Brain Rules (Hindi)


क्या आपको सच में लगता है कि आप बहुत स्मार्ट हैं। अगर आप अभी भी मल्टीटास्किंग के नाम पर खुद को थका रहे हैं और रात भर जागकर काम करना अपनी शान समझते हैं तो यकीन मानिए आप अपने दिमाग का कबाड़ा कर रहे हैं। बिना इन नियमों को जाने आप बस एक बिना पेट्रोल वाली गाड़ी को धक्का दे रहे हैं।

आज हम जॉन मदीना की मशहूर किताब ब्रेन रूल्स के उन ३ सबसे जरूरी लेसन के बारे में बात करेंगे जो आपके सोचने और काम करने के पुराने और बेकार तरीकों को हमेशा के लिए बदलकर रख देंगे।


लेसन १ : एक्सरसाइज से दिमाग की पावर बढ़ती है

क्या आपको लगता है कि ऑफिस की कुर्सी पर चिपककर बैठने से आप ज्यादा काम कर लेंगे। अगर हाँ, तो बधाई हो, आप अपनी बुद्धिमानी का गला घोंट रहे हैं। जॉन मदीना कहते हैं कि हमारा दिमाग उन पूर्वजों के साथ विकसित हुआ है जो दिन भर में कम से कम १२ मील चलते थे। आज की तारीख में हमारी सबसे बड़ी कसरत रिमोट का बटन दबाना या मोबाइल पर स्क्रॉल करना रह गई है। जब आप सोफे पर आलू की बोरी की तरह पड़े रहते हैं, तो आपका दिमाग भी सुस्त पड़ जाता है। असल में हमारा दिमाग तब सबसे बेहतरीन तरीके से काम करता है जब हम हिलते डुलते रहते हैं।

जरा सोचिए, जब आप जिम जाने के नाम पर बहाने बनाते हैं, तब आपका दिमाग अंदर ही अंदर ऑक्सीजन के लिए तड़प रहा होता है। एक्सरसाइज करने का मतलब यह नहीं है कि आपको कल ही ओलंपिक में जाना है। बस थोड़ा सा चलना फिरना भी आपके दिमाग के लिए अमृत जैसा है। जब आप शारीरिक रूप से एक्टिव होते हैं, तो आपके दिमाग में खून का बहाव बढ़ता है। यह खून अपने साथ ताजी ऑक्सीजन और ग्लूकोज लेकर आता है जो आपके न्यूरॉन्स को दावत देते हैं। जो लोग दिन भर बैठे रहते हैं, उनका दिमाग उस जंग लगे ताले की तरह हो जाता है जिसे खोलना नामुमकिन है।

इंसानी दिमाग को डिजाइन ही इसलिए किया गया था ताकि वह चलते फिरते समस्याओं का हल निकाल सके। लेकिन हमने इसे एक अंधेरे कमरे और एक नीली स्क्रीन के सामने कैद कर दिया है। अगर आप चाहते हैं कि आपके विचार बिजली की तरह तेज दौड़ें, तो आपको अपने पैरों को थोड़ा कष्ट देना होगा। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस एक सिंपल सा कुदरती नियम है। जिम में पसीना बहाने वाला इंसान उस इंसान से कहीं ज्यादा क्रिएटिव होता है जो बस एसी कमरे में बैठकर केवल बड़ी बड़ी बातें करता है।

लोग अपनी बॉडी बनाने के लिए तो मेहनत करते हैं, पर यह भूल जाते हैं कि वही कसरत उनके करियर को भी चमका सकती है। जब आप वॉक करते हैं या दौड़ते हैं, तो आपके दिमाग में प्रोटीन का लेवल बढ़ता है जो याददाश्त को मजबूत करता है। तो अगली बार जब आपको कोई मुश्किल फैसला लेना हो, तो कुर्सी छोड़िए और एक चक्कर लगाकर आइये। बैठे रहने से सिर्फ आपकी कमर चौड़ी होगी, दिमाग नहीं। दिमाग चलाने के लिए पैर चलाना बहुत जरूरी है।


लेसन २ : नींद से सोचने की शक्ति बेहतर होती है

अगर आप उन लोगों में से हैं जो रात को ३ बजे तक वेब सीरीज देखते हैं या काम का बहाना बनाकर अपनी आंखों को टॉर्चर करते हैं, तो आप खुद को जीनियस नहीं, बल्कि धीरे-धीरे स्लो बना रहे हैं। जॉन मदीना साफ कहते हैं कि नींद कोई लग्जरी नहीं बल्कि दिमाग की मरम्मत करने वाली वर्कशॉप है। जब आप सोते हैं, तब आपका दिमाग असल में छुट्टियां नहीं मना रहा होता, बल्कि वह झाड़ू-पोछा लगा रहा होता है। दिन भर आपने जो भी कूड़ा-कचरा या ज्ञान इकट्ठा किया है, नींद उसे सहेजकर सही जगह पर रखने का काम करती है।

जरा उस पुराने कंप्यूटर के बारे में सोचिए जिसे आपने हफ़्तों से रीस्टार्ट नहीं किया। वह हैंग होगा ही। ठीक वैसे ही, जब आप नींद से समझौता करते हैं, तो आपकी याददाश्त और लॉजिकल पावर का सर्वर डाउन हो जाता है। आप छोटी-छोटी बातें भूलने लगते हैं और चिड़चिड़े ऐसे हो जाते हैं जैसे किसी ने आपकी पसंदीदा मिठाई छीन ली हो। लोग सोचते हैं कि कम सोकर वे दुनिया जीत लेंगे, जबकि असलियत में वे बिना धार वाली कुल्हाड़ी से पेड़ काटने की कोशिश कर रहे हैं। मेहनत पूरी, लेकिन नतीजा जीरो।

नींद की कमी आपके आईक्यू को भी कम कर देती है। एक रात की खराब नींद आपकी दिमागी हालत ऐसी कर देती है जैसे आपने नशा किया हो। अब आप ही सोचिए, नशे की हालत में आप ऑफिस का प्रेजेंटेशन देंगे या क्लास में टॉप करेंगे। स्कूल और दफ्तरों में जो लोग उबासी लेते रहते हैं, उनका दिमाग असल में इमरजेंसी मोड पर चल रहा होता है। उनका शरीर तो वहां मौजूद होता है, लेकिन दिमाग कहीं बिस्तर के सपने देख रहा होता है।

जॉन मदीना एक बहुत दिलचस्प बात बताते हैं कि हर किसी की नींद की जरूरत अलग होती है। कुछ लोग 'लार्क' होते हैं जो सुबह जल्दी उठकर चहचहाते हैं, और कुछ 'आउल' होते हैं जिन्हें रात में ही करंट आता है। लेकिन अगर आप अपनी कुदरती जरूरत के खिलाफ जाएंगे, तो आपका दिमाग विद्रोह कर देगा। अच्छी नींद का मतलब है बेहतर फोकस और कमाल की क्रिएटिविटी। तो अगर कल कोई बड़ा काम करना है, तो आज रात को उल्लू बनना छोड़िए और चैन की नींद सोइए। याद रखिये, बिस्तर पर पड़ा हुआ आलसी इंसान कभी-कभी जागते हुए पागलों की तरह काम करने वाले से ज्यादा समझदार साबित होता है।


लेसन ३ : मल्टीटास्किंग एक धोखा है

अगर आपको लगता है कि आप एक हाथ से ईमेल टाइप कर रहे हैं, दूसरे से फोन पर बात कर रहे हैं और साथ ही साथ लंच भी कर रहे हैं, तो आप कोई सुपरहीरो नहीं बल्कि अपने दिमाग के दुश्मन हैं। जॉन मदीना कहते हैं कि मल्टीटास्किंग जैसा असल में कुछ होता ही नहीं है। हमारा दिमाग एक समय में केवल एक ही काम पर फोकस करने के लिए बना है। जब आप एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं, तो आपका दिमाग असल में काम नहीं कर रहा होता, बल्कि वह बहुत तेजी से एक काम से दूसरे काम पर स्विच कर रहा होता है।

यह ठीक वैसा ही है जैसे आप किसी कार को बार-बार पहले गियर से रिवर्स गियर में डाल रहे हों। इंजन तो गर्म होगा ही और जल्दी खराब भी हो जाएगा। लोग बड़े गर्व से कहते हैं कि मैं मल्टीटास्कर हूँ, लेकिन सच तो यह है कि वे किसी भी काम को पूरी लगन से नहीं कर पा रहे होते। जब आप बार-बार अपना ध्यान भटकने देते हैं, तो काम पूरा करने में ५० प्रतिशत ज्यादा समय लगता है और गलतियां होने की गुंजाइश भी डबल हो जाती है। आप एक ही वक्त में दो नावों पर सवार होने की कोशिश कर रहे हैं और नतीजा यह होता है कि आप बीच मंझधार में डूब जाते हैं।

आजकल की दुनिया में नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया ने हमें ध्यान भटकाने का एडिक्ट बना दिया है। आप एक जरूरी रिपोर्ट लिख रहे हैं और अचानक फोन की घंटी बजती है। आप सोचते हैं कि बस एक सेकंड लगेगा मैसेज देखने में, लेकिन वह एक सेकंड आपके दिमाग के फ्लो को पूरी तरह तोड़ देता है। उस फोकस को वापस पाने में आपके दिमाग को कई मिनट लग जाते हैं। हम खुद को बहुत बिजी दिखाते हैं, पर अंत में हाथ कुछ नहीं आता। यह वैसी ही बात हुई कि आप भाग तो बहुत तेज रहे हैं, पर ट्रेडमिल पर खड़े हैं।

अगर आप वाकई कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं, तो एक समय में एक ही काम पर अपनी पूरी जान लगा दीजिये। जब आप पूरी तरह से एक काम में डूब जाते हैं, तब आपका दिमाग अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करता है। फालतू के शोर और बेमतलब के कामों को कुछ देर के लिए साइड में रख दीजिये। स्मार्ट वही है जो कम काम करे लेकिन जो भी करे उसे बेमिसाल तरीके से करे। अपनी एनर्जी को हर जगह बिखेरने से बेहतर है कि उसे एक लेजर बीम की तरह एक ही पॉइंट पर फोकस करें।


दोस्तो, जॉन मदीना के यह ३ लेसन हमें बताते हैं कि सफलता का रास्ता किसी जादुई गोली से नहीं, बल्कि अपने दिमाग के कुदरती नियमों को समझने से होकर गुजरता है। अगर आप आज भी पुरानी आदतों के गुलाम बने हुए हैं, तो आप अपनी काबिलियत के साथ नाइंसाफी कर रहे हैं। अब समय है कि आप अपनी सेहत, अपनी नींद और अपने फोकस को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाएं।

आप आज से अपनी रूटीन में कौन सा एक बदलाव करने वाले हैं। क्या आप कल सुबह जल्दी वॉक पर जाएंगे या आज रात फोन को दूर रखकर चैन की नींद सोएंगे। कमेंट में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो खुद को बहुत बड़ा मल्टीटास्कर समझते हैं। जाग जाइये, क्योंकि आपका दिमाग इससे कहीं ज्यादा का हकदार है।

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