Brand Hijack (Hindi)


क्या आप अभी भी लाखों रुपये उन बोरिंग विज्ञापनों पर फूंक रहे हैं जिन्हें लोग स्किप करने का बहाना ढूंढते हैं। सच तो यह है कि आपका ब्रैंड अब आपका रहा ही नहीं पर आपकी ईगो यह मानने को तैयार नहीं है। बिना इस सीक्रेट को जाने आप बस एक डूबती कश्ती के कैप्टन हैं।

आज हम एलेक्स विपरफर्थ की किताब ब्रैंड हाईजैक से मार्केटिंग के वो काले सच जानेंगे जो बड़ी कंपनियां आपसे छुपाती हैं। यह आर्टिकल आपकी सोच को पूरी तरह बदलने वाला है। चलिए बढ़ते हैं इन ३ पावरफुल लेसन्स की तरफ।


लेसन १ : अपने ब्रैंड का कंट्रोल जनता को दान कर दो

क्या आपको लगता है कि आप अपने ब्रैंड के मालिक हैं। अगर हाँ तो बधाई हो आप एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। एलेक्स विपरफर्थ कहते हैं कि आज के दौर में मार्केटिंग का मतलब अपने ब्रैंड को पिंजरे में बंद करके रखना नहीं है। असली पावर तब मिलती है जब आप अपने ब्रैंड की चाबी अपने कस्टमर्स के हाथ में थमा देते हैं। इसे ही वह ब्रैंड हाईजैक कहते हैं। सोचिए आपने एक बहुत महंगी पार्टी रखी है और आप चाहते हैं कि सब लोग वैसे ही नाचें जैसा आप कह रहे हैं। क्या होगा। लोग बोर होकर भाग जाएंगे। लेकिन अगर आप सिर्फ म्यूजिक बजाकर छोड़ दें और लोगों को अपनी मर्जी से पागलों की तरह झूमने दें तो वह रात यादगार बन जाएगी। मार्केटिंग भी बिल्कुल ऐसी ही है।

आजकल की जनता बहुत चालाक है। आप उन्हें टीवी पर चिल्ला चिल्ला कर यह नहीं बता सकते कि आपका साबुन उन्हें चांद जैसा चमका देगा। लोग अब विज्ञापनों पर भरोसा करना बंद कर चुके हैं। वे उन चीजों पर भरोसा करते हैं जिन्हें वे खुद खोजते हैं। जब आप अपने ब्रैंड को कंट्रोल करना बंद करते हैं तो आप लोगों को मौका देते हैं कि वे उसे अपना बना सकें। इसका सबसे बड़ा उदाहरण रेड बुल है। रेड बुल ने कभी नहीं कहा कि हम सिर्फ एक ड्रिंक हैं। उन्होंने लोगों को स्टंट करने दिए और अपनी कम्युनिटी खुद बनाने दी। लोगों ने ब्रैंड को हाईजैक कर लिया और उसे एड्रेनालिन का सिंबल बना दिया।

अगर आप एक बिजनेस चला रहे हैं और हर छोटी चीज खुद ही तय करना चाहते हैं तो आप बहुत जल्दी थक जाएंगे। आप चाहते हैं कि आपका लोगो कैसा दिखे और लोग आपके बारे में क्या बात करें। लेकिन सच तो यह है कि लोग वही बात करेंगे जो उन्हें पसंद आएगा। अगर आप जबरदस्ती अपनी इमेज थोपने की कोशिश करेंगे तो आप उस ताऊ की तरह लगेंगे जो शादी में जबरदस्ती सबको डिसिप्लिन सिखाने की कोशिश करता है और अंत में अकेला बैठा रहता है।

असली मार्केटिंग तब होती है जब आपका कस्टमर आपके ब्रैंड के बारे में दूसरों को ऐसे बताता है जैसे वह उसका खुद का बिजनेस हो। इसे करने के लिए आपको थोड़े हंबल होने की जरूरत है। आपको यह मानना होगा कि आपके कस्टमर्स आपसे ज्यादा स्मार्ट हैं। उन्हें अपना को क्रिएटर बनाइये। उन्हें यह महसूस होने दीजिये कि यह ब्रैंड उनका है। जब कोई चीज अपनी होती है तो लोग उसकी हिफाजत भी करते हैं और उसका ढिंढोरा भी पीटते हैं।

कंट्रोल छोड़ने का मतलब यह नहीं है कि आप क्वालिटी खराब कर दें। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आप लोगों को अपनी क्रिएटिविटी दिखाने का स्पेस दें। जब आप ऐसा करते हैं तो आपका ब्रैंड एक प्रोडक्ट से बढ़कर एक कल्चर बन जाता है। और कल्चर को कभी विज्ञापन की जरूरत नहीं पड़ती। वह तो हवा की तरह खुद ब खुद फैलता है। तो क्या आप तैयार हैं अपने ब्रैंड की लगाम ढीली छोड़ने के लिए। याद रखिये जितना ज्यादा आप पकड़ कर रखेंगे उतना ही यह आपके हाथ से फिसलता जाएगा।


लेसन २ : विज्ञापन का ढिंढोरा पीटना बंद करो और कबीला बनाओ

क्या आपने कभी उन सेल्समैन को देखा है जो घर के दरवाजे पर आकर जबरदस्ती अपना सामान बेचने की कोशिश करते हैं। हम सब क्या करते हैं। हम दरवाजा उनके मुंह पर बंद कर देते हैं। यही हाल आज के करोड़ों रुपये वाले विज्ञापनों का है। लोग विज्ञापन नहीं देखना चाहते बल्कि वे एक ग्रुप का हिस्सा बनना चाहते हैं। एलेक्स विपरफर्थ कहते हैं कि एक सफल ब्रैंड विज्ञापन से नहीं बल्कि एक कम्युनिटी या एक कबीले से बनता है। अगर आपके पास दस ऐसे लोग हैं जो आपके ब्रैंड के लिए मर मिटने को तैयार हैं तो वे उन एक लाख लोगों से बेहतर हैं जो सिर्फ आपका एड देखकर गुजर जाते हैं।

मान लीजिये आप एक जिम शुरू करते हैं। एक तरीका यह है कि आप पूरे शहर में पोस्टर लगवा दें कि हमारे पास सबसे बढ़िया मशीनें हैं। दूसरा तरीका यह है कि आप उन दस लड़कों को पकड़ें जो सच में वर्कआउट के दीवाने हैं और उन्हें ऐसी फीलिंग दें कि यह जिम उनका अपना घर है। जब वे दस लड़के बाहर जाकर अपनी बॉडी दिखाएंगे और आपके जिम की तारीफ करेंगे तो लोग खुद खिंचे चले आएंगे। लोग मशीनों से नहीं जुड़ते बल्कि वे उन लोगों से जुड़ते हैं जो उनकी तरह सोचते हैं।

आज के जमाने में सोशल मीडिया ने सबको एक माइक दे दिया है। अब ब्रैंडिंग का मतलब यह नहीं है कि आप क्या कह रहे हैं बल्कि यह है कि लोग आपस में आपके बारे में क्या बात कर रहे हैं। अगर आप सिर्फ खुद की तारीफ करते रहेंगे तो आप उस बोरिंग रिश्तेदार की तरह लगेंगे जो हर पार्टी में सिर्फ अपनी ही कामयाबी के किस्से सुनाता है। कोई भी उस इंसान के साथ नहीं बैठना चाहता। लोग उस ब्रैंड को प्यार करते हैं जो उन्हें एक प्लेटफॉर्म देता है।

कम्युनिटी बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको मार्केटिंग के लिए पैसे नहीं खर्च करने पड़ते। आपका कबीला ही आपकी आर्मी बन जाता है। जब कोई आपके ब्रैंड पर उंगली उठाता है तो ये लोग ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं। लेकिन यह कबीला रातों रात नहीं बनता। इसके लिए आपको ऑथेंटिक होना पड़ेगा। आपको लोगों को यह यकीन दिलाना होगा कि आप सिर्फ उनका पैसा नहीं चाहते बल्कि आप उनकी लाइफ में वैल्यू ऐड करना चाहते हैं।

ज्यादातर कंपनियां इस बात को समझ ही नहीं पातीं। वे सोचती हैं कि ज्यादा पैसा मतलब ज्यादा सेल्स। लेकिन असल में ज्यादा भरोसा मतलब ज्यादा सेल्स होता है। जब आप एक कम्युनिटी बनाते हैं तो आप एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर देते हैं जहाँ लोग खुद ही एक दूसरे की मदद करते हैं और आपके ब्रैंड को आगे बढ़ाते हैं। तो फैसला आपका है। आप विज्ञापन चलाकर लोगों को परेशान करना चाहते हैं या फिर एक ऐसा कबीला बनाना चाहते हैं जो आपके ब्रैंड को अमर बना दे। याद रखिये शोर कुछ पल का होता है लेकिन एक कम्युनिटी हमेशा के लिए होती है।


लेसन ३ : ऑथेंटिक बनो वरना गायब हो जाओ

क्या आपको वो दोस्त याद है जो हर समय शो-ऑफ करता है और ऐसी बातें करता है जो सच नहीं लगतीं। आप उसके साथ कितना समय बिताना चाहेंगे। शायद बिल्कुल नहीं। यही बात ब्रैंड्स पर भी लागू होती है। एलेक्स विपरफर्थ कहते हैं कि अगर आप मार्केट में टिकना चाहते हैं तो आपको अपनी बनावटी चमक छोड़नी होगी और ऑथेंटिक बनना होगा। आज का कस्टमर इतना स्मार्ट है कि वह दूर से ही पहचान लेता है कि कौन सच बोल रहा है और कौन सिर्फ माल बेचने के लिए मक्खन लगा रहा है। अगर आपकी बातों में और आपके काम में फर्क है तो समझ लीजिये आपका पैकअप होने वाला है।

मान लीजिये आप एक ढाबा चलाते हैं। आप बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगा दें कि यहाँ दुनिया का सबसे हेल्दी खाना मिलता है लेकिन अंदर जाते ही प्लेट गंदी हो और स्वाद गायब हो। क्या कोई दोबारा आएगा। बिल्कुल नहीं। लेकिन वहीं अगर आप ईमानदारी से कहें कि भाई साहब हमारा खाना थोड़ा तीखा है पर देसी घी का है तो लोग आपकी ईमानदारी के दीवाने हो जाएंगे। लोग गलतियों को माफ कर देते हैं पर झूठ को कभी नहीं। ब्रैंड हाईजैक का मतलब यह भी है कि आप अपनी कमियों को स्वीकार करें और उन्हें अपनी ताकत बनाएं।

आजकल हर ब्रैंड परफेक्ट दिखने की होड़ में लगा है। सब चाहते हैं कि उनकी फोटो एकदम शानदार हो और उनका मैसेज एकदम प्रोफेशनल हो। लेकिन सच तो यह है कि लोग परफेक्शन से नहीं बल्कि रियलिटी से जुड़ते हैं। जब आप अपनी स्ट्रगल की कहानी सुनाते हैं या यह बताते हैं कि आपसे कहाँ गलती हुई तो लोग आपको एक इंसान की तरह देखने लगते हैं। और इंसान हमेशा इंसान से जुड़ना चाहता है किसी बेजान कंपनी से नहीं। अगर आप सिर्फ एक कॉर्पोरेट मशीन की तरह बात करेंगे तो लोग भी आपको एक एटीएम मशीन की तरह ही ट्रीट करेंगे।

ऑथेंटिक होने का मतलब है अपनी जड़ों से जुड़े रहना। आपको पता होना चाहिए कि आप यह काम क्यों कर रहे हैं। अगर आपका मकसद सिर्फ पैसा कमाना है तो वह आपकी मार्केटिंग में साफ दिखेगा और लोग आपसे कतराएंगे। लेकिन अगर आप किसी समस्या को हल करने के लिए निकले हैं तो लोग खुद आपके साथ जुड़ना चाहेंगे। आपको विज्ञापन पर चिल्लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आपकी सच्चाई खुद बोलेगी। याद रखिये साख बनाने में सालों लग जाते हैं और उसे गंवाने में सिर्फ एक गलत विज्ञापन।

तो क्या आपमें वह हिम्मत है कि आप शीशे के सामने खड़े होकर अपनी कमियों को देख सकें और उन्हें अपने कस्टमर्स के सामने रख सकें। अगर हाँ तो आप एक ऐसा ब्रैंड बना सकते हैं जिसे कोई कभी नहीं भूल पाएगा। मार्केटिंग कोई जादू की छड़ी नहीं है जिसे घुमाते ही लोग दीवाने हो जाएंगे। यह तो बस एक जरिया है अपनी सच्चाई को दुनिया तक पहुँचाने का। अगर आप अंदर से खोखले हैं तो दुनिया का कोई भी बड़ा मार्केटिंग गुरु आपको नहीं बचा सकता।


तो दोस्तों, यह थे ब्रैंड हाईजैक के ३ सबसे बड़े और कड़वे सच। अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चलकर अपना पैसा और समय बर्बाद करना चाहते हैं या फिर आप अपने ब्रैंड को आज़ाद करके उसे लोगों के दिलों तक पहुँचाना चाहते हैं। अगर आपको लगा कि आज आपने कुछ नया सीखा है तो इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना नया बिजनेस शुरू कर रहे हैं। नीचे कमेंट्स में बताइये कि क्या आपने कभी किसी ब्रैंड को उसकी सच्चाई की वजह से पसंद किया है। चलिए साथ मिलकर एक ऐसी कम्युनिटी बनाते हैं जहाँ मार्केटिंग नहीं बल्कि भरोसा बिकता हो।

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