Venture Catalyst (Hindi)


क्या आप भी अपनी कंपनी को पुराने जमाने के स्कूटर की तरह धक्के मार कर चला रहे हैं? मुबारक हो, आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं! जबकि आपके कॉम्पिटिटर्स रॉकेट की स्पीड से आगे निकल रहे हैं, आप वही घिसी पिटी स्ट्रेटेजी के भरोसे बैठे हैं। यह फेलियर का वीआईपी पास है जो आपने खुद बुक किया है।

डोंट वरी, अभी भी वक्त है। डोनाल्ड लॉरी की बुक वेंचर कैटलिस्ट हमें उन ३ पावरफुल लेसन के बारे में बताती है जो आपके बिजनेस को कछुए की चाल से निकालकर चीते की रफ्तार दे सकते हैं। चलिए इन लेसन को गहराई से समझते हैं।


Lesson : पुराने ढर्रे को लात मारो और इन्नोवेशन का इंजन चालू करो

अगर आप आज भी वही घिसी पिटी फाइलें और पुराने आइडियाज लेकर बैठे हैं, तो यकीन मानिए आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि एक म्यूजियम चला रहे हैं। डोनाल्ड लॉरी अपनी बुक वेंचर कैटलिस्ट में साफ कहते हैं कि अगर आपको एक्सप्लोसिव ग्रोथ चाहिए, तो आपको अपनी कंपनी के अंदर एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां नए और 'पागलपन' भरे आइडियाज को इज्जत मिले। ज्यादातर इंडियन कंपनीज में क्या होता है? कोई नया लड़का आकर कहता है कि सर हमें यह नया तरीका ट्राई करना चाहिए, तो सीनियर मैनेजर उसे ऐसे देखता है जैसे उसने कोई जुर्म कर दिया हो। उसे तुरंत चुप करा दिया जाता है कि बेटा ज्यादा दिमाग मत चलाओ, जो चल रहा है वैसे ही चलने दो। यही वह मोमेंट है जहां आपकी कंपनी की मौत शुरू हो जाती है।

असली वेंचर कैटलिस्ट वह होता है जो अपनी कंपनी के अंदर ही छोटे छोटे स्टार्टअप्स खड़ा करता है। इसे हम 'कॉर्पोरेट वेंचरिंग' कह सकते हैं। मान लीजिए आपकी एक नमकीन बनाने की फैक्ट्री है। अब आप दस साल से वही पुराना आलू भुजिया बेच रहे हैं। मार्केट में लोग अब डाइट चिप्स और हेल्दी स्नैक्स मांग रहे हैं, लेकिन आप कहते हैं कि नहीं हमारे दादाजी ने भुजिया से शुरू किया था तो हम भी वही करेंगे। भाई साहब, दादाजी के जमाने में इंटरनेट भी नहीं था, तो क्या आप भी टेलीग्राम भेजते हैं? नहीं ना! मार्केट बदल रहा है और आपको भी बदलना होगा। इन्नोवेशन का मतलब सिर्फ कोई नया गैजेट बनाना नहीं है, बल्कि अपनी पुरानी प्रोसेस को बदल देना भी है।

डोनाल्ड लॉरी समझाते हैं कि एक बड़ी कंपनी अक्सर अपनी पिछली कामयाबी के बोझ तले दब जाती है। उन्हें डर लगता है कि अगर कुछ नया किया और वह फेल हो गया तो क्या होगा? लेकिन सच तो यह है कि कुछ नया न करना सबसे बड़ा रिस्क है। आज के दौर में अगर आप अपने प्रोडक्ट को खुद ही बेहतर नहीं बनाएंगे, तो कोई दूसरा आकर उसे मार्केट से उखाड़ फेंकेगा। सार्केज्म की बात यह है कि हम अक्सर अपनी पुरानी स्ट्रेटेजी को इतना प्यार करने लगते हैं जैसे वह हमारी सगी बुआ हो। लेकिन बिजनेस में कोई इमोशन नहीं चलता। यहाँ सिर्फ रिजल्ट्स चलते हैं।

नोकिया और कोडक जैसी बड़ी कंपनीज का क्या हुआ? उनके पास पैसा था, टैलेंट था, और मार्केट पर कब्जा भी था। लेकिन उनके पास 'कैटलिस्ट' माइंडसेट नहीं था। उन्हें लगा कि उनकी पुरानी फिल्म और कीपैड वाले फोन कभी आउटडेटेड नहीं होंगे। वहीं दूसरी तरफ कुछ छोटी कंपनियों ने मार्केट की नब्ज पकड़ी और आज वह राज कर रही हैं। एक वेंचर कैटलिस्ट अपनी कंपनी में ऐसे लोगों को ढूंढता है जो बागी हों, जो सवाल पूछें और जो रिस्क लेने से न डरें। अगर आपकी टीम में सब हां में हां मिलाने वाले लोग हैं, तो मुबारक हो, आप एक डूबती हुई नाव के कैप्टन हैं।

इन्नोवेशन का इंजन चालू करने के लिए आपको सिर्फ बजट नहीं, बल्कि अपनी सोच बदलनी होगी। आपको अपनी कंपनी के कल्चर में यह बात डालनी होगी कि फेल होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन कोशिश न करना सबसे बड़ी बेवकूफी है। जब आप अपनी टीम को आजादी देते हैं कि वह एक्सपेरिमेंट करें, तभी वहां से कुछ ऐसा निकल कर आता है जो पूरी इंडस्ट्री को हिला देता है। याद रखिए, अगर आप खुद को अपडेट नहीं करेंगे, तो दुनिया आपको डिलीट कर देगी।


Lesson : बॉस बनना छोड़ो और एक असली 'कैटलिस्ट' बनो

अगर आपको लगता है कि ऑफिस में टाई लगाकर बैठना और एम्प्लॉईज पर चिल्लाना ही लीडरशिप है, तो भाई साहब आप किसी पुरानी सदी की ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म के विलेन लग रहे हैं। डोनाल्ड लॉरी अपनी बुक वेंचर कैटलिस्ट में समझाते हैं कि एक ट्रेडिशनल बॉस और एक वेंचर कैटलिस्ट में जमीन आसमान का फर्क होता है। बॉस का काम होता है कंट्रोल करना, जबकि कैटलिस्ट का काम होता है 'रिएक्शन' शुरू करना। सोचिए, एक केमिस्ट्री लैब में कैटलिस्ट क्या करता है? वह खुद नहीं जलता, लेकिन वह बाकी चीजों में ऐसी आग लगा देता है कि धमाका हो जाता है। बिजनेस में भी आपको वही आग लगाने वाला बनना है।

आजकल के कॉर्पोरेट कल्चर में ज्यादातर मैनेजर्स को लगता है कि उनकी टीम के हर छोटे काम में टांग अड़ाना ही उनकी ड्यूटी है। इसे कहते हैं 'माइक्रो मैनेजमेंट'—यानी कि एम्प्लॉई ने कितनी बार चाय पी और उसने ईमेल में कोमा कहाँ लगाया, उस पर भी नजर रखना। यह लीडरशिप नहीं, यह जासूसी है। डोनाल्ड लॉरी कहते हैं कि अगर आप अपनी टीम के टैलेंट को पिंजरे में बंद करके रखेंगे, तो वह कभी ऊंची उड़ान नहीं भर पाएंगे। एक असली कैटलिस्ट अपनी टीम को वह विजन देता है जिसे देखकर उनके रोंगटे खड़े हो जाएं। वह उन्हें डराता नहीं है, बल्कि उन्हें इंस्पायर करता है कि वह खुद अपने आइडियाज लेकर आएं।

हम अक्सर उन लोगों को प्रमोट कर देते हैं जो सबसे ज्यादा 'यस सर' कहते हैं। लेकिन एक वेंचर कैटलिस्ट को 'यस मैन' नहीं चाहिए, उसे 'व्हाई मैन' (Why Man) चाहिए—वह इंसान जो पूछे कि "सर, हम यह पुराने तरीके से क्यों कर रहे हैं?" अगर आपकी टीम आपसे सवाल पूछने से डरती है, तो समझ लीजिए कि आपकी लीडरशिप में जंग लग चुका है। एक कैटलिस्ट का रोल यह है कि वह ऐसे लोगों को ढूंढे जिनके पास जुनून हो और फिर उन्हें वह रिसोर्सेज और आजादी दे जिससे वह कमाल कर सकें।

मान लीजिए आपकी एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी है। अब आप अपनी टीम को हर रोज टारगेट देते हैं कि भाई इतने क्लाइंट्स ले आओ। लेकिन एक कैटलिस्ट लीडर क्या करेगा? वह अपनी टीम को बोलेगा कि "देखो, मार्केट में एआई आ गया है, तुम लोग बताओ कि हम इसे कैसे यूज करके क्लाइंट्स का काम आधा कर सकते हैं?" अब टीम अपनी क्रिएटिविटी लगाएगी क्योंकि उन्हें पता है कि उनका लीडर उनके साथ खड़ा है, उनके ऊपर नहीं। अगर कोई आइडिया फेल भी हो जाता है, तो कैटलिस्ट चिल्लाता नहीं है, बल्कि पूछता है कि "हमने इससे क्या सीखा?"

डोनाल्ड लॉरी साफ कहते हैं कि कॉर्पोरेट ग्रोथ तब होती है जब लीडर अपनी कुर्सी छोड़कर मैदान में उतरता है और अपनी टीम के लिए रास्ते बनाता है, न कि उनके रास्तों में रोड़े अटकाता है। आपको एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां लोग रिस्क लेने से न डरें। अगर आप अपनी टीम को सिर्फ सैलरी के लिए काम करने पर मजबूर करेंगे, तो वह सिर्फ उतना ही करेंगे जितना आपने कहा है। लेकिन अगर आप उन्हें एक मकसद देंगे, तो वह वह सब कर दिखाएंगे जो आपने कभी सोचा भी नहीं था। याद रखिए, एक बॉस के पीछे लोग मजबूरी में चलते हैं, लेकिन एक कैटलिस्ट के पीछे लोग यकीन और जोश के साथ चलते हैं।


Lesson : रिस्क से डरना छोड़ो और कैलकुलेटेड छलांग लगाना सीखो

अगर आप सोचते हैं कि बिना रिस्क लिए आप बिजनेस में अंबानी या टाटा बन जाएंगे, तो भाई साहब आप शायद किसी दूसरी दुनिया में रह रहे हैं। डोनाल्ड लॉरी अपनी बुक वेंचर कैटलिस्ट में साफ़ कहते हैं कि 'सेफ' खेलना ही आज के समय का सबसे बड़ा रिस्क है। ज्यादातर इंडियन कंपनीज की प्रॉब्लम क्या है? वह तब तक हाथ-पांव नहीं हिलातीं जब तक कि पानी सिर के ऊपर न चला जाए। वह वेट करती हैं कि कोई और आए, रिस्क ले, मार्केट बनाए और फिर वह उसकी नकल करें। इसे 'फॉलोअर' बनना कहते हैं, और फॉलोअर्स कभी भी एक्सप्लोसिव ग्रोथ नहीं देख पाते।

असली वेंचर कैटलिस्ट वह है जो मार्केट के आने वाले तूफान को पहले ही भांप लेता है। सार्केज्म की बात यह है कि हम अपनी सेविंग्स को तो एफडी में डालकर खुश हो जाते हैं, लेकिन बिजनेस में हम चाहते हैं कि बिना एक रुपया दांव पर लगाए करोड़ों का मुनाफा हो जाए। ऐसा सिर्फ फिल्मों में होता है, हकीकत में नहीं। डोनाल्ड लॉरी समझाते हैं कि रिस्क लेने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी सारी जमा पूंजी लेकर जुआ खेलने बैठ जाएं। बल्कि इसका मतलब है 'कैलकुलेटेड रिस्क'। यानी कि आपको पता होना चाहिए कि अगर आपका नया प्रोजेक्ट फेल हुआ, तो आपके पास प्लान बी क्या है?

मान लीजिए आपकी एक कपड़े की दुकान है। अब ऑनलाइन शॉपिंग का जमाना है और लोग घर बैठे कपड़े मंगा रहे हैं। आप कहते हैं कि "नहीं, लोग तो दुकान पर आकर कपड़ा छूकर ही लेंगे।" यह आपकी ईगो है, बिजनेस नहीं। एक कैटलिस्ट लीडर क्या करेगा? वह अपनी एक छोटी सी वेबसाइट बनवाएगा, चाहे उस पर कम ही रिस्पॉन्स आए। वह टेस्ट करेगा कि मार्केट किधर जा रहा है। अगर वह फेल भी हुआ, तो उसे कम से कम यह तो पता चलेगा कि कस्टमर को क्या नहीं चाहिए। लेकिन अगर वह डर के मारे कुछ नहीं करता, तो एक दिन उसकी दुकान पर सिर्फ धूल ही जमी होगी।

डोनाल्ड लॉरी कहते हैं कि एक्सप्लोसिव ग्रोथ तब आती है जब आप नए मार्केट्स और नई टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट करते हैं, भले ही वह अभी प्रॉफिटेबल न लग रही हों। एक वेंचर कैटलिस्ट अपनी कंपनी का पोर्टफोलियो ऐसे बनाता है जैसे कोई इन्वेस्टर शेयर मार्केट में बनाता है। कुछ प्रोजेक्ट्स पुराने और स्टेबल होते हैं जो घर का खर्चा चलाते हैं, और कुछ प्रोजेक्ट्स 'फ्यूचरिस्टिक' होते हैं जो आपको कल का सुपरस्टार बनाएंगे। अगर आप आज के मुनाफे को ही सब कुछ मान लेंगे, तो कल के लिए आपके पास कुछ नहीं बचेगा।

सच्चाई तो यह है कि फेलियर को लेकर हमारा समाज इतना डरा हुआ है कि हम कोशिश ही नहीं करते। लेकिन एक कॉर्पोरेट जायंट के लिए फेलियर एक 'लर्निंग कॉस्ट' है। अगर आप फेल नहीं हो रहे, तो इसका मतलब है कि आप कुछ नया ट्राई ही नहीं कर रहे। एक कैटलिस्ट अपनी टीम को यह भरोसा दिलाता है कि "जाओ, कुछ तूफानी करो, अगर गिरे तो मैं संभालने के लिए खड़ा हूं।" यही वह भरोसा है जो किसी साधारण कंपनी को एक लेजेंडरी ब्रांड बना देता है। तो अब फैसला आपका है—क्या आप वही पुराने ढर्रे पर घिसटना चाहते हैं या एक वेंचर कैटलिस्ट बनकर आसमान छूना चाहते हैं?


दोस्तों, डोनाल्ड लॉरी की यह बुक हमें सिखाती है कि ग्रोथ कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी स्ट्रेटेजी है। अगर आप अपनी कंपनी या अपने करियर में वह 'एक्सप्लोसिव' बदलाव लाना चाहते हैं, तो आज से ही एक कैटलिस्ट की तरह सोचना शुरू करें। पुराने डर को पीछे छोड़ें और इन्नोवेशन की आग जलाएं।

अब आपकी बारी है! आप अपने बिजनेस या काम में ऐसा कौन सा नया 'रिस्क' लेने वाले हैं जिससे आपकी किस्मत बदल सकती है? कमेंट्स में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अभी भी पुराने जमाने की सोच लेकर बैठा है!

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