क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अपने ईगो के चक्कर में अपनी ही लंका लगवा लेते हैं। मुबारक हो क्योंकि आपकी इसी जिद्दी आदतों की वजह से आपका कॉम्पिटिटर आज नई गाड़ी खरीद रहा है और आप अभी भी पुराने झगड़ों का अचार डाल रहे हैं।
रॉबर्ट नूकिन की बुक बार्गेनिंग विद द डेविल हमें सिखाती है कि कब लड़ना है और कब हाथ मिलाना है। आइए जानते हैं वो ३ लाइफ चेंजिंग लेसन जो आपको इमोशनल फूल बनने से बचाएंगे।
लेसन १ : इमोशनल ट्रैप से बचना
लाइफ में कभी न कभी आपका सामना किसी ऐसे इंसान से जरूर हुआ होगा जिसे देखकर आपका खून खौलने लगता है। वो ऑफिस का खडूस बॉस हो सकता है या वो पड़ोसी जो आपकी गाड़ी के सामने कचरा फेंकता है। रॉबर्ट नूकिन ऐसे लोगों को डेविल यानी शैतान कहते हैं। और हम इंडियन्स की सबसे बड़ी समस्या क्या है। हमारा इमोशन। जैसे ही हमें कोई बुरा आदमी दिखता है हमारा अंदर का सनी देओल जाग जाता है। हम चिल्लाते हैं कि यह आदमी गंदा है और मैं इससे बात तक नहीं करूंगा। लेकिन यही वह जाल है जिसमें आप फंस जाते हैं।
नूकिन कहते हैं कि जब आप किसी को सिर्फ बुरा मान लेते हैं तो आपका दिमाग काम करना बंद कर देता है। आप उसे एक विलेन की तरह देखने लगते हैं और खुद को एक बेचारा हीरो। अब सोचिए कि आपका एक बिजनेस पार्टनर है जिसने आपके साथ धोखाधड़ी की। आपका मन करेगा कि आज ही पुलिस बुलाऊं और इसे जेल भेज दूं। लेकिन क्या आपने कभी ठंडे दिमाग से सोचा है। अगर आप पुलिस के चक्कर में पड़े तो अगले पांच साल कोर्ट के चक्कर काटते रहेंगे। वकील आपकी जेब खाली कर देगा और आपका बिजनेस मिट्टी में मिल जाएगा। वहीं अगर आप उस डेविल के साथ बैठकर एक छोटी सी डील कर लें तो शायद आपका पैसा वापस मिल जाए और आप अपनी लाइफ में आगे बढ़ सकें।
इमोशनल होना अच्छी बात है लेकिन बिजनेस और डिसीजन मेकिंग में यह एक जहर की तरह है। लोग अक्सर अपनी ईगो को सहलाने के लिए लाखों का नुकसान कर लेते हैं। वे कहते हैं कि मुझे पैसा नहीं चाहिए बस उसे सबक सिखाना है। अरे भाई उसे लेसन सिखाने के चक्कर में आप खुद सड़क पर आ जाएंगे। नूकिन हमें सिखाते हैं कि अपने दुश्मन को भी एक इंसान की तरह देखें जो अपना फायदा चाहता है। जब आप सामने वाले के मोटिव को समझ जाते हैं तो आप उसे बेहतर तरीके से हैंडल कर सकते हैं।
मान लीजिए आपकी सोसाइटी में एक अंकल हैं जो हमेशा पार्क में क्रिकेट खेलने से मना करते हैं। अब आप उन पर चिल्ला सकते हैं या उनके घर के शीशे तोड़ सकते हैं। लेकिन इससे क्या होगा। वो पुलिस बुलाएंगे और आपकी शाम बर्बाद होगी। इसके बजाय अगर आप उन्हें जाकर कहें कि अंकल हम सिर्फ शाम को एक घंटा खेलेंगे और अगर कोई गेंद आपके घर आई तो हम खुद नया शीशा लगवाएंगे। शायद वो मान जाएं। यहाँ आपने अपने गुस्से को थूका और एक डील की। इसे कहते हैं स्मार्ट नेगोशिएशन।
अक्सर हम अपने दुश्मन को इतना ज्यादा नफरत करने लगते हैं कि हमें उसकी सही बातें भी गलत लगने लगती हैं। हम सोचते हैं कि अगर यह कह रहा है कि धूप है तो पक्का बारिश हो रही होगी। इस तरह की सोच आपको कमजोर बनाती है। रॉबर्ट नूकिन हमें समझाते हैं कि नेगोशिएशन का मतलब यह नहीं है कि आप उस इंसान को पसंद करने लगे हैं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आप अपने फायदे के लिए एक टेबल पर बैठे हैं। तो अगली बार जब कोई आपको उकसाए तो याद रखना कि आपका रिएक्शन ही आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकता है। अपने दिमाग को एक कैलकुलेटर की तरह चलाएं न कि एक प्रेशर कुकर की तरह जो जरा सी आंच पर सीटी मारने लगे।
लेसन २ : कॉस्ट और बेनिफिट का एनालिसिस
दुनिया में हर चीज की एक कीमत होती है। यहाँ तक कि आपकी उस ईगो की भी जिसकी वजह से आप किसी से लड़ने को तैयार बैठे हैं। रॉबर्ट नूकिन का दूसरा सबसे बड़ा लेसन है कैलकुलेशन। ज्यादातर लोग जोश में आकर होश खो देते हैं और फिर बाद में बैठकर आंसू बहाते हैं। वे लड़ाई तो शुरू कर देते हैं लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि उस लड़ाई को खत्म करने में उनका कितना कुछ दांव पर लगा है। लेखक कहते हैं कि किसी भी 'डेविल' से टकराने से पहले आपको अपनी मेज पर एक तराजू रखना चाहिए। एक तरफ रखिए लड़ने का नुकसान और दूसरी तरफ रखिए समझौता करने का फायदा।
मान लीजिए आपका एक सगा रिश्तेदार है जिसने आपकी खानदानी जमीन पर कब्जा कर लिया है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता है कि आप उस पर केस कर दें। सुनने में यह बड़ा हीरो वाला काम लगता है। लेकिन क्या आपने हिसाब लगाया है। इंडियन कोर्ट्स में तारीख पर तारीख मिलते मिलते आपके सिर के बाल सफेद हो जाएंगे। वकील साहब हर बार आपसे मोटी फीस वसूलेंगे। आपकी रातों की नींद उड़ जाएगी और आपका ब्लड प्रेशर आसमान छूने लगेगा। दस साल बाद शायद आप केस जीत भी जाएं लेकिन तब तक उस जमीन की कीमत से ज्यादा आप वकीलों को दे चुके होंगे। क्या यह वाकई एक जीत है। या फिर यह खुद को तबाह करने का एक तरीका है।
नूकिन हमें सिखाते हैं कि नेगोशिएशन कोई कमजोरी की निशानी नहीं है। यह एक स्ट्रेटेजी है। अगर आप उस रिश्तेदार से बात करके जमीन का एक हिस्सा छोड़ देते हैं और बाकी अपने नाम करवा लेते हैं तो आप आज ही फ्री हो जाते हैं। आप उस समय और पैसे को कहीं और इन्वेस्ट करके उस जमीन से दस गुना ज्यादा कमा सकते हैं। लेकिन नहीं हमें तो 'न्याय' चाहिए। दोस्त न्याय अक्सर बहुत महंगा बिकता है। अगर आप एक स्मार्ट इंसान हैं तो आप देखेंगे कि आपके लिए क्या ज्यादा कीमती है। आपका मानसिक सुकून और आने वाला कल या फिर वो बीता हुआ कल जिसके लिए आप आज को दांव पर लगा रहे हैं।
आजकल के स्टार्टअप कल्चर में अक्सर को फाउंडर्स के बीच झगड़ा हो जाता है। एक कहता है कि सारा आईडिया मेरा था और दूसरा कहता है कि सारा काम मैंने किया। अब दोनों एक दूसरे को बर्बाद करने पर तुले होते हैं। वे क्लाइंट्स के सामने एक दूसरे की बुराई करते हैं और अपनी ही कंपनी की लंका लगा देते हैं। रॉबर्ट नूकिन यहाँ पर बड़े प्यार से समझाते हैं कि भाई अगर तुम दोनों अलग होना चाहते हो तो शांति से अलग हो जाओ। अगर तुम कोर्ट जाओगे तो कंपनी की वैल्यू जीरो हो जाएगी। लेकिन अगर तुम एक एग्जिट डील साइन कर लो तो कम से कम कुछ तो हाथ लगेगा।
सच्चाई तो यह है कि लोग अक्सर लड़ते इसलिए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि समझौता करने से वो छोटे हो जाएंगे। समाज क्या कहेगा। लोग कहेंगे कि देखो यह तो डर गया। अरे भाई लोगों का काम तो कहना ही है। जब आप कर्ज में डूबे होंगे तब यही लोग आपकी मदद करने नहीं आएंगे। नूकिन का यह लेसन हमें सिखाता है कि अपनी जीत को रुपयों और खुशियों में नापो न कि सामने वाले की हार में। जब आप फायदे और नुकसान का हिसाब लगाने बैठते हैं तो आपको समझ आता है कि कई बार हाथ मिलाना लड़ने से कहीं ज्यादा हिम्मत का काम होता है। तो अपनी लाइफ के कैलकुलेटर को हमेशा ऑन रखें और ईगो के बटन को ऑफ।
लेसन ३ : मोरल और एथिकल बाउंड्रीज सेट करना
पिछले दो लेसन्स को पढ़कर शायद आपको लग रहा होगा कि रॉबर्ट नूकिन हमें हर बार झुकना सिखा रहे हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह किताब सिर्फ समझौता करना नहीं बल्कि यह भी सिखाती है कि कब आपको अपनी कुर्सी छोड़नी है और युद्ध का मैदान तैयार करना है। तीसरा सबसे बड़ा लेसन है अपनी लक्ष्मण रेखा पहचानना। नूकिन कहते हैं कि समझौता करना एक चॉइस होनी चाहिए कोई मजबूरी नहीं। अगर सामने वाला डेविल आपसे ऐसी चीज मांग रहा है जो आपकी आत्मा या आपकी वैल्यूज के खिलाफ है तो वहां नेगोशिएशन की टेबल पर बैठना भी पाप है।
सोचिए कि कोई आपसे कहे कि मैं आपके बिजनेस में पैसा लगाऊंगा लेकिन आपको अपनी क्वालिटी गिरानी होगी या कस्टमर्स को धोखा देना होगा। यहाँ पर कॉस्ट और बेनिफिट का कैलकुलेटर काम नहीं करेगा। यहाँ पर आपका करैक्टर काम करेगा। अगर आप सिर्फ पैसों के लिए गलत इंसान के साथ हाथ मिला लेते हैं तो आप एक ऐसी सुरंग में घुस रहे हैं जहाँ से वापस आने का कोई रास्ता नहीं है। नूकिन हमें यह समझाते हैं कि कुछ चीजें बिकाऊ नहीं होतीं। जब बात आपके आत्म सम्मान या मोरल वैल्यूज की आए तो वहां लड़ना ही एकमात्र रास्ता बचता है। चाहे उसका अंजाम कुछ भी हो।
मान लीजिए आप एक फ्रीलांसर हैं और आपका क्लाइंट आपसे काम करवाकर पैसे देने में नखरे कर रहा है। वो आपको धमकाता है कि अगर आपने और काम मुफ्त में नहीं किया तो वो आपकी पेमेंट रोक लेगा। अब यहाँ पर अगर आप झुक गए तो वो आपको जिंदगी भर गुलाम बना लेगा। यहाँ पर आपको एक स्ट्रोंग स्टैंड लेना होगा। आपको उसे बताना होगा कि भाई काम के बदले दाम देना होगा वरना मैं कानूनी रास्ता अपनाऊंगा। भले ही आपको वहां से पैसे न मिलें लेकिन आपने अपनी बाउंड्री सेट कर दी। डेविल हमेशा उसी को डराता है जो डरने के लिए तैयार खड़ा हो।
नूकिन की यह किताब हमें एक बैलेंस बनाना सिखाती है। एक तरफ वो लोग हैं जो हर बात पर तलवार निकाल लेते हैं और दूसरी तरफ वो जो डर के मारे हर शर्त मान लेते हैं। आपको इन दोनों के बीच का रास्ता चुनना है। आपको एक ऐसा खिलाड़ी बनना है जो दिमाग से सोचता है लेकिन जिसके पास अपनी वैल्यूज का एक मजबूत ढाल भी है। जब आप अपनी बाउंड्रीज क्लियर रखते हैं तो सामने वाले को पता होता है कि वो आपको कितना दबा सकता है। एक सफल इंसान वही है जिसे पता हो कि कब उसे हाथ मिलाना है और कब उसे मुक्का बंद करना है।
तो दोस्तों, रॉबर्ट नूकिन की यह बातें हमें सिर्फ बिजनेस में ही नहीं बल्कि हमारी पर्सनल लाइफ में भी बहुत काम आती हैं। चाहे वो प्रॉपर्टी का झगड़ा हो या ऑफिस की पॉलिटिक्स हर जगह आपको यह तय करना होगा कि क्या दांव पर लगा है। अपनी ईगो को अलमारी में बंद कर दीजिए और ठंडे दिमाग से अपने फायदे का हिसाब लगाइए। लेकिन याद रहे अपनी ईमानदारी का सौदा कभी मत करना। लाइफ एक शतरंज की बिसात है जहाँ हर चाल सोच समझकर चलनी पड़ती है। क्या आप तैयार हैं अपनी अगली चाल चलने के लिए।
क्या आप भी फिलहाल किसी ऐसी स्थिति में फंसे हैं जहाँ आपको समझ नहीं आ रहा कि लड़ें या समझौता करें। नीचे कमेंट में अपनी सिचुएशन शेयर करें और हम मिलकर रॉबर्ट नूकिन के इन लेसन्स की मदद से उसे सॉल्व करेंगे। याद रखिए आपका एक सही फैसला आपकी जिंदगी के अगले दस साल बचा सकता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो बात बात पर गर्म हो जाता है।
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