Automatic Wealth for Grads (Hindi)


अगर आपको लगता है कि सिर्फ डिग्री और नौ से पांच वाली घिसी पिटी नौकरी आपको करोड़पति बना देगी तो आप वाकई में एक बहुत ही प्यारे मुगालते में जी रहे हैं। बिना किसी फाइनेंसियल प्लान के आप सिर्फ अपने बॉस की ईएमआई भर रहे हैं और अपनी गरीबी का आधार कार्ड पक्का कर रहे हैं।

यह आर्टिकल आपको उस कोमा से जगाने के लिए है जिसमें आप अपनी पूरी जवानी बर्बाद कर सकते हैं। आज हम माइकल मास्टरसन की किताब से वे तीन सीक्रेट लेसन सीखेंगे जो आपकी खाली जेब को ऑटोमेटिक वेल्थ जनरेटर में बदल देंगे।


लेसन १ : बिकम एन एक्स्ट्राऑर्डिनरी एम्प्लॉयी

अगर आप उन लोगों में से हैं जो ऑफिस में सिर्फ घड़ी की सुइयां देखते हैं और सोचते हैं कि एक दिन अचानक छप्पर फाड़कर पैसा बरसेगा तो शायद आप गलत प्लैनेट पर आ गए हैं। माइकल मास्टरसन अपनी किताब में सबसे पहला और सबसे कड़वा लेसन यही देते हैं कि अमीर बनने का रास्ता आपकी सैलरी स्लिप से ही होकर गुजरता है। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। आपको सिर्फ एक एम्प्लोयी नहीं बल्कि एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी एम्प्लोयी बनना होगा। अब आप कहेंगे कि भाई यह एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी क्या होता है। क्या मुझे ऑफिस में सुपरमैन की ड्रेस पहनकर जाना होगा। बिल्कुल नहीं। इसका मतलब है कंपनी के लिए इतना जरूरी बन जाना कि अगर आप एक दिन भी छुट्टी लें तो आपके बॉस का बीपी बढ़ जाए और पूरी ऑफिस में तहलका मच जाए।

जरा सोचिए आप उस कलीग के बारे में जो सुबह दस बजे आता है और ठीक छह बजते ही ऐसे गायब होता है जैसे गधे के सिर से सींग। वह सिर्फ उतना ही काम करता है जितना उसकी जॉब डिस्क्रिप्शन में लिखा है। अगर उसे एक्स्ट्रा काम दे दो तो उसका चेहरा ऐसा बन जाता है जैसे उसने करेले का जूस पी लिया हो। क्या आपको लगता है कि कंपनी उसे कभी बड़ा बोनस या तगड़ा प्रमोशन देगी। कभी नहीं। वह तो बस एक गिनती है जो किसी भी दिन बदली जा सकती है। मास्टरसन कहते हैं कि अगर आप अपनी इनकम को रॉकेट की तरह ऊपर ले जाना चाहते हैं तो आपको अपनी वैल्यू बढ़ानी होगी। आपको वह इंसान बनना होगा जो प्रॉब्लम लेकर नहीं बल्कि सोल्यूशन लेकर बॉस के केबिन में घुसता है।

मान लीजिए राहुल और सुमित एक ही कंपनी में सेल्स का काम करते हैं। राहुल उतना ही काम करता है जितना उसे बोला जाता है। वह रोज शिकायत करता है कि मार्केट खराब है और कस्टमर पैसे नहीं दे रहे। दूसरी तरफ सुमित है जो न सिर्फ अपनी सेल्स पूरी करता है बल्कि कंपनी के मार्केटिंग प्लान में भी मदद करता है और नए क्लाइंट्स को लाने के जुगाड़ ढूंढता रहता है। जब कंपनी में छंटनी की बारी आती है तो राहुल को सबसे पहले टाटा बाय बाय बोल दिया जाता है क्योंकि वह एक लायबिलिटी था। वहीं सुमित को रोकने के लिए बॉस उसकी सैलरी बढ़ा देता है क्योंकि सुमित एक एसेट बन चुका है। सुमित ने यह समझ लिया था कि कंपनी को अमीर बनाना असल में खुद को अमीर बनाने का पहला कदम है।

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ज्यादा काम करने का मतलब है कंपनी को फ्री में अपनी मेहनत देना। पर हकीकत में आप अपनी स्किल को शार्प कर रहे होते हैं। जब आप अपनी फील्ड के मास्टर बन जाते हैं तो दुनिया आपके पीछे भागती है। यह लेसन हमें सिखाता है कि अगर आप अपनी प्रेजेंट जॉब में टॉप पर नहीं पहुंच सकते तो आप कभी भी ऑटोमेटिक वेल्थ के अगले पड़ाव पर नहीं जा पाएंगे। अपनी इनकम बढ़ाना ही वह पहला गियर है जो आपकी अमीरी की गाड़ी को स्टार्ट करता है। और एक बार जब आपकी इनकम बढ़ती है तभी आप उस पैसे को सही जगह लगाकर उसे कई गुना बढ़ा सकते हैं।

पर क्या सिर्फ ज्यादा कमाना ही काफी है। बिल्कुल नहीं। अगर आप महीने के एक लाख कमाते हैं और सवा लाख का आईफोन ईएमआई पर ले आते हैं तो आप सिर्फ एक अमीर दिखने वाले गरीब इंसान हैं। असली खेल तो तब शुरू होता है जब आप उस बढ़ी हुई इनकम को संभालना और उसे ऑटोमेटिक मोड पर डालना सीखते हैं। यह लेसन हमें उस मेहनत के लिए तैयार करता है जो आगे चलकर हमें पैसिव इनकम की दुनिया में ले जाएगी। तो क्या आप तैयार हैं उस 15 परसेंट वाले मैजिक फॉर्मूले को जानने के लिए जो आपकी लाइफ बदल देगा।


लेसन २ : द 15% ऑटोमैटिक सेविंग्स रूल

अब जब आपने अपनी वैल्यू बढ़ाकर ज्यादा पैसा कमाना शुरू कर दिया है तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप हर हफ्ते पार्टी करें और महंगे जूतों का ढेर लगा लें। माइकल मास्टरसन का दूसरा लेसन बहुत ही सीधा और डेंजरस है। वे कहते हैं कि अगर आप अपनी कमाई का कम से कम 15 परसेंट हिस्सा खुद को पे नहीं कर रहे हैं तो आप असल में सिर्फ दूसरों को अमीर बना रहे हैं। वह मकान मालिक हो या वह ऑनलाइन शॉपिंग वाली वेबसाइट। आप बस पैसा इधर से उधर ट्रांसफर करने वाले एक जरिया बनकर रह गए हैं। और यकीन मानिए अगर आप यह 15 परसेंट वाला रूल फॉलो नहीं करते तो आपकी डिग्री सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है जो अलमारी में रखी धूल चाट रही है।

जरा अपने उस दोस्त समीर को देखिए जो हर महीने अपनी पूरी सैलरी उड़ा देता है। जैसे ही सैलरी अकाउंट में आती है उसके फोन पर नोटिफिकेशन्स की बाढ़ आ जाती है। नया रेस्टोरेंट ट्राई करना है नया गैजेट लेना है और महीने के आखिर में वह पारले जी के बिस्किट खाकर दिन गुजारता है। वह सोचता है कि जब उसकी सैलरी डबल होगी तब वह सेविंग शुरू करेगा। पर कड़वा सच यह है कि जब सैलरी बढ़ती है तो खर्चे भी उसके पीछे पीछे दौड़ते हैं। इसे कहते हैं लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन। मास्टरसन कहते हैं कि अमीर वह नहीं जो ज्यादा कमाता है बल्कि अमीर वह है जो उस पैसे को अपने पास रोककर उसे काम पर लगा देता है।

मान लीजिए आपकी सैलरी 50 हजार है। आपने नियम बनाया कि 7500 रुपये यानी 15 परसेंट आप भूल जाएंगे कि आपके पास हैं। इसे कहते हैं ऑटोमेटिक वेल्थ। आपको यह काम मैन्युअली नहीं करना है वरना आपका मन पिघल जाएगा जब आप किसी सेल का विज्ञापन देखेंगे। आपको अपने बैंक में एक स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन सेट करना है कि जैसे ही सैलरी आए वह पैसा कटकर इन्वेस्टमेंट अकाउंट में चला जाए। अगर आप अपनी इच्छाशक्ति यानी विलपावर के भरोसे बैठेंगे तो याद रखिए कि आपका दिमाग दुनिया का सबसे बड़ा बहानेबाज है। वह आपको समझा देगा कि इस महीने पार्टी कर लेते हैं अगले महीने से पक्का डबल सेविंग करेंगे। और वह अगला महीना कभी नहीं आता।

मास्टरसन यहाँ एक और जबरदस्त बात कहते हैं। वह 15 परसेंट सिर्फ एक गुल्लक में जमा नहीं करना है। उसे पाँच अलग अलग एसेट क्लास में डालना है ताकि आपका पैसा सोए नहीं बल्कि आपकी तरह ओवर टाइम करे। इसमें स्टॉक्स रियल एस्टेट और गोल्ड जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। सोचिए आपका पैसा एक छोटा सा सैनिक है जो आपके लिए और पैसा जीत कर लाने के लिए युद्ध पर गया है। अब अगर आप उस सैनिक को ही खा जाएंगे तो वह आपके लिए क्या लाएगा। लोग अक्सर अमीर दिखने के चक्कर में अपने भविष्य की बलि चढ़ा देते हैं। वे कार लोन और क्रेडिट कार्ड के जाल में ऐसे फंसते हैं जैसे मकड़ी के जाले में मक्खी।

यह लेसन हमें अनुशासन यानी डिसिप्लिन सिखाता है। यह वह फिल्टर है जो असली रईसों को दिखावा करने वालों से अलग करता है। जब आप ऑटोमेटिक तरीके से पैसा बचाते हैं तो आपको पता भी नहीं चलता और कुछ सालों में आपके पास एक ऐसा फंड तैयार हो जाता है जो आपको नौकरी छोड़ने या अपना बिजनेस शुरू करने की हिम्मत देता है। लेकिन क्या सिर्फ सेविंग और इन्वेस्टमेंट ही काफी है। क्या होगा अगर मार्केट गिर जाए या आपकी एक इनकम स्ट्रीम बंद हो जाए। इसीलिए मास्टरसन हमें अगले और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर ले जाते हैं जहाँ हम सीखेंगे कि एक नहीं बल्कि कई रास्तों से पैसा घर कैसे लाया जाता है।


लेसन ३ : डेवलप मल्टिपल स्ट्रीम्स ऑफ इनकम

अगर आप आज भी यह सोचते हैं कि एक सिंगल नौकरी के भरोसे आप अपनी पूरी जिंदगी की नैया पार लगा लेंगे तो भाई साहब आप टाइटैनिक के उस डेक पर खड़े हैं जो बस डूबने ही वाला है। माइकल मास्टरसन का तीसरा और सबसे धांसू लेसन यह है कि कभी भी अपनी तकदीर का रिमोट कंट्रोल किसी एक बॉस या एक कंपनी के हाथ में मत दो। अमीर लोग कभी भी सिर्फ एक रास्ते से पैसा नहीं कमाते। उनके पास इनकम के ऐसे अलग-अलग पाइपलाइन होते हैं कि अगर एक नल सूख भी जाए तो बाकी के चार नलों से पानी यानी पैसा आता रहता है। लेकिन हमारे यहाँ मिडिल क्लास में क्या सिखाया जाता है। बस पढ़ो लिखो और एक सुरक्षित नौकरी पकड़ लो। यह सुरक्षा असल में एक बहुत बड़ा धोखा है।

जरा कल्पना कीजिये पंकज की जो एक बड़ी आईटी कंपनी में सीनियर मैनेजर है। पंकज की सैलरी बहुत अच्छी है और वह अपनी लाइफ में बहुत रिलैक्स्ड है। अचानक एक दिन ग्लोबल रिसेशन आता है और कंपनी उसे एक पिंक स्लिप थमा देती है। अब पंकज के पास जीरो इनकम है लेकिन उसके सिर पर लाखों की ईएमआई का बोझ है। वह पैनिक में आ जाता है और डिप्रेशन में चला जाता है। अब दूसरी तरफ देखिए अमित को। अमित भी वही नौकरी करता है लेकिन उसने मास्टरसन की बात मानकर अपने फ्री टाइम में एक छोटा सा ऑनलाइन साइड बिजनेस शुरू किया था और थोड़ा बहुत पैसा रियल एस्टेट में भी लगाया था। जब अमित की नौकरी जाती है तो वह परेशान नहीं होता। उसे पता है कि उसका साइड बिजनेस उसके घर का चूल्हा जलता रखेगा। इसे कहते हैं फाइनेंसियल फ्रीडम का असली चस्का।

मास्टरसन कहते हैं कि आपको अपना दूसरा इनकम सोर्स अपनी पहली नौकरी को छोड़कर नहीं बल्कि उसे करते हुए ही बनाना चाहिए। यह कुछ भी हो सकता है। क्या आप स्टॉक मार्केट में डिविडेंड देने वाले शेयर ले सकते हैं। क्या आप किसी छोटे स्टार्टअप में साइलेंट पार्टनर बन सकते हैं। या फिर क्या आप अपने हुनर को इंटरनेट पर बेच सकते हैं। आजकल तो लोग सोते हुए भी पैसा कमा रहे हैं और आप हैं कि संडे को सिर्फ नेटफ्लिक्स देखकर और सोकर गुजार देते हैं। यह वह समय है जिसे आप अपनी दूसरी पाइपलाइन बनाने में लगा सकते थे। याद रखिये कि अमीर बनने के लिए आपको गधे की तरह मेहनत नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से अपना नेटवर्क और एसेट्स फैलाने होते हैं।

यहाँ भी मास्टरसन एक बहुत जरूरी सलाह देते हैं। नए काम में हाथ डालने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी जमा पूंजी किसी ऐसी जगह लगा दें जिसके बारे में आपको कद्दू भी पता न हो। आपको वह काम चुनना चाहिए जो आपकी स्किल्स से जुड़ा हो। अगर आप कोडिंग जानते हैं तो फ्रीलांसिंग कीजिये। अगर आपको प्रॉपर्टी की समझ है तो रेंटल इनकम पर फोकस कीजिये। लोग अक्सर गलती क्या करते हैं। वे अपने पड़ोसी को देखकर क्रिप्टो या किसी स्कीम में पैसा डाल देते हैं और फिर जब पैसा डूबता है तो किस्मत को दोष देते हैं। असली खिलाड़ी वह है जो खेल के नियम समझकर मैदान में उतरता है।

यह लेसन हमें यह अहसास दिलाता है कि इनकम स्ट्रीम्स बढ़ाना कोई लग्जरी नहीं बल्कि आज के दौर की जरूरत है। जब आपके पास तीन चार अलग जगहों से पैसा आता है तो आपके चेहरे पर वह कॉन्फिडेंस आता है जो किसी करोड़पति के चेहरे पर होता है। आप डरना बंद कर देते हैं और लाइफ को अपनी शर्तों पर जीना शुरू करते हैं। तो क्या आप अभी भी उस एक सैलरी वाले पिंजरे में कैद रहना चाहते हैं या फिर अपनी खुद की वेल्थ की सल्तनत खड़ी करना चाहते हैं। फैसला आपका है क्योंकि वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करता और गरीबी किसी पर रहम नहीं खाती।


दोस्तो, माइकल मास्टरसन की यह बातें सिर्फ सुनने में अच्छी नहीं हैं बल्कि इन्हें आजमाने से ही जिंदगी बदलेगी। आज ही अपनी इनकम का वह 15 परसेंट अलग कीजिये और अपनी पहली साइड इनकम के बारे में सोचना शुरू कीजिये। अगर आप अपनी फाइनेंसियल जर्नी आज से शुरू करने का संकल्प लेते हैं तो नीचे कमेंट में 'आजादी' लिखिये। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर कीजिये जो अपनी नौकरी से परेशान है पर कुछ कर नहीं रहा। आपकी एक शेयरिंग किसी की लाइफ बदल सकती है।

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