Blue Ocean Strategy (Hindi)


क्या आप भी उसी भीड़ का हिस्सा हैं जो एक ही हड्डी के पीछे भाग रहे कुत्तों की तरह कॉम्पिटिशन में मर रहे हैं? अगर आप अभी भी वही घिसी पिटी रेड ओशन स्ट्रेटजी अपना रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द बर्बाद होने वाले हैं। अपनी मेहनत और पैसा पानी में बहाना बंद कीजिये वरना पड़ोसी की दुकान आपसे आगे निकल जाएगी और आप बस हाथ मलते रह जाएंगे।

आज हम डब्लू चैन किम की मशहूर किताब ब्लू ओशन स्ट्रेटजी के उन राज की बात करेंगे जो आपको मार्केट का इकलौता राजा बना सकते हैं। चलिए इन 3 पावरफुल लेसन्स को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : वैल्यू इनोवेशन: कॉम्पिटिशन का गला घोंटने का सीक्रेट तरीका

दोस्तो, मान लीजिये आप एक मोहल्ले में समोसे की दुकान खोलते हैं। वहां पहले से ही दस दुकानें हैं जो पंद्रह रुपये में समोसा बेच रही हैं। अब आप वहां जाकर चौदह रुपये में समोसा बेचने लगते हैं। आप खुश हैं कि आपने कॉम्पिटिशन को धूल चटा दी पर सच तो यह है कि आपने अपनी ही बर्बादी का डेथ वारंट साइन कर दिया है। इसे कहते हैं रेड ओशन। यहाँ सब एक दूसरे का खून बहा रहे हैं और मार्केट का पानी लाल हो चुका है। 

यहाँ मुनाफा कम है और सरदर्द ज्यादा है। ब्लू ओशन स्ट्रेटजी कहती है कि अगर आपको सच में बड़ा खिलाडी बनना है तो आपको इस कीचड़ वाली लड़ाई से बाहर निकलना होगा। यहाँ एंट्री होती है वैल्यू इनोवेशन की। वैल्यू इनोवेशन का मतलब यह नहीं है कि आप कुछ ऐसा अजूबा बना दें जो मंगल ग्रह से आया हो। इसका सिंपल मतलब है कि आप कस्टमर की लाइफ से बेकार की चीजें हटा दें और उन्हें वो दें जिसकी उन्हें सच में जरूरत है। 
आपने सर्कस तो देखा ही होगा। पुराने जमाने के सर्कस में जानवर होते थे जो शेर की दहाड़ और हाथी के नाच पर चलते थे। उन जानवरों को पालना और ट्रेन करना बहुत महंगा पड़ता था। फिर आया सर्क ड सोले। उन्होंने क्या किया? उन्होंने जानवरों को पूरी तरह हटा दिया। उन्होंने महंगे स्टार्स को भी हटा दिया। उन्होंने सर्कस को थिएटर और आर्ट के साथ मिला दिया। उन्होंने बच्चों के बजाय अमीर बड़ों को टारगेट किया जो ज्यादा पैसे दे सकते थे। उन्होंने अपनी कॉस्ट कम की और वैल्यू इतनी बढ़ा दी कि उनका कोई कॉम्पिटिटर बचा ही नहीं।

हमारे यहाँ इंडिया में भी कई लोग यही गलती करते हैं। अगर शर्मा जी ने कोचिंग सेंटर खोला है तो वर्मा जी भी वही खोलेंगे। वही पुराने बेंच वही बोरिंग ब्लैकबोर्ड और वही घिसी पिटी पढ़ाई। अगर आप भी यही कर रहे हैं तो आप बस एक भीड़ का हिस्सा हैं। ब्लू ओशन में जाने के लिए आपको सोचना होगा कि आप क्या अलग कर सकते हैं। शायद आप पढ़ाई को गेम की तरह बना दें या फिर कुछ ऐसा जो अब तक किसी ने सोचा ही न हो। 

जब आप वैल्यू इनोवेशन करते हैं तब आप कॉम्पिटिशन से नहीं लड़ते बल्कि आप उसे बेमतलब बना देते हैं। लोग आपके पास इसलिए नहीं आते क्योंकि आप सस्ते हैं बल्कि इसलिए आते हैं क्योंकि आपके जैसा कोई दूसरा है ही नहीं। तो क्या आप अभी भी उस रेड ओशन में डूबकर मरना चाहते हैं या अपना खुद का नीला समंदर बनाना चाहते हैं जहाँ सिर्फ आपका राज हो? फैसला आपका है क्योंकि बिना दिमाग चलाए तो सिर्फ लेबर क्लास काम करती है और आप यहाँ एक बड़ा बिजनेस एम्पायर खड़ा करने आए हैं।


लेसन २ : सिक्स पाथ्स फ्रेमवर्क: अपनी बाउंड्री से बाहर निकलने का रास्ता

क्या आप भी उन्हीं लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि मार्केट की दीवारें पत्थर की बनी हैं जिन्हें तोड़ा नहीं जा सकता? ज्यादातर बिजनेसमैन अपनी इंडस्ट्री के घेरे में ऐसे कैद रहते हैं जैसे जेल का कैदी। अगर आप रेस्टोरेंट चला रहे हैं तो आप सिर्फ दूसरे रेस्टोरेंट को देखते हैं। अगर आप जूते बेच रहे हैं तो आप बस एडिडास और नाइकी के डिस्काउंट चेक करते हैं। ब्लू ओशन स्ट्रेटजी का यह दूसरा लेसन कहता है कि अपनी गर्दन घुमाओ और उन छह रास्तों को देखो जो आपको इस पिंजरे से बाहर ले जा सकते हैं। इसे कहते हैं सिक्स पाथ्स फ्रेमवर्क। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि बस अपनी आंखों पर बंधी कॉम्पिटिशन की पट्टी उतारने का तरीका है।

मिसाल के तौर पर मान लीजिये आप एक जिम खोलना चाहते हैं। अब आप क्या करेंगे? आप देखेंगे कि पास वाले जिम में कितनी मशीनें हैं और वहां का म्यूजिक कैसा है। आप बस उसी को कॉपी करने की कोशिश करेंगे। लेकिन अगर आप अपनी इंडस्ट्री से बाहर देखें तो लोग जिम क्यों जाते हैं? फिट रहने के लिए। लेकिन फिट रहने का और क्या तरीका है? योग या डांस या फिर मार्शल आर्ट्स। जब आप इन दूसरी इंडस्ट्रीज के फायदों को अपने बिजनेस में जोड़ते हैं तब आप एक नया रास्ता बनाते हैं। इंडिया में आपने देखा होगा कि कैसे हल्दीराम ने ट्रेडिशनल मिठाई और चाट को एक साफ सुथरे और मॉडर्न रेस्टोरेंट के साथ मिला दिया। उन्होंने सिर्फ हलवाइयों से कॉम्पिटिशन नहीं किया बल्कि उन्होंने बाहर जाकर फास्ट फूड चेन को भी टक्कर दी।

सिक्स पाथ्स फ्रेमवर्क आपको सिखाता है कि कस्टमर के खरीदार बनने से पहले और बाद में क्या होता है उस पर ध्यान दें। लोग अक्सर सिर्फ प्रोडक्ट बेचकर भूल जाते हैं। मान लीजिये आप एक वाटर प्यूरीफायर बेच रहे हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि कस्टमर को हर महीने सर्विसिंग की टेंशन होती है? अगर आप सिर्फ मशीन बेचने के बजाय एक ऐसा सब्सक्रिप्शन मॉडल लाएं जहाँ सर्विसिंग अपने आप हो जाए तो आपने एक नया रास्ता ढूंढ लिया है। 

हमारे देश में आधे लोग तो सिर्फ इसलिए नया काम शुरू नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि सब कुछ तो पहले से बिक रहा है। अरे भाई अगर सब कुछ बिक रहा होता तो आज भी हम सिर्फ बैलगाड़ी पर घूम रहे होते। अपनी बाउंड्री को लांघना सीखिये वरना आप उसी छोटे से तालाब के मेंढक बनकर रह जाएंगे जिसे कल कोई बड़ा मगरमच्छ आकर खा जाएगा। जब आप इंडस्ट्री के बने बनाए रास्तों को छोड़कर अपना नया रास्ता चुनते हैं तब दुनिया आपको फॉलो करती है और आप बन जाते हैं मार्केट के असली ट्रेंडसेटर।


लेसन ३ : नॉन कस्टमर्स पर फोकस: मार्केट का साइज बढ़ाने का असली राज

अक्सर लोग अपनी पूरी जिंदगी उन लोगों को मक्खन लगाने में गुजार देते हैं जो पहले से ही उनका सामान खरीद रहे हैं। इसे कहते हैं चूहा दौड़। आप अपने मौजूदा कस्टमर्स को डिस्काउंट देते हैं और आपका कॉम्पिटिटर उससे भी बड़ा डिस्काउंट दे देता है। अंत में आप दोनों की जेब खाली हो जाती है और कस्टमर मजे लेता है। ब्लू ओशन स्ट्रेटजी का तीसरा लेसन कहता है कि अगर आपको वाकई में बड़ा पैसा बनाना है तो उन लोगों की तरफ देखिये जो अभी आपके कस्टमर नहीं हैं। इन्हें हम कहते हैं नॉन कस्टमर्स। ये वो लोग हैं जो आपकी इंडस्ट्री से नफरत करते हैं या जिन्हें लगता है कि आपका प्रोडक्ट उनके किसी काम का नहीं है।

एक वक्त था जब इंडिया में स्टॉक मार्केट में पैसा लगाना सिर्फ बहुत अमीर और पढ़े लिखे लोगों का काम माना जाता था। आम आदमी इससे डरता था। उसे लगता था कि यह तो जुआ है या फिर इसके लिए बहुत सारे कागज और झंझट चाहिए। फिर आए कुछ नए जमाने के एप्स जिन्होंने इस डर को पकड़ा। उन्होंने उन करोड़ों लोगों को टारगेट किया जो कभी स्टॉक मार्केट के करीब भी नहीं गए थे। उन्होंने प्रोसेस को इतना आसान बना दिया कि एक आम लड़का भी अपने मोबाइल से इन्वेस्ट करने लगा। उन्होंने उन लोगों को कस्टमर बना लिया जो पहले नॉन कस्टमर्स थे। देखते ही देखते मार्केट का साइज इतना बड़ा हो गया कि पुराने प्लेयर्स बस देखते रह गए।

अगर आप भी अपनी दुकान या स्टार्टअप को बड़ा करना चाहते हैं तो पूछिए कि लोग आपसे दूर क्यों भाग रहे हैं। क्या आपकी सर्विस बहुत महंगी है? क्या इसे समझना बहुत मुश्किल है? या फिर क्या आप सिर्फ एक खास ग्रुप को ही भाव दे रहे हैं? जब आप उन लोगों की परेशानी दूर करते हैं जो अभी आपके साथ नहीं हैं तब आप एक ऐसा मार्केट कैप्चर करते हैं जहाँ कोई कॉम्पिटिशन है ही नहीं। वरना आप तो उसी पुरानी बाल्टी में से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं जो पहले से ही आधी खाली है। नॉन कस्टमर्स पर फोकस करना ही वो चाबी है जो आपके छोटे से बिजनेस को एक ब्रांड में बदल सकती है। याद रखिये कि दुनिया बहुत बड़ी है और अगर आप सिर्फ अपनी गली के लोगों को देख रहे हैं तो आप अपनी ही तरक्की का गला घोंट रहे हैं।


ब्लू ओशन स्ट्रेटजी कोई किताबी ज्ञान नहीं है बल्कि एक कड़वा सच है। अगर आप आज भी दूसरों की नकल करके आगे बढ़ना चाहते हैं तो तैयार रहिये उस लाल समंदर में डूबने के लिए जहाँ हर कोई एक दूसरे को काट रहा है। लेकिन अगर आपके अंदर हिम्मत है कुछ नया करने की और कॉम्पिटिशन को बेमतलब बनाने की तो यह नीला समंदर आपका इंतजार कर रहा है। आज ही बैठिये और सोचिये कि आपके बिजनेस का ब्लू ओशन कहाँ है। क्या आप वही पुराने घिसे पिटे रास्ते पर चलेंगे या अपना खुद का एक नया इतिहास लिखेंगे? नीचे कमेंट में बताइये कि आप अपने बिजनेस में कौन सा एक बड़ा बदलाव लाने वाले हैं। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो दिन रात कॉम्पिटिशन का रोना रोते रहते हैं ताकि उनकी भी आंखें खुल सकें।

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