Don't Be a Stranger (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो कोने में खड़े होकर समोसे खाते हैं और सोचते हैं कि लक खुद चलकर आएगा। मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का रास्ता खुद बना रहे हैं। बिना नेटवर्किंग के आप सिर्फ एक औसत लाइफ जी रहे हैं और करोड़ों की डील्स आपके हाथ से फिसल रही हैं।

अगर आप स्ट्रेंजर बने रहे तो बिजनेस में कभी अपनी जगह नहीं बना पाएंगे। लॉरेंस पर्किन्स की यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे सही लोगों से जुड़कर आप खुद अपना लक बना सकते हैं। चलिए जानते हैं वो 3 पावरफुल लेसन जो आपकी ग्रोथ बदल देंगे।


लेसन १ : लक कोई जादू नहीं बल्कि एक सोची समझी स्ट्रेटेजी है

अक्सर हम उन लोगों को देखकर जलते हैं जिनकी किस्मत रातों रात चमक जाती है। हमें लगता है कि ऊपर वाले ने उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबानी कर दी है। लेकिन असलियत में जिसे आप लक कहते हैं वो लॉरेंस पर्किन्स के हिसाब से सिर्फ एक कैलकुलेटेड गेम है। मान लीजिए आप एक पार्टी में गए और वहां चुपचाप एक कोने में खड़े होकर कोल्ड ड्रिंक पी रहे हैं। दूसरी तरफ आपका वो दोस्त है जो हर किसी से हाथ मिला रहा है और बातें कर रहा है। अब अगर उसे वहां कोई बड़ा इन्वेस्टर मिल जाए तो आप उसे लकी कहेंगे। सच तो ये है कि उसने खुद को उस पोजीशन में रखा जहां लक उसे मिल सके। आपने तो अपनी कोल्ड ड्रिंक के साथ ही वफादारी निभाई। बिजनेस की दुनिया में लक असल में प्रिपरेशन और अपॉर्चुनिटी का मिलन होता है। अगर आप घर में दुबक कर बैठे रहेंगे तो लक आपके दरवाजे की घंटी नहीं बजाएगा।

लॉरेंस कहते हैं कि आपको खुद को ऐसे हालात में डालना होगा जहां लोगों से मिलना मजबूरी बन जाए। अगर आप किसी अनजान इंसान से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपनी किस्मत का गला खुद घोंट रहे हैं। क्या आपको लगता है कि बड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स सिर्फ ईमेल भेजकर मिल जाते हैं। बिल्कुल नहीं। वो मिलते हैं उन लंच मीटिंग्स से जहाँ आपने शायद सिर्फ मौसम की बात शुरू की थी। लोग अक्सर सोचते हैं कि वो बहुत टैलेंटेड हैं इसलिए काम उनके पास खुद आएगा। यह वैसी ही बात है जैसे कोई बहुत सुंदर लड़की घर में छुपकर बैठे और सोचे कि राजकुमार खुद उसे ढूंढ लेगा। भाई यह डिज्नी की फिल्म नहीं है। यहाँ अगर आप दिखेंगे नहीं तो आप बिकेंगे नहीं।

असली लक तब बनता है जब आप अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर किसी स्ट्रेंजर को नमस्ते बोलते हैं। वह स्ट्रेंजर आपकी लाइफ का सबसे बड़ा क्लाइंट हो सकता है या शायद वो आपको किसी ऐसे इंसान से मिलवा दे जो आपकी तकदीर बदल दे। लेकिन अगर आपने उसे स्ट्रेंजर ही रहने दिया तो वह मौका हमेशा के लिए खत्म हो गया। हम अक्सर डरते हैं कि सामने वाला क्या सोचेगा। यकीन मानिए वह भी शायद यही सोचकर डरा हुआ है। अगर आप पहल करते हैं तो आप गेम के लीडर बन जाते हैं। अपनी किस्मत का रोना रोने से बेहतर है कि आप अपनी नेटवर्किंग की स्किल पर काम करें। लक कोई लॉटरी नहीं है जिसे कोई भी जीत ले। यह एक फसल है जिसे आपको सही लोगों के साथ मिलकर बोना पड़ता है। जितना ज्यादा आप लोगों से मिलेंगे आपके लकी होने के चांस उतने ही बढ़ते जाएंगे। तो अगली बार जब कोई आपसे कहे कि यार तेरी किस्मत बहुत अच्छी है तो मुस्कुराकर कहिएगा कि मैंने इस किस्मत को बनाने के लिए बहुत सारे अजनबियों से हाथ मिलाया है।


लेसन २ : स्ट्रेंजर बनने की आदत छोड़िए और मौकों को पकड़िए

अक्सर हम अपने ही बनाए हुए एक छोटे से पिंजरे में कैद रहते हैं। हम सोचते हैं कि जो लोग हमें जानते हैं वही हमारी दुनिया है। लेकिन लॉरेंस पर्किन्स कहते हैं कि आपकी असली ग्रोथ उन लोगों के पास छिपी है जिन्हें आप अभी तक नहीं जानते। इसे ऐसे समझिए कि आप एक पुराने रेस्टोरेंट में बार बार जा रहे हैं क्योंकि वहां का मेन्यू आपको रटा हुआ है। लेकिन क्या पता बगल वाली गली के नए कैफे में उससे बेहतर स्वाद मिल जाए। अजनबियों से बात न करना असल में अपनी ग्रोथ पर ब्रेक लगाने जैसा है। लोग अक्सर कहते हैं कि मुझे अनजान लोगों से बात करने में शर्म आती है। सच तो यह है कि यह शर्म नहीं बल्कि आपका ईगो है जो आपको नया सीखने से रोक रहा है।

बिजनेस में हर बड़ा प्रोजेक्ट किसी न किसी अनजानी बातचीत से शुरू होता है। अगर आप एयरपोर्ट पर बैठे हैं और बगल वाले इंसान से बात नहीं कर रहे हैं तो शायद आपने अपनी लाइफ का सबसे बड़ा पार्टनर खो दिया है। हो सकता है वह इंसान उसी समस्या का हल जानता हो जिसे आप हफ्तों से ऑफिस में सर पटक कर सुलझा रहे हैं। लेकिन आप तो अपने फोन में रील देखने में बिजी थे। यह रील देखना आपको एंटरटेनमेंट तो दे सकता है लेकिन बिजनेस डील नहीं दिलाएगा। आपको यह समझना होगा कि हर इंसान एक चलता फिरता एनसाइक्लोपीडिया है। जब आप किसी स्ट्रेंजर से जुड़ते हैं तो आप सिर्फ एक इंसान से नहीं जुड़ते बल्कि उसके पूरे नेटवर्क से जुड़ जाते हैं।

मान लीजिए आपको किसी बड़ी कंपनी के CEO से मिलना है। अब आप डायरेक्ट तो उसे फोन नहीं करेंगे। लेकिन अगर आप किसी सोशल इवेंट में एक अनजान मैनेजर से दोस्ती कर लेते हैं तो वह आपको वहां तक पहुंचा सकता है। इसे ही स्ट्रेटेजिक नेटवर्किंग कहते हैं। लेकिन हम तो अपनी ही दुनिया में मगन रहते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हमने पहल की तो लोग हमें छोटा समझेंगे। भाई आप पहले से ही उनके लिए कोई नहीं हैं तो छोटा होने का डर कैसा। कम से कम बात करके आप किसी की नजर में तो आएंगे।

लॉरेंस सलाह देते हैं कि आपको अपनी झिझक को कूड़ेदान में डाल देना चाहिए। जब आप किसी अनजान से मिलते हैं तो अपनी कहानी सुनाने के बजाय उनकी सुनने की कोशिश करें। लोग अपने बारे में बात करना पसंद करते हैं। अगर आप एक अच्छे श्रोता बन गए तो आप आधे से ज्यादा जंग जीत चुके हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी को अपनी सेल्फी दिखाएं और वो आपकी तारीफ करे तो आपको कितना अच्छा लगता है। बस यही तरीका दूसरों पर भी आजमाइए। उनके काम और उनकी दिक्कतों के बारे में पूछिए। जब आप लोगों में दिलचस्पी लेते हैं तो लोग आपमें दिलचस्पी लेने लगते हैं। स्ट्रेंजर बनकर रहने में कोई समझदारी नहीं है क्योंकि दुनिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और अकेले दौड़कर आप कभी रेस नहीं जीत पाएंगे।


लेसन ३ : रिश्तों में वैल्यू भरिए वरना आप सिर्फ एक मतलब के साथी रह जाएंगे

नेटवर्किंग का मतलब यह नहीं है कि आप बस लोगों के विजिटिंग कार्ड इकट्ठा करें और दिवाली पर उन्हें फॉरवर्डेड मैसेज भेजें। लॉरेंस पर्किन्स यहाँ एक बहुत कड़वी सच्चाई बताते हैं। अगर आप किसी से सिर्फ इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि आपको उससे कुछ चाहिए तो यकीन मानिए उसे आपकी नीयत साफ दिख रही है। यह वैसी ही बात है जैसे कोई दूर का रिश्तेदार अचानक आपको फोन करे तो आप समझ जाते हैं कि पक्का इसे उधार चाहिए या शादी का कार्ड देना है। बिजनेस में भी लोग ऐसे स्वार्थी लोगों को तुरंत पहचान लेते हैं। असली नेटवर्किंग का राज है गिविंग (Giving) यानी पहले आप दूसरों के लिए क्या कर सकते हैं।

सोचिए अगर आप किसी ऐसे इंसान की मदद कर दें जिसे आपकी जरूरत थी और आपने बदले में कुछ नहीं मांगा। वह इंसान ताउम्र आपका एहसानमंद रहेगा। जब उसे कभी मौका मिलेगा तो वह सबसे पहले आपका नाम रिकमेंड करेगा। इसे ही कहते हैं बैंक में गुडविल जमा करना। अगर आपके पास लोगों की दुआएं और मदद का बैलेंस है तो आपका बिजनेस कभी दिवालिया नहीं हो सकता। अक्सर लोग सोचते हैं कि मेरे पास देने के लिए है ही क्या। भाई जरूरी नहीं कि आप सबको पैसे ही बांटें। आप किसी को एक अच्छी सलाह दे सकते हैं या किसी सही इंसान से मिलवा सकते हैं या बस उनके काम की सराहना कर सकते हैं।

बिजनेस में रिश्ते बनाना एक खेती की तरह है। आज आपने बीज बोया है तो कल फल की उम्मीद मत रखिए। इसमें वक्त लगता है और भरोसे का पानी डालना पड़ता है। अगर आप आज किसी से मिले और कल ही उससे काम मांगने पहुंच गए तो आप अपनी इमेज एक सेल्समैन वाली बना लेंगे न कि एक पार्टनर वाली। लॉरेंस कहते हैं कि आपको लोगों की लाइफ में वैल्यू ऐड करनी चाहिए। जब आप दूसरों की कामयाबी में खुशी ढूंढने लगते हैं तो आपकी कामयाबी खुद ब खुद रास्ता ढूंढ लेती है। यह दुनिया बहुत गोल है। आज आप किसी छोटे एम्प्लॉई की मदद करेंगे तो कल शायद वही किसी बड़ी कंपनी का डिसीजन मेकर बन जाए। तब आपका वह छोटा सा किया हुआ काम एक बहुत बड़ी डील बनकर वापस आएगा।

कुछ लोग नेटवर्किंग के नाम पर बस अपना सीवी (CV) चिपकाते फिरते हैं। उन्हें लगता है कि वो बहुत स्मार्ट हैं लेकिन असल में वो सबको इरिटेट कर रहे होते हैं। रिश्तों को ट्रांजेक्शनल मत बनाइए। उन्हें इमोशनल और जेन्युइन बनाइए। जब आप बिना किसी स्वार्थ के लोगों से जुड़ते हैं तो जो बॉन्ड बनता है उसे कोई भी कॉम्पिटिटर नहीं तोड़ सकता। याद रखिए कि लोग कंपनी के साथ बिजनेस नहीं करते बल्कि उन लोगों के साथ करते हैं जिन पर वो भरोसा करते हैं। और भरोसा तब बनता है जब आप स्ट्रेंजर की दीवार गिराकर एक सच्चे दोस्त की तरह हाथ बढ़ाते हैं।


तो दोस्तों, यह थे लॉरेंस पर्किन्स की बुक से वो 3 कीमती लेसन जो आपके बिजनेस और लाइफ को पूरी तरह बदल सकते हैं। किस्मत के भरोसे बैठना छोड़िए और खुद अपनी किस्मत बनाइए। अजनबियों से बात करना शुरू कीजिए क्योंकि हर अनजान चेहरा आपके लिए एक नया अवसर लेकर आ सकता है।

आज ही किसी ऐसे इंसान को मैसेज करें या कॉल करें जिससे आपने लंबे समय से बात नहीं की है या जिसे आप जानना चाहते थे। बिना किसी मतलब के सिर्फ हालचाल पूछिए। देखिए कैसे आपके रिश्तों की दुनिया बदलती है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बहुत शर्मीला है और कमेंट में बताएं कि आपका नेटवर्किंग का सबसे अच्छा अनुभव क्या रहा है।

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