत खराब है। असल में आपकी किस्मत नहीं बल्कि आपके सोचने का तरीका खराब है। आप वही पुराने टूल्स लेकर नई बिल्डिंग बनाने की कोशिश कर रहे है। अगर आप अपने करियर या बिजनेस में कुछ बड़ा करना चाहते है तो आपको यह समझना होगा कि पुराने तरीके अब काम नहीं आएंगे। मार्केट बदल रहा है और दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। अगर आप आज भी वही सोच रहे है जो आपने पांच साल पहले सोचा था तो आप पीछे छूट चुके है।

अपने दिमाग को एक जिम की तरह समझिये। अगर आप रोज वही एक किलो का डंबल उठाएंगे तो मसल्स नहीं बनेंगे। आपको वजन बढ़ाना होगा और खुद को चैलेंज करना होगा। ठीक वैसे ही जब आप प्रोडक्टिव थिनकिंग करते है तो आप अपने दिमाग को मुश्किल सवाल पूछने के लिए मजबूर करते है। आप पूछते है कि क्या यह काम करने का सबसे अच्छा तरीका है। क्या इसका कोई और विकल्प हो सकता है। जब आप ये सवाल पूछते है तब जाकर कहीं आपके दिमाग की बत्ती जलती है। और यकीन मानिए जब वो बत्ती जलती है तो आपको वो रास्ते दिखते है जो बाकी दुनिया को कभी नजर नहीं आते।

इसलिए अगली बार जब भी आप किसी समस्या में फंसे तो तुरंत रिएक्ट मत कीजिये। रुकिए और खुद से पूछिए कि क्या मैं बस पुराने तरीके दोहरा रहा हूँ या मैं सच में कुछ नया प्रोड्यूस कर रहा हूँ। अगर आप बस कॉपी पेस्ट कर रहे है तो आप एक एवरेज इंसान बनकर रह जाएंगे। लेकिन अगर आप अपनी थिनकिंग को प्रोडक्टिव बना लेते है तो आप उस एक परसेंट भीड़ में शामिल हो जाएंगे जो दुनिया को चलाते है। और याद रखियेगा कि दुनिया सिर्फ उन्हीं को याद रखती है जिन्होंने कुछ अलग और कुछ नया सोचा है। बाकी तो बस जनगणना का हिस्सा बनकर रह जाते है।


लेसन २ : व्हाट्स अंडर वे (समस्या को सही से पहचानना)

ज्यादातर लोग लाइफ में इसलिए फेल नहीं होते कि उनके पास सॉल्यूशन नहीं है। वे इसलिए फेल होते है क्योंकि वे गलत समस्या को सुलझाने में अपनी पूरी ताकत लगा देते है। टिम हरसन इसे व्हाट्स अंडर वे कहते है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आपके पैर में कांटा लगा हो और आप सर दर्द की दवा खा रहे हो। आप मेहनत तो पूरी कर रहे है लेकिन रिजल्ट जीरो मिलेगा। हम अक्सर ऊपर ऊपर से दिखने वाली परेशानियों को ही असली समस्या मान लेते है। आपका बॉस आप पर चिल्ला रहा है तो आपको लगता है कि बॉस बुरा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शायद समस्या बॉस नहीं बल्कि आपकी खराब टाइम मैनेजमेंट स्किल्स है।

मान लीजिये आप अपनी फिटनेस को लेकर परेशान है। आप जिम की महंगी मेंबरशिप लेते है और दुनिया भर के सप्लीमेंट खरीद लाते है। एक हफ्ते बाद आप जिम जाना छोड़ देते है। अब आप खुद को कोसते है कि मुझमें मोटिवेशन की कमी है। लेकिन अगर आप थोड़ा गहराई में जाकर सोचें तो असली समस्या मोटिवेशन नहीं थी। असली समस्या यह थी कि आपने जिम का समय शाम को रखा था जब आप ऑफिस से थक कर चूर हो जाते है। अगर आप सुबह का समय चुनते तो शायद कहानी कुछ और होती। हम बस सतह पर तैरते रहते है और कभी गोता लगाकर यह नहीं देखते कि नीचे चल क्या रहा है।

किसी भी बिजनेस या काम में जब कोई दिक्कत आती है तो हमारा पहला रिएक्शन होता है कि बस इसे जल्दी से ठीक कर दो। हम आग बुझाने में इतने बिजी हो जाते है कि यह पूछना ही भूल जाते है कि आग लग क्यों रही है। क्या तार पुराने हो गए है या कोई जानबूझकर माचिस जला रहा है। जब तक आप व्हाट्स अंडर वे को नहीं समझेंगे आप बस एक गड्ढा भरेंगे और दूसरा तैयार हो जाएगा। यह एक कभी न खत्म होने वाला लूप है जिसमे आम जनता फंसी रहती है और अपनी किस्मत को कोसती रहती है।

प्रोडक्टिव थिनर बनने के लिए आपको एक जासूस की तरह सोचना होगा। आपको हर चीज के पीछे का क्यों ढूंढना होगा। अगर आपकी सेल्स गिर रही है तो क्या यह मार्केटिंग की गलती है या आपका प्रोडक्ट ही आउटडेटेड हो गया है। अगर आपके रिश्ते खराब हो रहे है तो क्या गलती सामने वाले की है या आपके बात करने का तरीका ही जहरीला है। जब आप कड़वे सवाल खुद से पूछते है तब जाकर असली तस्वीर सामने आती है। और यकीन मानिए वह तस्वीर हमेशा वैसी नहीं होती जैसी आप देखना चाहते है।

समस्या को सही से फ्रेम करना ही आधा सॉल्यूशन है। अगर आपने सही सवाल पूछ लिया तो जवाब अपने आप चलकर आपके पास आएगा। लेकिन हम तो सवाल पूछने से डरते है क्योंकि हमें लगता है कि कहीं सच सामने न आ जाए। हम अपनी ईगो को बचाने के चक्कर में पूरी लाइफ बर्बाद कर लेते है। टिम हरसन कहते है कि अपनी धारणाओं को चुनौती दीजिये। जो आपको सच लगता है जरूरी नहीं कि वह सच हो। शायद वह बस आपका एक नजरिया है जो धुंधला पड़ चुका है।

इसलिए अगली बार जब भी आप किसी मुसीबत में फंसे तो पागलों की तरह हाथ पैर मारना बंद कीजिये। बैठिए और एक कागज पर लिखिए कि असल में हो क्या रहा है। जो दिख रहा है उसके नीचे क्या छिपा है। जब आप उस छिपे हुए सच को पकड़ लेंगे तो आप देखेंगे कि बड़ी से बड़ी समस्या भी छोटी लगने लगेगी। दुनिया को बेवकूफ बनाना आसान है लेकिन खुद को बेवकूफ बनाना सबसे बड़ी बेवकूफी है। समस्या की जड़ पकड़िए और फिर देखिये कि कैसे आप हर मुश्किल को एक मौके में बदल देते है।


लेसन ३ : कायरोस और क्रोनोस टाइम (समय को देखने का नया नजरिया)

हम सब घड़ी के गुलाम है। सुबह 9 बजे ऑफिस जाना है और शाम को 6 बजे घर आना है। टिम हरसन कहते है कि हम जिस समय को घड़ी से नापते है उसे क्रोनोस कहते है। यह वो समय है जो बस बीत रहा है और जिसे हम मैनेज करने की नाकाम कोशिश करते है। लेकिन एक दूसरा समय भी होता है जिसे कायरोस कहा जाता है। यह वो पल होता है जब कोई बड़ा आइडिया आता है या कोई बड़ा बदलाव करने का सही मौका मिलता है। दुनिया के सफल लोग घड़ी देखकर काम नहीं करते बल्कि वो सही मौके की तलाश में रहते है।

मान लीजिये आप एक रील बना रहे है। आप रोज घड़ी देखकर 5 बजे वीडियो अपलोड करते है क्योंकि किसी पंडित ने कहा था कि यह शुभ समय है। यह क्रोनोस है। लेकिन कायरोस वो पल है जब कोई टॉपिक ट्रेंड कर रहा हो और आप तुरंत उस पर एक जबरदस्त वीडियो बना दें। अगर आपने वो मौका छोड़ दिया तो आप चाहे कितनी भी घड़ी की सुईयां पकड़ कर लटके रहें कोई फायदा नहीं होगा। लाइफ में प्रोग्रेस करने के लिए आपको घड़ी के कांटों से ज्यादा मौकों की नब्ज पहचाननी होगी।

हम अक्सर कहते है कि मेरे पास टाइम नहीं है। भाई साहब टाइम सबके पास 24 घंटे ही है। फर्क बस इतना है कि आप उस समय में क्या कर रहे है। अगर आप बस क्रोनोस मोड में है तो आप बस एक मशीन है जो सुबह उठती है और रात को सो जाती है। लेकिन अगर आप कायरोस मोड में जीना सीख जाए तो आप हर उस छोटे पल का फायदा उठाएंगे जो आपको दूसरों से आगे ले जा सकता है। यह वो पल होता है जब आप अपने बॉस से सैलरी बढ़ाने की बात करते है या जब आप किसी अजनबी से मिलकर एक बड़ा बिजनेस डील फाइनल करते है।

समस्या यह है कि हम क्रोनोस में इतने फंसे हुए है कि हमें कायरोस दिखता ही नहीं। हम अपनी टू-डू लिस्ट पूरी करने में इतने बिजी है कि हमें वो दरवाजा नजर ही नहीं आता जो हमारे ठीक सामने खुला है। टिम हरसन कहते है कि अपनी प्रोडक्टिव थिनकिंग का इस्तेमाल करके इन खास मौकों को पहचानना सीखिए। समय को काटना बंद कीजिये और समय का इस्तेमाल करना शुरू कीजिये। जब आप सही समय पर सही फैसला लेते है तभी आप उस भीड़ से अलग हो पाते है जो बस रिटायरमेंट का इंतजार कर रही है।

याद रखिये कि आपकी वैल्यू इस बात से नहीं है कि आपने कितने घंटे काम किया बल्कि इस बात से है कि आपने उस समय में क्या वैल्यू क्रिएट की। कायरोस टाइम वो इन्वेस्टमेंट है जो आपको अमीर बनाता है। तो अगली बार जब आप कहें कि मैं बहुत बिजी हूँ तो खुद से पूछिए कि क्या मैं सच में कुछ बड़ा कर रहा हूँ या बस घड़ी की सुइयों के साथ गोल गोल घूम रहा हूँ। मौकों को पहचानिए और उन पर झपट पड़िए क्योंकि कायरोस किसी का इंतजार नहीं करता।


तो दोस्तों, थिनक बेटर सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि यह एक वेक-अप कॉल है। अगर आप आज भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे है तो आप अपनी लाइफ को बर्बाद कर रहे है। सोचना शुरू कीजिये पर असली तरीके से। क्या आप तैयार है अपने दिमाग की जंग साफ करने के लिए?

अगर इस आर्टिकल ने आपके सोचने का तरीका थोड़ा भी बदला है तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा कहता है कि उसकी किस्मत खराब है। कमेंट में बताइये कि आप अपनी लाइफ में कौन सा लेसन आज से ही लागू करने वाले है। जागिए और सोचना शुरू कीजिये।

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