क्या आप अभी भी उसी घिसे पिटे मार्केट में सिर फोड़ रहे हैं जहां प्रॉफिट के नाम पर सिर्फ चवन्नी बचती है। सच तो यह है कि आपकी मेहनत बेकार जा रही है क्योंकि आप रेड ओशन के भूखे शार्क के बीच फंस गए हैं। मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का जश्न मना सकते हैं।
आज हम डब्लू चान किम की किताब ब्लू ओशन शिफ्ट के बारे में बात करेंगे। यह बुक समरी आपको सिखाएगी कि कैसे आप कम्पटीशन की भीड़ से निकलकर एक नया मार्केट बना सकते हैं। चलिए इस जर्नी के तीन सबसे पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : रेड ओशन की खूनी लड़ाई छोड़कर नीले समंदर की तलाश करें
ज़रा सोचिए आप एक मछली हैं और आप एक ऐसे छोटे से तालाब में तैर रहे हैं जहां हज़ारों दूसरी भूखी मछलियां भी मौजूद हैं। वहां खाने के लिए सिर्फ एक छोटा सा टुकड़ा गिरा है। अब आप सब उस एक टुकड़े के लिए एक दूसरे का गला काट रहे हैं। वहां पानी धीरे धीरे लाल होता जा रहा है क्योंकि हर कोई एक दूसरे को चोट पहुंचा रहा है। इसे कहते हैं रेड ओशन। हमारे आस पास का बिज़नेस वर्ल्ड कुछ ऐसा ही है। हर कोई वही बेच रहा है जो दूसरा बेच रहा है। हर कोई डिस्काउंट की रेस में लगा है। अगर पड़ोसी ने समोसा दस रुपये में बेचा तो आप उसे आठ रुपये में बेचने लगते हैं। फायदा किसी का नहीं हो रहा पर ईगो की लड़ाई फुल स्पीड पर है। यह रास्ता आपको सिर्फ थकान और कंगाली की तरफ ले जाता है।
ब्लू ओशन शिफ्ट हमें सिखाता है कि इस पागलपन का हिस्सा बनने की ज़रूरत ही नहीं है। क्यों न एक ऐसे बड़े और गहरे नीले समंदर में चला जाए जहां दूर दूर तक कोई कम्पटीशन ही न हो। वहां पानी एकदम साफ है और पूरा खाना सिर्फ आपका है। इसे कहते हैं मार्केट क्रिएशन। लोग अक्सर यह गलती करते हैं कि वह कम्पटीशन को हराने की कोशिश करते हैं। पर असली जीनियस वह है जो कम्पटीशन को अप्रासंगिक यानी इरेलेवेंट बना देता है। जब आप कुछ ऐसा करते हैं जो कोई और नहीं कर रहा तो फिर तुलना किससे होगी।
मान लीजिए आप एक ऐसी जिम खोलते हैं जहां सिर्फ उन लोगों को एंट्री मिलती है जो बहुत आलसी हैं और जिन्हें वर्कआउट से नफरत है। वहां आप भारी वजन उठाने के बजाय मज़ेदार गेम खिलाकर वजन कम करवाते हैं। अब शहर की बाकी जिम जो अपनी बॉडी बिल्डर वाली इमेज के लिए लड़ रही हैं वह आपका मुकाबला कैसे करेंगी। आपने अपना एक अलग ही मार्केट बना लिया है। अब लोग आपको पैसे भी ज्यादा देंगे क्योंकि उन्हें आपके जैसा एक्सपीरियंस कहीं और नहीं मिलेगा।
ज़्यादातर लोग डरते हैं कि अगर वह कुछ नया करेंगे तो फेल हो जाएंगे। पर सच तो यह है कि जो सब कर रहे हैं वही करते रहने में फेल होने की गारंटी सौ परसेंट है। रेड ओशन में आप सिर्फ सर्वाइवल की लड़ाई लड़ते हैं जबकि ब्लू ओशन में आप अपनी मर्जी के किंग होते हैं। यहाँ सारा खेल अपनी सोच को बदलने का है। आपको यह नहीं देखना कि दूसरे क्या कर रहे हैं बल्कि यह देखना है कि कस्टमर की वह कौन सी बड़ी मुश्किल है जिसे दुनिया इग्नोर कर रही है। जब आप उस मुश्किल का हल निकालते हैं तो आप खुद ही एक नीले समंदर के मालिक बन जाते हैं।
यह लेसन हमें याद दिलाता है कि लड़ाई में जीतने से बेहतर है कि लड़ाई ही न लड़नी पड़े। अगर आप अपनी एनर्जी और पैसा दूसरों को नीचा दिखाने में लगा रहे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी ग्रोथ का गला घोंट रहे हैं। शिफ्ट का मतलब ही यही है कि आप उस भीड़ से अपना हाथ छुड़ाएं और शांति से अपनी एक नई दुनिया बसाएं। यह सुनने में रिस्की लग सकता है पर असल में एक भीड़ का हिस्सा बने रहना सबसे बड़ा रिस्क है। जब आप इस पहले लेसन को समझ लेते हैं तो आप उस डर से आज़ाद हो जाते हैं जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा था।
लेसन २ : ह्यूमननेस यानी लोगों के कॉन्फिडेंस को जगाना
ज़्यादातर कंपनियाँ जब कुछ नया करने की सोचती हैं तो वह सिर्फ डेटा और एक्सेल शीट्स में खो जाती हैं। उन्हें लगता है कि अगर नंबर्स सही हैं तो काम हो जाएगा। पर वह एक बात भूल जाते हैं कि काम मशीनों को नहीं बल्कि इंसानों को करना है। ब्लू ओशन शिफ्ट का दूसरा लेसन हमें सिखाता है ह्यूमननेस यानी इंसानियत के बारे में। अगर आपके एम्प्लॉई या आपकी टीम डरी हुई है तो वह कभी भी आपको नीले समंदर तक नहीं ले जा पाएगी। डर एक ऐसी चीज़ है जो क्रिएटिविटी का गला घोंट देती है।
मान लीजिए आपको एक पहाड़ चढ़ना है। आपका बॉस नीचे खड़ा होकर चिल्ला रहा है कि अगर गिरे तो नौकरी से निकाल दूंगा। अब आपका पूरा ध्यान पहाड़ चढ़ने पर नहीं बल्कि न गिरने पर होगा। आप रिस्क लेने से डरेंगे और छोटे कदम उठाएंगे। यही होता है जब किसी बिज़नेस में ह्यूमैनिटी की कमी होती है। लोग बदलाव से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी पुरानी स्किल्स बेकार हो जाएंगी या उनकी अहमियत खत्म हो जाएगी। लेखक कहते हैं कि आपको लोगों के मन से यह डर निकाल कर उनमें कॉन्फिडेंस भरना होगा।
सोचिए, आपकी मम्मी ने पहली बार स्मार्टफोन हाथ में लिया। अगर आप उन्हें डांटकर सिखाएंगे तो वह डर के मारे फोन ही रख देंगी। पर अगर आप उन्हें छोटे छोटे टास्क देंगे जैसे कि फोटो खींचना या व्हाट्सएप पर मैसेज भेजना और हर बार उनकी तारीफ करेंगे तो वह खुद ही उसमें एक्सपर्ट बन जाएंगी। यही तरीका ऑफिस और बिज़नेस में भी काम करता है। आपको बड़े टारगेट को छोटे छोटे हिस्सों में बांटना होगा ताकि लोग उसे आसानी से कर सकें और उन्हें जीत का एहसास हो। इसे बुक में एटॉमिक स्टेप्स कहा गया है।
ह्यूमननेस का मतलब यह भी है कि आप लोगों को उस प्रोसेस का हिस्सा बनाएं। अगर आप ऊपर से कोई आर्डर थोप देंगे तो लोग उसे सिर्फ एक बोझ मानेंगे। पर अगर आप उनसे पूछेंगे कि हमारी इस खूनी लड़ाई को खत्म करने के लिए आपके पास क्या आईडिया है तो वह अपनी पूरी जान लगा देंगे। लोगों को तब सबसे ज्यादा खुशी होती है जब उन्हें लगता है कि उनकी बात सुनी जा रही है। एक सफल ब्लू ओशन शिफ्ट वही है जहाँ टीम का हर मेम्बर यह कहे कि यह हमारा आईडिया है न कि सिर्फ मैनेजमेंट का।
बिज़नेस में अक्सर लोग रोबोट बनने की कोशिश करते हैं पर सच तो यह है कि इमोशन्स ही वह फ्यूल है जो किसी भी बड़े विजन को सच बनाता है। अगर आप अपनी टीम को यह भरोसा दिला सकें कि यह बदलाव उनके फायदे के लिए है और आप हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं तो वह नामुमकिन को भी मुमकिन कर देंगे। व्यंग्य की बात तो यह है कि हम आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के ज़माने में जी रहे हैं पर आज भी सबसे बड़ी कमी असली इंटेलिजेंस और इमोशनल सपोर्ट की ही है। जब आप लोगों को इम्पॉवर करते हैं तो आप सिर्फ एक बिज़नेस नहीं बदल रहे होते बल्कि आप एक कल्चर खड़ा कर रहे होते हैं जो किसी भी कॉम्पिटिटर के लिए कॉपी करना नामुमकिन है।
लेसन ३ : मार्केट की सीमाओं को तोड़कर नई दुनिया बनाना
ज़्यादातर बिज़नेस मालिक अपनी पूरी लाइफ एक ही दायरे में गुजार देते हैं। वह सिर्फ अपने डायरेक्ट कॉम्पिटिटर को देखते रहते हैं। अगर आप कार बेच रहे हैं तो आप सिर्फ दूसरी कार कंपनियों को देखेंगे। अगर आप ट्यूशन पढ़ा रहे हैं तो आप सिर्फ बगल वाली गली के टीचर को देखेंगे। लेकिन ब्लू ओशन शिफ्ट का तीसरा लेसन कहता है कि अपनी गर्दन घुमाइए और उन बाउंड्रीज़ को तोड़िए जो आपने खुद अपने दिमाग में बनाई हैं। असली खजाना उन लोगों के पास है जो अभी आपके कस्टमर नहीं हैं यानी नॉन कस्टमर्स।
आम तौर पर कंपनियां अपने मौजूदा कस्टमर्स को खुश करने के लिए लड़ती रहती हैं। वह उन्हें और डिस्काउंट देती हैं या थोड़े और फीचर्स जोड़ देती हैं। पर ब्लू ओशन शिफ्ट कहता है कि उन लोगों पर ध्यान दो जिन्होंने आज तक आपका प्रोडक्ट खरीदा ही नहीं और यह पूछो कि वह आपसे दूर क्यों भाग रहे हैं। अक्सर जवाब बहुत सिंपल होता है पर हम उसे देख नहीं पाते क्योंकि हम अपनी ही ईगो के बुलबुले में कैद होते हैं। आपको अपनी इंडस्ट्री के बने बनाए नियमों को चुनौती देनी होगी।
मान लीजिए आप एक बहुत बड़ा और महंगा फाइव स्टार होटल चलाते हैं। वहां मखमली कालीन है और हर कमरे में झूमर लगा है। लेकिन एक आम आदमी वहां आने से कतराता है क्योंकि उसे लगता है कि वहां की फॉर्मेलिटी बहुत ज्यादा है और उसे उन फालतू की सुख सुविधाओं के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं जिनकी उसे ज़रूरत ही नहीं है। अब अगर कोई ऐसा होटल बना दे जहां सिर्फ साफ़ बिस्तर और बढ़िया वाईफाई हो और बाकी तामझाम हटा दे तो वह एक नया मार्केट खड़ा कर देगा। उसने उन लोगों को अपनी तरफ खींच लिया जो महंगे होटल से डरते थे और सस्ते ढाबों में सोना नहीं चाहते थे।
यह लेसन हमें एलिमिनेट यानी हटाने और क्रिएट यानी नया बनाने का फार्मूला सिखाता है। हम अक्सर चीज़ें जोड़ते रहते हैं जिससे प्रोडक्ट महंगा और पेचीदा हो जाता है। असली समझदारी इसमें है कि उन चीज़ों को हटा दिया जाए जिनकी कस्टमर को परवाह ही नहीं है और उन चीज़ों पर पैसा लगाया जाए जो उसे सच में वैल्यू देती हैं। आपको यह सोचना होगा कि क्या मैं किसी दूसरी इंडस्ट्री से कुछ उधार ले सकता हूं। जैसे सर्कस और थिएटर को मिलाकर सर्क ड्यू सोले बना जिसने सर्कस की पूरी परिभाषा ही बदल दी। उन्होंने जानवरों को हटा दिया क्योंकि लोग अब उसे पसंद नहीं कर रहे थे और उसकी जगह कला और कहानी को जोड़ दिया।
अगर आप आज भी वही बेच रहे हैं जो आपके दादा जी के ज़माने में बिकता था और आप उम्मीद कर रहे हैं कि आप एलन मस्क बन जाएंगे तो आपसे बड़ा ऑप्टिमिस्ट कोई नहीं है। मार्केट की सीमाएं पत्थर की लकीर नहीं हैं। वह तो सिर्फ लोगों की आदतों से बनी हैं। जिस दिन आप उन आदतों को समझकर कुछ अलग पेश करते हैं उस दिन आप भीड़ से कोसों दूर निकल जाते हैं। यह लेसन हमें सिखाता है कि अवसर की कमी नहीं है बल्कि देखने वाली नज़र की कमी है। जब आप अपनी बाउंड्रीज़ को शिफ्ट करते हैं तो आप सिर्फ एक दुकान नहीं चलाते बल्कि आप एक नया ट्रेंड सेट करते हैं।
तो दोस्तों, ब्लू ओशन शिफ्ट का असली मतलब सिर्फ बिज़नेस बदलना नहीं बल्कि अपनी सोच को बदलना है। रेड ओशन की खूनी जंग में अपनी लाइफ बर्बाद मत करिए। अपनी काबिलियत को पहचानिए और अपने लिए एक ऐसा नीला समंदर बनाइये जहां आप सुकून से अपनी शर्तों पर काम कर सकें। याद रखिये कि दुनिया में हर बड़ी कंपनी कभी न कभी एक छोटा सा ब्लू ओशन आईडिया ही थी।
क्या आप अभी भी उस भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ सर्वाइवल के लिए लड़ रही है या आप अपना खुद का रास्ता बनाने के लिए तैयार हैं। हमें नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं कि आपका वह कौन सा आईडिया है जो मार्केट में तहलका मचा सकता है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपने स्टार्टअप के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आपकी एक छोटी सी शिफ्ट आपकी पूरी तकदीर बदल सकती है।
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