The Advice Trap (Hindi)


आपकी प्रमोशन रुक चुकी है। आपकी टीम आपसे छुपकर मीटिंग्स कर रही है। और आपका बॉस आपको एक थका हुआ ओवरस्मार्ट इंसान समझता है।

वजह कोई बहुत बड़ी गलती नहीं है। वजह है आपकी एक बहुत ही बुरी आदत। हर बात पर बिना मांगे सलाह देना।

आप सोचते हैं कि आप सबकी मदद कर रहे हैं। आप सोचते हैं कि आप सबसे बुद्धिमान इंसान हैं। लेकिन असलियत यह है कि आपकी यह आदत आपके करियर को दीमक की तरह चाट रही है। इसे लेखक माइकल बंगे स्टेनियर एडवाइस मॉन्स्टर कहते हैं।

अगर आपने आज इस एडवाइस मॉन्स्टर की गर्दन नहीं मरोड़ी, तो आप जिंदगी भर बस एक ऐसा इंसान बनकर रह जाएंगे जिसे लोग देखकर रास्ता बदल लेते हैं।

इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे बिना मांगे सलाह देने की आदत को खत्म करके, सही सवाल पूछकर और सिर्फ 20 परसेंट बोलकर आप ऑफिस और जिंदगी में 100 परसेंट कंट्रोल हासिल कर सकते हैं।

आइए समझते हैं कि यह पूरा खेल काम कैसे करता है।


लेसन १ : अपने एडवाइस मॉन्स्टर की गर्दन मरोड़िए

सोचिए आप ऑफिस में बैठे हैं। आपका जूनियर आपके पास आता है। वह कहता है कि बॉस प्रोजेक्ट में एक छोटी सी दिक्कत आ रही है। आप उसकी पूरी बात सुनते भी नहीं हैं। आपका दिमाग तुरंत चलने लगता है। आप कुर्सी पर पीछे टेक लगाते हैं। एक गहरी सांस लेते हैं। और कहते हैं सुनो मेरी बात, तुमको ऐसा करना चाहिए।

बधाई हो। आपने अभी-अभी अपने अंदर छिपे एडवाइस मॉन्स्टर को खाना खिलाया है।

हम सबमें यह दानव बैठा हुआ है। जैसे ही कोई अपनी परेशानी बताता है, हमारे अंदर का ज्ञान का नलका तुरंत खुल जाता है। हमें लगता है कि हम मसीहा हैं। हमें लगता है कि हम सामने वाले की जिंदगी बचा रहे हैं। लेकिन सच तो यह है कि हम सिर्फ अपना ईगो शांत कर रहे होते हैं।

लेखक माइकल बंगे स्टेनियर कहते हैं कि यह एडवाइस मॉन्स्टर तीन अलग-अलग रूपों में आपके दिमाग पर कब्जा करता है।

पहला है टेल इट मॉन्स्टर। इसे लगता है कि दुनिया के हर सवाल का जवाब सिर्फ इसी के पास है। अगर इसने सलाह नहीं दी तो पूरी दुनिया ठप हो जाएगी।

दूसरा है रेस्क्यू इट मॉन्स्टर। इसे लगता है कि हर इंसान की मदद करना इसी की जिम्मेदारी है। अगर कोई दुखी है तो उसे सही करने का ठेका इसी ने लिया है।

और तीसरा है कंट्रोल इट मॉन्स्टर। इसे हर स्थिति पर अपना 100 परसेंट कंट्रोल चाहिए होता है। इसे लगता है कि अगर चीजें इसके हिसाब से नहीं हुईं तो सब बर्बाद हो जाएगा।

अब जरा सोचिए कि इस आदत का नतीजा क्या होता है।

जब आप हर बात पर बिना मांगे सलाह देते हैं, तो आप सामने वाले इंसान को यह मैसेज देते हैं कि तुम बेवकूफ हो। तुम अपना दिमाग इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसलिए मुझे तुम्हें बताना पड़ रहा है।

धीरे-धीरे आपकी टीम सोचना बंद कर देती है। वे हर छोटी बात के लिए आपके सिर पर आकर बैठ जाते हैं। आप काम के बोझ से दबने लगते हैं। आपका स्ट्रेस बढ़ता है। और आप सोचते हैं कि सब कुछ मुझे ही क्यों करना पड़ता है।

यह एक ऐसा जाल है जिसे आपने खुद अपने हाथों से बुना है।

अगर आप इस जाल से बाहर निकलना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने इस दानव को पहचानिए। जब भी किसी बातचीत में आपका दिल करे कि आप तुरंत कहें कि तुम्हें यह करना चाहिए, तो वहीं रुक जाइए। अपनी जीभ को दांतों तले दबाइए।

अपनी टेबल पर रखी कॉफी मग को उठाइए। एक घूंट पीजिए। और खुद से कहिए कि मुझे अभी जवाब नहीं देना है।

सामने वाले को अपनी बात पूरी करने दीजिए। उसकी समस्या को खुद हल करने का मौका दीजिए। जब आप सलाह देना बंद करते हैं, तभी आप एक असली लीडर बनने की दिशा में पहला कदम बढ़ाते हैं।

अब वक्त आ गया है कि हम अपनी आदत को बदलें और सलाह देने की जगह एक नया हथियार इस्तेमाल करें। यह नया हथियार क्या है, आइए आगे समझते हैं।


लेसन २ : सलाह की जगह सवाल पूछना सीखिए

अब जरा सीन बदलिए। आप अपने कैबिन में बैठे हैं। आपकी टीम का एक सदस्य दौड़ता हुआ अंदर आता है। उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं। वह कहता है कि सर, क्लाइंट बहुत नाराज है और वह डील कैंसिल करने जा रहा है।

आपका पहला रिएक्शन क्या होगा? आप तुरंत उठ खड़े होंगे। आप टेबल पर हाथ मारेंगे। और कहेंगे कि तुमने यह क्या कर दिया? एक काम करो, तुरंत क्लाइंट को फोन लगाओ। उसे 10 परसेंट डिस्काउंट का ऑफर दो। और अगर वह न माने तो मेरी बात करवाओ।

रुकिए। जरा सांस लीजिए।

आपने अभी क्या किया? आपने बिना पूरी बात जाने, बिना गहराई में उतरे, तुरंत अपनी सलाह की दुकान खोल दी। आपने सामने वाले को सोचने का, सीखने का और अपनी गलती सुधारने का मौका छीन लिया। आपने उसे फिर से एक छोटा बच्चा बना दिया जो हर बार अंगुली पकड़कर चलना चाहता है।

लेखक माइकल बंगे स्टेनियर कहते हैं कि एक महान लीडर वह नहीं होता जो हर बात का जवाब जानता है। महान लीडर वह होता है जो सही समय पर सही सवाल पूछना जानता है।

जब आप सलाह की जगह सवाल पूछते हैं, तो आप सामने वाले का दिमाग चालू करते हैं। आप उसके अंदर छिपी काबिलियत को बाहर निकालते हैं।

किताब में लेखक ने कुछ बहुत ही शानदार सवाल बताए हैं। जब भी कोई आपके पास अपनी समस्या लेकर आए, तो पहला सवाल पूछिए, और क्या?

सुनने में यह दो शब्द बहुत साधारण लगते हैं। लेकिन यह एक जादू की तरह काम करता है। जब आप पूछते हैं कि और क्या? तो सामने वाला इंसान पहली बार में ही रुक नहीं जाता। वह थोड़ा और गहरा सोचता है। वह अपनी समस्या के असली कारण तक पहुंचने की कोशिश करता है।

दूसरा सवाल पूछिए, यहाँ आपके लिए असली चुनौती क्या है?

अक्सर लोग आपके पास समस्या का केवल एक हिस्सा लेकर आते हैं। वे ऊपरी चीजों पर रोना रोते हैं। जब आप उनसे पूछते हैं कि असली चुनौती क्या है, तो उनका ध्यान भटकाव से हटकर सीधा मुद्दे पर आ जाता है। वे अपनी असली परेशानी को पकड़ पाते हैं।

और तीसरा सबसे पावरफुल सवाल, आप मुझसे क्या चाहते हैं?

यह सवाल सामने वाले के होश उड़ा देता है। क्योंकि ज्यादातर लोग आपके पास केवल अपना दुखड़ा रोने आते हैं। वे चाहते हैं कि आप उनका काम कर दें। लेकिन जब आप पूछते हैं कि आप मुझसे क्या चाहते हैं, तो उन्हें समझ आता है कि उन्हें खुद कदम उठाना पड़ेगा।

अपनी डायरी निकालिए। इन सवालों को एक मेटल पेन से बड़े-बड़े अक्षरों में लिखिए। और अपनी डेस्क पर चिपका दीजिए।

जब आप सलाह देना छोड़कर सवाल पूछना शुरू करते हैं, तो आपकी टीम का आत्मविश्वास बढ़ता है। वे अपनी समस्याओं का समाधान खुद ढूंढने लगते हैं। और आपको हर छोटी बात में सिर खपाने से मुक्ति मिल जाती है।

आप केवल काम करवाने वाले मैनेजर से एक ऐसे मेंटर बन जाते हैं जिसकी हर कोई इज्जत करता है।

लेकिन सवाल पूछना ही सब कुछ नहीं है। सवाल पूछने के बाद जो सबसे कठिन काम आता है, वह है सामने वाले को चुपचाप सुनना। चलिए समझते हैं कि कम बोलकर ज्यादा कंट्रोल कैसे हासिल किया जाता है।


लेसन ३ : कम बोलिए और ज्यादा सुनिए

सोचिए आप ऑफिस में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मीटिंग में बैठे हैं। आपकी मेज पर एक ब्रांडेड नोटबुक रखी है। सब लोग अपनी अपनी बात रख रहे हैं। लेकिन आपका ध्यान किसी की बात पर नहीं है।

आपका दिमाग सिर्फ इस बात में लगा है कि जैसे ही सामने वाला इंसान अपनी सांस लेने के लिए रुकेगा, आप तुरंत बीच में कूद पड़ेंगे। आप अपना सबसे बेहतरीन आइडिया सबको सुनाएंगे। आप साबित करेंगे कि इस कमरे में सबसे ज्यादा समझदार इंसान आप ही हैं।

जैसे ही सामने वाले का मुंह बंद होता है, आप बिना एक सेकंड गंवाए बोलना शुरू कर देते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप ऐसा करते हैं, तो बाकी लोगों को कैसा लगता है?

उन्हें लगता है कि आप उनकी बात सुन ही नहीं रहे थे। आप सिर्फ अपनी हांकने के इंतजार में थे। और सच भी यही है।

माइकल बंगे स्टेनियर कहते हैं कि हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि हम सुनने के लिए नहीं सुनते। हम सिर्फ जवाब देने के लिए सुनते हैं।

जब आप सामने वाले की पूरी बात सुने बिना अपनी सलाह देना शुरू करते हैं, तो आप आधी अधूरी जानकारी पर फैसला लेते हैं। और आधी अधूरी जानकारी पर लिया गया फैसला हमेशा नुकसान ही कराता है।

अगर आप एक शानदार लीडर बनना चाहते हैं, तो आपको 20-80 का रूल अपनाना पड़ेगा।

मीटिंग में सिर्फ 20 परसेंट वक्त आप बोलिए। और 80 परसेंट वक्त सामने वाले को बोलने दीजिए।

जब आप चुप रहते हैं, तो सामने वाला इंसान सहज महसूस करता है। वह अपने मन की असली बात बाहर निकालता है। कई बार तो लोग बोलते-बोलते ही अपनी समस्या का हल खुद ही ढूंढ लेते हैं। आपको कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

जब आप कम बोलते हैं, तो आपकी हर एक बात का वजन बढ़ जाता है। लोग आपकी बात को ध्यान से सुनते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है कि यह इंसान फालतू की बकवास नहीं करता।

अपनी मेज पर एक डिजिटल टेबल क्लॉक रखिए। जब भी कोई आपसे बात करने आए, तो समय देखिए। खुद को चैलेंज दीजिए कि अगले 5 मिनट तक आप सिर्फ सुनेंगे और सिर हिलाएंगे। अपनी सलाह की दुकान को पूरी तरह से बंद रखेंगे।

शुरुआत में यह काम आपको बहुत मुश्किल लगेगा। आपके पेट में मरोड़ उठेगी। आपका दिल करेगा कि आप तुरंत बोल पड़ें। लेकिन खुद पर कंट्रोल रखिए।

जब आप कम बोलकर ज्यादा सुनना शुरू करेंगे, तो आप वो चीजें भी देख पाएंगे जो बाकी लोग मिस कर देते हैं। और यही एक नॉर्मल इंसान को एक पावरफुल लीडर बनाता है।

अब वक्त आ गया है कि हम अपनी जिंदगी का कंट्रोल अपने हाथों में लें और इस एडवाइस मॉन्स्टर को हमेशा के लिए गायब कर दें।


अगर इस आर्टिकल ने आपके सोचने का तरीका बदला है, तो इस माइंडसेट शिफ्ट को सिर्फ अपने तक मत रखिए।

इस आर्टिकल को तुरंत अपने उन दोस्तों और सहकर्मियों के साथ शेयर कीजिए जो बात-बात पर अपनी सलाह का पिटारा खोल देते हैं। शायद आपका एक शेयर उनकी प्रोफेशनल लाइफ बदल दे।

नीचे कमेंट सेक्शन में मुझे लिखकर बताइए कि इन तीन लेसन में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा पसंद आया? क्या आप भी अपने एडवाइस मॉन्स्टर को हराने के लिए तैयार हैं?

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