Be the Best at What Matters Most (Hindi)


क्या आप अभी भी उन हजार फालतू कामों में बिजी रहकर अपनी लाइफ बर्बाद कर रहे हैं जो कभी रिजल्ट नहीं देंगे। बहुत बढ़िया। इसी तरह आप रेस में पीछे छूट जाएंगे और लोग आपकी मेहनत पर हसेंगे। अपनी एनर्जी कचरे में फेंकना बंद करिए वरना सक्सेस बस एक सपना बनकर रह जाएगी।

आज हम जो कैलोवे की बुक बी द बेस्ट एट व्हॉट मैटर्स मोस्ट से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी पूरी लाइफ और काम करने का तरीका बदल देंगे। क्या आप सच में जीतने के लिए तैयार हैं। चलिए इन 3 लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : फालतू के दिखावे छोड़ो और सिर्फ असली वैल्यू पर दांव लगाओ

अक्सर हम सबको एक बहुत बड़ी गलतफहमी होती है कि अगर हम दिन भर पागलों की तरह बिजी रहेंगे तो हम बहुत बड़े तुर्रम खान बन जाएंगे। हम सोचते हैं कि दस अलग अलग प्रोजेक्ट्स पर हाथ मारना या हर नई टेक्नोलॉजी के पीछे भागना ही असली सक्सेस का रास्ता है। लेकिन जो कैलोवे अपनी बुक में सीधे दिल पर चोट करते हुए कहते हैं कि भाई साहब रुकिए। आप असल में उन चीजों पर अपनी जान छिड़क रहे हैं जो शायद आपके कस्टमर या आपकी लाइफ के लिए कौड़ी के भाव भी नहीं हैं। क्या आपने कभी उस रेस्टोरेंट में खाना खाया है जहाँ का मेन्यू कार्ड किसी पुरानी डिक्शनरी जितना मोटा होता है। वहाँ आपको चाइनीज से लेकर इटालियन तक सब मिलता है लेकिन सच तो यह है कि उनका स्वाद इतना खराब होता है कि उसे खाकर आपको अपनी किस्मत पर रोना आ जाए। वह रेस्टोरेंट सब कुछ बेस्ट बनने की कोशिश में किसी भी चीज में अच्छा नहीं बन पाता। यही हाल हम इंसानों का भी है। हम चाहते हैं कि हम ऑफिस में बेस्ट कोडर भी हों बेस्ट प्रेजेंटर भी हों और साथ ही साथ ऑफिस की पॉलिटिक्स के भी किंग हों।

असलियत यह है कि इस दुनिया को आपके मल्टी टास्किंग वाले टैलेंट से कोई लेना देना नहीं है। लोग सिर्फ यह देखते हैं कि आपने उनके लिए सबसे जरूरी काम कितनी सफाई से किया है। मान लीजिए आप एक ग्राफिक डिजाइनर हैं। आप अपने क्लाइंट को हजार तरह के फैंसी फोंट्स और चमक धमक वाले कलर्स दिखा सकते हैं। लेकिन अगर आपका डिजाइन वह मैसेज ही नहीं दे पा रहा जो क्लाइंट को चाहिए तो आपकी मेहनत जीरो है। जो कैलोवे कहते हैं कि वह एक चीज ढूंढो जो आपके काम में सबसे ज्यादा मायने रखती है और फिर उसमें इतने माहिर बन जाओ कि लोग आपके नाम की कसमें खाएं। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे गली का वह मोची जिसके पास लोग शहर के दूसरे कोने से आते हैं क्योंकि उसे पता है कि जूते की सिलाई कैसे पक्की करनी है। वह रॉकेट साइंस नहीं बेच रहा वह सिर्फ अपनी कोर वैल्यू में बेस्ट है।

हम लोग अक्सर नई चीजों के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई छोटा बच्चा गुब्बारे के पीछे भागता है। हमें लगता है कि अगर हमने वह लेटेस्ट एआई टूल नहीं सीखा या वह नई मार्केटिंग ट्रिक नहीं आजमाई तो हम पिछड़ जाएंगे। इस डर को फोमो कहते हैं और यही आपकी बर्बादी की जड़ है। असली खिलाड़ी वह नहीं होता जो हर गेंद पर बल्ला घुमाता है बल्कि वह होता है जिसे पता है कि कौन सी गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजना है और किसे छोड़ देना है। जब आप हर चीज में हाथ डालते हैं तो आप अपनी एनर्जी को बिखेर देते हैं। आप एक इंच गहरा और दस मील चौड़ा गड्ढा खोद रहे हैं जिससे कभी पानी नहीं निकलेगा। अगर प्यास बुझानी है तो एक ही जगह पर फोकस करके गहरा कुआं खोदना होगा।

यही बात बिजनेस पर भी लागू होती है। बहुत सारी कंपनियां सोचती हैं कि अगर वह अपने ऑफिस में फ्री कॉफी और बीन बैग्स रख देंगी तो उनके एम्प्लॉई खुश रहेंगे और बिजनेस बढ़ जाएगा। लेकिन अगर उनकी बेसिक सर्विस ही घटिया है तो यह सब दिखावा किसी काम का नहीं है। क्या आप कभी ऐसे बैंक में जाना चाहेंगे जहाँ स्टाफ बहुत मुस्कुरा कर बात करता हो लेकिन आपके पैसे ट्रांसफर करने में चार दिन लगा दे। कभी नहीं। क्योंकि आपके लिए बैंक में सबसे ज्यादा जो चीज मायने रखती है वह है आपकी ट्रांजैक्शन की स्पीड और सिक्योरिटी। इसलिए यह पहचानना बहुत जरूरी है कि आपके काम में वह असली वैल्यू क्या है। एक बार वह मिल गई तो बाकी सब चीजों को कचरे के डिब्बे में डाल दीजिए। जो लोग फालतू की चीजों को छोड़ना नहीं जानते वह कभी भी महान नहीं बन सकते।


लेसन २ : कॉम्प्लेक्सिटी का भूत उतारो और सिंप्लिसिटी के बादशाह बनो

अक्सर लोगों को लगता है कि अगर कोई बात बहुत मुश्किल या पेचीदा है तो वह बहुत महान होगी। हम इंडियंस की तो आदत ही यही है कि जो चीज समझ न आए उसे हम बड़ा मान लेते हैं। अगर कोई बिजनेस कंसल्टेंट आकर भारी भरकम अंग्रेजी शब्द बोलने लगे और ग्राफ दिखा दे तो हमें लगता है कि भाई साहब यह तो कोई जादूगर है। लेकिन जो कैलोवे कहते हैं कि असली जीनियस वह नहीं है जो बात को उलझा दे बल्कि वह है जो उसे एकदम सिंपल बना दे। लाइफ में सक्सेस का मतलब यह नहीं है कि आप दुनिया का सबसे कॉम्प्लेक्स सिस्टम बना लें बल्कि मतलब यह है कि आप अपनी कोर सर्विस को इतना आसान रखें कि एक बच्चा भी उसे समझ सके।

सोचिए आप एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करते हैं। अगर उसमें लॉगिन करने के लिए ही आपको अपनी दस पुश्तों का नाम और आधार कार्ड नंबर देना पड़े तो क्या आप उसे इस्तेमाल करेंगे। बिलकुल् नहीं। आप उसे तुरंत अनइंस्टॉल करेंगे और उसे रेटिंग देंगे जीरो। दुनिया को आपकी स्मार्टनेस नहीं चाहिए उन्हें अपना काम आसान करवाना है। जो कैलोवे अपनी बुक में साफ कहते हैं कि हम लोग फालतू की स्ट्रैटेजी बनाने में हफ़्तों बर्बाद कर देते हैं लेकिन बेसिक चीजों को भूल जाते हैं। जैसे मान लीजिए आपकी एक चाय की दुकान है। आप वहाँ एसी लगा दें म्यूजिक बजा दें और वेटर को टाई पहना दें लेकिन अगर आपकी चाय का स्वाद ही पानी जैसा है तो क्या कोई दोबारा आएगा। आपकी सारी डेकोरेशन धरी की धरी रह जाएगी क्योंकि आपने उस बेसिक चीज को ही इग्नोर कर दिया जो सबसे ज्यादा जरूरी थी।

हम अपनी डेली लाइफ में भी यही गलती करते हैं। हम जिम जाने के लिए तीन दिन तक तो केवल बेस्ट जूते और डाइट प्लान ढूंढते रहते हैं। हमें लगता है कि जब तक हमारे पास वह फैंसी प्रोटीन शेकर नहीं होगा तब तक मसल्स नहीं बनेंगी। यह सिर्फ अपने दिमाग को बेवकूफ बनाने का तरीका है। सच तो यह है कि आपको बस जूते पहनकर घर से बाहर निकलना है और पसीना बहाना है। यही वह सिंपल चीज है जो असल में मैटर करती है। कॉम्प्लेक्सिटी सिर्फ एक बहाना है काम को टालने का। जब आप चीजों को मुश्किल बनाते हैं तो आप असल में डर रहे होते हैं कि कहीं आप फेल न हो जाएं। इसलिए आप खुद को फालतू के प्लान्स के पीछे छुपा लेते हैं।

बिजनेस हो या जॉब जो इंसान कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम का सिंपल सोल्यूशन देता है वही असली विनर है। गूगल को ही देख लीजिए। इंटरनेट पर करोड़ों वेबसाइट्स हैं लेकिन गूगल का होम पेज कैसा है। एकदम खाली। सिर्फ एक सर्च बॉक्स। उन्होंने दुनिया भर की जानकारी को एक डब्बे में समेट दिया। यही सिंप्लिसिटी की ताकत है। अगर आप अपने काम में उलझ रहे हैं तो समझ जाइए कि आप गलत रास्ते पर हैं। अपनी लाइफ से वह सारा कचरा साफ करिए जो आपको असली काम करने से रोक रहा है। याद रखिए जो चीज सिंपल नहीं है वह कभी भी लॉन्ग टर्म तक नहीं टिक सकती। जब आप सादगी में मास्टरी हासिल कर लेते हैं तब आप असल में उन चीजों में बेस्ट बनते हैं जो सबसे ज्यादा जरूरी हैं। और एक बार आप इस लेवल पर पहुँच गए तो आपके कॉम्पिटिटर्स आपके आस पास भी नहीं भटकेंगे क्योंकि वह अभी भी अपनी उलझी हुई फाइलों में ही दबे होंगे।


लेसन ३ : कंसिस्टेंसी का जादुई चश्मा पहनो और बोरियत से जीतना सीखो

हम में से ज्यादातर लोगों को लगता है कि सक्सेस किसी फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी होती है जहाँ अचानक से बिजली कड़केगी और रातों रात आप अमीर बन जाएंगे। हकीकत इससे बिलकुल उलट है। जो कैलोवे कहते हैं कि असली जीत उस बोरियत भरे काम को बार बार पूरी शिद्दत से करने में है जो दूसरे लोग दो दिन बाद ही छोड़ देते हैं। आप एक दिन जिम जाकर अपनी बॉडी नहीं बना सकते और एक दिन ऑफिस में एक्स्ट्रा काम करके प्रमोशन नहीं पा सकते। असली वैल्यू तब क्रिएट होती है जब आप हर रोज वही बेसिक काम दुनिया में सबसे अच्छे तरीके से करते हैं। क्या आपने कभी अपनी गली के उस समोसे वाले को देखा है जिसका स्वाद पिछले बीस सालों से एक जैसा है। लोग वहाँ इसलिए नहीं जाते कि वह हर रोज कुछ नया ट्राई करता है बल्कि इसलिए जाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वहाँ हमेशा वही बेस्ट क्वालिटी मिलेगी।

कस्टमर या आपके बॉस को आपसे कोई बड़ा चमत्कार नहीं चाहिए उन्हें सिर्फ आपसे भरोसा चाहिए। भरोसा इस बात का कि अगर उन्होंने आपको कोई काम दिया है तो वह समय पर और बेस्ट क्वालिटी के साथ होगा। हम अक्सर जोश में आकर पहले हफ्ते तो बहुत आग लगा देते हैं लेकिन दूसरे हफ्ते तक हमारा सारा मोटिवेशन ठंडा पड़ जाता है। हम नए आइडियाज ढूंढने लगते हैं क्योंकि पुराना काम बोरिंग लगने लगता है। लेकिन भाई साहब यह बोरियत ही वह दीवार है जो आम लोगों को खास लोगों से अलग करती है। जो इंसान उस बोरियत को झेल गया और अपनी परफॉरमेंस को गिरने नहीं दिया वही मार्केट का राजा बनता है। अगर आप आज बहुत अच्छा काम करते हैं और कल एकदम घटिया तो आपकी वैल्यू कौड़ी के बराबर भी नहीं रहेगी।

सोचिए अगर आपका इंटरनेट प्रोवाइडर हफ्ते में सिर्फ तीन दिन तेज स्पीड दे और बाकी दिन गायब रहे तो क्या आप उसे पैसे देंगे। चाहे वह आपको कितनी भी बड़ी बड़ी बातें सुना ले आप उसे छोड़कर किसी ऐसे बंदे के पास जाएंगे जो शायद उतनी स्पीड न दे लेकिन कनेक्शन कभी टूटने न दे। यही कंसिस्टेंसी की ताकत है। जो कैलोवे अपनी बुक में साफ कहते हैं कि दुनिया उन लोगों से भरी पड़ी है जो बहुत टैलेंटेड हैं लेकिन गायब हो जाते हैं। असली विनर वह कछुआ है जो अपनी रफ्तार जानता है और कभी रुकता नहीं है। आपको हर दिन दुनिया बदलने की जरूरत नहीं है बस अपनी उस एक कोर सर्विस को हर बार परफेक्टली डिलीवर करना है जो आपने अपने क्लाइंट या कंपनी से वादा किया है।

अंत में यही बात समझ लीजिए कि जो चीजें सच में मायने रखती हैं वह अक्सर बहुत सिंपल और थोड़ी बोरिंग होती हैं। उन पर टिके रहना ही सबसे बड़ी स्ट्रेटजी है। अपनी एनर्जी को हर रोज नई दिशा में बर्बाद करना बंद करिए और एक ही जगह पर इतनी बार चोट मारिए कि पत्थर भी टूट जाए। जब आप अपनी क्वालिटी के साथ समझौता करना बंद कर देते हैं और कंसिस्टेंसी को अपना धर्म बना लेते हैं तब आपको सक्सेस के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ती सक्सेस खुद आपके पास चलकर आती है। अब यह आपके ऊपर है कि आप उन हजार चीजों में उलझे रहना चाहते हैं जो सिर्फ दिखावा हैं या फिर उन चंद चीजों में बेस्ट बनना चाहते हैं जो आपकी लाइफ बदल सकती हैं।


दोस्तों, क्या आप अभी भी उन चीजों पर टाइम बर्बाद कर रहे हैं जो असल में कोई रिजल्ट नहीं देतीं। आज ही बैठिए और अपनी लाइफ की उन तीन सबसे जरूरी चीजों की लिस्ट बनाइए जिनमें आपको बेस्ट बनना है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करिए जो बहुत बिजी तो रहता है पर पहुँच कहीं नहीं रहा। कमेंट्स में बताइए कि आपके लिए वह एक चीज क्या है जो सबसे ज्यादा मैटर करती है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#SuccessTips #Productivity #JoeCalloway #BusinessStrategy #DIYBooks


_

Post a Comment

Previous Post Next Post