Extraordinary Habits (Hindi)


आप अभी भी वही पुरानी घिसी पिटी आदतों के साथ जी रहे हैं जबकि दुनिया के टॉप लीडर्स और एथलीट्स आपसे मीलों आगे निकल चुके हैं। अगर आपने आज अपनी दिनचर्या नहीं बदली तो अगले दस साल भी बस भीड़ का हिस्सा बनकर पछताएंगे। क्या आप बदलाव के लिए तैयार हैं।

सफल होने का रास्ता काफी आसान है बस आपको सही आदतों का साथ चाहिए। आज हम एक्स्ट्राऑर्डिनरी हैबिट्स किताब के जरिए उन तीन सीक्रेट्स को जानेंगे जो आपकी पूरी लाइफ बदल सकते हैं।


लेसन १ : छोटी आदतों का बड़ा असर

क्या आपको लगता है कि सक्सेस का मतलब रातों-रात कोई बड़ा धमाका करना है। अगर हां तो आप गलतफहमी की दुनिया में जी रहे हैं। सच तो यह है कि दुनिया के बड़े लीडर्स और एथलीट्स कोई जादू की छड़ी नहीं घुमाते। वे बस अपने दिन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटते हैं। एक बड़ा काम शुरू करने का तनाव अक्सर हमें बिस्तर पर ही बिठाए रखता है। पर ये लोग क्या करते हैं। ये लोग एक छोटी सी शुरुआत पर ध्यान देते हैं। मान लीजिए आपको एक बड़ी किताब लिखनी है। आप सोचेंगे कि आज ही पांच सौ पन्ने लिख दूंगा। नतीजा क्या होगा। अगले ही दिन आपका मन कहेगा कि भाई रहने दे बहुत मेहनत है।

एक्स्ट्राऑर्डिनरी हैबिट्स किताब यही सिखाती है कि आपको पहाड़ नहीं चढ़ना है बस हर दिन एक सीढ़ी चढ़नी है। अगर आप जिम जाने के नाम से ही डरते हैं तो सिर्फ पांच मिनट के लिए जिम जाने की आदत डालिए। बस पांच मिनट। आप सोचेंगे कि पांच मिनट से क्या होगा। बहुत कुछ होगा दोस्त। पांच मिनट से एक रिदम बनता है। जब आप पांच मिनट के लिए कुछ करते हैं तो आप अपना आलस तोड़ देते हैं। एक बार आलस टूटा तो आप खुद ब खुद पंद्रह या बीस मिनट तक काम करेंगे। टॉप प्रोफेशनल्स यही करते हैं। वे अपने लक्ष्य को इतना छोटा कर देते हैं कि उसे टालने का कोई बहाना ही न बचे।

सोचिए अगर आप हर दिन खुद को केवल एक प्रतिशत बेहतर बनाते हैं तो साल के अंत तक आप कितने बदल जाएंगे। यह गणित बहुत पावरफुल है। अधिकतर लोग बड़े बदलाव के चक्कर में अपनी वर्तमान स्थिति को भी खराब कर लेते हैं। वे जोश में आकर सात दिन वर्कआउट करते हैं और आठवें दिन थकान के नाम पर एक महीने का ब्रेक ले लेते हैं। यह कोई आदत नहीं बल्कि एक मजाक है। आपको कंसिस्टेंसी चाहिए। एक छोटा सा कदम जो आप रोज ले सकें। चाहे आप कितने भी थके हुए हों। चाहे बाहर बारिश हो रही हो या आप घर पर अकेले हों।

दुनिया के टॉप आर्टिस्ट्स भी इसी मंत्र का पालन करते हैं। वे रोज अपनी कला को कुछ समय देते हैं। चाहे वो केवल दस मिनट ही क्यों न हो। यह दस मिनट का समय ही आगे चलकर मास्टरपीस बनता है। जब आप छोटी आदतें अपनाते हैं तो आपका दिमाग डरना बंद कर देता है। उसे लगता है कि ये तो आसान है इसे तो मैं आसानी से कर सकता हूं। और यहीं से आपकी जीत की शुरुआत होती है। अगली बार जब आप किसी बड़े काम को देखकर घबराएं तो रुकिए और सोचिए कि इसका सबसे छोटा हिस्सा क्या है जिसे मैं अभी कर सकता हूं। बस उसे पकड़ लीजिए और बाकी सब खुद ठीक हो जाएगा।


लेसन २ : सही माइंडसेट का चुनाव

अब जब आपने अपनी छोटी आदतों का ढांचा तैयार कर लिया है तो असली खेल शुरू होता है आपके सोचने के नजरिए यानी माइंडसेट से। क्या आप जानते हैं कि क्यों कुछ लोग हर बाधा को अवसर मान लेते हैं जबकि बाकी लोग सिर्फ रोना रोते रहते हैं। इसका जवाब उनकी काबिलियत में नहीं बल्कि उनके दिमाग की वायरिंग में छिपा है। जो लोग टॉप पर बैठे हैं वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि दुनिया वैसे नहीं दिखती जैसी वो है बल्कि वैसी दिखती है जैसे हम उसे देखना चाहते हैं। अगर आप खुद को फेलियर मानकर चलेंगे तो आपकी हर कोशिश में आपको हार ही नजर आएगी।

सफल लोग अक्सर अपने दिमाग को एक जिम की तरह इस्तेमाल करते हैं। जैसे आप मसल्स बनाने के लिए भारी वजन उठाते हैं वैसे ही ये लोग अपने विचारों का भार उठाते हैं। इनका माइंडसेट रिजिड नहीं बल्कि फ्लेक्सिबल होता है। जब कोई बड़ी चुनौती सामने आती है तो एक आम आदमी कहता है कि यह मुझसे नहीं होगा। लेकिन एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी इंसान खुद से पूछता है कि आखिर इस काम को करने का सही तरीका क्या हो सकता है। यह छोटा सा सवाल आपकी पूरी दुनिया बदल सकता है। यह सवाल आपको विक्टिम मोड से निकालकर क्रिएटर मोड में ले आता है।

उदाहरण के तौर पर ऑफिस में कोई नया प्रोजेक्ट मिला जो आपको कठिन लग रहा है। पहला रिस्पांस क्या होगा। शायद यह कि मुझे तो यह आता ही नहीं है। यही वह पॉइंट है जहां आप अपनी प्रोग्रेस की कब्र खोद रहे हैं। इसके बजाय अगर आप यह सोचें कि यह नई चीज सीखने का एक जबरदस्त मौका है तो आपके दिमाग के न्यूरॉन्स अलग तरीके से काम करने लगते हैं। यह कोई मोटिवेशनल भाषण नहीं है बल्कि एक व्यावहारिक तरीका है जो दुनिया के बेस्ट प्रोफेशनल अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करते हैं। वे अपने दिमाग को किसी भी स्थिति में ढालना जानते हैं।

कई बार हम अपने कंफर्ट जोन में इतने गहरे धंस जाते हैं कि हमें बाहर की दुनिया का पता ही नहीं चलता। टॉप लीडर्स अपने कंफर्ट जोन को एक जेल की तरह देखते हैं। वे जानते हैं कि अगर आज उन्होंने कुछ नया नहीं सीखा या अपने पुराने खयालात को चुनौती नहीं दी तो वे कल के लीडर नहीं बन पाएंगे। वे अपने डर का सामना हंसी खुशी करते हैं। उन्हें पता है कि असफलता सिर्फ एक फीडबैक है। अगर आपने कोई गलती की है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं बल्कि इसका मतलब यह है कि आपको अभी और सीखना बाकी है।

याद रखिए आपका माइंडसेट ही आपका सबसे बड़ा एसेट है। अगर यह खराब है तो दुनिया की सारी सुख सुविधाएं भी आपको कंगाल ही बनाए रखेंगी। लेकिन अगर यह सही है तो आप खाली हाथ भी सब कुछ हासिल कर सकते हैं। अपने अंदर के उस छोटे बच्चे को जगाइए जो हर बात पर सवाल करता है और हर नई चीज को सीखने के लिए एक्साइटेड रहता है। जिस दिन आपने अपने दिमाग को यह समझा दिया कि कोई भी काम असंभव नहीं है बस सही तरीके की जरूरत है उस दिन से आपकी रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।


लेसन ३ : स्किल मास्टरी की गति

अब बात करते हैं उस रफ्तार की जो आपको भीड़ से अलग खड़ा करती है। आज के दौर में जानकारी की कमी नहीं है बल्कि स्किल को जल्दी सीखने और उसे अप्लाई करने की कमी है। दुनिया के टॉप प्रोफेशनल्स और एथलीट्स किसी काम को दस साल तक सीखते नहीं रहते। वे जानते हैं कि समय सबसे महंगी करेंसी है। वे एक खास तरीके का इस्तेमाल करते हैं जिसे हम डीप वर्क और फोकस्ड लर्निंग कहते हैं। ज्यादातर लोग दिन भर काम करने का ढोंग करते हैं लेकिन दिन के अंत में उनके पास दिखाने के लिए कुछ नहीं होता क्योंकि उनका ध्यान भटका हुआ है।

क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप कोई नया काम शुरू करते हैं तो पहले दो दिन कितना जोश रहता है। लेकिन तीसरे दिन जैसे ही थोड़ी कठिनाई आती है आप उसे छोड़ देते हैं। टॉप लीडर्स यहाँ बिल्कुल अलग होते हैं। वे जानते हैं कि शुरुआत का समय सबसे कठिन होता है और यहीं पर सबसे ज्यादा सीखने की गुंजाइश होती है। वे अपनी स्किल को छोटे हिस्सों में तोड़ते हैं और हर हिस्से में मास्टर बनने तक रुकते नहीं। इसे आप एक वीडियो गेम की तरह देख सकते हैं। पहले आप लेवल वन पार करते हैं फिर लेवल टू। बिना लेवल वन पार किए आप सीधे बॉस लेवल तक नहीं पहुँच सकते।

मान लीजिए आपको डिजिटल मार्केटिंग सीखनी है। आप सब कुछ एक साथ सीखने की कोशिश करेंगे तो आप पागल हो जाएंगे। इसके बजाय आप सिर्फ एक हफ्ते का टारगेट रखिए कि मुझे सिर्फ विज्ञापन चलाना सीखना है। बस उतना ही। जब वो स्किल आपके अंदर बस जाएगी तब अगले लेवल पर जाइए। यही वो तरीका है जिससे एक्स्ट्राऑर्डिनरी लोग कम समय में बड़ी कामयाबी हासिल करते हैं। वे मल्टीटास्किंग के जाल में नहीं फंसते। मल्टीटास्किंग का मतलब है एक साथ कई गलतियां करना। सफल लोग मोनो-टास्किंग करते हैं। अपना सारा दिमाग सारा फोकस सिर्फ एक काम पर लगा देते हैं।

जब आप पूरी तरह डूबकर कोई काम करते हैं तो आप स्टेट ऑफ फ्लो में चले जाते हैं। यह वो स्थिति है जहाँ समय का पता ही नहीं चलता और काम की क्वालिटी बेहतरीन हो जाती है। क्या आपने कभी महसूस किया है कि जब आप पूरी तरह मग्न होकर काम करते हैं तो आप कम समय में ज्यादा आउटपुट दे पाते हैं। यही वो सीक्रेट है जो आपको टॉप वन परसेंट में ले जाता है। दुनिया के बड़े एथलीट्स भी ट्रेनिंग के दौरान इसी स्टेट ऑफ फ्लो को खोजते हैं। वे वहां मौजूद होते हैं। उनका शरीर उनका दिमाग और उनका लक्ष्य एक लाइन में होते हैं।

तो अगली बार जब आप कुछ सीखने बैठें तो अपने फोन को दूसरे कमरे में रख दें। नोटिफिकेशन बंद कर दें। खुद को बाहरी शोर से दूर कर लें। आप देखेंगे कि जिस काम को करने में आपको चार घंटे लगते थे वो अब दो घंटे में पूरा हो रहा है। स्किल मास्टरी का मतलब सिर्फ किताब पढ़ना नहीं है। यह मतलब है कि आप उस जानकारी को अपने जीवन में कैसे उतारते हैं। जो आपने अब तक पढ़ा और समझा है उसे कल से ही लागू कीजिए। छोटे कदम लीजिए सही माइंडसेट रखिए और अपनी स्किल को धार दीजिए। आपकी सफलता अब आपसे ज्यादा दूर नहीं है। बस उठिए और काम पर लग जाइए।

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