अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो अपनी पुरानी और घिसी पिटी आदतों को अपनी विरासत समझते हैं तो मुबारक हो। आप बड़ी शान से अपनी बर्बादी की तरफ बढ़ रहे हैं। जब दुनिया बदल रही थी तब आईबीएम भी आपकी तरह ही ईगो पालकर बैठी थी और फिर जो हुआ वह किसी डरावने सपने से कम नहीं था।
लुई गेर्स्टनर की यह कहानी केवल एक कंपनी के बचने की नहीं है बल्कि आपकी सुस्ती को एक जोरदार लात मारने के लिए है। इस आर्टिकल में हम आईबीएम के उस ऐतिहासिक बदलाव से वह 3 लेसन सीखेंगे जो आपको और आपके बिजनेस को फेल होने से बचा सकते हैं।
लेसन १ : कल्चर ही असली गेम है, बाकी सब मोह माया है
अगर आपको लगता है कि बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ और ऑफिस की चमचमाती दीवारें किसी बिजनेस को चलाती हैं, तो आप शायद किसी अलग ही दुनिया में जी रहे हैं। आईबीएम जैसी दिग्गज कंपनी जब डूबने की कगार पर थी, तो लुई गेर्स्टनर ने वहां जाकर कोई जादू की छड़ी नहीं घुमाई। उन्होंने सबसे पहले उस 'सड़े हुए कल्चर' पर हमला किया जो आईबीएम के रग-रग में बस चुका था। वहां के लोग काम करने से ज्यादा इस बात पर ध्यान देते थे कि मीटिंग में कौन सी टाई पहनकर आनी है। सोचिए, कंपनी अरबों के घाटे में है और साहब लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि प्रेजेंटेशन की स्लाइड्स का रंग नीला होना चाहिए या गहरा नीला। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे घर में आग लगी हो और आप इस बात पर टेंशन ले रहे हों कि सोफे का कवर गंदा हो गया है।
आईबीएम के लोग अपनी ही एक काल्पनिक दुनिया में रहते थे जिसे वे 'आईबीएम वे' कहते थे। उन्हें लगता था कि वे इतने महान हैं कि कस्टमर को उनकी खुशामद करनी चाहिए। लुई ने देखा कि कंपनी के अंदर राजनीति इतनी बढ़ चुकी थी कि एक डिपार्टमेंट दूसरे डिपार्टमेंट को नीचा दिखाने के लिए खुद की ही जड़ें काट रहा था। अगर आपको लगता है कि आपके ऑफिस या छोटे से स्टार्टअप में भी लोग काम कम और 'पॉलिटिक्स' ज्यादा कर रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आपका हाथी भी जल्द ही जमीन पर आने वाला है। लुई ने साफ कह दिया था कि मुझे ऐसे लोग नहीं चाहिए जो सिर्फ प्रॉब्लम गिनाना जानते हों, मुझे वो चाहिए जो सलूशन पर काम करें।
मान लीजिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वेटर आपसे कहता है कि सर, खाना तो बहुत बढ़िया है लेकिन हम अपनी मर्जी से ही खिलाएंगे, आप क्या चाहते हैं उससे हमें फर्क नहीं पड़ता। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे? कभी नहीं। आईबीएम के इंजीनियर्स भी यही कर रहे थे। वे ऐसे प्रोडक्ट्स बना रहे थे जो उन्हें अच्छे लगते थे, न कि वो जो कस्टमर को चाहिए थे। लुई ने इस ईगो को तोड़ने के लिए पूरे ड्रेस कोड और काम करने के तरीके को ही बदल दिया। उन्होंने सिखाया कि कल्चर का मतलब केवल दीवार पर लिखे स्लोगन नहीं होते, बल्कि वह व्यवहार होता है जो आप तब करते हैं जब कोई आपको देख नहीं रहा होता।
जब तक आपका कल्चर 'कस्टमर फर्स्ट' और 'रिजल्ट ओरिएंटेड' नहीं होगा, तब तक आप कितनी भी मार्केटिंग कर लें, नतीजा सिफर ही रहेगा। हाथी तभी नाच सकता है जब वह अपनी भारी भरकम ईगो को उतार कर जमीन पर रख दे। आईबीएम में लोग मीटिंग्स को ही अपना असली काम समझ बैठे थे। लुई ने इन बिना मतलब की मीटिंग्स को बंद कराया और लोगों को फील्ड पर भेजा। उन्होंने साफ कर दिया कि अगर आप कस्टमर की समस्या हल नहीं कर रहे हैं, तो आप कंपनी के लिए एक बोझ हैं। यह लेसन हर उस इंसान के लिए है जो किसी टीम को लीड कर रहा है। अपनी टीम का कल्चर ऐसा बनाइये जहाँ काम बोले, चमचागिरी नहीं।
लेसन २ : विजन के झुनझुने छोड़ो और काम खत्म करना सीखो
जब लुई आईबीएम में आए, तो हर कोई उनसे एक ही सवाल पूछ रहा था कि सर, आपका 'विजन' क्या है? मीडिया वाले पीछे पड़े थे, इन्वेस्टर्स को लंबी चौड़ी स्पीच चाहिए थी। लेकिन लुई ने एक ऐसी बात कही जिसने पूरी इंडस्ट्री को हिला दिया। उन्होंने कहा कि अभी इस वक्त आईबीएम को किसी विजन की जरूरत नहीं है। अब आप सोचेंगे कि क्या आदमी है? बिना विजन के कंपनी कैसे चलेगी? लेकिन दोस्त, जब नाव में छेद हो और पानी अंदर आ रहा हो, तो आप यह नहीं सोचते कि पाँच साल बाद यह नाव कौन से आइलैंड पर खड़ी होगी। आपका पहला काम होता है बाल्टी उठाकर पानी बाहर फेंकना।
हमारे देश में भी यही दिक्कत है। हर दूसरा लड़का स्टार्टअप खोलकर बैठा है और विजन की बातें ऐसे करता है जैसे अगला एलन मस्क वही हो। लेकिन जब पूछो कि भाई आज कितने सेल हुए? तो जवाब मिलता है कि अभी हम अपनी वेबसाइट के फॉन्ट और लोगो पर रिसर्च कर रहे हैं। लुई ने आईबीएम में यही गंदगी देखी थी। लोग सालों तक स्ट्रेटेजी बनाते रहते थे लेकिन उसे लागू करने के नाम पर सबको सांप सूंघ जाता था। उन्होंने साफ कहा कि एक एवरेज आईडिया जिसे पूरी जान लगाकर लागू किया जाए, वह उस महान आईडिया से लाख गुना बेहतर है जो सिर्फ आपकी फाइलों में धूल फांक रहा है।
मान लीजिए आपको जिम जाना है और बॉडी बनानी है। अब आप बैठकर दुनिया भर के यूट्यूब वीडियो देख रहे हैं, बेस्ट डाइट चार्ट बना रहे हैं और सबसे महंगे जूते खरीद रहे हैं। यह सब आपका 'विजन' है। लेकिन एक महीना बीत गया और आप एक दिन भी जिम नहीं गए। वहीं आपका पड़ोसी जिसके पास न महंगे जूते हैं न कोई प्लान, वह रोज सुबह उठकर 50 पुशअप्स मार रहा है। जीत उसकी होगी क्योंकि वह 'एग्जीक्यूशन' कर रहा है। आईबीएम में भी यही हो रहा था, वहां के लोग खुद को इतना इंटेलिजेंट समझते थे कि वे काम करने को छोटा काम मानते थे और सिर्फ सोचने को बड़ा काम।
लुई ने आईबीएम के भारी भरकम हाथी को धक्का देना शुरू किया। उन्होंने हर काम के लिए डेडलाइन सेट की और जवाबदेही तय की। पहले आईबीएम में कोई प्रोजेक्ट फेल होता था तो कोई जिम्मेदार नहीं मिलता था, सब एक दूसरे पर उंगली उठाते थे। लुई ने कहा कि अगर यह प्रोजेक्ट फेल हुआ तो फलां आदमी की कुर्सी जाएगी। जब कुर्सी पर आंच आई तो लोग अपने आप काम करने लगे। उन्होंने सिखाया कि सफलता सिर्फ इस बात से नहीं मिलती कि आपके पास कितना बड़ा आईडिया है, बल्कि इस बात से मिलती है कि आप उसे कितनी तेजी और सटीकता से जमीन पर उतारते हैं।
अगर आप भी अपनी लाइफ में सिर्फ प्लानिंग ही कर रहे हैं और रिजल्ट कुछ नहीं आ रहा, तो समझ जाइए कि आप भी आईबीएम वाली बीमारी के शिकार हैं। बड़े सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए पसीना बहाना पड़ता है। लुई ने आईबीएम को दुनिया की सबसे बड़ी सर्विस कंपनी बना दिया क्योंकि उन्होंने सिर्फ बातें नहीं कीं, बल्कि करके दिखाया। उन्होंने आईबीएम के उन टुकड़ों को जोड़ा जो बिखर रहे थे और एक ऐसी मशीन तैयार की जो सिर्फ रिजल्ट देना जानती थी। याद रखिये, विजन आपको रास्ता दिखा सकता है, लेकिन मंजिल तक तो आपके पैर ही आपको पहुँचाएंगे।
लेसन ३ : कस्टमर की उंगली पकड़ो वरना मार्केट आपको हाथ छुड़ाकर भाग जाएगा
क्या आपको पता है कि आईबीएम जैसी बड़ी कंपनी आखिर डूबने की कगार पर कैसे आई? क्योंकि उन्हें लगता था कि वे कस्टमर से ज्यादा समझदार हैं। वे लैब में बैठकर ऐसी चीजें बनाते थे जो देखने में तो कूल थीं, लेकिन असली दुनिया में किसी काम की नहीं थीं। लुई गेर्स्टनर ने जब कमान संभाली, तो उन्होंने देखा कि आईबीएम के सेल्स वाले लोग कस्टमर के पास जाकर उसकी समस्या सुनने के बजाय उसे यह समझाने में लगे रहते थे कि हमारा कंप्यूटर कितना महान है। यह तो वही बात हुई कि आपको प्यास लगी है और दुकानदार आपको जबरदस्ती यह बता रहा है कि उसका बनाया हुआ जूता कितना मजबूत है। भाई, मुझे पानी चाहिए, जूता नहीं।
लुई ने आईबीएम के उन सोए हुए दिग्गजों को जगाया और कहा कि अपने इन एअर कंडीशनर वाले केबिन से बाहर निकलो और असली दुनिया में जाओ। उन्होंने एक बहुत बड़ा रिस्क लिया और आईबीएम को एक हार्डवेयर कंपनी से बदलकर एक 'सर्विस' कंपनी बना दिया। लोग चिल्लाते रहे कि हम तो मेनफ्रेम कंप्यूटर के राजा हैं, हम सर्विसिंग का छोटा काम क्यों करें? लेकिन लुई जानते थे कि कस्टमर को अब सिर्फ डब्बे नहीं चाहिए, उसे अपनी समस्याओं का समाधान चाहिए। अगर आप आज के दौर में अपना कोई बिजनेस चला रहे हैं या किसी जॉब में हैं, तो याद रखिये कि आपकी वैल्यू सिर्फ उतनी ही है जितनी बड़ी प्रॉब्लम आप सॉल्व कर रहे हैं।
मान लीजिए आप एक नई नवेली दुल्हन के लिए साड़ी खरीदने जाते हैं। दुकानदार आपको साड़ी का फैब्रिक और उसकी मशीन के बारे में एक घंटे तक लेक्चर देता है, लेकिन वह यह नहीं देखता कि आपको कौन सा रंग पसंद है। आप चिढ़कर वहां से भाग जाएंगे। आईबीएम भी यही कर रही थी। लुई ने आईबीएम के हर एम्प्लोई के लिए यह जरूरी कर दिया कि वे कस्टमर के साथ समय बिताएं। उन्होंने सिखाया कि असली इनोवेशन लैब में नहीं, बल्कि कस्टमर के फीडबैक में छिपा होता है। जब तक आप अपने कस्टमर की आँखों से दुनिया नहीं देखेंगे, तब तक आप अंधेरे में तीर चलाते रहेंगे।
आजकल के इन्फ्लुएंसर्स और गुरु आपको बताएंगे कि अपना ब्रांड बनाओ, अपनी ईगो बढ़ाओ। लेकिन लुई की यह कहानी सिखाती है कि अपनी ईगो को कचरे के डिब्बे में डाल दो और कस्टमर के सामने विनम्र बनो। आईबीएम की जीत का सबसे बड़ा राज यही था कि उन्होंने यह स्वीकार किया कि वे रास्ता भटक गए थे। उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स को कस्टमर की जरूरत के हिसाब से ढाला, न कि कस्टमर को मजबूर किया कि वह उनके पुराने प्रोडक्ट्स खरीदे। हाथी ने नाचना इसलिए सीखा क्योंकि उसे समझ आ गया था कि अगर वह नहीं नाचा, तो सर्कस का मालिक उसे खाना देना बंद कर देगा।
लुई गेर्स्टनर और आईबीएम की यह कहानी हमें सिखाती है कि कोई भी कंपनी या इंसान इतना बड़ा नहीं होता कि वह गिर न सके, और कोई भी इतना नीचे नहीं गिरता कि वह फिर से उठ न सके। बस जरूरत है अपनी गलतियों को मानने की और उन पर काम करने की। क्या आप भी अपनी लाइफ में किसी ऐसे 'हाथी' को पाल रहे हैं जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है? क्या वह आपकी ईगो है या आपकी सुस्ती? आज ही उस पर काम करना शुरू करें। कमेंट्स में हमें बताएं कि इन 3 लेसन में से कौन सा लेसन आपकी लाइफ की कहानी से मेल खाता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे एक 'वेक अप कॉल' की जरूरत है। चलिए साथ मिलकर अपने अंदर के हाथी को नचाते हैं।
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