क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस में बड़ा केबिन और महंगी कुर्सी मिलते ही खुद को दुनिया का राजा समझने लगते हैं। मुबारक हो। आप अपनी कंपनी को डुबोने के सबसे पक्के रास्ते पर निकल चुके हैं। जबकि अमेरिका की सबसे अमीर कंपनियाँ आज भी फटे पुराने जूतों वाली मेहनत और कंजूसी के दम पर राज कर रही हैं और आप यहाँ फालतू के ईगो में करोड़ों का नुकसान कर रहे हैं।
आज हम जेसन जेनिंग्स की मशहूर किताब थिंक बिग एक्ट स्मॉल के उन राज खोलेंगे जो बड़े बड़े बिजनेस टाइकून्स को रातों की नींद हराम करने पर मजबूर कर देते हैं। हम जानेंगे वो ३ कमाल के लेसन जो आपके काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : हम्बल लीडरशिप - ईगो को डस्टबिन में डालिए
आप तो शायद अभी से खुद को अगला एलन मस्क समझने लगे हैं। वैसे यह बड़ी अच्छी बात है। पर समस्या तब आती है जब आप एलन मस्क जैसा काम करने के बजाय सिर्फ उनके जैसा सूट पहनना और एटीट्यूड दिखाना शुरू कर देते हैं। जेसन जेनिंग्स अपनी किताब में एक कड़वा सच बताते हैं। वो कहते हैं कि अमेरिका की सबसे सफल कंपनियों के मालिक कभी भी अपने नाम के आगे बड़े बड़े टाइटल लगाकर नहीं घूमते।
वो लोग आज भी उसी तरह काम करते हैं जैसे उन्होंने पहले दिन किया था। इसे ही कहते हैं हम्बल लीडरशिप। अब आप पूछेंगे कि इसमें नया क्या है। नया यह है कि जब आप थोड़े से सफल होते हैं तो आपके अंदर का छोटा सा हिटलर जाग जाता है। आपको लगता है कि अब तो मैं मालिक हूँ। अब तो मेरा काम सिर्फ हुक्म चलाना है। पर यकीन मानिए यही वह पल है जब आपकी बर्बादी का काउंटडाउन शुरू हो जाता है।
मान लीजिए आपकी एक छोटी सी कैफे की चेन है। अब जैसे ही आपके दस आउटलेट हुए आपने खुद को एक आलीशान ऑफिस में बंद कर लिया। आप दिन भर एयर कंडीशनर की हवा खाते हैं। आप सिर्फ फाइलों पर साइन करते हैं। आपको यह तक नहीं पता कि आपके कैफे की कॉफी अब नाले के पानी जैसी स्वाद दे रही है। क्यों। क्योंकि आप तो अब बड़े आदमी बन गए हैं।
वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा मालिक है जिसके सौ आउटलेट हैं। पर वो आज भी हफ्ते में एक दिन खुद एप्रन पहनकर काउंटर पर खड़ा होता है। वो अपने कर्मचारियों के साथ बैठकर समोसे खाता है। उसे पता है कि किस मशीन में तेल कम है और कौन सा वेटर कस्टमर को देखकर शक्ल बिगाड़ता है। इसे कहते हैं जमीन पर टिके रहना।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि लीडरशिप का मतलब है ऊपर बैठकर नीचे वालों को डराना। पर सच तो यह है कि असली लीडर वो है जो नीचे खड़ा होकर पूरी टीम को ऊपर धक्का देता है। अगर आप अपने ईगो को कंट्रोल नहीं कर सकते तो आप अपना बिजनेस भी कंट्रोल नहीं कर सकते। सादगी में ही असली ताकत है। अगर आप आज भी अपने ऑफिस का कचरा खुद उठाने की हिम्मत रखते हैं तो समझ लीजिए आप एक बड़े लीडर बनने की राह पर हैं।
दिखावे की दुनिया से बाहर निकलिए। महंगे सूट और बड़ी गाड़ियों से कंपनी नहीं चलती। कंपनी चलती है उन लोगों से जो उस पर पसीना बहाते हैं। अगर आप उनके साथ खड़े नहीं हो सकते तो आप लीडर कहलाने लायक ही नहीं हैं। तो क्या आप तैयार हैं अपने ईगो को आज ही विदा करने के लिए।
लेसन २ : स्पीड और सादगी - काम को खींचना बंद करिए
अब बात करते हैं उस बीमारी की जो दुनिया के हर दूसरे ऑफिस में पाई जाती है। और उस बीमारी का नाम है फालतू की मीटिंग्स। जी हाँ। आपने देखा होगा कि कुछ लोगों को हर छोटी बात पर मीटिंग बुलाने का बड़ा शौक होता है। चाय ठंडी हो गई। चलिए मीटिंग करते हैं। पंखा आवाज कर रहा है। चलिए एक और मीटिंग करते हैं। जेसन जेनिंग्स कहते हैं कि अगर आप सच में सफल होना चाहते हैं तो अपनी स्पीड बढ़ाएं और काम को सिंपल रखें।
बड़ी कंपनियों की सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि वो खुद को इतना कॉम्प्लिकेटेड बना लेती हैं कि एक छोटा सा फैसला लेने में भी छह महीने लग जाते हैं। इसे हम कॉर्पोरेट भाषा में नौकरशाही कहते हैं। पर असल में यह सिर्फ आलस और जिम्मेदारी से भागने का तरीका है। अगर आपको एक फाइल पास करवाने के लिए दस लोगों के साइन चाहिए तो समझ लीजिए आपकी कंपनी कछुए की चाल चल रही है। और आज के जमाने में कछुआ कभी रेस नहीं जीतता। उसे तो खरगोश रास्ते में ही नाश्ते में खा जाता है।
मान लीजिए आपने एक नई मार्केटिंग स्कीम सोची। अब आप अपनी कंपनी के बोर्ड रूम में बैठे हैं। पंद्रह लोग टाई लगाकर आए हैं। दो घंटे तक चर्चा होती है कि लोगों का रंग क्या होना चाहिए। फोंट का साइज क्या होना चाहिए। अगले हफ्ते फिर मीटिंग होगी। फिर उसके अगले हफ्ते। इतने में पता चलता है कि आपके पड़ोस वाले चिंटू ने अपनी छोटी सी दुकान से वही स्कीम लॉन्च कर दी और सारा मार्केट कब्जा कर लिया।
आप अभी भी प्रेजेंटेशन ही बना रहे हैं और वो पैसे कमा कर निकल भी गया। यही फर्क है एक थकी हुई बड़ी कंपनी और एक फुर्तीले स्टार्टअप में। बड़ी कंपनियां अपनी ही सफलता के बोझ तले दब जाती हैं। वो इतने नियम बना देती हैं कि काम करना ही मुश्किल हो जाता है। जेसन जेनिंग्स का कहना है कि नियम कम करिए और भरोसे को बढ़ाइए।
काम को इतना सिंपल बनाइए कि एक छोटे बच्चे को भी समझ आ जाए कि आप क्या करना चाहते हैं। अगर आपके बिजनेस मॉडल को समझाने के लिए आपको भारी भरकम शब्दों की जरूरत पड़ रही है तो यकीन मानिए आपका मॉडल ही खराब है। सादगी में ही सुंदरता है और सादगी में ही पैसा है।
अपनी कंपनी से उन हर एक चीजों को हटा दीजिए जो आपके काम की रफ़्तार को धीमा करती हैं। फैसला लीजिए और उस पर अमल करिए। गलत होगा तो सीख लेंगे पर लटके रहना सबसे बड़ी हार है। क्या आपकी कंपनी में भी फाइलों पर धूल जम रही है। अगर हाँ तो आज ही उन फाइलों को आग लगाइए और काम शुरू करिए।
लेसन ३ : फ्रंटलाइन का जादू - ऑफिस से बाहर निकलिए
क्या आपको लगता है कि दुनिया के सबसे बेहतरीन आइडियाज कांच की दीवारों वाले ठंडे ऑफिस में बैठकर आते हैं। अगर हाँ तो आप गलतफहमी के शिकार हैं। जेसन जेनिंग्स का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि असली बिजनेस तो उस जमीन पर होता है जहाँ आपका कस्टमर खड़ा है। ज्यादातर बड़े लीडर जैसे ही थोड़े सफल होते हैं वो अपने कस्टमर और अपने निचले लेवल के कर्मचारियों से कट जाते हैं। उन्हें लगता है कि वो तो अब विजनरी बन चुके हैं। पर बिना जमीन देखे कोई भी विजन सिर्फ एक सपना ही होता है।
आप खुद सोचिए। आपकी कंपनी के बारे में सबसे ज्यादा किसे पता है। उस सेल्समैन को जो धूप में पसीना बहाकर आपका प्रोडक्ट बेच रहा है या उस मैनेजर को जो दिन भर लैपटॉप पर एक्सेल शीट देख रहा है। जाहिर है उस सेल्समैन को। पर त्रासदी यह है कि हम कभी उस सेल्समैन की बात ही नहीं सुनते। हम उसे बस एक मशीन समझते हैं। जेसन जेनिंग्स कहते हैं कि जो कंपनियां स्टार्टअप जैसा जोश बनाए रखती हैं उनके मालिक हमेशा अपनी फ्रंटलाइन टीम के साथ टच में रहते हैं।
मान लीजिए आपका जूतों का बिजनेस है। आप ऊपर ऑफिस में बैठकर मीटिंग कर रहे हैं कि जूतों का फीता गुलाबी होना चाहिए। पर असलियत यह है कि जब कस्टमर जूता पहनता है तो उसे एड़ी में दर्द होता है। यह बात उस सेल्समैन को पता है जो दुकान पर खड़ा है। पर आप तो इतने बड़े हो गए हैं कि आप दुकान पर जाते ही नहीं। आप तो बस सेल्स की रिपोर्ट देखते हैं। नतीजा क्या होगा। आप गुलाबी फीते वाले लाखों जूते बना देंगे पर कोई उन्हें खरीदेगा नहीं।
असली लीडर वो है जो अपने ऑफिस का दरवाजा खुला रखता है। वो जो हर महीने कम से कम एक दिन अपने सबसे छोटे कर्मचारी के साथ काम करता है। वो जो सीधे कस्टमर से फोन पर बात करता है और पूछता है कि भाई बताओ क्या कमी रह गई। जब आप लोगों के बीच जाते हैं तो आपको वो सच्चाई पता चलती है जो कोई रिपोर्ट नहीं बता सकती।
दिखावे की दुनिया और इन खोखले नंबर्स से बाहर निकलिए। अपनी टीम को यह महसूस कराइए कि उनकी आवाज सुनी जा रही है। अगर आपका चपरासी आपको आकर कुछ सुझाव दे रहा है तो उसे डाँटिए मत। शायद उसके पास वो आइडिया हो जो आपकी कंपनी की किस्मत बदल दे। स्टार्टअप जैसा जोश तब तक बना रहता है जब तक सबको लगता है कि वो इस खेल का हिस्सा हैं। जिस दिन आपने उन्हें सिर्फ एक नंबर समझ लिया उसी दिन आपकी कंपनी का अंत शुरू हो गया।
तो क्या आप आज भी अपने कस्टमर का चेहरा याद रखते हैं। या आप सिर्फ बैंक बैलेंस के डिजिट गिनने में व्यस्त हैं। जमीन पर उतरिए साहब क्योंकि असली खजाना वहीं छुपा है।
तो दोस्तों, थिंक बिग एक्ट स्मॉल का निचोड़ बहुत सिंपल है। बड़ा सोचिए पर काम हमेशा वैसे ही करिए जैसे आपने पहले दिन किया था। वही भूख वही सादगी और वही ईमानदारी। जिस दिन आप खुद को बहुत बड़ा समझने लगेंगे समझ लीजिए आप छोटे होने लगे हैं। सफलता का असली मजा तब है जब आप उसे संभाल सकें और दूसरों को साथ लेकर बढ़ सकें।
आज ही खुद से एक सवाल पूछिए। क्या आप अपने काम में वो स्टार्टअप वाला जोश वापस ला सकते हैं। कमेंट्स में हमें जरूर बताएं कि इन ३ लेसन्स में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा चुभा और आप उसे कैसे बदलेंगे। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी नए नए बॉस बने हैं और थोड़े हवा में उड़ रहे हैं। चलिए मिलकर एक बेहतर और ईमानदार बिजनेस कम्युनिटी बनाते हैं।
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