Go Do Deals (Hindi)


क्या आप अभी भी वही घिसे पिटे तरीके से बिजनेस को जीरो से खड़ा करने में अपनी जवानी बर्बाद कर रहे हैं। जबकि स्मार्ट लोग दूसरों के बने बनाए बिजनेस खरीदकर रातों रात अमीर बन रहे हैं। आप बस मेहनत करते रह जाएंगे और पीछे छूट जाएंगे। असली खेल डील्स में है।

यह किताब आपको उन सीक्रेट्स के बारे में बताती है जो ज्यादातर लोग आपको कभी नहीं बताएंगे। आज हम इस किताब के तीन बड़े लेसन पर बात करेंगे जो आपके सोचने का नजरिया पूरी तरह से बदल कर रख देंगे।


लेसन १ : बिजनेस खरीदने के लिए जेब से पैसे देने की जरूरत नहीं है

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बिजनेस खरीदने के लिए करोड़ों का बैंक बैलेंस होना चाहिए। भाई साहब, यह सोच ही आपको गरीबी में रखती है। आप सोचते हैं कि बिजनेस खरीदना मतलब अपनी पूरी जमा पूंजी लुटाना है। यह बिल्कुल गलत है। जेरेमी हारबर कहते हैं कि अगर आपके पास कैश नहीं है तो भी आप बिजनेस खरीद सकते हैं। कमाल की बात है न। लोग अपनी मेहनत की कमाई बिजनेस में झोंक देते हैं और फिर दो साल बाद दुकान बंद करके रोते हैं।

सोचिए आपका पड़ोसी रमेश जो हमेशा चिल्लाता है कि उसका बिजनेस घाटे में है। अब अगर आप उसके पास जाकर कहें कि भाई मैं तुम्हारा यह सिरदर्द कम कर देता हूं। आप उससे बिजनेस का मालिकाना हक ले लेते हैं और उसे कहते हैं कि जब बिजनेस से मुनाफा होगा तो मैं तुम्हें धीरे धीरे पैसे चुका दूंगा। यह सुनने में अजीब लगता है लेकिन असलियत यही है। बिजनेस का अपना कैश फ्लो ही उस बिजनेस को खरीदने के लिए पैसे देता है।

लोग इसे कॉम्प्लिकेटेड समझते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सब कुछ कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंट्स में छुपा है। असल में यह गेम सिर्फ बातचीत का है। आप उस बिजनेस के मालिक को उसके ही प्रॉफिट से पैसे दे रहे हैं। आपने एक रुपया भी अपनी जेब से नहीं निकाला और आप एक बिजनेस के मालिक बन गए। जो लोग खुद बिजनेस शुरू करने की गलती करते हैं, वे पहले दिन से ही हार रहे होते हैं। वे ग्राहक ढूंढ रहे होते हैं, वे ऑफिस का किराया भर रहे होते हैं, और वे मार्केटिंग पर फालतू पैसा खर्च कर रहे होते हैं।

वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट इन्वेस्टर पहले से चलता हुआ बिजनेस उठाता है जिसके पास पहले से ही ग्राहक हैं। वहां पहले से ही टीम काम कर रही है। वहां पहले से ही कैश आ रहा है। आप बस वहां जाकर सिस्टम को थोड़ा और बेहतर बनाते हैं। यह कितना आसान है। लेकिन नहीं, आपको तो खुद का जीरो से स्टार्टअप शुरू करना है ताकि आप अपनी ईगो संतुष्ट कर सकें। यह ईगो ही है जो आपको अमीर बनने से रोक रही है।

असली बिजनेस लीडर वो नहीं है जो सबसे ज्यादा मेहनत करता है। असली लीडर वो है जो दूसरों के काम को अपनी मेहनत के बिना अपना बना लेता है। आप बस ये समझ लीजिए कि दुनिया उन लोगों की नहीं है जो मेहनत करते हैं। दुनिया उन लोगों की है जो डील्स करते हैं। जब आप बिजनेस खरीदने का रिस्क लेते हैं, तो आप असल में सिर्फ सिस्टम खरीद रहे होते हैं। अगर वो सिस्टम काम कर रहा है, तो आपको वहां बैठने की भी जरूरत नहीं है।

क्या आप समझ पा रहे हैं कि आप कितना बड़ा मौका गंवा रहे हैं? हर दिन हजारों बिजनेस मालिक ऐसे हैं जो थक चुके हैं और अपना काम छोड़ना चाहते हैं। वे बस सही आदमी की तलाश में हैं जो उनका बोझ ले सके। और आप हैं कि आप अभी भी स्टार्टअप के आईडिया ढूंढने में अपना समय नष्ट कर रहे हैं। अगला लेसन इससे भी ज्यादा मजेदार होने वाला है क्योंकि वहां हम बात करेंगे कि कैसे आप बिजनेस को एक खिलौने की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।


लेसन २ : बिजनेस को खुद चलाने के बजाय उसे एक सिस्टम की तरह देखें

लोग बिजनेस खोलते हैं जैसे कोई मंदिर का प्रसाद बांट रहे हों। वे वहां दिन भर बैठते हैं, काउंटर संभालते हैं, और खुद को बिजनेस का सबसे बड़ा नौकर बना लेते हैं। जेरेमी हारबर का कहना है कि अगर आपको बिजनेस में हर दिन बैठना पड़ रहा है, तो आपके पास बिजनेस नहीं है, आपके पास सिर्फ एक महंगी नौकरी है। इसे ही लोग गलती से एंटरप्रेन्योरशिप समझ लेते हैं। ये वही लोग हैं जो अपनी शादी में भी लैपटॉप लेकर बैठते हैं और फिर कहते हैं कि बिजनेस में बहुत स्ट्रेस है।

असली बिजनेस वो है जो आपकी मौजूदगी के बिना भी पैसा कमाकर दे। इसे एक मशीन की तरह सोचिए। अगर मशीन को चलने के लिए हर पांच मिनट में ऑपरेटर की जरूरत पड़े, तो वो मशीन कबाड़ है। अगर आप बिजनेस को सिस्टम की तरह नहीं बना सकते, तो उसे खरीदने का कोई फायदा नहीं है। बहुत से लोग बिजनेस खरीदते हैं और फिर उसे खुद ही चलाने लगते हैं। ये तो वही बात हुई कि आपने कार खरीदी और उसे खुद धक्का देकर चलाने की कोशिश कर रहे हैं।

जब आप बिजनेस को एक सिस्टम की तरह देखते हैं, तो आप उसे किसी और के लिए आसान बना रहे होते हैं। आप उसमें प्रोसेसेस डालते हैं, आप उसे ऑटोमेट करते हैं, और आप उसे ऐसा बनाते हैं कि कोई भी नया मैनेजर वहां आए तो काम रुकना नहीं चाहिए। अगर आपका बिजनेस आपके बिना नहीं चल सकता, तो आप उसे कभी बेच भी नहीं पाएंगे। कोई भी समझदार इंसान ऐसा बिजनेस नहीं खरीदेगा जिसमें आप ही मुख्य कड़ी हैं।

सोचिए आप एक रेस्टोरेंट खरीदते हैं। अगर आप वहां जाकर खुद ही सब्जियां काटेंगे, तो आप रसोइया हैं, मालिक नहीं। लेकिन अगर आप वहां ऐसा सिस्टम बना दें कि खाना भी सही समय पर बने और बिलिंग भी बिना आपकी मर्जी के हो, तो वो एक एसेट है। अब आप उस रेस्टोरेंट को किसी और को बेच सकते हैं। दुनिया में लोग बिजनेस सिर्फ इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें उससे एक फिक्स्ड इनकम चाहिए। वे आपकी मेहनत नहीं खरीद रहे, वे आपका सिस्टम खरीद रहे हैं।

ज्यादातर लोग अपने बिजनेस के प्यार में इतने पागल हो जाते हैं कि वे उसे छोड़ ही नहीं पाते। वे हर छोटी चीज को खुद कंट्रोल करना चाहते हैं। ये कंट्रोल का भूत ही है जो आपकी ग्रोथ को रोकता है। याद रखिए, आप जितने कम जरूरी होंगे, आपका बिजनेस उतना ही ज्यादा कीमती होगा। अगर कल आप कहीं घूमने निकल जाएं और आपका बिजनेस तब भी मुनाफा दे रहा है, तभी आप एक असली बिजनेसमैन हैं।

जो लोग सिस्टम पर ध्यान नहीं देते, वे हमेशा छोटी दुकानों में उलझे रहते हैं और जिंदगी भर अपनी मेहनत का रोना रोते हैं। बिजनेस को बेच पाना ही आपकी सफलता की असली परीक्षा है। अगर आप उसे बेच नहीं सकते, तो आप उसे कभी बड़ा भी नहीं कर पाएंगे। ये सिलसिला यहीं नहीं रुकता, क्योंकि अगले लेसन में हम बात करेंगे उस बारे में जो सबसे ज्यादा जरूरी है, यानी बिजनेस से बाहर निकलना।


लेसन ३ : बिजनेस बेचने का सही समय वो है जब आप उसे आकर्षक बना देते हैं

ज्यादातर लोग बिजनेस तब बेचने की कोशिश करते हैं जब उनका धंधा डूब रहा होता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई सड़ी हुई सब्जी को ताजी बताकर बेचने की कोशिश करना। जेरेमी हारबर के अनुसार बिजनेस को तब बेचिए जब वह सबसे अच्छे फॉर्म में हो। अगर आप थके हुए हैं या बिजनेस में लॉस हो रहा है, तो कोई भी मूर्ख ही उसे खरीदेगा। बिजनेस को बेचने का मतलब है उसे किसी ऐसे व्यक्ति के लिए तैयार करना जो उसे आपसे भी बेहतर तरीके से संभाल सके।

जब आप बिजनेस को बेचने के लिए तैयार करते हैं, तो आप उसे प्रॉफिटेबल बनाते हैं, टीम को ट्रेन करते हैं और प्रोसेसेस को टाइट करते हैं। यही वो मेहनत है जो बिजनेस को असली वैल्यू दिलाती है। बहुत से लोग डरते हैं कि अगर मैंने अपना बिजनेस बेच दिया तो मैं क्या करूँगा। भाई, यही तो मौका है। जब आप एक बिजनेस बेचते हैं, तो आपके पास हाथ में कैश आता है, जिसे आप किसी दूसरे बड़े बिजनेस को खरीदने में लगा सकते हैं। इसे ही तो कंपाउंडिंग कहते हैं।

लोग बिजनेस के मालिक बने रहने के लिए अपनी पूरी जिंदगी निकाल देते हैं और अंत में उनके पास सिर्फ बुढ़ापा और बीमारियां बचती हैं। स्मार्ट लोग बिजनेस को सिर्फ एक पड़ाव की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे बिजनेस खरीदते हैं, उसे सुधारते हैं, उसका वैल्यू बढ़ाते हैं और फिर उसे किसी बड़े प्लेयर को बेच देते हैं। यह एक साइकिल की तरह है। जितना जल्दी आप इस साइकिल को समझेंगे, उतनी जल्दी आप खेल से बाहर निकलने और दोबारा बड़े लेवल पर एंट्री करने के काबिल बनेंगे।

याद रखिए, बिजनेस आपका बच्चा नहीं है जिसे आप जीवन भर पालेंगे। बिजनेस एक एसेट है। अगर वह आपको पैसा कमा कर नहीं दे रहा है, तो वह आपके लिए बोझ है। इसे बोझ की तरह ढोने में कोई बहादुरी नहीं है। जो लोग इसे छोड़ने से डरते हैं, वे असल में बदलाव से डरते हैं। आप जितना ज्यादा अपने बिजनेस से चिपके रहेंगे, उतना ही ज्यादा आप नई संभावनाओं से दूर होते जाएंगे।

अब आपके पास पूरा ज्ञान है। आप जानते हैं कि बिजनेस बिना पैसा लगाए कैसे खरीदा जाता है, आप जानते हैं कि उसे सिस्टम में कैसे बदला जाता है और आप जानते हैं कि उसे सही समय पर बेचकर कैसे एग्जिट लेना है। अब फैसला आपका है। या तो आप अपनी जिंदगी भर एक ही बिजनेस में फंसे रहकर मेहनत करते रहेंगे, या फिर आप इस गेम को सीखकर अपनी आजादी हासिल करेंगे।

आज ही कदम उठाएं। अपने आसपास उन बिजनेसेस को देखना शुरू करें जो बिकने के लिए तैयार हैं। बातचीत करना शुरू करें। छोटे कदम बड़े बदलाव लाते हैं। अगर यह लेख आपको आपकी मंजिल के एक कदम और करीब ले गया है, तो इसे उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी मेहनत के जाल में फंसे हुए हैं। अपनी सोच बदलिए और बिजनेस की दुनिया को नए नजरिए से देखना शुरू कीजिए।

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