करोड़ों रुपए की सैलरी वाली नौकरी को लात मारकर कचरे के ढेर से बिजनेस खड़ा करने वाले ये युवा आज अरबपति बन चुके हैं और आप अभी भी मंडे मॉर्निंग के रोने रो रहे हैं।
नौकरी के सुरक्षित कुएं में मेंढक की तरह जीते-जीते आपकी पूरी जवानी ऑफिस के क्यूबिकल में घुटकर दम तोड़ देगी और आपको पता भी नहीं चलेगा कि असली जिंदगी क्या थी।
अगर आप भी अपनी 9 से 5 की गुलामी से तंग आ चुके हैं और खुद का कुछ बड़ा खड़ा करना चाहते हैं, तो यह वीडियो स्क्रिप्ट आपके लिए किसी मास्टरक्लास से कम नहीं है।
इस आर्टिकल में हम बात करेंगे रश्मी बंसल की मशहूर किताब अराइज, अवेक के बारे में, जो आपको बताएगी कि कैसे साधारण कॉलेज के छात्रों ने अपने दम पर बड़े बिजनेस साम्राज्य खड़े किए।
अंत तक बने रहिए क्योंकि इस लेख के आखिर में आपको वह सीक्रेट फार्मूला मिलेगा जो आपकी जिंदगी की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है।
अब समय आ गया है कि हम इस किताब के गहरे समंदर में उतरें और समझें कि कैसे एक छोटा सा विचार आपकी किस्मत को पूरी तरह पलट सकता है।
लेसन १ : पैकेज्ड नौकरी का मोह छोड़ो और खुद का रिस्क उठाओ
जिंदगी कोई सेफ गेम नहीं है जिसे आप वीडियो गेम की तरह रीस्टार्ट कर लोगे। कैंपस प्लेसमेंट के नाम पर मिलने वाला वो बारह लाख का पैकेज असल में आपकी बरसों की काबिलियत का सौदा होता है। हर महीने बैंक खाते में आने वाला मैसेज देखकर आप खुश होते हो, लेकिन असलियत यह है कि आप किसी और के सपने को पूरा करने के लिए अपनी जवानी गिरवी रख चुके हो। सुबह नौ बजे लैपटॉप खोलना और रात को आठ बजे लाल आंखें लेकर बंद करना, क्या यही सफलता है?
किताब अराइज, अवेक हमें सिखाती है कि जब तक आप दूसरों के बनाए पिंजरे में खुद को सुरक्षित मानोगे, तब तक आप कभी उड़ नहीं पाओगे। कॉलेज के हॉस्टल के कमरे में बैठकर जब इन युवाओं ने अपने स्टार्टअप का बीज बोया था, तब उनके पास कोई फिक्स सैलरी का गद्दा नहीं था। उनके पास था तो बस एक जिद्दी इरादा और रात भर जागने का हौसला। लोग उन्हें पागल कहते थे। रिश्तेदार ताने मारते थे कि बेटा सरकारी नौकरी की तैयारी करो, ये बिजनेस धंधा तुम्हारे बस का नहीं है। लेकिन उन्होंने समाज की इस घिसी-पिटि सोच के मुंह पर जोरदार तमाचा मारा।
जरा सोचिए, आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वेटर आपके सामने मेनू कार्ड रखता है। आप वही चुनते हैं जो उस पर लिखा होता है। यही हाल हमारी नौकरी का है। हम अपनी किस्मत का मेनू खुद लिखने के बजाय कंपनी के भरोसे छोड़ देते हैं। जब तक आप अपने कंफर्ट जोन के पंख नहीं काटोगे, तब तक आसमान छूने का सपना देखना छोड़ दो। रिस्क लेना ही असली आंत्रप्रेन्योर का धर्म है। अगर आपके पास भी खुद का कुछ शुरू करने का विजन है, तो आज ही अपनी तैयारी पक्की करने के लिए रिच डैड पुअर डैड बुक को अपना साथी बनाएं और अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं।
यही जिद्द और बिना डरे आगे बढ़ने का जज्बा आपको भीड़ से अलग खड़ा करता है। लेकिन सिर्फ नौकरी छोड़ देने से काम नहीं चलता, असली खेल तो तब शुरू होता है जब आप बाजार में उतरते हो और वहां की धक्के खाने वाली असलियत से सामना होता है। चलिए, अब सीधे बढ़ते हैं हमारे अगले पड़ाव की तरफ और समझते हैं कि कैसे एक सही टीम और मजबूत विजन आपके डूबते हुए जहाज को सोने की नाव बना सकते हैं।
लेसन २ : फंडिंग से ज्यादा मजबूत विजन और सही टीम है जरूरी
बाजार में उतरते ही लोग सबसे पहले रोना रोते हैं कि हमारे पास फंडिंग नहीं है, हमारे पास तो कोई बड़ा निवेशक नहीं है। अरे भाई, जब जेब में चवन्नी न हो और दिमाग में विजन हो, तभी असली हीरा तराशा जाता है। स्टार्टअप की दुनिया में लोग सोचते हैं कि करोड़ों रुपए का चेक मिल जाएगा तभी काम शुरू होगा। यह बिल्कुल ऐसा है जैसे आप बिना तैरना सीखे ही सीधे प्रशांत महासागर में कूद पड़ो और फिर भगवान से प्रार्थना करो कि कोई जहाज आकर बचा ले।
किताब अराइज, अवेक के ये युवा जब मैदान में उतरे थे, तब उनके पास भी बड़े फंड्स नहीं थे। उनके पास थी तो सिर्फ गजब की टीम और एक ऐसा आइडिया जो लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को चुटकियों में हल कर सके। उन्होंने ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़ा जो पैसे के भूखे नहीं बल्कि मिशन के पक्के थे। जब आपकी टीम में एक जैसी आग सुलग रही हो, तब दुनिया की कोई ताकत आपको हरा नहीं सकती। लेकिन अगर आपकी टीम में ऐसा इंसान है जो हर बात पर रोना रोता है, तो समझ लीजिए कि आपकी नैया बीच मझधार में ही डूबने वाली है।
सोचिए, आप एक ऐसी बस में सफर कर रहे हैं जिसका ड्राइवर ही नशे में है और कंडक्टर को रास्ता ही नहीं पता। आप उस बस में बैठकर कितनी दूर जाओगे? यही हाल बिना सही टीम और कमजोर विजन वाले बिजनेस का होता है। निवेशक भी अपना पैसा उसी घोड़े पर लगाते हैं जिसकी दौड़ने की जिद साफ दिखाई देती है। अगर आपको भी अपनी टीम को मजबूत करना है और बिजनेस के दांवपेंच सीखने हैं, तो जीरो टू वन बुक को पढ़ना शुरू कीजिए और अपने सोचने का तरीका बदलिए।
बिना पैसे के भी बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है अगर आपकी नीयत और टीम चट्टान जैसी मजबूत हो। लेकिन सिर्फ टीम बना लेने से मंजिल नहीं मिलती, असली परीक्षा तब होती है जब चारों तरफ असफलता का अंधेरा छा जाता है और कोई रास्ता नजर नहीं आता। आइए, अब बिना एक भी पल गंवाए बढ़ते हैं हमारे अगले और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव की तरफ, जो आपको सिखाएगा कि कैसे हर हार को जीत में बदला जाता है।
लेसन ३ : असफलता से मत डरो, यही तुम्हारी सबसे बड़ी जीत है
जब पहली बार आपका स्टार्टअप औंधे मुंह गिरेगा और बैंक बैलेंस शून्य पर आ जाएगा, तब रिश्तेदारों के फोन आने बंद हो जाएंगे और दोस्त आपका फोन उठाना छोड़ देंगे। उस वक्त आपको लगेगा कि दुनिया की हर दीवार आपके ही ऊपर आ गिरी है। लोग डर के मारे वापस उसी घिसी-पिटी 9 से 5 की नौकरी में लौट जाते हैं और जिंदगी भर अपने फैसले पर पछताते रहते हैं। अरे भाई, असफलता कोई फुल स्टॉप नहीं है, यह तो सिर्फ एक कॉमा है जो यह बताता है कि कहानी अभी और भी धमाकेदार बाकी है।
किताब अराइज, अवेक हमें सिखाती है कि जिन लोगों ने आज भारत में बड़े बिजनेस खड़े किए हैं, उन्होंने अपनी जिंदगी में असफलता के अनगिनत झटके झेले हैं। उनका हर एक फेलियर एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ जिसने उन्हें अगली बार और ज्यादा मजबूत बना दिया। वे रोए नहीं, बल्कि अपनी गलतियों से सीखकर मैदान में दोगुने जोश के साथ वापस लौटे। असफलता आपको वह कड़वी दवाई देती है जो आपका बिजनेस इम्यून सिस्टम हमेशा के लिए फौलादी बना देती है। अगर आप ठोकर खाने से ही डरोगे, तो दौड़ना कभी नहीं सीख पाओगे।
जरा सोचिए, कोई बच्चा जब चलना सीखता है, तो वो सैकड़ों बार गिरता है, घुटने छिलवाता है, रोता है, लेकिन क्या वो चलना छोड़ देता है? बिलकुल नहीं! फिर बड़े होते ही हम असफलता से इतना क्यों डर जाते हैं? हर एक नाकामी आपको सफलता के एक कदम और करीब ले जाती है। अगर आपको भी अपनी जिंदगी के हर डर को खत्म करना है और अंदर से फौलादी बनना है, तो आज ही दि साइकोलॉजी ऑफ मनी बुक को पढ़िए और पैसों के साथ-साथ जिंदगी के असली खेल को भी गहराई से समझिए।
असफलता से डरने के बजाय उसे गले लगाना ही एक असली विजेता की पहचान होती है। इसी जिद्दी और कभी न हार मानने वाले एटीट्यूड के साथ आप अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।
अगर इस आर्टिकल को पढ़कर आपके भीतर भी सोने की जंजीरें तोड़कर कुछ बड़ा करने की आग सुलग उठी है, तो इस वीडियो को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो रोज सुबह उठकर सिर्फ मंडे मॉर्निंग का रोना रोते हैं। नीचे कमेंट करके हमें बताएं कि आपने आज कौन सा बड़ा रिस्क लेने का फैसला किया है और इस चैनल को लाइक और सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूलें ताकि कोई भी दमदार लेसन आपसे छूट न जाए।
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