Billion-Dollar Brand Club (Hindi)


अगर आपको लगता है कि सिर्फ करोड़ों की फंडिंग और बड़े ऑफिस से ही बड़ा ब्रांड बनता है तो मुबारक हो। आप उन पुरानी कंपनियों की तरह डूबने की तैयारी कर रहे हैं जिन्हें स्टार्टअप्स ने कच्चे धागे की तरह तोड़ दिया। अपनी पुरानी घिसी पिटी सोच को पकड़कर बैठे रहिये और मार्केट को अपने हाथ से जाते हुए देखिये।

इस किताब की समरी आपको बताएगी कि कैसे कुछ लड़कों ने बिना किसी बड़े नाम के मार्केट के बड़े खिलाड़ियों की नींद उड़ा दी। चलिए जानते हैं उन ३ लेसन्स के बारे में जो आपके बिजनेस करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : मिडिलमैन का गला घोंटो और कस्टमर के दोस्त बनो

अगर आप आज भी यह सोच रहे हैं कि आपका प्रोडक्ट पहले होलसेलर के पास जाएगा फिर डिस्ट्रीब्यूटर उसे दुकान तक पहुँचाएगा और अंत में कोई थका हुआ सेल्समैन उसे बेचेगा तो सच मानिये आप बिजनेस नहीं म्यूजियम चलाने लायक हैं। पुराने जमाने में जिलेट जैसी बड़ी कंपनियों ने मार्केट पर कब्जा कर रखा था क्योंकि उनके पास रिटेल स्टोर्स की शेल्फ पर जगह थी। वो आपसे एक छोटे से रेजर के लिए इतने पैसे वसूलते थे जैसे वो चांदी का बना हो। डॉलर शेव क्लब ने इसी सिस्टम की कमजोरी को पकड़ा। उन्होंने सोचा कि क्यों न सीधे इंटरनेट के जरिए कस्टमर के घर तक माल पहुँचाया जाए। जब आप बीच के इन बिचौलियों यानी मिडिलमैन को हटा देते हैं तो आपके पास दो ही रास्ते बचते हैं। या तो आप बहुत सारा मुनाफा कमाएं या फिर अपने कस्टमर को इतनी सस्ती और अच्छी सर्विस दें कि वो आपका दीवाना हो जाए।

आज के दौर में जो स्टार्टअप सीधे अपने कस्टमर से बात नहीं कर रहा है वो दरअसल एक अंधी गली में गाड़ी चला रहा है। मान लीजिये आप एक चश्मा खरीदने जाते हैं। शोरूम वाला आपको ऐसे देखता है जैसे आप उसकी किडनी मांगने आए हों। ऊपर से पांच हजार का चश्मा आपको पंद्रह हजार में चिपका देता है क्योंकि उसे दुकान का किराया और सेल्समैन की सैलरी भी आपसे ही निकालनी है। वारबी पार्कर ने इसी सड़े हुए सिस्टम को लात मारी। उन्होंने सीधे फैक्ट्री से चश्मा बनवाया और ऑनलाइन बेचना शुरू किया। उन्होंने कस्टमर को पांच फ्रेम घर पर ट्राय करने के लिए भेजे। अब आप खुद सोचिये कि कौन सा कस्टमर उस घमंडी दुकानदार के पास जाएगा जब उसे घर बैठे किंग वाली फीलिंग मिल रही हो।

मिडिलमैन को हटाना सिर्फ पैसे बचाने का जरिया नहीं है बल्कि यह डेटा इकट्ठा करने का सबसे बड़ा हथियार है। जब आप सीधे बेचते हैं तो आपको पता होता है कि राहुल को कौन सा कलर पसंद है और प्रिया को किस साइज का फ्रेम चाहिए। बड़ी कंपनियां इस मामले में बिल्कुल पैदल हैं। उन्हें सिर्फ यह पता होता है कि उनका ट्रक लोड होकर कहाँ गया। कस्टमर के दिल में क्या चल रहा है यह जानने के लिए उनके पास कोई जरिया नहीं होता। अगर आप अपने ब्रांड को अगले लेवल पर ले जाना चाहते हैं तो कस्टमर और अपने बीच की हर दीवार को गिरा दीजिये। जितना कम फासला होगा उतना ज्यादा भरोसा बढ़ेगा। और याद रखिये बिजनेस भरोसे पर चलता है विज्ञापन के शोर पर नहीं।


लेसन २ : कस्टमर के उस दर्द को पकड़ो जिसे सब नजरअंदाज कर रहे हैं

ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते वक्त सोचते हैं कि उन्हें कोई रॉकेट बनाना है या मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसानी है। पर सच तो यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां सिर्फ इसलिए सफल हुईं क्योंकि उन्होंने एक बहुत ही मामूली और इरिटेटिंग प्रॉब्लम को सॉल्व किया। आप खुद को ही देख लीजिये। आप एक महंगे ब्रांड का रेजर खरीदते हैं और उसे तब तक घिसते हैं जब तक वह आपकी खाल न निकाल ले। क्यों। क्योंकि नया ब्लेड खरीदना इतना महंगा है कि उसे सोचकर ही पसीने आ जाते हैं। डॉलर शेव क्लब के फाउंडर माइकल डबिन ने इसी छोटे से लेकिन गहरे दर्द को समझा। उन्होंने देखा कि लोग रेजर के लिए बीस डॉलर देने से नफरत करते हैं। उन्होंने एक डॉलर में रेजर देने का वादा किया और रातों रात करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बना ली।

अक्सर बड़े ब्रांड्स को लगता है कि कस्टमर बेवकूफ है और वह सिर्फ उनके नाम के पैसे देगा। यही उनकी सबसे बड़ी गलती होती है। वो अपनी पुरानी ग्लोरी में इतने खोए रहते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब कोई नया खिलाड़ी आकर उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसका गया। मान लीजिये आप चश्मा पहनते हैं। पुराने जमाने में चश्मा खरीदना एक सजा जैसा था। आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ता था फिर दुकान पर जाकर महंगे फ्रेम चुनने पड़ते थे। अगर चश्मा टूट गया तो फिर वही लंबी और महंगी प्रोसेस। वारबी पार्कर ने देखा कि लोग चश्मे की कीमत से परेशान हैं। उन्होंने चश्मे को एक हेल्थ प्रोडक्ट की जगह एक फैशन एक्सेसरी बना दिया और उसे सस्ता भी कर दिया।

अगर आप अपना ब्रांड बनाना चाहते हैं तो बस यह देखिये कि आपके आसपास लोग किस बात पर चिढ़ रहे हैं। क्या किसी सर्विस का बिल बहुत ज्यादा है। क्या किसी प्रोडक्ट को खरीदना बहुत मुश्किल है। अगर आप उस चिढ़ को खत्म कर सकते हैं तो लोग आपको सर आंखों पर बिठाएंगे। लेकिन ध्यान रहे सिर्फ सस्ता होना काफी नहीं है। आपको उस सस्तेपन को एक कूल अंदाज में बेचना होगा। डॉलर शेव क्लब ने कोई इमोशनल विज्ञापन नहीं बनाया। उन्होंने एक मजाकिया वीडियो बनाया जिसमें बताया गया कि उनके ब्लेड शानदार हैं। उन्होंने कस्टमर को यह महसूस कराया कि वे एक क्लब का हिस्सा हैं न कि सिर्फ एक खरीदार।

जब आप किसी की छोटी सी समस्या को हल करते हैं तो आप उनके लिए सिर्फ एक दुकानदार नहीं रह जाते। आप उनके साथी बन जाते हैं। बड़ी कंपनियां अपनी ईगो में इतनी बड़ी हो चुकी हैं कि उन्हें छोटे घाव नजर ही नहीं आते। आपको बस उन्हीं छोटे घावों पर मरहम लगाना है। याद रखिये बड़ी लड़ाइयां तलवारों से नहीं बल्कि सही समय पर सही नस पकड़ने से जीती जाती हैं। अगर आपका प्रोडक्ट किसी की लाइफ को एक परसेंट भी आसान बना रहा है तो आप बिलीयन डॉलर की रेस में शामिल हो चुके हैं। बस अपनी आंखें और कान खुले रखिये क्योंकि मौके अक्सर शिकायतों के रूप में आपके सामने खड़े होते हैं।


लेसन ३ : डेटा के साथ दोस्ती करो और पर्सनल रिश्ता बनाओ

अगर आपको लगता है कि कस्टमर को सामान बेचकर आपका काम खत्म हो गया है तो आप अभी भी 1990 वाले बिजनेस मॉडल में जी रहे हैं। पुराने जमाने के बड़े ब्रांड्स की सबसे बड़ी कमजोरी यही थी कि उन्हें पता ही नहीं था कि उनका सामान असल में खरीद कौन रहा है। वो बस टीवी पर विज्ञापन चलाते थे और उम्मीद करते थे कि कोई दुकान पर जाकर उनका डिब्बा उठा लेगा। लेकिन आज के बिलीयन डॉलर ब्रांड्स ऐसे काम नहीं करते। वो डेटा को अपनी जासूसी के लिए नहीं बल्कि अपने कस्टमर को बेहतर समझने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जब आप सीधे कस्टमर को ऑनलाइन बेचते हैं तो आपको पता होता है कि वो कब वेबसाइट पर आया उसने क्या देखा और उसने क्या छोड़ दिया। यह कोई जादू नहीं है यह वो डेटा है जो आपको बड़ी कंपनियों से दस कदम आगे रखता है।

सोचिये आप एक ऐसी दुकान पर जाते हैं जहाँ दुकानदार को आपका नाम पता है उसे पता है कि आपको पिछले महीने क्या पसंद आया था और वो आपको वही दिखाता है जिसकी आपको जरूरत है। क्या आप कहीं और जाना चाहेंगे। बिल्कुल नहीं। यही वो पर्सनल टच है जो छोटे स्टार्टअप्स को बड़ा बनाता है। डॉलर शेव क्लब या वारबी पार्कर जैसे ब्रांड्स अपने हर कस्टमर के साथ एक रिश्ता बनाते हैं। वो आपको सिर्फ एक नंबर की तरह नहीं देखते। वो जानते हैं कि अगर आप हर महीने ब्लेड मंगवा रहे हैं तो आपको कब नए शेविंग क्रीम की जरूरत पड़ सकती है। डेटा का इस्तेमाल करके वो आपको वही ऑफर देते हैं जो आपके काम का हो न कि वो जो उन्हें बेचना हो।

ज्यादातर पुराने ब्रांड्स आज भी अंधेरे में तीर चला रहे हैं। वो करोड़ों रुपये उन विज्ञापनों पर फूँक देते हैं जिन्हें आधे लोग देखते भी नहीं। दूसरी तरफ ये नए जमाने के डिजिटल ब्रांड्स सिर्फ उन्हीं लोगों को टारगेट करते हैं जो वाकई उनका प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं। इसे कहते हैं दिमाग से बिजनेस करना। अगर आप अपने कस्टमर की पसंद और नापसंद का डेटा नहीं रख रहे हैं तो आप अपनी तिजोरी की चाबी किसी और को दे रहे हैं। डेटा आपको यह बताता है कि आपका अगला कदम क्या होना चाहिए। क्या आपको नया कलर लॉन्च करना चाहिए या अपनी डिलीवरी स्पीड बढ़ानी चाहिए। बिना डेटा के बिजनेस करना बिल्कुल वैसा ही है जैसे बिना मैप के जंगल में रास्ता खोजना।

अंत में, यह सब कुछ सिर्फ एक चीज पर आकर टिकता है और वो है भरोसा। जब आप डेटा का सही इस्तेमाल करके कस्टमर की लाइफ आसान बनाते हैं तो उनका आप पर भरोसा बढ़ता है। वो जानते हैं कि आप उन्हें समझते हैं। और जिस दिन कस्टमर को यह महसूस हो गया कि आप उनके दोस्त हैं उस दिन कोई भी बड़ी कंपनी अपनी करोड़ों की मार्केटिंग के बावजूद उन्हें आपसे छीन नहीं पाएगी। तो अपनी फाइल्स और एक्सेल शीट्स को गौर से देखिये क्योंकि उनमें सिर्फ नंबर्स नहीं बल्कि आपके ब्रांड का भविष्य छुपा है। जो ब्रांड डेटा को अपनी ताकत बना लेता है उसे दुनिया की कोई भी ताकत बढ़ने से नहीं रोक सकती।


अब समय आ गया है कि आप अपनी कुर्सी से उठें और सोचना शुरू करें। क्या आप अब भी उन्हीं पुराने घिसे पिटे रास्तों पर चलना चाहते हैं या फिर आप भी अपना एक बिलीयन डॉलर ब्रांड खड़ा करने की हिम्मत रखते हैं। याद रखिये मार्केट किसी का सगा नहीं होता वह सिर्फ उसे इनाम देता है जो कस्टमर के दर्द को समझता है और सीधे उससे जुड़ता है। अगर आपके पास भी कोई ऐसा आइडिया है जो किसी की लाइफ आसान बना सकता है तो देर मत कीजिये। आज ही अपना पहला कदम उठाइये क्योंकि कल कभी नहीं आता और मार्केट इंतज़ार नहीं करता। इस आर्टिकल को उनके साथ शेयर कीजिये जो बिजनेस की दुनिया में कुछ बड़ा करना चाहते हैं।

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