Two Weeks Notice (Hindi)


नौकरी की जंजीरों में बंधकर हर सोमवार को सिर पकड़कर बैठना अब आपकी आदत बन चुकी है। क्या आप भी अपनी आधी जिंदगी किसी और के सपने पूरे करने में बर्बाद करना चाहते है। अगर आप आज भी बदलाव से डर रहे है तो समझ लीजिए आप एक बड़ी गलती कर रहे है।

अब बात करते है उस बदलाव की जो आपकी जिंदगी बदल सकता है और आपको अपनी काबिलियत पहचानने में मदद करेगा। चलिए देखते है कैसे आप अपनी शर्तों पर जीना शुरू कर सकते है।


लेसन १ : डर का सामना करना और नौकरी छोड़ने की हिम्मत जुटाना

क्या आपने कभी गौर किया है कि आपकी अलार्म घड़ी की आवाज आपको उतनी बुरी नहीं लगती जितनी आपकी बॉस की कॉल लगती है। हर दिन सुबह उठकर वही पुराना रास्ता पकड़ना, वही उबाऊ ऑफिस की कुर्सी घिसना और महीने के अंत में सैलरी के नाम पर अपनी मेहनत के टुकड़ों को गिनना, यही तो हमारी कहानी है। हम में से ज्यादातर लोग एक अदृश्य डर में जीते है। यह डर इस बात का नहीं है कि हम भूखे मर जाएंगे, बल्कि यह डर इस बात का है कि लोग क्या कहेंगे। क्या घर वाले मानेंगे। क्या समाज हमें आवारा कहेगा। सच तो यह है कि आपकी नौकरी ने आपको एक ऐसे सुनहरे पिंजरे में कैद कर रखा है जहाँ आपको खाना तो समय पर मिलता है, लेकिन आपकी उड़ान के सारे पर पहले ही काट दिए गए है।

एमी पोर्टरफील्ड अपनी इस किताब में बहुत साफ शब्दों में कहती है कि नौकरी छोड़ना कोई आत्महत्या नहीं है, बल्कि यह खुद को फिर से जन्म देने जैसा है। जब आप ये सोचते है कि मेरे पास कोई प्लान नहीं है, तो असल में आप अपनी क्षमता को कम आंक रहे होते है। आपने कभी सोचा है कि आपका मन ऑफिस के उस बोरिंग प्रेजेंटेशन के दौरान कहीं और क्यों भटकता है। क्योंकि वहां आपका दिल नहीं है। आप सिर्फ वहां शरीर से मौजूद है। जो इंसान अपनी काबिलियत के हिसाब से काम नहीं कर रहा, वह हर दिन अपनी आत्मा को धीरे धीरे मार रहा है। यह एक ऐसा नुकसान है जिसे कोई भी बैंक बैलेंस पूरा नहीं कर सकता। आप सोचते है कि जॉब सिक्योरिटी ही सब कुछ है, जबकि हकीकत में दुनिया की सबसे बड़ी असुरक्षा है अपनी जिंदगी का नियंत्रण किसी और के हाथ में देना।

जरा सोचिए, एक दिन आप ऑफिस पहुंचे और आपके बॉस ने कहा कि आज से आपकी जरूरत नहीं है। उस दिन क्या होगा। आपकी दुनिया खत्म हो जाएगी क्या। नहीं। उस दिन आपको समझ आएगा कि आपने जिस कंपनी को अपना घर समझा, उसने आपको एक फाइल की तरह साइड में कर दिया। लेकिन अगर यही फैसला आप अपनी मर्जी से ले, तो वह कमजोरी नहीं बल्कि आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। डर सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि आप अभी तक उस अंधेरे कमरे में बैठे है जहाँ आपने लाइट ऑन करने की कोशिश ही नहीं की। हिम्मत जुटाने का मतलब यह नहीं है कि आप कल ही इस्तीफा देकर बैठ जाए, बल्कि इसका मतलब है कि आप धीरे धीरे अपनी उस पहचान को बाहर निकाले जो ऑफिस की फाइलों के नीचे दब गई है।

आप उस शख्स को जानते है जो हर शाम को घर आकर बस टीवी के सामने पसर जाता है। वह थका हुआ है, चिड़चिड़ा है और पूरी दुनिया से नफरत कर रहा है। वह सिर्फ इसलिए ऐसा है क्योंकि उसने पूरे दिन वह किया जो उसे नापसंद था। अगर आप आज अपनी हिम्मत को नहीं जुटाएंगे, तो आप भी वही बन जाएंगे। आपका डर आपको बहुत सारी दलीलें देगा। वह कहेगा कि अभी सही समय नहीं है। वह कहेगा कि अभी घर की जिम्मेदारियां बहुत है। लेकिन सच तो यह है कि समय कभी सही नहीं होता, समय को सही बनाना पड़ता है। जिस दिन आप ये मान लेते है कि मेरी जिंदगी मेरी जिम्मेदारी है, उसी दिन आपका डर भागने लगता है।

लोग अक्सर कहते है कि क्या तुम पागल हो, अच्छी खासी नौकरी छोड़ रहे हो। मैं कहता हूँ कि पागल तो वह है जो जानते हुए भी अपनी खुशी का गला घोट रहा है। हिम्मत का मतलब है अपने अंदर की उस आवाज को सुनना जो आपसे कह रही है कि तुम इससे बहुत ज्यादा के हकदार हो। जब आप इस सच को स्वीकार कर लेते है, तब आप वाकई अपनी जिंदगी के मालिक बनने की राह पर निकलते है। यह लेसन सिर्फ काम छोड़ने के बारे में नहीं है, यह अपनी खुशी को सबसे ऊपर रखने के बारे में है।


लेसन २ : अपनी पसंद का काम चुनकर उससे पैसे कमाने का सही तरीका

जब आप अपने डर के दायरे से बाहर निकलते है, तो अगला बड़ा सवाल आता है कि आखिर करे तो क्या करे। दुनिया आपको सलाह देगी कि वही करो जिसमें बहुत पैसा है, भले ही आपको उसे करने में मौत आती हो। लेकिन एमी पोर्टरफील्ड का कहना है कि यह रास्ता सीधे बर्बादी की ओर जाता है। आप एक ऐसा काम शुरू कर रहे है जो आपका अपना है, तो क्या आप वाकई वह करना चाहते है जो आपको पसंद नहीं है। सोचिए, एक इंसान जिसे खाना पकाने से नफरत है, अगर वह सिर्फ पैसे के लिए रेस्टोरेंट खोल ले, तो क्या उसका खाना कभी स्वादिष्ट हो सकता है। उसका खाना खाकर ग्राहक कम और मरीज ज्यादा पैदा होंगे। यही गलती हम अपने करियर में करते है।

सही काम चुनने का तरीका बहुत सरल है, लेकिन हम उसे बहुत जटिल बना देते है। अपनी उस स्किल को पहचानिए जो आपके पास पहले से है, या जिसे सीखने में आपको मजा आता है। वह क्या है जिसके लिए लोग आपसे बार बार मदद मांगते है। क्या आप अच्छे लेखक है। क्या आप लोगो को सिखा सकते है। क्या आप जटिल चीजों को सरल बना सकते है। यह वही जगह है जहाँ आपका जुनून और आपकी कमाई एक दूसरे से हाथ मिलाते है। अगर आप सिर्फ इसलिए काम कर रहे है क्योंकि उसमें ज्यादा पैसा है, तो आप उस रेस में शामिल है जहाँ कोई भी नहीं जीतता। वहां सिर्फ भागना है, कोई मंजिल नहीं है।

अब बात करते है पैसे की। बहुत से लोग सोचते है कि बिजनेस शुरू करने के लिए करोड़ो रुपये चाहिए। यह सिर्फ एक बहाना है ताकि आप अपनी जगह से न हिले। आज के दौर में इंटरनेट ने हर किसी को एक मौका दिया है। आप घर बैठे अपनी नॉलेज को बेच सकते है। आप एक डिजिटल प्रोडक्ट बना सकते है, एक कोर्स तैयार कर सकते है या कंसल्टिंग दे सकते है। आपको किसी बड़ी ऑफिस बिल्डिंग की जरूरत नहीं है, आपको बस एक सही नजरिए की जरूरत है। आपका असली निवेश आपका समय और आपकी मेहनत है। अगर आप अपनी पसंद का काम चुनते है, तो काम काम नहीं लगता, वह एक खेल बन जाता है।

मान लीजिए आप लोगो को फिटनेस के बारे में सिखाना पसंद करते है। तो आप जिम खोलने की बजाए एक ऑनलाइन कम्युनिटी बना सकते है। वहां आप लोगो के साथ अपनी डाइट और एक्सरसाइज शेयर कर सकते है। क्या इसमें मेहनत नहीं है। बिल्कुल है। लेकिन यह मेहनत आपको थकाती नहीं, बल्कि आपको उत्साहित करती है। जब आप अपने पसंद का काम करते है, तो आप हर दिन बेहतर होने की कोशिश करते है। और जब आप बेहतर होते है, तो पैसा अपने आप पीछे चला आता है। लोग आपको आपकी मेहनत के लिए नहीं, बल्कि आपके हुनर के लिए पैसे देते है।

कभी कभी हमें लगता है कि हमें कुछ अनोखा करना है। सच्चाई तो यह है कि दुनिया को अनोखा नहीं, बल्कि काम का चाहिए। आपकी पसंद का काम तभी पैसा कमाएगा जब वह किसी और की समस्या का समाधान करेगा। अगर आप सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे, तो आपकी दुकान कभी नहीं चलेगी। लेकिन अगर आप दूसरे लोगो की मदद करना अपना मिशन बना लेंगे, तो पैसा सिर्फ एक बाई प्रोडक्ट बनकर रह जाएगा। आप जिस दिन यह समझ लेंगे कि आपकी वैल्यू क्या है, उस दिन आपको किसी से पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि कितना पैसा कमाया जा सकता है।

याद रखिए, आप जो काम चुनते है वह आपकी आने वाली पूरी जिंदगी की दिशा तय करता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि आप उस काम को चुने जो आपकी आत्मा को संतुष्ट करे। अगर आप सिर्फ पैसे के पीछे भागेंगे, तो पैसा आपसे दूर भागेगा। लेकिन अगर आप वैल्यू देने के पीछे भागेंगे, तो पैसा खुद आपका रास्ता ढूँढ लेगा। यह संतुलन ही असली बिजनेस का आधार है। जो लोग इस सच्चाई को नहीं समझते, वे पूरी जिंदगी बस बिल भरने के लिए काम करते रह जाते है। आप उन लोगो में से नहीं है, इसलिए सही दिशा चुनना आज आपकी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।


लेसन ३ : अपने काम को मिशन बनाना और दुनिया में बदलाव लाना

जब आप डर से मुक्त हो जाते है और अपने पसंद के काम से पैसा कमाना शुरू कर देते है, तो एक समय ऐसा आता है जब आपका काम सिर्फ एक बिजनेस नहीं रह जाता। वह एक मिशन बन जाता है। क्या आपने कभी महसूस किया है कि जब आप किसी की मदद करते है, तो आपको मिलने वाली खुशी किसी भी सैलरी इंक्रीमेंट से कहीं ज्यादा बड़ी होती है। यही वह पड़ाव है जहाँ आप अपनी मेहनत को एक बड़ा रूप देते है। अगर आपका काम सिर्फ पैसे तक सीमित है, तो आप एक व्यापारी है। लेकिन अगर आपका काम किसी की जिंदगी को आसान बना रहा है, तो आप एक लीडर है। और विश्वास मानिए, दुनिया को व्यापारियों की नहीं, लीडर्स की जरूरत है।

एमी पोर्टरफील्ड अपनी इस किताब में गहराई से बताती है कि जब आप अपने काम को एक मिशन का रूप देते है, तो आप कभी थकते नहीं है। आप सुबह इसलिए नहीं उठते कि आपको काम पर जाना है, बल्कि आप इसलिए उठते है कि आज आप किसी की जिंदगी में सुधार ला सकते है। सोचिए उस व्यक्ति के बारे में जो अपनी छोटी सी दुकान या ऑनलाइन पेज के जरिए लोगो को सही जानकारी दे रहा है। क्या वह सिर्फ सामान बेच रहा है। नहीं, वह विश्वास बेच रहा है। जब आप अपने काम को दूसरों के लिए समर्पित कर देते है, तो आपका नेटवर्क खुद ब खुद बढ़ने लगता है। लोग आपको इसलिए फॉलो नहीं करते कि आप क्या बेच रहे है, बल्कि इसलिए फॉलो करते है कि आप कौन है।

बदलाव लाने का मतलब यह नहीं है कि आपको पूरी दुनिया को रातोंरात बदलना है। अगर आप दिन के अंत में किसी एक इंसान के चेहरे पर मुस्कान ला पाए, या किसी की समस्या का समाधान कर पाए, तो समझ लीजिए आपने अपना काम कर दिया। आज की दुनिया में हर कोई शोर मचा रहा है। सब चिल्ला रहे है कि मुझे देखो, मेरा प्रोडक्ट खरीदो। ऐसे में अगर आप शांति और ईमानदारी से अपना मिशन पूरा करते है, तो लोग आपकी ओर खींचे चले आएंगे। आपका मिशन ही आपकी पहचान है। जब आप अपने काम को एक मिशन मानते है, तो आप छोटे मोटे झटकों से नहीं डरते। आप जानते है कि आप एक बड़े मकसद के लिए काम कर रहे है।

उदाहरण के लिए, अगर आप एक टीचर है तो सिर्फ कोर्स पूरा करना आपका मकसद नहीं होना चाहिए। आपका मिशन होना चाहिए कि आपका स्टूडेंट अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करे। जब आप ये सोचकर काम करते है, तो आपकी भाषा बदल जाती है, आपके तौर तरीके बदल जाते है। लोग इसे महसूस कर सकते है। यह एक ऐसा प्रभाव है जो किसी भी मार्केटिंग बजट से ज्यादा असरदार है। जब आप दुनिया को कुछ देना शुरू करते है, तो दुनिया आपको रिटर्न में बहुत कुछ देती है। यह एक कुदरती नियम है। जितना ज्यादा आप वैल्यू देंगे, उतना ज्यादा आप प्रभावशाली बनेंगे।

अपने काम को मिशन बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको अपने काम में एक गहरा अर्थ मिलता है। बहुत से लोग इसलिए डिप्रेशन में चले जाते है क्योंकि उन्हें अपने काम में कोई अर्थ नहीं दिखता। वे सिर्फ एक मशीन की तरह काम कर रहे है। जब आप जानते है कि आपका काम क्यों जरूरी है, तो आपके पास कभी भी मोटिवेशन की कमी नहीं होगी। आपका मिशन ही आपका फ्यूल है। यह आपको उन दिनों में भी आगे बढ़ाएगा जब सब कुछ आपके खिलाफ लग रहा होगा। जो इंसान अपने काम को मिशन बना लेता है, उसे कोई भी ताकत नहीं रोक सकती।

अब आपके सामने एक स्पष्ट रास्ता है। आप अपनी जिंदगी के उस मोड़ पर खड़े है जहाँ से आगे की राह आपकी खुद की बनाई हुई है। यह समय है कि आप अपनी काबिलियत पर भरोसा करे, अपनी पसंद के काम को चुने और उसे एक बड़े मिशन का रूप दे। क्या आप तैयार है अपनी उस पुरानी जिंदगी को पीछे छोड़ने के लिए। क्या आप तैयार है उस नई शुरुआत के लिए जो न सिर्फ आपको पैसा देगी, बल्कि आपको एक पहचान भी देगी। आज ही पहला कदम उठाए, क्योंकि कल कभी नहीं आता। आज का छोटा सा फैसला ही आपकी कल की बड़ी सफलता की नींव बनेगा। अपना काम शुरू करे, अपना मिशन चुने और दुनिया को दिखा दे कि आप क्या करने के लिए पैदा हुए है। याद रखिए, आपकी सफलता आपकी मेहनत और आपके इरादों का नतीजा है।

-----






#Entrepreneurship #CareerGrowth #SuccessMindset #DigitalBusiness #PersonalDevelopment


_

Post a Comment

Previous Post Next Post