Think Like Your Customer (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो कस्टमर को देखते ही सेल्स की उल्टी कर देते हैं और फिर सोचते हैं कि डील क्लोज क्यों नहीं हुई। मुबारक हो आप अपनी सेल्स और इज्जत दोनों खो रहे हैं क्योंकि आपको पता ही नहीं कि कस्टमर के दिमाग में चल क्या रहा है।

आज हम बिल स्टिनेट की किताब थिनक लाइक योर कस्टमर से वो सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी सेल्स को जीरो से हीरो बना देंगे। चलिए इन ३ लेसन की गहराई में उतरते हैं जो आपका बिजनेस बदल देंगे।


लेसन १ : कस्टमर की नजर से दुनिया देखना (वैल्यू का असली मतलब)

अक्सर सेल्स की दुनिया में लोग एक ऐसी गलती करते हैं जिसे देखकर भगवान भी अपना सिर पकड़ ले। लोग अपना प्रोडक्ट बेचने के चक्कर में इतने अंधे हो जाते हैं कि उन्हें सामने खड़ा इंसान सिर्फ एक चलता फिरता बटुआ नजर आता है। बिल स्टिनेट कहते हैं कि जब तक आप कस्टमर के चश्मे से दुनिया नहीं देखेंगे तब तक आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं। मान लीजिए आप एक बहुत ही हाई टेक वैक्यूम क्लीनर बेच रहे हैं। आप कस्टमर को बता रहे हैं कि इसमें इतने हजार वाट की मोटर है और यह चांद तक की धूल खींच सकता है। लेकिन उस बेचारे कस्टमर की असली समस्या यह है कि उसका कुत्ता घर के सोफे पर बाल छोड़ देता है जिसे देखकर उसकी बीवी उसे हर संडे सुनाती है। अब आप उसे मोटर की पावर समझा रहे हैं जबकि उसे सिर्फ शांति और सुकून चाहिए।

यहाँ पर दिक्कत यह है कि हम फीचर्स बेचते हैं जबकि कस्टमर को सिर्फ अपने फायदे से मतलब होता है। कस्टमर यह नहीं सोचता कि आपका प्रोडक्ट कितना महान है वह बस यह सोचता है कि क्या इससे मेरा काम आसान होगा। अगर आप एक दुकानदार के पास जाकर उसे अपनी नई इन्वेंट्री मैनेजमेंट ऐप दिखा रहे हैं और वह बेचारा अपने पुराने रजिस्टर में हिसाब मिलाने में पसीने बहा रहा है तो उसे आपके क्लाउड स्टोरेज से कोई मतलब नहीं है। उसे बस यह सुनना है कि भैया इस ऐप के बाद आपको संडे को दुकान पर बैठकर हिसाब नहीं करना पड़ेगा और आप अपने परिवार के साथ बाहर जा पाएंगे। यही वह वैल्यू है जिसे बेचने की जरूरत है।

हमारा दिमाग बचपन से ही 'मैं मैं मैं' करने के लिए प्रोग्राम्ड है। हमें लगता है कि हमारी कहानी सबसे ज्यादा इंटरेस्टिंग है। लेकिन सेल्स की फील्ड में हीरो आप नहीं बल्कि आपका कस्टमर है। अगर आप खुद को महान दिखाने की कोशिश करेंगे तो कस्टमर आपको उतनी ही जल्दी दरवाजा दिखा देगा जितनी जल्दी आप उधार मांगने वाले रिश्तेदार को दिखाते हैं। आपको उसके जूते में पैर डालकर देखना होगा कि कांटा कहाँ चुभ रहा है। जब आप उसकी प्रॉब्लम को उसकी भाषा में बोलते हैं तब उसे लगता है कि चलो कोई तो है जो मुझे समझता है।

कुछ सेल्समेन तो ऐसे होते हैं जैसे किसी की शादी में बिन बुलाए बाराती। वे बस अपनी तारीफों के पुल बांधते रहते हैं और यह भूल जाते हैं कि सामने वाला इंसान बोर होकर सो चुका है। बिल स्टिनेट हमें सिखाते हैं कि सेल्स कोई जंग नहीं है जिसे आपको जीतना है। यह एक पार्टनरशिप है जहाँ आपको कस्टमर के साथ मिलकर उसकी मुसीबत का हल ढूंढना है। अगर आप उसे यह महसूस करा पाए कि आप उसके भले के लिए वहाँ हैं तो वह खुद अपना बटुआ खोलकर खड़ा हो जाएगा। असली खिलाड़ी वही है जो प्रोडक्ट नहीं बल्कि एक बेहतर कल का सपना बेचता है। जब आप कस्टमर की तरह सोचना शुरू करते हैं तो सेल करना दुनिया का सबसे आसान काम बन जाता है।


लेसन २ : कस्टमर के फैसले लेने के तरीके को समझना

अगर आप सोचते हैं कि कस्टमर ने आपका शानदार चेहरा देखा और सामान खरीद लिया तो आप किसी फिल्मी दुनिया में जी रहे हैं। हकीकत में कस्टमर के दिमाग में एक पूरा कोर्ट केस चलता है जहाँ वह खुद ही जज होता है और खुद ही वकील। बिल स्टिनेट समझाते हैं कि सेल्स करने से पहले आपको यह समझना होगा कि खरीदने की यह इंटरनल प्रोसेस आखिर काम कैसे करती है। मान लीजिए आप किसी को एक महंगा जिम मेंबरशिप प्लान बेच रहे हैं। वह इंसान आपके सामने बैठा तो है पर उसके दिमाग में द्वंद्व चल रहा है कि क्या मैं वाकई रोज सुबह जल्दी उठ पाऊंगा या फिर यह पैसे भी पिछले साल की तरह पानी में चले जाएंगे। अगर आप सिर्फ डिस्काउंट की माला जप रहे हैं तो आप फेल होने वाले हैं। आपको उसके उस डर को एड्रेस करना होगा जो उसे फैसला लेने से रोक रहा है।

अक्सर सेल्समेन को लगता है कि कस्टमर का 'ना' कहना एक रिजेक्शन है। लेकिन असल में वह 'ना' नहीं है बल्कि एक अधूरा सवाल है जिसका जवाब आपने अभी तक नहीं दिया है। जब कोई कहता है कि प्रोडक्ट बहुत महंगा है तो वह आपसे यह नहीं कह रहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं। वह दरअसल आपसे पूछ रहा है कि भाई मुझे यह तो बताओ कि इस सामान में ऐसा क्या है जिसके लिए मैं अपनी मेहनत की कमाई तुम्हें दे दूं। कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो कस्टमर के एक बार मना करते ही ऐसे मुंह बना लेते हैं जैसे उनकी जायदाद छीन ली गई हो। लेकिन समझदार सेल्समेन जानता है कि कस्टमर पहले खुद को मनाता है फिर आपसे सामान खरीदता है। आपको उसके दिमाग की उस उलझन को सुलझाना है जो उसे 'बाय' बटन दबाने से रोक रही है।

सोचिए आप एक नया स्मार्टफोन लेने गए हैं। सेल्समेन आपको रैम और प्रोसेसर के आंकड़े गिना रहा है जो आपके सिर के ऊपर से जा रहे हैं। लेकिन तभी वह कहता है कि सर इस फोन का कैमरा इतना जबरदस्त है कि आपकी वाइफ की फोटो एकदम प्रोफेशनल आएगी और वह आपसे खुश रहेंगी। बस यहाँ उसने आपके इमोशनल फैसले की नस पकड़ ली। बिल स्टिनेट कहते हैं कि लोग लॉजिक के आधार पर फैसला नहीं लेते बल्कि इमोशन के आधार पर लेते हैं और बाद में उसे लॉजिक से जस्टिफाई करते हैं। अगर आप सिर्फ फैक्ट्स और डेटा लेकर बैठे रहेंगे तो आप किसी बोरिंग प्रोफेसर से कम नहीं लगेंगे। आपको उस कहानी का हिस्सा बनना होगा जो कस्टमर अपने मन में बुन रहा है।

जरा उस सेल्समेन के बारे में सोचिए जो घर पर आरओ (RO) ठीक करने आता है। वह फिल्टर बदलकर जा सकता है पर वह आपको डराता है कि देखिए पानी कितना गंदा है आपके बच्चों की सेहत खराब हो सकती है। यहाँ वह आपकी 'प्रोटेक्टिव' भावना का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि हम डराना नहीं चाहते पर यह समझना जरूरी है कि कस्टमर के लिए सबसे बड़ा मोटिवेशन क्या है। क्या वह कुछ पाना चाहता है या फिर कुछ खोने से डर रहा है। जब आप उसके इस 'वाई' (Why) को समझ लेते हैं तो आपकी पिच में जादू आ जाता है। आप उसे सामान नहीं बेच रहे होते बल्कि आप उसे उस उलझन से बाहर निकाल रहे होते हैं जिसमें वह फंसा है। और जब आप किसी की मदद करते हैं तो वह खुशी खुशी आपके साथ डील फाइनल करता है।


लेसन ३ : सही सवाल पूछने की कला (लिसनिंग पावर)

दुनिया में दो तरह के सेल्समेन होते हैं। एक वो जो रेडियो की तरह बस बजते रहते हैं और दूसरे वो जो किसी जासूस की तरह गहरी बात निकाल लेते हैं। बिल स्टिनेट कहते हैं कि अगर आप अपनी सेल बढ़ाना चाहते हैं तो बोलना कम और सुनना ज्यादा शुरू करें। अक्सर हम अपनी पिच इतनी रट लेते हैं कि सामने वाले को बोलने का मौका ही नहीं देते। यह तो वही बात हुई कि डॉक्टर बिना मरीज की बीमारी पूछे ही उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाए। अगर आप कस्टमर की जरूरत नहीं जानते तो आप उसे जो भी बेचेंगे वह उसे कचरा ही लगेगा। एक अच्छा सेल्समेन वह नहीं है जो बर्फ को फ्रिज बेच दे बल्कि वह है जो यह पता लगाए कि सामने वाले को वाकई प्यास लगी है या नहीं।

कल्पना कीजिए आप एक कार शोरूम में गए हैं। सेल्समैन दौड़कर आता है और आपको सबसे महंगी स्पोर्ट्स कार के फीचर्स बताने लगता है। वह चीख-चीख कर कह रहा है कि यह गाड़ी ३ सेकंड में १०० की स्पीड पकड़ लेती है। लेकिन हकीकत यह है कि आप एक ऐसी गाड़ी ढूंढ रहे हैं जिसमें आपकी पूरी फैमिली और पालतू कुत्ता आराम से फिट हो सके। यहाँ उस सेल्समैन का सारा जोश और ज्ञान बेकार चला गया क्योंकि उसने एक छोटा सा सवाल नहीं पूछा कि सर आप गाड़ी किस मकसद के लिए लेना चाहते हैं। जब आप सही सवाल पूछते हैं तो कस्टमर खुद ही आपको अपनी सेल्स पिच लिखकर दे देता है। वह आपको बताएगा कि उसे क्या तकलीफ है और उसे क्या चाहिए। आपको बस उसकी बातों के डॉट्स को जोड़ना है।

कुछ लोग सवाल पूछने के नाम पर इंटरोगेशन शुरू कर देते हैं जैसे कि वे किसी मुजरिम से पूछताछ कर रहे हों। सवाल ऐसे होने चाहिए जो बातचीत को आगे बढ़ाएं न कि सामने वाले को अनकम्फर्टेबल कर दें। बिल स्टिनेट हमें सिखाते हैं कि ओपन एंडेड सवाल पूछें। यानी ऐसे सवाल जिनका जवाब सिर्फ हां या ना में न हो। उदाहरण के लिए यह पूछने के बजाय कि क्या आपको हमारा प्रोडक्ट अच्छा लगा आप यह पूछिए कि आपको अपने मौजूदा काम में सबसे बड़ी चुनौती क्या आ रही है। जब कस्टमर अपनी परेशानी बताना शुरू करता है तो उसके और आपके बीच एक भरोसे का रिश्ता बनता है। उसे लगता है कि आप उसे कुछ चिपकाने की कोशिश नहीं कर रहे बल्कि वाकई उसकी मदद करना चाहते हैं।

कुछ सेल्समेन तो ऐसे चिपकू होते हैं कि अगर उन्हें मौका मिले तो वे आपको आपकी ही परछाई बेच दें। लेकिन असली मास्टर वह है जो शांति से बैठता है और कस्टमर को अपनी दुनिया का राजा महसूस कराता है। जब आप ध्यान से सुनते हैं तो आपको वो बारीक बातें पता चलती हैं जो बड़े-बड़े डेटा टूल्स भी नहीं बता सकते। शायद उसे डर है कि उसका बॉस नाराज हो जाएगा या शायद उसे नया सिस्टम सीखने में आलस आ रहा है। जब आप इन बातों को सुन लेते हैं तब आप अपनी बात को इस तरह पेश कर सकते हैं कि उसके सारे डर खत्म हो जाएं। याद रखिए ऊपर वाले ने हमें दो कान और एक मुंह इसीलिए दिया है ताकि हम बोलें कम और सुनें दुगना।


तो दोस्तों, बिल स्टिनेट की यह बुक हमें सिखाती है कि सेल्स कोई चालाकी का खेल नहीं है बल्कि यह इंसानियत और समझदारी का रिश्ता है। जिस दिन आप अपने फायदे को भूलकर कस्टमर के फायदे के बारे में सोचने लगेंगे उस दिन आपकी सेल्स के आंकड़े आसमान छूने लगेंगे। अब समय है इसे हकीकत में बदलने का। आज ही अपनी अगली मीटिंग में कम बोलें और ज्यादा सुनें। नीचे कमेंट्स में हमें जरूर बताएं कि इन ३ लेसन में से कौन सा लेसन आपकी बिजनेस लाइफ को बदलने वाला है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सेल्स की फील्ड में कुछ बड़ा करना चाहते हैं।

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