What Really Works (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो हर हफ्ते नई बिजनेस स्ट्रैटेजी बदलकर खुद को बहुत बड़ा बिजनेसमैन समझते हैं। मुबारक हो क्योंकि आपकी यह कन्फ्यूजन ही आपके बिजनेस को डुबाने के लिए काफी है। जबकि सफल कंपनियां वो 4 प्लस 2 फॉर्मूला इस्तेमाल कर रही हैं जिसके बारे में आपको भनक तक नहीं है। बिना इस सीक्रेट के आप बस अंधेरे में हाथ पैर मारते रहेंगे और मार्केट के असली खिलाड़ी आपकी मेहनत का मजाक उड़ाते हुए आगे निकल जाएंगे।

आज हम विलियम जॉयस की वॉट रियली वर्क्स बुक की मदद से उस कड़वे सच का सामना करेंगे जो कोई और नहीं बताता। चलिए जानते हैं वो 3 लेसन जो आपके काम करने के तरीके को हमेशा के लिए बदल देंगे।


लेसन १ : द 4 प्राइमरी प्रैक्टिस (बिजनेस की असली बुनियाद)

अगर आप सोचते हैं कि बिजनेस शुरू करना और उसे चलाना बस एक अच्छा आईडिया और कुछ लकी फैसलों का खेल है तो शायद आप किसी दूसरी दुनिया में जी रहे हैं। सच तो यह है कि मार्केट को आपके आईडिया से ज्यादा इस बात की परवाह है कि आप उसे जमीन पर कैसे उतारते हैं। वॉट रियली वर्क्स के ऑथर्स ने हजारों कंपनियों को छानने के बाद पाया कि जो कंपनियां सालों तक टिकी रहती हैं वो कोई जादुई मंत्र नहीं पढ़तीं बल्कि 4 बुनियादी पिलर्स पर फोकस करती हैं। ये 4 चीजें हैं स्ट्रेटेजी, एग्जीक्यूशन, कल्चर और स्ट्रक्चर। अगर आपकी कंपनी में ये चारों सही सलामत नहीं हैं तो समझ लीजिए कि आप एक ऐसी नाव में बैठे हैं जिसमें चार बड़े छेद हैं और आप चम्मच से पानी बाहर निकाल रहे हैं।

सबसे पहले बात करते हैं स्ट्रेटेजी की। बहुत से लोग सोचते हैं कि एक भारी भरकम 50 पेज की फाइल बना लेना ही स्ट्रेटेजी है। असल में स्ट्रेटेजी का मतलब है यह साफ होना कि आप क्या करेंगे और उससे भी ज्यादा जरूरी यह कि आप क्या नहीं करेंगे। मैंने ऐसे कई स्टार्टअप फाउंडर्स देखे हैं जो आज कपड़े बेच रहे होते हैं और कल अचानक उन्हें लगता है कि उन्हें रॉकेट भी बनाना चाहिए। भाई पहले एक चीज में तो झंडे गाड़ लो। आपकी स्ट्रेटेजी इतनी सिंपल होनी चाहिए कि आपके ऑफिस का चपरासी भी उसे समझ सके और कस्टमर को भी समझ आए कि आप दूसरों से अलग क्यों हैं। अगर आपकी स्ट्रेटेजी आपके पड़ोसी की बातों को सुनकर हर हफ्ते बदलती है तो यकीन मानिए आप बिजनेस नहीं बल्कि एक कंफ्यूज्ड हॉबी चला रहे हैं।

इसके बाद आता है एग्जीक्यूशन। यह वो जगह है जहाँ बड़े बड़े धुरंधर मात खा जाते हैं। लोग हफ़्तों तक मीटिंग्स में बैठकर समोसे खाते हैं और प्लान बनाते हैं लेकिन जब काम करने की बारी आती है तो सब गायब। सफल कंपनियां कभी भी परफेक्शन के पीछे नहीं भागतीं बल्कि वो काम को खत्म करने के पीछे भागती हैं। उनके लिए प्रोडक्ट की क्वालिटी और डिलीवरी में कोई समझौता नहीं होता। अगर आप अपने कस्टमर को वादा करते हैं कि सामान सोमवार को पहुंचेगा और वो शनिवार तक नहीं आता तो आपकी चाहे कितनी भी बड़ी कंपनी क्यों न हो आप फेल हैं। एग्जीक्यूशन का मतलब है अपनी सर्विस को इतना स्मूथ बनाना कि कस्टमर को शिकायत करने का मौका ही न मिले।

तीसरा पिलर है कल्चर। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप दीवार पर लिखकर टांग दें। कल्चर वो है जो आपके एम्प्लॉई तब करते हैं जब आप कमरे में नहीं होते। अगर आपके ऑफिस का माहौल ऐसा है जहाँ लोग बस घड़ी देखते हैं कि कब शाम के छह बजें और वो भागें तो आपके बिजनेस का भविष्य अंधकार में है। एक अच्छा कल्चर वो है जहाँ हर कोई खुद को कंपनी का मालिक समझता है और परफॉरमेंस को सबसे ऊपर रखता है। और आखिरी है स्ट्रक्चर। इसका मतलब है कि सबको पता होना चाहिए कि किसका क्या काम है। अगर एक ही काम के लिए तीन लोग बॉस बने बैठे हैं तो समझ लीजिए कि काम कभी नहीं होगा। स्ट्रक्चर ऐसा हो जो काम को आसान बनाए न कि फाइलों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक घुमाने में वक्त बर्बाद करे। जब ये 4 प्राइमरी प्रैक्टिस एक साथ मिल जाती हैं तब जाकर एक मजबूत किला तैयार होता है जिसे मार्केट का कोई भी तूफान हिला नहीं सकता।


लेसन २ : द 2 सेकेंडरी प्रैक्टिस (वो एक्स्ट्रा पावर जो आपको जिताएगी)

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर 4 पिलर्स ही सब कुछ हैं तो हर कोई अमीर क्यों नहीं है। यहीं पर आता है इस बुक का असली ट्विस्ट जिसे ऑथर्स 4 प्लस 2 फॉर्मूला कहते हैं। इसका मतलब है कि वो 4 बेसिक काम तो आपको करने ही हैं लेकिन उसके साथ आपको 4 और ऑप्शंस में से कोई भी 2 चीजें चुननी होंगी जिनमें आपको दुनिया में बेस्ट बनना पड़ेगा। ये 4 ऑप्शंस हैं टैलेंट, इनोवेशन, लीडरशिप और मर्जर एंड एक्विजिशन। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपनी कार में पेट्रोल तो डालते ही हैं लेकिन अगर आपको रेस जीतनी है तो आपको उसमें थोडा टर्बो बूस्ट भी चाहिए होगा।

सबसे पहले बात करते हैं टैलेंट की। बहुत से मालिक सोचते हैं कि कम सैलरी में काम करने वाले लोग मिल जाएं तो मजा आ जाए। भाई साहब अगर आप मूंगफली देंगे तो आपको काम करने के लिए बंदर ही मिलेंगे। सफल कंपनियां टैलेंट को पहचानती हैं और उन्हें बढ़ने का मौका देती हैं। वो सिर्फ डिग्री नहीं देखतीं बल्कि यह देखती हैं कि बंदे में काम को लेकर कितनी आग है। अगर आपके पास दुनिया के सबसे बेहतरीन लोग हैं तो आपको उन्हें बार बार यह बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि काम कैसे करना है। वो खुद आपको बताएंगे कि कंपनी को आगे कैसे ले जाना है। लेकिन अगर आप खुद को सबसे बड़ा ज्ञानी समझते हैं और अपने स्टाफ को बस रोबोट की तरह ट्रीट करते हैं तो समझ लीजिए कि आपका टैलेंट कल किसी दूसरी कंपनी का इंटरव्यू दे रहा होगा।

दूसरा बड़ा बूस्ट है इनोवेशन। अब इसका मतलब यह नहीं है कि आपको हर दिन नया आईफोन बनाना है। इनोवेशन का मतलब है अपने काम करने के तरीके को लगातार बेहतर बनाना। क्या आप कुछ ऐसा कर सकते हैं जिससे कस्टमर का काम आसान हो जाए। कई लोग पुरानी घिसी पिटी टेक्निक पर चिपके रहते हैं और फिर रोते हैं कि धंधा मंदा है। अगर आप वक्त के साथ अपने आप को अपडेट नहीं करेंगे तो मार्केट आपको किसी पुराने सॉफ्टवेयर की तरह डिलीट कर देगा। कुछ नया करने का रिस्क तो लेना ही पड़ेगा क्योंकि बिना रिस्क के तो सिर्फ सरकारी बैंक की एफडी चलती है और आप यहाँ बिजनेस करने आए हैं।

फिर आती है लीडरशिप। एक अच्छा लीडर वो नहीं होता जो एसी कमरे में बैठकर बस हुक्म चलाता है। असली लीडर वो है जो मुश्किल वक्त में सबसे आगे खड़ा होता है और अपनी टीम को यकीन दिलाता है कि हम यह कर सकते हैं। अगर आपकी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सिर्फ अपनी जेब भरने में लगे हैं और उन्हें कंपनी के विजन से कोई लेना देना नहीं है तो वो नाव डूबना तय है। और आखिरी ऑप्शन है मर्जर या पार्टनरशिप। कभी कभी अकेले दौड़ना मुश्किल होता है इसलिए सही पार्टनर के साथ जुड़ना समझदारी होती है। लेकिन याद रहे पार्टनरशिप सोच समझकर करें वरना यह किसी गलत शादी की तरह बन जाएगी जहाँ काम कम और लड़ाई झगड़े ज्यादा होंगे। बुक का कहना है कि इन 4 में से कोई भी 2 चुन लो और उनमें महारत हासिल कर लो। अगर आप सब कुछ करने की कोशिश करेंगे तो आप किसी भी चीज में मास्टर नहीं बन पाएंगे और अंत में एक कन्फ्यूज्ड खिचड़ी बनकर रह जाएंगे।


लेसन ३ : कंसिस्टेंसी और सिंपलीसिटी (सफलता का बोरिंग लेकिन असली सच)

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो जोश जोश में जिम ज्वाइन करते हैं और दो दिन में अपनी बॉडी देखने लगते हैं और दूसरे वो जो जानते हैं कि असली बॉडी सालों की मेहनत से बनती है। बिजनेस में भी यही लॉजिक काम करता है। वॉट रियली वर्क्स बुक का सबसे बड़ा लेसन यही है कि सफल होना कोई एक दिन का चमत्कार नहीं है बल्कि यह तो उन साधारण चीजों को बार बार करने का नतीजा है जिन्हें लोग अक्सर बोरिंग समझकर छोड़ देते हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ कंपनियां मार्केट में आती हैं और एक साल तक खूब शोर मचाती हैं और फिर अचानक गायब हो जाती हैं। उनकी गलती यही होती है कि वो कंसिस्टेंसी की पावर को कम आंकते हैं।

जब हम सिंपलीसिटी की बात करते हैं तो इसका मतलब यह है कि अपने काम को इतना आसान बना दो कि उसमें गलती की गुंजाइश ही न रहे। कई लोग अपने बिजनेस में इतने भारी भरकम सॉफ्टवेयर और इतनी लंबी चौड़ी प्रोसेस डाल देते हैं कि खुद एम्प्लॉई भी चकरा जाते हैं कि भाई आखिर करना क्या है। अगर आपकी कंपनी का हर आदमी यह नहीं जानता कि आज के दिन का सबसे जरूरी काम क्या है तो समझ लीजिए आप बस कचरा इकट्ठा कर रहे हैं। सफल कंपनियां अपने प्रोसेस को इतना साफ रखती हैं कि वहां किसी को भी कन्फ्यूजन नहीं होती। वो जानते हैं कि अगर आज वो अपने 4 प्लस 2 फॉर्मूला पर टिके रहेंगे तो कल का रिजल्ट अपने आप अच्छा आएगा। लेकिन आजकल के दौर में लोगों को हर चीज तुरंत चाहिए। अगर एक महीने में प्रॉफिट नहीं बढ़ा तो वो पूरी स्ट्रैटेजी ही बदल देते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप एक पौधा लगाएं और हर दो दिन में उसे उखाड़कर देखें कि जड़ें कितनी लंबी हुईं। भाई साहब ऐसा करने से पौधा बढ़ेगा नहीं बल्कि सूख जाएगा।

असली मंत्र यही है कि अपनी स्ट्रैटेजी को सिंपल रखें और उस पर डटे रहें। मार्केट में चाहे कितना भी शोर हो या आपका कॉम्पिटिटर चाहे कितनी भी नई चमक धमक वाली चीजें लाए आपको अपने बेसिक्स नहीं छोड़ने हैं। मैंने देखा है कि लोग अक्सर नए ट्रेंड्स के पीछे भागते भागते अपने पुराने और वफादार कस्टमर्स को ही भूल जाते हैं। यह तो वही बात हुई कि नया दोस्त बनाने के चक्कर में पुराने यार का साथ छोड़ दिया। बुक कहती है कि जो कंपनियां सालों तक नंबर वन रही हैं उन्होंने कभी भी कुछ बहुत ज्यादा हटकर नहीं किया बल्कि उन्होंने वही पुराने काम इतनी सफाई और इतनी बार किए कि कोई दूसरा उनके आस पास भी नहीं फटक सका। तो अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बिजनेस सिर्फ एक सीजन का हिट न रहे बल्कि सालों साल चले तो अपनी स्ट्रैटेजी में सादगी लाएं और उसे अपनी आदत बना लें। याद रखिये बिजनेस कोई 100 मीटर की रेस नहीं है बल्कि यह एक मैराथन है जहाँ वही जीतता है जो अंत तक दौड़ता रहता है।


तो दोस्तों, यह था वॉट रियली वर्क्स का वो सच जो शायद आपकी नींद उड़ा दे या फिर आपको एक नई दिशा दे दे। बिजनेस कोई रॉकेट साइंस नहीं है अगर आपके पास सही फॉर्मूला हो। अब सवाल यह है कि क्या आप अब भी वही पुरानी गलतियां दोहराते रहेंगे या फिर आज से ही अपने 4 प्लस 2 पिलर्स पर काम शुरू करेंगे। नीचे कमेंट्स में बताएं कि आपके बिजनेस या काम में वो कौन सा एक पिलर है जो सबसे कमजोर है और आप उसे आज ही सुधारने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो हर दूसरे दिन एक नया बिजनेस आईडिया लेकर आपके पास आता है। चलिए साथ मिलकर ग्रो करते हैं।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#BusinessStrategy #EntrepreneurshipIndia #BookSummary #SuccessFormula #ManagementTips


_

Post a Comment

Previous Post Next Post