आप अभी भी गधे की तरह मेहनत कर रहे हैं और आपकी टीम आपको पीठ पीछे विलेन समझती है। अगर आपको लगता है कि सिर्फ चिल्लाने से काम होता है तो मुबारक हो आप अपनी कंपनी और करियर दोनों को डुबोने की रेस में सबसे आगे हैं। यह कीमती सीक्रेट्स मिस करना आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी होगी।
आज हम टोड वैगनर की मशहूर किताब के जरिए वह १२ राज खोलेंगे जो आपको एक खड़ूस बॉस से एक लेजेंडरी लीडर बना देंगे। चलिए जानते हैं वे ३ बड़े लेसन जो आपकी वर्क लाइफ बदल देंगे।
लेसन १ : उम्मीदों की सफाई और सही हथियारों का खेल
जरा सोचिये कि आप एक अंधेरे कमरे में खड़े हैं और आपसे कहा जाए कि सामने रखी किसी चीज पर निशाना लगाओ। अब भाई जब कुछ दिख ही नहीं रहा तो निशाना क्या खाक लगेगा। ऑफिस में भी हमारे साथ यही होता है। इस किताब का पहला और सबसे जरूरी लेसन यही है कि क्या आपके एम्प्लॉई को पता है कि उससे असल में चाहिए क्या। बहुत से मैनेजर अपनी टीम को काम तो दे देते हैं लेकिन यह बताना भूल जाते हैं कि सक्सेस का मतलब क्या है। बिना क्लैरिटी के काम करना वैसा ही है जैसे बिना एड्रेस के जीपीएस चलाना। आप पेट्रोल तो बहुत जलाएंगे लेकिन कहीं पहुँचेंगे नहीं।
हमारे यहाँ कई मैनेजर ऐसे होते हैं जो सुबह कुछ और बोलते हैं और शाम तक उनका मूड मौसम की तरह बदल जाता है। बेचारा एम्प्लॉई कन्फ्यूज रहता है कि उसे तारीफ मिलेगी या गाली। जब आप अपनी टीम को यह नहीं बताते कि उनकी प्रायोरिटी क्या है तो वे बस वक्त काटते हैं। वे काम नहीं करते बल्कि काम करने का नाटक करते हैं। और सच तो यह है कि इसमें उनकी गलती कम और आपकी ज्यादा है। क्लैरिटी देना आपकी जिम्मेदारी है। अगर उसे गोल पोस्ट ही नहीं दिखेगा तो वह गोल कैसे करेगा।
सिर्फ यह बताना काफी नहीं है कि क्या करना है। क्या उनके पास वह काम करने के लिए सही टूल्स और रिसोर्सेज हैं। अब आप किसी को बिना इंटरनेट के डिजिटल मार्केटिंग करने को बोल देंगे तो वह बेचारा तो फेल होगा ही। यह वैसा ही है जैसे आप किसी को जंग पर भेज दें और हाथ में तलवार की जगह प्लास्टिक का चम्मच पकड़ा दें। फिर जब वह हार कर आए तो आप उस पर चिल्लाएं। यह मैनेजमेंट नहीं बल्कि टॉर्चर है। एक बेहतरीन मैनेजर वह है जो अपने खिलाड़ियों को मैदान में उतारने से पहले उन्हें बेस्ट जूते और ट्रेनिंग देता है।
अक्सर ऑफिस में यह देखा जाता है कि पुराने सड़े हुए कंप्यूटर और स्लो सिस्टम की वजह से लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं। मैनेजर साहब को लगता है कि एम्प्लॉई काम चोरी कर रहा है जबकि एम्प्लॉई बेचारा सिस्टम रीस्टार्ट होने का इन्तजार कर रहा होता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम चीते की रफ़्तार से दौड़े तो आपको उन्हें बैलगाड़ी वाले टूल्स देना बंद करना होगा। सही टूल्स का मतलब सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं बल्कि सही जानकारी और सही माहौल भी है। जब इंसान के पास सब कुछ होता है तो उसका दिमाग सिर्फ काम पर होता है न कि बहाने बनाने पर।
इस लेसन का सबसे बड़ा टेकअवे यही है कि कन्फ्यूजन को खत्म करो। अपने एम्प्लॉई से बात करो और पूछो कि उसे क्या चाहिए। क्या उसे पता है कि आज का सबसे बड़ा काम क्या है। जब आप यह क्लैरिटी देते हैं तो आप आधे मैनेजर तो वहीं बन जाते हैं। बाकी की कसर आपकी केयर पूरी कर देती है। एक अच्छी टीम हमेशा उस लीडर के लिए जान लगा देती है जो उन्हें यह अहसास दिलाता है कि उनका काम और उनका वक्त कीमती है। बिना सही दिशा और सही टूल्स के आप सिर्फ भीड़ जमा कर सकते हैं कोई बड़ी जीत हासिल नहीं कर सकते।
लेसन २ : तारीफ का टॉनिक और परवाह का जादू
जब आप किसी शादी में जाते हैं और बहुत सजधज कर तैयार होते हैं और कोई आपकी तारीफ न करे तो कैसा लगता है। ऐसा लगता है जैसे सारा मेकअप और नए कपड़े बेकार चले गए। ऑफिस में भी ठीक ऐसा ही होता है। लोग सिर्फ सैलरी के लिए काम नहीं करते। अगर ऐसा होता तो हर अमीर आदमी दुनिया का सबसे खुश एम्प्लॉई होता। लोग काम करते हैं उस एक लाइन के लिए जो बॉस मीटिंग में बोलता है कि शाबाश तुमने बहुत बढ़िया काम किया। लेकिन हमारे यहाँ के मैनेजर्स को शायद लगता है कि अगर उन्होंने तारीफ कर दी तो एम्प्लॉई के सिर पर सींग निकल आएंगे या वह अगले दिन प्रमोशन मांग लेगा।
जरा सोचिये आप एक ऐसे ऑफिस में हैं जहाँ आप दिन रात एक कर रहे हैं और आपका मैनेजर आपको ऐसे देखता है जैसे आप फर्नीचर का हिस्सा हों। न कोई हाय न कोई बाय। बस काम हुआ कि नहीं हुआ। यह मैनेजमेंट नहीं बल्कि रोबोटिक फैक्ट्री है। इस किताब का दूसरा बड़ा लेसन यही है कि पिछले सात दिनों में क्या आपने अपने किसी एम्प्लॉई के अच्छे काम की सराहना की है। अगर नहीं की तो यकीन मानिए वह एम्प्लॉई मन ही मन दूसरी कंपनी के इंटरव्यू शेड्यूल कर रहा है। इंसान को जब तक यह महसूस नहीं होता कि उसकी मेहनत कोई देख रहा है तब तक वह अपना सौ परसेंट कभी नहीं देता।
और यहाँ बात सिर्फ काम की तारीफ की नहीं है। क्या आप एक इंसान के तौर पर उनकी परवाह करते हैं। अब मान लीजिये किसी एम्प्लॉई के घर में कोई बीमार है और आप उसे टारगेट की फाइलें फेंक कर मार रहे हैं। वह काम तो कर देगा लेकिन उस काम में दिल नहीं होगा। एक अच्छा मैनेजर वह है जो जानता है कि उसके एम्प्लॉई की लाइफ में क्या चल रहा है। उसे यह पता होना चाहिए कि उसका टीम मेंबर आज परेशान क्यों है। जब आप लोगों को यह अहसास कराते हैं कि आप उनकी फिक्र करते हैं तो वे आपके लिए उस वक्त भी खड़े रहेंगे जब कंपनी बुरे दौर से गुजर रही होगी।
अक्सर देखा गया है कि कुछ बॉस को लगता है कि डरा कर काम कराना ही असली लीडरशिप है। वे गब्बर सिंह बनकर ऑफिस में घूमते हैं। नतीजा यह होता है कि उनके आते ही लोग अपनी कंप्यूटर स्क्रीन ऐसे घूरने लगते हैं जैसे कोई बहुत बड़ा रिसर्च कर रहे हों। जैसे ही बॉस केबिन में घुसा पीछे से जोक्स और गालियां शुरू हो जाती हैं। क्या आप ऐसा माहौल चाहते हैं। बिल्कुल नहीं। तारीफ और केयर वह खाद है जो किसी भी एम्प्लॉई की प्रोडक्टिविटी के पौधे को बढ़ाती है। बिना इसके आप सिर्फ मुरझाए हुए चेहरे और बहाने वाले ईमेल ही पाएंगे।
इस लेसन का सीधा सा मतलब है कि कंजूसी छोड़ो और तारीफ करना शुरू करो। चाहे वह एक छोटा सा थैंक यू ही क्यों न हो। जब आप किसी की स्ट्रेंथ को पहचानते हैं और उसे बताते हैं कि वह किस काम में माहिर है तो वह उस काम को और भी बेहतर तरीके से करने की कोशिश करता है। याद रखिये पैसा बिल भर सकता है लेकिन मोटिवेशन और केयर ही करियर को आगे बढ़ाती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम आपको अपना लीडर माने तो पहले आपको उन्हें यह यकीन दिलाना होगा कि आप उनके लिए एक ढाल की तरह खड़े हैं।
लेसन ३ : ग्रोथ की सीडी और भविष्य का सपना
दुनिया में कोई भी इंसान इसलिए पैदा नहीं हुआ कि वह जिंदगी भर एक ही जगह बैठकर एक्सेल शीट भरता रहे। हम सबको तरक्की चाहिए। लेकिन कई मैनेजर्स को लगता है कि अगर उन्होंने अपने एम्प्लॉई को कुछ नया सिखा दिया तो वह उनकी कुर्सी हड़प लेगा या कहीं और भाग जाएगा। यह सोच वैसी ही है जैसे कोई शादी इसलिए न करे कि कहीं बीवी या पति लड़ाई न कर ले। भाई अगर आप अपनी टीम को बढ़ने का मौका नहीं देंगे तो वे आपके पास रहकर भी मर चुके होंगे। उनका शरीर ऑफिस में होगा लेकिन दिमाग कहीं और। इस किताब का तीसरा बड़ा लेसन यही है कि क्या आप अपनी टीम की ग्रोथ में दिलचस्पी ले रहे हैं।
जरा उस सिचुएशन के बारे में सोचिये जब आप हर रोज वही घिसा पिटा काम करते हैं। धीरे-धीरे आपका दिमाग सुन्न होने लगता है। आप ऑफिस सिर्फ इसलिए जाते हैं क्योंकि अटेंडेंस लगानी है। हमारे यहाँ कई ऐसे ऑफिस हैं जहाँ लोग दस साल से एक ही डेस्क पर बैठकर एक ही जैसा काम कर रहे हैं। उनके मैनेजर को लगता है कि यह तो बहुत वफादार आदमी है। हकीकत में वह इंसान अंदर से टूट चुका है क्योंकि उसे प्रोग्रेस नहीं दिख रही। एक अच्छा मैनेजर वह है जो अपने एम्प्लॉई से साल में एक बार नहीं बल्कि हर छह महीने में पूछता है कि तुम अगले साल खुद को कहाँ देखते हो।
कुछ मैनेजर ऐसे होते हैं जो मीटिंग में ज्ञान तो बहुत बांटते हैं लेकिन जब प्रमोशन की बात आती है तो उन्हें सांप सूंघ जाता है। वे एम्प्लॉई की कमियां तो उंगलियों पर गिना देंगे लेकिन उसकी प्रोग्रेस पर बात करना भूल जाएंगे। अगर आप अपनी टीम को यह भरोसा नहीं दिला सकते कि आपके साथ रहकर उनका करियर रॉकेट की तरह उड़ेगा तो आप एक नाकाम मैनेजर हैं। लोग कंपनी नहीं छोड़ते वे अपने खराब मैनेजर को छोड़ते हैं। और वे उस मैनेजर को कभी नहीं छोड़ते जो उन्हें एक बेहतर इंसान और प्रोफेशनल बनने में मदद करता है।
ग्रोथ का मतलब सिर्फ प्रमोशन या सैलरी हाइक नहीं होता। इसका मतलब है नई स्किल्स सीखना और जिम्मेदारी मिलना। जब आप किसी को कोई नया प्रोजेक्ट देते हैं तो आप उसे यह मैसेज देते हैं कि मुझे तुम पर भरोसा है। यह भरोसा ही उसे रात को देर तक काम करने की ताकत देता है। लेकिन अगर आप हर काम में अपनी टांग अड़ाएंगे और उसे कुछ नया नहीं करने देंगे तो वह कभी खुद को साबित नहीं कर पाएगा। उसे गलती करने का मौका दीजिये क्योंकि जो गिरता है वही चलना सीखता है। आपका काम उसे गिरने से बचाना नहीं बल्कि गिरकर उठने में मदद करना है।
इस पूरे सफर का निचोड़ यही है कि मैनेजमेंट कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि इंसानों को समझने की कला है। अगर आप क्लैरिटी देते हैं उनकी तारीफ करते हैं और उनकी ग्रोथ का रास्ता साफ करते हैं तो आप दुनिया के बेस्ट मैनेजर बन सकते हैं। यह किताब हमें याद दिलाती है कि एम्प्लॉई कोई मशीन नहीं है जिसके बटन दबाते ही आउटपुट निकल आएगा। वे भावनाओं वाले इंसान हैं। जब आप उनके दिल को जीत लेते हैं तो उनका दिमाग और हाथ अपने आप आपके विजन के लिए काम करने लगते हैं। तो क्या आप तैयार हैं एक ऐसा लीडर बनने के लिए जिसे लोग याद रखें।
मैनेजमेंट का मतलब सिर्फ हुक्म चलाना नहीं बल्कि साथ मिलकर चलना है। याद रखिये आपकी टीम की कामयाबी ही आपकी असली जीत है। अगर आप आज भी पुराने तरीकों से अटके हुए हैं तो वक्त आ गया है खुद को बदलने का। अपनी टीम से बात कीजिये उनकी सुनिए और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दीजिये।
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