क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि मार्केट में पहले आकर झंडा गाड़ना ही सक्सेस की गारंटी है? मुबारक हो, आप और आपका बिजनेस दोनों ही डूबने वाले हैं क्योंकि आपने विजन के नाम पर सिर्फ अपनी गलतफहमियों को पाल रखा है।
हैरान मत होइए, असलियत यह है कि पहले आने वाले अक्सर धूल चाटते रह जाते हैं। आज हम विल एंड विजन किताब के जरिए उन सीक्रेट्स को खोलेंगे जो बताएंगे कि कैसे देर से आने वाले खिलाड़ी ही असल में मार्केट के असली बाप बनते हैं।
Lesson : फर्स्ट मूवर होना सक्सेस की गारंटी नहीं है
अक्सर हम सुनते हैं कि जो पहले आता है वही सब कुछ ले जाता है। लेकिन विल एंड विजन किताब इस खोखले सच की धज्जियां उड़ा देती है। क्या आपको लगता है कि मार्केट में सबसे पहले कदम रखना ही जीत का सर्टिफिकेट है? अगर ऐसा होता तो आज आप याहू पर सर्च कर रहे होते और नोकिया का फोन हाथ में लेकर घूम रहे होते। असलियत तो यह है कि जो सबसे पहले आता है, वह अक्सर सिर्फ रास्ता साफ करने का काम करता है। वह मार्केट को जगाता है, गलतियां करता है और फिर उन गलतियों का फायदा उठाकर कोई और आकर पूरी मलाई मार ले जाता है।
मान लीजिए आपके मोहल्ले में किसी ने सबसे पहले मोमोस की दुकान खोली। उसने लोगों को बताया कि भाई यह क्या चीज है, चटनी कितनी तीखी होनी चाहिए और इसे कैसे खाना है। उसने पूरी मेहनत की, पसीना बहाया और लोगों की जीभ पर स्वाद चढ़ाया। लेकिन दो महीने बाद उसके ठीक सामने एक और लड़का दुकान खोलता है। वह देखता है कि पहले वाले की चटनी थोड़ी ज्यादा तीखी है और बैठने की जगह कम है। वह लड़का बढ़िया कुर्सियां लगाता है, चटनी का बैलेंस सही करता है और पहले वाले से ज्यादा भीड़ बटोर लेता है। यहाँ पहला दुकानदार सिर्फ एक रास्ता बनाने वाला बनकर रह गया, जबकि असली पैसा वह ले गया जो मार्केट की कमी को समझकर देर से आया।
बिजनेस की दुनिया में इसे फर्स्ट मूवर एडवांटेज कहना बंद कीजिए। असल में यह अक्सर फर्स्ट मूवर डिजास्टर होता है। जब आप पहले आते हैं, तो आप अनजानी मुश्किलों से लड़ रहे होते हैं। आप पैसे फूंकते हैं यह देखने के लिए कि क्या काम करेगा और क्या नहीं। और पीछे खड़ा आपका कंपटीटर चुपचाप बैठकर आपकी हार से सीख रहा होता है। वह आपकी रिसर्च का फ्री में फायदा उठाता है। उसे पता चल जाता है कि कस्टमर को क्या पसंद नहीं आया। फिर वह आता है, एक बेहतर प्रोडक्ट लाता है और आपको इतिहास के पन्नों में दफन कर देता है।
क्या आपको याद है कि गूगल से पहले कितने सर्च इंजन थे? या फेसबुक से पहले आरकुट का क्या जलवा था? वे पहले आए थे, उन्होंने मार्केट बनाया, लेकिन वे टिक नहीं पाए क्योंकि उनके पास वह विजन नहीं था जो मार्केट के बदलते मिजाज को समझ सके। वे अपनी पहली कामयाबी के नशे में इतने चूर थे कि उन्हें लगा अब कोई उन्हें हिला नहीं सकता। और यहीं से उनके पतन की शुरुआत हुई। मार्केट किसी के बाप की जागीर नहीं है कि आप पहले आ गए तो वह आपकी हो गई। मार्केट उसका है जो सबसे बेहतर है, न कि उसका जो सबसे तेज है।
अगर आप भी अपना स्टार्टअप शुरू करने की सोच रहे हैं और इस बात से परेशान हैं कि भाई फलां कंपनी तो पहले से ही यह काम कर रही है, तो रिलैक्स कीजिए। आप देर से आए हैं, यह आपकी कमजोरी नहीं बल्कि आपकी सबसे बड़ी ताकत है। आपके पास मौका है यह देखने का कि बड़े खिलाड़ी कहाँ फेल हो रहे हैं। उनकी सर्विस में क्या कमी है? उनके एप में क्या बग्स हैं? उनकी कस्टमर केयर क्यों घटिया है? बस उसी एक छेद को पकड़िए और वहाँ अपना झंडा गाड़ दीजिए। याद रखिए, शेर हमेशा पहले नहीं दौड़ता, वह तब दौड़ता है जब उसे पता होता है कि शिकार अब उसकी पहुंच में है।
जेरार्ड टेलिस और पीटर गोल्डर ने सालों की रिसर्च के बाद यह साबित किया है कि मार्केट लीडर्स में से ज्यादातर लोग वे थे जो मार्केट में काफी बाद में आए थे। उन्होंने सिर्फ मार्केट में एंट्री नहीं मारी, बल्कि उन्होंने मार्केट को डोमिनेट करने का इरादा रखा था। यह इरादा ही वह विल यानी इच्छाशक्ति है जो आपको एक साधारण दुकानदार से मार्केट का राजा बनाती है। अब सवाल यह है कि क्या आप पहले आकर हारने वालों में से बनना चाहते हैं या देर से आकर सबको पीछे छोड़ने वाले असली खिलाड़ी?
Lesson : विजन के बिना पावर बेकार है और इनोवेशन के बिना विजन
अगर आपको लगता है कि सिर्फ एक अच्छा आइडिया और थोड़ा सा पैसा आपको मार्केट का राजा बना देगा, तो शायद आप नींद में हैं। असल में मार्केट का राजा वह नहीं होता जिसके पास सबसे ज्यादा पैसा है, बल्कि वह होता है जिसके पास आने वाले कल को देखने की दूरदृष्टि यानी विजन होता है। लेकिन यहाँ एक बड़ा पेंच है। सिर्फ विजन होने से कुछ नहीं होता, अगर आप अपनी ही सफलता के बोझ तले दबकर इनोवेशन करना छोड़ दें। विल एंड विजन किताब हमें सिखाती है कि मार्केट लीडर वही बनता है जो खुद को ही बार-बार खत्म करके नया बनाने की हिम्मत रखता है।
मान लीजिए आपने एक बहुत ही बढ़िया चाय की दुकान खोली। आपकी चाय इतनी हिट हुई कि लोग दूर-दूर से आने लगे। अब आप चौड़े होकर बैठ गए कि भाई अब तो मैं ही किंग हूँ। लेकिन कुछ समय बाद बगल में एक और दुकान खुलती है जो चाय के साथ फ्री में बिस्किट और बैठने के लिए एसी रूम देती है। अब आप चिल्ला रहे हैं कि मैं तो पुराना हूँ, मेरी रेसिपी असली है। भाई साहब, कस्टमर को आपकी पुरानी यादों से मतलब नहीं है, उसे आज की सुविधा और कल का एक्सपीरियंस चाहिए। अगर आपने अपनी दुकान में एसी नहीं लगवाया और सिर्फ पुरानी शोहरत के भरोसे बैठे रहे, तो आपकी दुकान पर सिर्फ मक्खियां भिनभिनाएंगी, कस्टमर नहीं।
यही हाल बड़ी-बड़ी कंपनियों का होता है। वे एक बार सफल होती हैं और फिर उन्हें लगता है कि बस अब तो हम अमर हो गए। वे इनोवेशन करना बंद कर देती हैं क्योंकि उन्हें डर लगता है कि कहीं नया करने के चक्कर में पुराना बिजनस न बिगड़ जाए। लेकिन किताब कहती है कि अगर आप खुद को इनोवेट नहीं करेंगे, तो कोई और आकर आपको मार्केट से बाहर कर देगा। एप्पल को ही देख लीजिए। जब उन्होंने आईफोन निकाला, तो उनके पास पहले से ही आईपॉड जैसा हिट प्रोडक्ट था। लेकिन स्टीव जॉब्स को पता था कि अगर आईफोन में म्यूजिक का फीचर दे दिया, तो शायद लोग आईपॉड खरीदना बंद कर देंगे। उन्होंने डरने के बजाय खुद के ही प्रोडक्ट को टक्कर दी। इसे कहते हैं असली विजन और रिलेंटलेस इनोवेशन।
ज्यादातर भारतीय बिजनेसमैन यही गलती करते हैं। वे एक बार दुकान सेट कर लेते हैं और फिर बीस साल तक उसी ढर्रे पर चलते रहते हैं। उन्हें लगता है कि चेंज होना रिस्की है। अरे भाई, चेंज न होना सबसे बड़ा रिस्क है। मार्केट एक बहती हुई नदी की तरह है, अगर आप एक जगह रुक गए तो आप सड़ जाएंगे। आपको लहरों के साथ नहीं, बल्कि लहरों से आगे तैरना सीखना होगा। आपको वह चीजें देखनी होंगी जो आज अस्तित्व में भी नहीं हैं।
सच्चाई तो यह है कि इनोवेशन का मतलब सिर्फ नई मशीनें खरीदना नहीं है। इसका मतलब है अपने कस्टमर की बदलती हुई आदतों को पहचानना। अगर आज लोग ऑनलाइन ऑर्डर करना पसंद कर रहे हैं, और आप अभी भी कह रहे हैं कि भाई दुकान पर आकर ही सामान मिलेगा, तो आप विजन के मामले में अंधे हैं। मार्केट लीडर वही होता है जो समस्या आने से पहले उसका समाधान तैयार रखता है। वह दूसरों की नकल नहीं करता, बल्कि वह नए बेंचमार्क सेट करता है जिसे बाकी दुनिया फॉलो करती है।
क्या आपके पास वह हिम्मत है कि आप अपने आज के सबसे सफल तरीके को कल के लिए बेकार घोषित कर सकें? अगर नहीं, तो आप मार्केट में सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे। डोमिनेट वही करता है जो खुद को हर रोज बेहतर बनाने की भूख रखता है। जो यह मानता है कि आज जो बेस्ट है, वह कल कचरा हो सकता है। इसलिए अपनी कुर्सी से उठिए, अपने कंफर्ट जोन को आग लगाइए और देखिए कि कल की दुनिया आपसे क्या मांग रही है। विजन सिर्फ आंखों से नहीं, बल्कि मार्केट की नब्ज से आता है।
Lesson : लॉन्ग टर्म विजन और हार न मानने वाली जिद
बिजनेस कोई १०० मीटर की रेस नहीं है कि जो शुरू में तेज भागा वही मेडल ले जाएगा। यह एक मैराथन है, और मैराथन में वही जीतता है जिसके फेफड़ों में दम और दिमाग में जिद होती है। विल एंड विजन का सबसे बड़ा सच यही है कि मार्केट पर कब्जा करने के लिए आपको केवल स्मार्ट होना काफी नहीं है, आपको थोड़ा पागल और बहुत ज्यादा जिद्दी होना पड़ता है। ज्यादातर कंपनियां इसलिए फेल नहीं होतीं कि उनके पास आईडिया बुरा था, बल्कि इसलिए होती हैं क्योंकि वे पहली दो-तीन हार के बाद ही घुटने टेक देती हैं। उन्हें लगता है कि अगर पहले साल में प्रॉफिट नहीं हुआ, तो धंधा बंद कर देना चाहिए।
मान लीजिए आपने एक जिम खोला। पहले दिन आपने बहुत जोश में रिबन काटा, म्यूजिक बजाया और सोचा कि कल से पूरी दुनिया बॉडी बनाने मेरे पास आएगी। पहले हफ्ते में दस लोग आए, दूसरे हफ्ते में पांच रह गए और तीसरे हफ्ते में सिर्फ आप और आपका ट्रेनर एक-दूसरे का मुंह देख रहे हैं। अब यहाँ दो तरह के लोग होते हैं। एक वह जो कहेंगे कि भाई इस इलाके के लोगों को फिटनेस की कदर ही नहीं है, ताला लगाओ और चलो घर। और दूसरे वह, जो जिम के बाहर खड़े होकर लोगों को जूस पिलाएंगे, उन्हें वर्कआउट के फायदे बताएंगे और छह महीने तक खाली जेब रहकर भी मुस्कुराएंगे। यही वह विल यानी इच्छाशक्ति है जो मार्केट डोमिनेट करने वालों में होती है।
किताब के लेखक बताते हैं कि जो कंपनियां आज मार्केट लीडर हैं, वे एक समय पर दिवालिया होने की कगार पर थीं। लेकिन उनके पास एक विजन था कि अगले १० या २० साल में दुनिया कैसी दिखेगी। वे आज के छोटे नुकसान से नहीं डरे क्योंकि उनकी नजर कल के बड़े साम्राज्य पर थी। अगर आप आज के कल पैसे डबल करने के चक्कर में बिजनेस में आए हैं, तो आप जुआ खेल रहे हैं, बिजनेस नहीं। मार्केट डोमिनेट करने के लिए आपको उस गड्ढे में भी कूदना पड़ता है जहाँ से वापसी का रास्ता नजर नहीं आता, बस खुद पर भरोसा होना चाहिए।
सर्कस के हाथी की तरह मत बनिए जिसे बचपन में एक पतली जंजीर से बांधा गया था और अब बड़ा होने के बाद भी उसे लगता है कि वह उसे तोड़ नहीं सकता। मार्केट की जंजीरें सिर्फ आपके दिमाग में हैं। अगर आप लगातार पांच साल तक एक ही विजन पर टिके रहे, तो मार्केट को झुकना ही पड़ेगा। लोग आपकी हंसी उड़ाएंगे, कहेंगे कि भाई तू पागल हो गया है, पैसा बर्बाद कर रहा है। लेकिन जिस दिन आपकी जिद रंग लाएगी, वही लोग सबसे पहले आकर आपसे हाथ मिलाएंगे।
यह समझ लीजिए कि मार्केट लीडर बनना कोई इत्तेफाक नहीं है। यह एक सोची-समझी साजिश है खुद को बेहतर बनाने की और दुनिया को कुछ अलग देने की। क्या आपके पास वह विजन है जो अंधेरे में भी रास्ता देख सके? क्या आपके पास वह जिद है जो थकावट को भी थका दे? अगर हाँ, तो मुबारक हो, देर से आने के बावजूद आप ही इस रेस के असली विजेता बनने वाले हैं।
तो दोस्तों, विल एंड विजन हमें यही सिखाती है कि मार्केट में आपकी एंट्री की टाइमिंग से ज्यादा आपका टिके रहने का इरादा मायने रखता है। आज ही अपने बिजनेस या अपने करियर को एक नए विजन से देखिए। क्या आप सिर्फ भीड़ का हिस्सा हैं या आप डोमिनेट करने की तैयारी कर रहे हैं? नीचे कमेंट में बताइए कि आपका वह कौन सा सपना है जिसे लोग पागलपन कहते हैं, लेकिन आप उसे सच करके दिखाएंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो अपना स्टार्टअप शुरू करने से डर रहा है। याद रखिए, विजन बड़ा होगा तो रास्ता अपने आप बन जाएगा।
-----
अगर आप इस बुक की पूरी गहराई में जाना चाहते हैं, तो इस बुक को यहाँ से खरीद सकते है - Buy Now
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#BusinessStrategy #MarketLeadership #Innovation #Entrepreneurship #SuccessMindset
_