Conversational Capital (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आपका प्रोडक्ट महान है और लोग खुद ब खुद इसके बारे में बात करेंगे तो मुबारक हो आप गहरी नींद में सो रहे हैं। सच तो यह है कि लोग आपके ब्रांड को भूल चुके हैं क्योंकि आप उन्हें बोर कर रहे हैं। बिना कन्वर्सेशनल कैपिटल के आप बस एक और गुमनाम दुकानदार हैं जो अपनी किस्मत को कोस रहा है।

लेकिन चिंता मत कीजिए क्योंकि आज हम बर्ट्रेंड सेसवेट की इस मास्टरपीस से वह सीक्रेट्स निकालेंगे जो आपके बोरिंग बिजनेस को शहर की सबसे बड़ी गपशप बना देंगे। चलिए जानते हैं वह ३ पावरफुल लेसन जो आपके ब्रांड की किस्मत बदल देंगे।


लेसन १ : रिचुअल - काम को बनाओ एक यादगार रिवाज

दोस्तो, क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ ब्रांड्स के लिए लोग दीवाने क्यों होते हैं। क्या उनके पास कोई जादू की छड़ी है। बिल्कुल नहीं। असल में वह इस्तेमाल करते हैं रिचुअल्स का। रिचुअल यानी एक ऐसा रिवाज जिसे कस्टमर आपके साथ जुड़कर बार बार करना चाहता है। अगर आपके काम में कोई खास तरीका नहीं है तो आप बस एक भीड़ का हिस्सा हैं। मान लीजिए आप एक कॉफी शॉप चलाते हैं। अगर आप बस एक कप में कॉफी डालकर दे देते हैं तो आप बोरिंग हैं। लेकिन अगर आप कॉफी देने से पहले उस पर कस्टमर का नाम लिखकर एक खास स्माइली बनाते हैं तो यह एक रिचुअल बन जाता है। लोग कॉफी के लिए नहीं बल्कि उस अनुभव के लिए आपके पास आते हैं।

रिचुअल्स लोगों को एक कम्युनिटी का हिस्सा महसूस कराते हैं। इंसान को पुरानी आदतें और परंपराएं बहुत पसंद होती हैं। जब आप अपने ब्रांड के चारों तरफ एक छोटा सा रिवाज खड़ा कर देते हैं तो लोग उसके बारे में बात करने पर मजबूर हो जाते हैं। आपने ओरियो बिस्किट तो खाया होगा। क्या आप उसे सीधे खा जाते हैं। बहुत कम लोग ऐसा करते हैं। ज्यादातर लोग उसे ट्विस्ट करते हैं फिर क्रीम चाटते हैं और फिर दूध में डुबोते हैं। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है पर यह एक रिचुअल है। ओरियो ने आपको बिस्किट नहीं बेचा बल्कि उसे खाने का एक तमाशा बेच दिया। अब जब भी कोई बच्चा बिस्किट खाता है तो वह वही करता है जो विज्ञापनों में देखा है। यही है कन्वर्सेशनल कैपिटल की असली ताकत।

अब जरा अपने बिजनेस या काम को देखिए। क्या वहां कुछ ऐसा है जिसे लोग दूसरों को बता सकें। अगर आप एक जिम ट्रेनर हैं और हर वर्कआउट के बाद अपने क्लाइंट के साथ एक खास तरह का हाई फाइव करते हैं तो वह रिचुअल है। अगर आप एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और हर बड़े प्रोजेक्ट की डिलीवरी पर पूरी टीम के साथ एक खास पिज्जा पार्टी करते हैं तो वह भी रिचुअल है। लोग काम को भूल जाते हैं पर उस काम को करने के तरीके को हमेशा याद रखते हैं। बिना किसी खास रिवाज के आप एक रोबोट की तरह हैं जो बस ऑर्डर पूरा कर रहा है। और यकीन मानिए रोबोट्स के बारे में कोई गपशप नहीं करता।

आजकल लोग स्टेटस दिखाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। अगर आप उन्हें एक ऐसा रिचुअल देते हैं जो सोशल मीडिया पर कूल लगे तो आपका काम हो गया। लोग आपके प्रोडक्ट की फोटो नहीं खींचेंगे बल्कि उस रिचुअल को करते हुए अपनी फोटो डालेंगे। आपने स्टारबक्स में लोगों को अपने गलत नाम लिखे हुए कप्स की फोटो डालते देखा होगा। आपको क्या लगता है कि स्टारबक्स वाले अनपढ़ हैं जिन्हें नाम लिखना नहीं आता। जी नहीं वह जानबूझकर आपके नाम की स्पेलिंग गलत लिखते हैं ताकि आप चिढ़कर या हंसकर उसकी फोटो इंटरनेट पर डालें। और लीजिए हो गई उनकी फ्री में मार्केटिंग। आप उनके मजाक का हिस्सा बन रहे हैं और उन्हें पैसा भी दे रहे हैं। इसे कहते हैं दिमाग वाला रिचुअल।

जब आप अपने कस्टमर के लिए एक छोटा सा लेकिन प्यारा रिवाज बना लेते हैं तो आप उनके दिमाग में एक परमानेंट जगह बना लेते हैं। यह रिचुअल ही है जो एक अनजान इंसान को आपका पक्का फैन बना देता है। तो आज ही सोचिए कि आप अपने काम में कौन सा नया रिवाज शुरू करने वाले हैं। कुछ ऐसा जो इतना मजेदार हो कि लोग उसे अपने दोस्तों को बताए बिना रह न सकें। याद रखिए अगर आपका काम करने का तरीका यूनिक नहीं है तो आपकी कहानी भी कभी वायरल नहीं होगी।


लेसन २ : एक्सक्लूसिविटी - सबको मत बुलाओ सिर्फ चुनिंदा को चुनो

दोस्तो, क्या आपने कभी गौर किया है कि लोग उस क्लब के बाहर लंबी लाइन में खड़े होना क्यों पसंद करते हैं जहाँ घुसना नामुमकिन है। या फिर उस आईफोन के लिए किडनी बेचने को तैयार क्यों हो जाते हैं जो पिछले साल जैसा ही दिखता है। इसका सिर्फ एक जवाब है और वह है एक्सक्लूसिविटी। अगर आपका प्रोडक्ट गली के नुक्कड़ पर मिलने वाली मूंगफली की तरह हर किसी के लिए हर वक्त मौजूद है तो आपकी कोई इज्जत नहीं करेगा। कड़वा सच तो यही है कि इंसान को वही चीज सबसे ज्यादा चाहिए होती है जो उसे आसानी से नहीं मिलती। जब आप अपने ब्रांड को थोड़ा मुश्किल बना देते हैं तो आप लोगों के बीच एक ऐसी तड़प पैदा करते हैं जिसे कन्वर्सेशनल कैपिटल कहते हैं।

सोचिए अगर कल से सरकार एलान कर दे कि सोना अब आलू के भाव मिलेगा और हर राशन की दुकान पर उपलब्ध होगा। क्या तब भी लोग शादियों में सोने के गहने पहनकर इतराएंगे। बिल्कुल नहीं। लोग उसे देखना तक छोड़ देंगे। आपके बिजनेस का भी यही हाल है। अगर आप डिस्काउंट की सेल लगाकर सबको अंदर बुला रहे हैं तो आप अपनी वैल्यू खुद ही गिरा रहे हैं। एक्सक्लूसिविटी का मतलब यह नहीं है कि आप घमंडी बन जाएं बल्कि इसका मतलब है कि आप अपनी एक बाउंड्री बनाएं। जब आप कहते हैं कि यह ऑफर सिर्फ पहले १० लोगों के लिए है या यह सर्विस सिर्फ उन लोगों के लिए है जो सच में लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो आप एक फिल्टर लगा देते हैं। और यही फिल्टर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता है।

आजकल के दौर में तो यह और भी मजेदार हो गया है। लोग उस रेस्टोरेंट में जाना ज्यादा पसंद करते हैं जहाँ तीन महीने पहले टेबल बुक करानी पड़ती है। भले ही वहां का खाना घर की दाल रोटी जैसा हो पर वह जो स्टेटस मिलता है न कि भाई मैंने वहां खाना खाया वह अनमोल है। आप जब किसी चीज को लिमिटेड कर देते हैं तो आप लोगों को एक कहानी सुनाने का मौका देते हैं। वह अपने दोस्तों को जाकर गर्व से बताएंगे कि देखो मुझे यह मिल गया जो तुम सबको नहीं मिल सका। यही वह घमंड है जो आपके ब्रांड की फ्री में पब्लिसिटी करता है। अगर आप सबको खुश करने की कोशिश करेंगे तो अंत में आप किसी को भी याद नहीं रहेंगे।

आपने कुछ मोबाइल ऐप्स देखे होंगे जो सिर्फ इनवाइट के जरिए चलते थे। जैसे शुरुआत में जीमेल या कुछ साल पहले क्लबहाउस ऐप। अगर आपके पास इनवाइट नहीं है तो आप अंदर नहीं जा सकते। अब लोग इंटरनेट पर पागलों की तरह इनवाइट मांगने लगे। लोग एक दूसरे से पूछ रहे थे कि क्या तुम्हारे पास क्लबहाउस का एक्सेस है। देखते ही देखते वह ऐप पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने कोई करोड़ों का विज्ञापन नहीं चलाया बस उन्होंने लोगों के ईगो को टच किया। जो लोग अंदर थे वो खुद को वीआईपी समझ रहे थे और जो बाहर थे वो अंदर जाने के लिए बेताब थे। इसी को कहते हैं बिना पैसे खर्च किए माहौल बनाना।

लेकिन यहाँ एक पेंच है। एक्सक्लूसिविटी का मतलब सिर्फ दिखावा नहीं होना चाहिए। अगर आप लोगों को इंतजार करवा रहे हैं और अंदर जाने के बाद उन्हें घटिया सर्विस देते हैं तो वह आपकी तारीफ नहीं बल्कि आपकी बुराई करेंगे। आपको वह वैल्यू भी देनी होगी जिसके लिए लोग इंतजार कर रहे हैं। अगर आपने एक लग्जरी कार बनाई है तो उसका दरवाजा बंद होने की आवाज भी वैसी ही होनी चाहिए जो आम कारों में न मिले। अगर आप अपने ब्रांड को एक्सक्लूसिव बनाना चाहते हैं तो पहले अपनी क्वालिटी को उस लेवल पर ले जाइए जहाँ लोग आपके नखरे उठाने को तैयार हों। याद रखिए जो चीज सबको मिल जाए उसे कोई याद नहीं रखता और जो चीज किस्मत वालों को मिले उसकी लोग कसमें खाते हैं।


लेसन ३ : मिथ - अपने ब्रांड को एक अमर कहानी में बदलो

दोस्तो, क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स सिर्फ सामान नहीं बेचते बल्कि वो एक कहानी बेचते हैं। एक ऐसी कहानी जिसे लोग सच मानने लगते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाते रहते हैं। इसे कहते हैं मिथ यानी एक महान गाथा। अगर आपके पास कोई कहानी नहीं है तो आप बस एक कमोडिटी हैं। और कमोडिटी की कोई इज्जत नहीं होती। लेसन ३ हमें सिखाता है कि अपने काम के पीछे एक ऐसा मिथक खड़ा करो जो लोगों के इमोशन्स से सीधे जा जुड़े। लोग डेटा और फैक्ट्स भूल जाते हैं पर कहानियाँ उन्हें हमेशा याद रहती हैं।

सोचिए अगर मैं आपसे कहूं कि यह पेन बहुत अच्छा चलता है तो शायद आप ध्यान भी न दें। लेकिन अगर मैं कहूं कि इसी पेन से महान लेखकों ने अपनी पहली बेस्टसेलर किताब लिखी थी तो इस पेन की वैल्यू अचानक आसमान छूने लगेगी। यही होता है जब आप अपने काम के पीछे एक मिथ जोड़ देते हैं। लोग प्रोडक्ट नहीं बल्कि उस लेजेंड का हिस्सा बनने के लिए पैसे देते हैं। आपने अक्सर सुना होगा कि फलां कंपनी एक गैरेज से शुरू हुई थी। स्टीव जॉब्स और एप्पल की वह गैरेज वाली कहानी एक क्लासिक मिथ बन चुकी है। अब हर कोई जो अपने घर के छोटे से कमरे से काम शुरू करता है वह खुद को अगला स्टीव जॉब्स समझने लगता है। क्या उस गैरेज में कोई जादू था। शायद नहीं। पर उस कहानी में जादू जरूर है।

मिथ बनाने के लिए आपको झूठ बोलने की जरूरत नहीं है पर आपको अपने संघर्ष और अपनी जीत को एक हीरो की तरह पेश करना होता है। लोग उन ब्रांड्स को पसंद करते हैं जिनके पास कोई मकसद होता है। अगर आप बस पैसा कमाने के लिए दुकान खोलकर बैठे हैं तो कोई आपकी बात क्यों करेगा। लेकिन अगर आप कहते हैं कि आप दुनिया से प्लास्टिक खत्म करने के मिशन पर निकले हैं और आपका हर प्रोडक्ट उस मिशन का एक हिस्सा है तो लोग आपसे जुड़ेंगे। वो दूसरों को गर्व से बताएंगे कि वो एक ऐसी कंपनी का सामान इस्तेमाल कर रहे हैं जो दुनिया बचा रही है। यह कहानी ही आपके ब्रांड का कन्वर्सेशनल कैपिटल है।

आजकल के सो कॉल्ड इन्फ्लुएंसर्स भी यही करते हैं। वो अपनी लाइफ की छोटी सी प्रॉब्लम को भी एक बड़ा ड्रामा बनाकर पेश करते हैं जैसे वो कोई बड़ी जंग लड़ रहे हों। और हम सब उन्हें देखते हैं क्योंकि हमें कहानियों में मजा आता है। अगर आप अपने कस्टमर को यह महसूस करा सकते हैं कि आपका सामान खरीदकर वो भी किसी बड़ी कहानी का हिस्सा बन रहे हैं तो आपने गेम जीत लिया है। लोग सिर्फ जूते नहीं खरीदते वो नाइकी पहनकर खुद को एक एथलीट महसूस करते हैं। वो सिर्फ कॉफी नहीं पीते वो स्टारबक्स में बैठकर खुद को एक प्रोफेशनल क्रिएटिव इंसान महसूस करते हैं। यह सब उन कहानियों का कमाल है जो इन कंपनियों ने सालों से हमारे दिमाग में भरी हैं।

अगर आपकी कोई कहानी नहीं है तो आपका कोई भविष्य नहीं है। लोग आपके जाने के बाद आपके सेल्स फिगर याद नहीं रखेंगे वो सिर्फ आपकी कहानी याद रखेंगे। क्या आप एक ऐसी विरासत छोड़ना चाहते हैं जिस पर लोग चर्चा करें या आप बस एक और गुमनाम चेहरा बनकर रह जाना चाहते हैं। चुनाव आपका है। अपने ब्रांड के चारों तरफ एक ऐसा मिथ खड़ा कीजिए कि लोग चाहकर भी आपको नजरअंदाज न कर सकें। जब लोग आपकी कहानी सुनाना शुरू करेंगे तब समझ लीजिए कि आपकी मार्केटिंग अब खुद ब खुद हो रही है।


तो दोस्तो, क्या आपका ब्रांड भी लोगों की बातों का हिस्सा है या आप अभी भी बोरिंग मार्केटिंग के भरोसे बैठे हैं। याद रखिए कन्वर्सेशनल कैपिटल कोई इत्तेफाक नहीं है यह एक सोची समझी रणनीति है। आज ही अपने काम में एक रिचुअल एक एक्सक्लूसिविटी और एक मिथ जोड़िए। नीचे कमेंट्स में बताइए कि इन तीनों में से आपको कौन सा लेसन सबसे ज्यादा पसंद आया और आप इसे अपने काम में कैसे इस्तेमाल करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसका बिजनेस ठंडा पड़ा है। शायद यह उसके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#ConversationalCapital #BrandingTips #MarketingStrategy #BusinessGrowthIndia #DYBooks


_

Post a Comment

Previous Post Next Post