The Practice (Hindi)


क्या आप भी अपनी बेस्ट आइडियाज को सिर्फ इसलिए दबाए बैठे हैं क्योंकि आपको लगता है कि वे अभी परफेक्ट नहीं हैं। आप सिर्फ परफेक्ट होने के इंतजार में अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं और असल दुनिया को अपनी कला से महरूम रख रहे हैं। यह कोई परफेक्शन नहीं बल्कि सिर्फ डर है।

अब बात करते हैं कि कैसे सेठ गोडिन की किताब द प्रैक्टिस आपकी इस सोच को बदलकर आपको एक बेहतर क्रिएटर बना सकती है और कैसे यह आपके काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकती है। चलिए जानते हैं तीन जादुई लेसन।


लेसन १ : काम को शिप करना यानी दुनिया के सामने लाना सबसे बड़ा हुनर है

हम सब अपनी लाइफ में कभी न कभी एक ऐसे कलाकार या क्रिएटर रहे हैं जो रात दिन एक करके कुछ बनाता तो है, लेकिन उसे दुनिया के सामने लाने से डरता है। हम सोचते हैं कि बस थोड़ा और बेहतर कर लूं, फिर लोगों को दिखाऊंगा। यह थोड़ी और वाली बीमारी कभी खत्म नहीं होती। सेठ गोडिन अपनी किताब में साफ कहते हैं कि आपका सबसे बड़ा काम उसे पूरा करके बाहर निकालना है। अगर आपने कोई गाना लिखा, कोई पेंटिंग बनाई या कोई कोड लिखा और उसे अपने लैपटॉप के फोल्डर में ही बंद रखा, तो उसका अस्तित्व ही क्या है। दुनिया को आपके उस अधूरेपन से कोई फर्क नहीं पड़ता, उसे तो आपके काम की जरूरत है।

अक्सर हम सोचते हैं कि जो हमने बनाया है वह दुनिया का सबसे बेकार काम है। अरे भाई, दुनिया में पहले से ही इतनी बेकार चीजें मौजूद हैं कि आपकी एक और चीज से कोई पहाड़ नहीं टूटने वाला। लोग असल में आपके काम के परफेक्ट होने का इंतजार नहीं कर रहे, वे बस किसी ऐसी चीज का इंतजार कर रहे हैं जो उनके काम आए। जब आप अपने काम को शिप नहीं करते, तो आप असल में खुद को रोक रहे होते हैं। आप किसी और के लिए नहीं, बल्कि अपने खुद के डर के लिए उसे छिपा रहे हैं।

सोचिए, आपने एक बेहतरीन डिश बनाई, लेकिन उसे खुद भी नहीं चखा और किसी को परोसा भी नहीं। तो उस मेहनत का क्या फायदा हुआ। आपकी क्रिएटिविटी भी ऐसी ही है। जब आप काम को बाहर भेजते हैं, तो आप एक प्रोसेस शुरू करते हैं। आप फीडबैक लेते हैं, आप सीखते हैं और आप खुद को बेहतर बनाते हैं। जो इंसान काम छुपाकर बैठा है, वह कभी नहीं सीख सकता। आप जितने ज्यादा अपने काम को शिप करेंगे, आप उतने ही ज्यादा निडर होते जाएंगे। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस एक आदत है।

हर बार जब आप अपना काम दुनिया के सामने लाते हैं, तो आप एक नया रास्ता खोलते हैं। हो सकता है कि शुरुआत में लोग उसे उतना न सराहें, या हो सकता है कि उसे कोई देखे भी न। लेकिन क्या आपको पता है, सबसे ज्यादा नुकसान किसका हुआ। उसका नहीं जिसने काम नहीं देखा, बल्कि उसका जिसने काम बनाया तो सही, लेकिन उसे दुनिया की रोशनी कभी नहीं दिखाई। आपकी क्रिएटिविटी एक बहती नदी की तरह है, अगर इसे बांधकर रखोगे तो इसमें गंदगी ही जमेगी। इसे बहने दो, इसे लोगों तक जाने दो। जब आप शिप करने की हिम्मत दिखाते हैं, तो आप असल में एक क्रिएटर बनते हैं। वरना आप सिर्फ उन लोगों में से एक हैं जो सिर्फ बातें करते हैं, काम नहीं।


लेसन २ : रिजल्ट की चिंता छोड़कर केवल अपनी प्रक्रिया यानी प्रोसेस पर ध्यान दें

ज्यादातर लोग काम शुरू करने से पहले ही यह सोचने लगते हैं कि इसका नतीजा क्या होगा। क्या लोग इसे पसंद करेंगे। क्या मुझे इस पर ढेरों लाइक मिलेंगे। या फिर क्या मेरा बॉस मेरी तारीफ करेगा। यहीं से सारी मुसीबत शुरू होती है। आप अपना काम करना छोड़कर परिणामों के सपने देखने लगते हैं। सेठ गोडिन हमें समझाते हैं कि रिजल्ट आपके हाथ में नहीं है, लेकिन प्रोसेस पूरी तरह से आपके कंट्रोल में है। जब आप हर दिन काम करने की प्रक्रिया को अपना धर्म बना लेते हैं, तो नतीजे अपने आप अच्छे आने लगते हैं।

कल्पना कीजिए कि आप एक जिम गए हैं और पहले ही दिन आईने में देखकर सोच रहे हैं कि मेरी बॉडी एथलीट जैसी क्यों नहीं दिख रही। यह सोचना ही पागलपन है। आप वहां मसल्स बनाने नहीं, बल्कि रोज जाकर पसीना बहाने गए हैं। क्रिएटिव काम भी बिल्कुल ऐसा ही है। अगर आप लिखने बैठे हैं तो यह मत सोचिए कि आपकी किताब बेस्टसेलर बनेगी या नहीं। बस यह सोचिए कि आज के पन्ने पर मुझे सबसे ईमानदार शब्द कैसे लिखने हैं। प्रोसेस पर ध्यान देने का मतलब है कि आप अपनी पूरी ऊर्जा काम की क्वालिटी में लगा रहे हैं, न कि इस बात में कि दुनिया आपके बारे में क्या कहेगी।

जब आप रिजल्ट की चिंता छोड़ देते हैं, तो काम में एक गजब की आजादी आ जाती है। आप प्रयोग करने लगते हैं। आप फेल होने से नहीं डरते क्योंकि आपका लक्ष्य जीतना नहीं, बल्कि काम को पूरा करना है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक दर्जी कपड़े सिलते समय सिर्फ टांके की मजबूती पर ध्यान देता है। अगर वह बार-बार यह सोचेगा कि इसे पहनकर कौन हीरो दिखेगा, तो वह कभी अपना काम सही से नहीं कर पाएगा। आप भी एक क्रिएटर हैं, आपका काम सिर्फ अपना बेस्ट देना है।

अक्सर हम अपने ही बनाए जाल में फंस जाते हैं। हम सोचते हैं कि जो काम हमने किया है, वह दुनिया को हिलाकर रख देगा। लेकिन असलियत तो यह है कि दुनिया को आपकी परवाह कम और अपने खुद के फायदों की परवाह ज्यादा है। इसलिए, अपनी प्रक्रिया पर भरोसा रखें। आज आपने जो काम किया, कल उससे बेहतर करने की कोशिश करें। जो इंसान प्रोसेस को प्यार करने लगता है, उसे रिजल्ट खुद ढूंढते हुए आते हैं। आज आप जो छोटी कोशिश कर रहे हैं, वही कल आपकी बड़ी सफलता की नींव बनेगी। रिजल्ट की भूख इंसान को बेचैन और अधूरा बनाती है, जबकि प्रोसेस का आनंद आपको शांत और स्थिर बनाता है। आप क्या चुनेंगे। एक बेचैनी भरा कल या एक स्थिर और क्रिएटिव आज।


लेसन ३ : क्रिएटिव ब्लॉक कुछ नहीं बस डर है जिसे एक्शन से ही खत्म किया जा सकता है

हम सब कभी न कभी कहते हैं कि यार, आज तो मन नहीं कर रहा या फिर आईडिया नहीं आ रहा। इसे हम फैंसी भाषा में क्रिएटिव ब्लॉक कह देते हैं। सच तो यह है कि यह कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं है। यह सिर्फ आपका डर है जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है। आप डरते हैं कि कहीं आपका काम किसी को पसंद न आए, या फिर कहीं आप खुद की नजरों में न गिर जाएं। सेठ गोडिन के अनुसार, क्रिएटिव ब्लॉक का इलाज केवल काम करना ही है। जब आप रुक जाते हैं, तो डर और बड़ा होता जाता है। लेकिन जैसे ही आप लिखना या काम करना शुरू करते हैं, वह डर ओझल होने लगता है।

सोचिए, आप एक अंधेरे कमरे में खड़े हैं और डर रहे हैं कि कहीं कोई साया तो नहीं। आप खड़े रहेंगे तो डर बढ़ता जाएगा। लेकिन जैसे ही आप लाइट जलाकर आगे बढ़ेंगे, आपको पता चलेगा कि वहां साया नहीं, बस आपकी अपनी परछाई थी। क्रिएटिव ब्लॉक भी वैसा ही है। यह आपके दिमाग की एक चाल है ताकि आप सुरक्षित दायरे में बने रहें। लेकिन सुरक्षा के दायरे में रहकर आज तक किसी ने इतिहास नहीं रचा है। आपको उस डर के बावजूद आगे बढ़ना होगा। अगर आज लिखने का मन नहीं है, तो भी दो लाइन लिखिए। अगर पेंटिंग करने का मन नहीं है, तो भी बस ब्रश उठाइए। एक्शन ही वह इकलौती दवा है जो इस ब्लॉक के वायरस को खत्म कर सकती है।

जो लोग कहते हैं कि वे इंस्पिरेशन का इंतजार कर रहे हैं, वे असल में सिर्फ समय बर्बाद कर रहे हैं। इंस्पिरेशन काम के बीच में आती है, काम शुरू होने से पहले नहीं। जब आप काम में डूब जाते हैं, जब आपकी उंगलियां कीबोर्ड पर चलती हैं या जब आप रंगो के साथ खेलते हैं, तब नए विचार जन्म लेते हैं। रुकना सबसे आसान काम है, लेकिन वह आपको कहीं नहीं ले जाएगा। आगे बढ़ते रहना ही एक मात्र तरीका है जिससे आप अपनी क्रिएटिविटी को जिंदा रख सकते हैं।

इस सफर को जारी रखिए। एक क्रिएटर के तौर पर आपकी पहचान इस बात से नहीं कि आपने कितनी बड़ी सफलता हासिल की, बल्कि इस बात से है कि आपने कितनी बार उस डर का सामना किया और फिर भी काम को शिप किया। अपने काम को दुनिया के सामने लाने का साहस जुटाएं, अपनी प्रोसेस को अपनाएं और डर को केवल काम के जरिए हराएं। आपकी यह छोटी सी शुरुआत कल एक बड़ी लहर बन सकती है। अब समय है कि आप अपनी कलम उठाएं और अपनी कहानी लिखना शुरू करें। क्या आप आज अपना काम शिप करने के लिए तैयार हैं।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#Creativity #ThePractice #SethGodin #ContentCreation #GrowthMindset


_

Post a Comment

Previous Post Next Post